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Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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दानिय्येल 7-9

चार पशुओं के बारे में दानिय्येल का स्वप्न

बेलशस्सर के बाबुल पर शासन काल के पहले वर्ष दानिय्येल को एक सपना आया सपने में अपने पलंग पर लेटे हुए दानिय्येल ने, ये दर्शन देखे। दानिय्येल ने जो सपना देखा था, उसे लिख लिया। दानिय्येल ने बताया, “रात में मैंने सपने में एक दर्शन पाया। मैंने देखा कि चारों दिशाओं से हवा बह रही है और उन हवाओं से सागर उफनने लगा था। फिर मैंने तीन पशुओं को देखा। हर पशु दूसरे पशु से भिन्न था। वे चारों पशु समुद्र में से उभर कर बाहर निकले थे।

“उनमें से पहला पशु सिंह के समान दिखाई दे रहा था और उस सिंह के उकाब के जैसे पंख थे। मैंने उस पशु को देखा। फिर मैंने देखा कि उसके पंख उखाड़ फेंके गये हैं। धरती पर से उस पशु को इस प्रकार उठाया गया जिससे वह किसी मनुष्य के समान अपने दो पैरों पर खड़ा हो गया। इस सिंह को मनुष्य का सा दिमाग दे दिया गया था।

“और फिर मैंने देखा कि मेरे सामने एक और दूसरा पशु मौजूद है। यह पशु एक भालू के जैसा था। वह अपनी एक बगल पर उठा हुआ था। उस पशु के मुँह में दांतों के बीच तीन पसलियाँ थीं। उस भालू से कहा गया था, ‘उठ और तुझे जितना चाहिये उतना माँस खा ले!’

“इसके बाद, मैंने देखा कि मेरे सामने एक और पशु खड़ा है। यह पशु चीते जैसे लग रहा था और उस चीते की पीठ पर चार पंख थे। पंख ऐसे लग रहे थे, जैसे वे किसी चिड़िया के पंख हों। इस पशु के चार सिर थे, और उसे शासन का अधिकार दिया गया था।

“इसके बाद, सपने में रात को मैंने देखा कि मेरे सामने एक और चौथा जानवर खड़ा है। यह जानवर बहुत खुँखार और भयानक लग रहा था। वह बहुत मज़बूत दिखाई दे रहा था। उसके लोहे के लम्बे—लम्बे दाँत थे। यह जानवर अपने शिकारों को कुचल करके खा डाल रहा था और शिकार को खा चुकने के बाद जो कुछ बचा रहता, वह उसे अपने पैरों तले कुचल रहा था। इस पशु से पहले मैंने सपने में जो पशु देखे थे, यह चौथा पशु उन सबसे अलग था। इस पशु के दस सींग थे।

“अभी मैं उन सींगों के बारे में सोच ही रहा था कि उन सींगों के बीच एक सींग और उग आया। यह सींग बहुत छोटा था। इस छोटे सींग पर आँखें थी, और वे आँखें किसी व्यक्ति की आँखों जैसी थीं। इस छोटे सींग में एक मुख भी था और वह स्वयं की प्रशंसा कर रहा था। इस छोटे सींग ने अन्य सींगों में से तीन सींग उखाड़ फेंके।

चौथे पशु का न्याय

“मेरे देखते ही देखते, उनकी जगह पर सिंहासन रखे गये
    और वह सनातन राजा सिंहासन पर विराज गया।
उसके वस्त्र अति धवल थे, वे वस्त्र बर्फ से श्वेत थे।
    उनके सिर के बाल श्वेत थे, वे ऊन से भी श्वेत थे।
उसका सिंहासन अग्नि का बना था
    और उसके पहिए लपटों से बने थे।
10 सनातन राजा के सामने
    एक आग की नदी बह रही थी।
लाखों करोड़ों लोग उसकी सेवा में थे।
    उसके सामने करोड़ों दास खड़े थे।
यह दृश्य कुछ वैसा ही था
    जैसे दरबार शुरू होने को पुस्तकें खोली गयी हों।

11 “मैं देखता का देखता रह गया क्योंकि वह छोटा सींग डींगे मार रहा था। मैं उस समय तक देखता रहा जब अंतिम रूप से चौथे पशु की हत्या कर दी गयी। उसकी देह को नष्ट कर दिया गया और उसे धधकती हुई आग में डाल दिया गया। 12 दूसरे पशुओं की शक्ति और राजसत्ता उनसे छींन लिये गये। किन्तु एक निश्चित समय तक उन्हें जीवित रहने दिया गया।

13 “रात को मैंने अपने दिव्य स्वप्न में देखा कि मेरे सामने कोई खड़ा है, जो मनुष्य जैसा दिखाई देता था। वह आकाश में बादलों पर आ रहा था। वह उस सनातन राजा के पास आया था। सो उसे उसके सामने ले आया गया।

14 “वह जो मनुष्य के समान दिखाई दे रहा था, उसे अधिकार, महिमा और सम्पूर्ण शासन सत्ता सौंप दी गयी। सभी लोग, सभी जातियाँ और प्रत्येक भाषा—भाषी लोग उसकी आराधना करेंगे। उसका राज्य अमर रहेगा। उसका राज्य सदा बना रहेगा। वह कभी नष्ट नहीं होगा।

चौथे पशु के स्वप्न का फल

15 “मैं, दानिय्येल बहुत विकल और चिंतित था। वे दर्शन जो मैंने देखे थे, उन्होंने मुझे विकल बनाया हुआ था। 16 मैं, जो वहाँ खड़े थे, उनमें से एक के पास पहुँचा। मैंने उससे पूछा, इस सब कुछ का अर्थ क्या है? सो उसने बताया, उसने मुझे समझाया कि इन बातों का मतलब क्या है। 17 उसने कहा, ‘वे चार बड़े पशु, चार राज्य हैं। वे चारों राज्य धरती से उभरेंगे। 18 किन्तु परमेश्वर के पवित्र लोग उस राज्य को प्राप्त करेंगे जो एक अमर राज्य होगा।’

19 “फिर मैंने यह जानना चाहा कि वह चौथा पशु क्या था और उसका क्या अभिप्राय था वह चौथा पशु सभी दूसरे पशुओं से भिन्न था। वह बहुत भयानक था। उसके दाँत लोहे के थे, और पंजे काँसे के थे। यह वह पशु था, जिसने अपने शिकार को चकनाचूर करके पूरी तरह खा लिया था, और अपने शिकार को खाने के बाद जो कुछ बचा था, उसे उसने अपने पैरों तले रौंद डाला था। 20 उस चौथे पशु के सिर पर जो दस सींग थे, मैंने उनके बारे में जानना चाहा और मैंने उस सींग के बारे में भी जानना चाहा जो वहाँ उगा था। उस सींग ने उन दस सींगों में से तीन सींग उखाड़ फेंके थे। वह सींग अन्य सींगों से अधिक बड़ा दिखाई देता था। उसकी आँखे थी और वह अपनी डींगे हाँके चला जा रहा था। 21 मैं देख ही रहा था कि उस सीग ने परमेश्वर के पवित्र लाग के विरूद्ध युद्ध और उन पर आक्रमण करना आरम्भ कर दिया है और वह सींग उन्हें मारे जा रहा है। 22 परमेश्वर के पवित्र लोग को वह सींग उस समय तक मारता रहा जब तक सनातन राजा ने आकर उसका न्याय नहीं किया। सनातन राजा ने उस सींग के न्याय की घोषणा की। उस न्याय से परम परमेश्वर के भक्तों को सहारा मिला और उन्हे उनके अपने राज्य की प्राप्ति हो गयी।

23 “और फिर उसने सपने को मुझे इस प्रकार समझाया कि वह चौथा पशु, वह चौथा राज्य है जो धरती पर आयेगा। वह राज्य अन्य सभी राज्यों से अलग होगा। वह चौथा राज्य संसार में सब कही लोगों का विनाश करेगा। संसार के सभी देशों को वह अपने पैरों तले रौंदेगा और उनके टुकड़े—टुकड़े कर देगा। 24 वे दस सींग वे दस राजा हैं, जो इस चौथे राज्य में आयेंगे। इन दसों राजाओं के चले जाने के बाद एक और राजा आयेगा। वह राजा अपने से पहले के राजाओं से अलग होगा। वह उनमें से तीन दूसरे राजाओं को पराजित करेगा। 25 यह विशेष राजा परम प्रधान परमेश्वर के विरूद्ध बातें करेगा तथा वह राजा परमेश्वर के पवित्र लोगो को हानि पहुँचायेगा और उनका वध करेगा। जो पवित्र उत्सव और जो नियम इस समय प्रचलन में है, वह राजा उन्हे बदलने का जतन करेगा। परमेश्वर के पवित्र लोग साढ़े तीन साल तक उस राजा की शक्ति के अधीन रहेंगे।

26 “‘किन्तु जो कुछ होना है, उसका निर्णय न्यायालय करेगा और उस राजा से उसकी शक्ति छीन ली जायेगी। उसके राज्य का पूरी तरह अन्त हो जायेगा। 27 फिर परमेश्वर के पवित्र लोग उस राज्य का शासन चलायेंगे। धरती के सभी राज्यों के सभी लोगों पर उनका शासन होगा। यह राज्य सदा सदा अटल रहेगा, और अन्य सभी राज्यों के लोग उन्हें आदर देंगे और उनकी सेवा करेंगे।’

28 “इस प्रकार उस सपने का अंत हुआ। मैं, दानिय्येल तो बहुत डर गया था। डर से मेरा मुँह पीला पड़ गया था। मैंने जो बातें देखीं थीं और सुनी थी, मैंने उनके बारे में दूसरे लोगों को नहीं बताया।”

भेड़े और बकरे के बारे में दानिय्येल का दर्शन

बेलशस्सर के शासन काल के तीसरे साल मैंने यह दर्शन देखा। यह उस दर्शन के बाद का दर्शन है। मैंने देखा कि मैं शूशन नगर में हूँ। शूशन एलाम प्रांत की राजधानी थी। मैं ऊलै नदी के किनारे पर खड़ा था। मैंने आँखें ऊपर उठाई तो देखा कि ऊलै नदी के किनारे पर एक मेढ़ा खड़ा है। उस मेढ़े के दो लम्बे लम्बे सींग थे। यद्यपि उसके दोनों ही सींग लम्बे थे। पर एक सींग दूसरे से बड़ा था। लम्बा वाला सींग छोटे वाले सींग के बाद में उगा था। मैंने देखा कि वह मेढ़ा इधर उधर सींग मारता फिरता है। मैंने देखा की वह मेंढ़ कभी पश्चिम की ओर दौड़ता है तो कभी उत्तर की ओर, और कभी दक्षिण की ओर उस मेढ़े को कोई भी पशु रोक नहीं पा रहा है और न ही कोई दूसरे पशुओं को बचा पा रहा है। वह मेढ़ा वह सब कुछ कर सकता है, जो कुछ वह करना चाहता है। इस तरह से वह मढ़ा बहुत शक्तिशाली हो गया।

मैं उस मेढ़े के बारे में सोचने लगा। मैं अभी सोच ही रहा था कि पश्चिम की ओर से मैंने एक बकरे को आते देखा। यह बकरा सारी धरती पर दौड़ गया। किन्तु उस बकरे के पैर धरती से छुए तक नहीं। इस बकरे के एक लम्बा सींग था। जो साफ—साफ दिख रहा था, वह सींग बकरे की होनो आँखों के बीचों—बीच था।

फिर वह बकरा दो सींग वाले मेढ़े के पास आया। (यह वही मेढ़ा था जिसे मैंने ऊलै नदी के किनारे खड़ा देखा था।) वह बकरा क्रोध से भरा हुआ था। सो वह मेढ़े की तरफ लपका। बकरे को उस मेढ़े की तरफ भागते हुए मैंने देखा। वह बकरा गुस्से में आग बबूला हो रहा था। सो उसने मढ़े के दोनों सींग तोड़ डाले। मेढ़ा बकरे को रोक नही पाया। बकरे ने मेढ़े को धरती पर पछाड़ दिया और फिर उस बकरे ने उस मेढ़े को पैरों तले कुचल दिया। वहाँ उस मेढ़े को बकरे से बचाने वाला कोई नहीं था।

सो वह बकरा शक्तिशाली बन बैठा। किन्तु जब वह शक्तिशाली बना, उसका बड़ा सींग टूट गया और फिर उस बड़े सींग की जगह चार सींग और निकल आये। वे चारों सींग आसानी से दिखाई पड़ते थे। वे चार सीग अलग—अलग चारों दिशाओं की ओर मुड़े हुए थे।

फिर उन चार सींगों में से एक सींग में एक छोटा सींग और निकल आया। वह छोटा सींग बढ़ने लगा और बढ़ते—बढ़ते बहुत बड़ा हो गया। यह सींग दक्षिण—पूर्व की ओर बढ़ा। यह सींग सुन्दर धरती की ओर बढ़ा। 10 वह छोटा सींग बढ़ कर बहुत बड़ा हो गया। उसने बढ़ते बढ़ते आकाश छू लिया। उस छोटे सींग ने, यहाँ तक कि कुछ तारों को भी धरती पर पटक दिया और उन सभी तारों को पैरों तले मसल दिया। 11 वह छोटा सींग बहुत मज़बूत हो गया और फिर वह तारों के शासक (परमेश्वर) के विरूद्ध हो गया। उस छोटे सींग ने उस शासक (परमेश्वर) को अर्पित की जाने वाली दैनिक बलियों को रोक दिया। वह स्थान जहाँ लोग उस शासक (परमेश्वर) की उपासना किया करते थे, उसने उसे उजाड़ दिया 12 और उनकी सेना को भी हरा दिया और एक विद्रोही कार्य के रूप में वह छोटा सींग दैनिक बलियों के ऊपर अपने आपको स्थापित कर दिया। उसने सत्य को धरती पर दे पटक दिया। उस छोटो सींग ने जो कुछ किया उस सब में सफल हो गया।

13 फिर मैंने किसी पवित्र जन को बोलते सुना और उसके बाद मैंने सुना कि कोई दूसरा पवित्र जन उस पहले पवित्र जन को उत्तर दे रहा है। पहले पवित्र जन ने कहा, “यह दर्शन दर्शाता है कि दैनिक बलियों का क्या होगा यह उस भयानक पाप के विषय में है जो विनाश कर डालता है। यह दर्शाता है कि जब लोग उस शासक के पूजास्थल को तोड़ डालेंगे तब क्या होगा यह दर्शन दर्शाता है कि जब लोग उस समूचे स्थान को पैर तले रौंदेंगे तब क्या होगा। यह दर्शन दर्शाता है कि जब लोग तारों के ऊपर पैर धरेंगे तब क्या होगा किन्तु यह बातें कब तक होती रहेंगी”

14 दूसरे पवित्र जन ने कहा, “दो हजार तीन सौ दिन तक ऐसा ही होता रहेगा और फिर उसके बाद पवित्र स्थान को फिर से स्थापित कर दिया जायेगा।”

दर्शन की व्याख्या

15 मैं, दानिय्येल ने यह दर्शन देखा था, और यह प्रयत्न किया कि उसका अर्थ समझ लूँ। अभी मैं इस दर्शन के बारे में सोच ही रहा था कि मनुष्य के जैसा दिखने वाला कोई अचानक आ कर मेरे सामने खड़ा हो गया। 16 इसके बाद मैंने किसी पुरूष की वाणी सुनी। यह वाणी ऊलै नदी के ऊपर से आ रही थी। उस आवाज़ ने कहा, “जिब्राएल, इस व्यक्ति को इसके दर्शन का अर्थ समझा दो।”

17 सो जिब्राएल जो किसी मनुष्य के समान दिख रहा था, जहाँ मै खड़ा था, वहाँ आ गया। वह जब मेरे पास आया तो मैं बहुत डर गया। मैं धरती पर गिर पड़ा। किन्तु जिब्राएल ने मुझसे कहा, “अरे मनुष्य, समझ ले कि यह दर्शन अंत समय के लिये है।”

18 अभी जिब्राएल बोल ही रहा था कि मुझे नींद आ गयी। नींद बहुत गहरी थी। मेंरा मुख धरती की ओर था। फिर जिब्राएल ने मुझे छुआ और मुझे मेरे पैरों पर खड़ा कर दिया। 19 जिब्राएल ने कहा, “देख, मैं तुझे अब उस दर्शन को समझाता हूँ। मैं तुझे बताऊँगा कि परमेश्वर के क्रोध के समय के बाद में क्या कुछ घटेगा।

20 “तूने दो सींगों वाला मेढ़ा देखा था। वे दो सींग हैं मादी और फारस के दो देश। 21 वह बकरा यूनान का राजा है। उसकी दोनों आखों के बीच का बड़ा सींग वह पहला राजा है। 22 वह सींग टूट गया और उसके स्थान पर चार सींग निकल आये। वे चार सींग चार राज्य हैं। वे चार राज्य, उस पहले राजा के राष्ट्र से प्रकट होंगे किन्तु वे चारों राज्य उस पहले राजा से मज़बूत नहीं होंगे।

23 “जब उन राज्यों का अंत निकट होगा, तब वहाँ एक बहुत साहसी और क्रूर राजा होगा। यह राजा बहुत मक्कार होगा। ऐसा उस समय घटेगा जब पापियों की संख्या बढ़ जायेगी। 24 यह राजा बहुत शक्तिशाली होगा किन्तु उसकी शक्ति उसकी अपनी नहीं होगी। यह राजा भयानक तबाही मचा देगा। वह जो कुछ करेगा उसमें उसे सफलता मिलेगी। वह शक्तिशाली लोगों—यहाँ तक कि परमेश्वर के पवित्र लोगों को भी नष्ट कर देगा।

25 “यह राजा बहुत चुस्त और मक्कर होगा। वह अपनी कपट और झूठों के बल पर सफलता पायेगा। वह अपने आप को सबसे बड़ा समझेगा। लोगों को वह बिना किसी पूर्व चेतावनी के नष्ट करवा देगा। यहाँ तक कि वह राजाओं के राजा (परमेश्वर) से भी युद्ध का जतन करेगा किन्तु उस क्रूर राजा की शक्ति का अंत कर दिया जायेगा और उसका अंत किसी मनुष्य के हाथों नहीं होगा।

26 “उन भक्तों के बारे में यह दर्शन और वे बातें जो मैंने कही हैं, सत्य हैं। किन्तु इस दर्शन पर तू मुहर लगा कर रख दे। क्योंकि वे बातें अभी बहुत सारे समय तक घटने वाली नहीं हैं।”

27 उस दिव्य दर्शन के बाद में मैं दानिय्येल, बहुत कमज़ोर हो गया और बहुत दिनों तक बीमार पड़ा रहा। फिर बीमारी से उठकर मैंने लौटकर राजा का कामकाज करना आरम्भ कर दिया किन्तु उस दिव्य दर्शन के कारण मैं बहुत व्याकुल रहा करता था। मैं उस दर्शन का अर्थ समझ ही नहीं पाया था।

दानिय्येल की विनती

राजा दारा के शासन के पहले वर्ष के दौरान ये बातें घटी थीं। दारा क्षयर्ष नाम के व्यक्ति का पुत्र था। दारा मादी लोगों से सम्बन्धित था। वह बाबुल का राजा बना। दारा के राजा के पहले वर्ष में मैं, दानिय्येल कुछ किताबें पढ़ रहा था। उन पुस्तकों में मैंने देखा कि यहोवा ने यिर्मयाह को यह बताया है कि यरूशलेम का पुनःनिर्माण कितने बरस बाद होगा। यहोवा ने कहा था कि इससे पहले कि यरूशलेम फिर से बसे, सत्तर वर्ष बीत जायेंगे।

फिर मैं अपने स्वामी परमेश्वर की ओर मुड़ा और उससे प्रार्थना करते हुए सहायता की याचना की। मैंने भोजन करना छोड़ दिया और ऐसे कपड़े पहन लिये जिनसे यह लगे कि मैं दु:खी हूँ। मैंने अपने सिर पर धूल डाल ली। मैंने अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना करते हुए उसको अपने सभी पाप बता दिये। मैंने कहा,

“हे यहोवा, तू महान और भययोग्य परमेश्वर है। जो व्यक्ति तुझसे प्रेम करते हैं, तू उनके साथ प्रेम और दयालुता के वचन को निभाता है। जो लोग तेरे आदेशों का पालन करते हैं उनके साथ तू अपना वचन निभाता है।

“किन्तु हे यहोवा, हम पापी हैं! हमने बुरा किया है। हमने कुकर्म किये हैं। हमने तेरा विरोध किया है। तेरे निष्पक्ष न्याय और तेरे आदेशों से हम दूर भटक गये हैं। हम नबियों की बात नहीं सुनते। नबी तो तेरे सेवक हैं। नबियों ने तेरे बारे में बताया। उन्होंने हमारे राजाओं, हमारे मुखियाओं और हमारे पूर्वजों को बताया था। उन्होंने इस्राल के सभी लोगों को भी बताया था। किन्तु हमने उन नबियों की नही सुनी!

“हे यहोवा, तू खरा है, और तुझमें नेकी है! जबकी आज हम लज्जित हैं। यरूशलेम और यहूदा के लोग लज्जित हैं—इस्राएल के सभी लोग लज्जित हैं। वे लोग जो निकट हैं और वे लोग जो बहुत दूर हैं। हे यहोवा! तूने उन लोगों को बहुत से देशों में फैला दिया। उन सभी देशों में बसे इस्राएल के लोगों को शर्म आनी चाहिये। हे यहोवा, उन सभी बुरी बातों के लिये, जो उन्होंने तेरे विरूद्ध की हैं, उन्हें लज्जित होना चाहिये।

“हे यहोवा, हम सबको लज्जित होना चाहिये। हमारे सभी राजाओं और मुखियाओं को लज्जित होना चाहिये, हमारे सभी पूर्वजों को लज्जित होना चाहिये। ऐसा क्यों ऐसा इसलिये कि हे यहोवा, हमने तेरे विरूद्ध पाप किये हैं।

“किन्तु हे यहोवा, तू दयालु है। लोग जो बुरे कर्म करते हैं तो तू उन्हें, क्षमा कर देता है। हमने वास्तव में तुझसे मुँह फेर लिया था। 10 हमने अपने यहोवा परमेश्वर की आज्ञा का पालन नही किया। यहोवा ने अपने सेवकों, अपने नबियों के द्वारा हमें व्यवस्था का विधान प्रदान किया। किन्तु हमने उसकी व्यवस्थाओं को नहीं माना। 11 इस्राएल का कोई भी व्यक्ति तेरी शिक्षाओं पर नहीं चला। वे सभी भटक गये थे। उन्होंने तेरे आदेशों का पालन नहीं किया। मूसा, (जो परमेश्वर का सेवक था) की व्यवस्था के विधान में शापों और वादों का उल्लेख हुआ है। वे शाप और वादे व्यवस्था के विधान पर नहीं चलने के दण्ड का बखान करते हैं और वे सभी बातें हमारे संग घट चुकी हैं क्योंकि हमने यहोवा के विरोध में पाप किये हैं।

12 “परमेश्वर ने बताया था कि हमारे साथ और हमारे मुखियाओं के साथ वे बातें घटेंगी और उसने उन्हें घटा दिया। उसने हमारे साथ भयानक बातें घटा दीं। यरूशलेम को जितना कष्ट उठाना पड़ा, किसी दूसरे नगर ने नहीं उठाया। 13 वे सभी भयानक बातें हमारे साथ भी घटीं। यह बातें ठीक वैसे ही घटीं, जैसे मूसा के व्यवस्था के विधान में लिखी हुई हैं। किन्तु हमने अभी भी परमेश्वर से सहारा नहीं माँगा है! हमने अभी भी पाप करना नहीं छोड़ा है। हे यहोवा, तेरे सत्य पर हम अभी भी ध्यान नहीं देते। 14 यहोवा ने वे भयानक बाते तैयार रख छोड़ी थीं और उसने हमाने साथ उन बातों को घटा दिया। हमारे परमेश्वर यहोवा ने ऐसा इसलिये किया था कि वह तो जो कुछ भी करता है, न्याय ही करता है। किन्तु हम अभी भी उसकी नहीं सुनते।

15 “हे हमारे परमेश्वर, यहोवा, तूने अपनी शक्ति का प्रयोग किया और हमें मिस्र से बाहर निकाल लाया। हम तो तेरे अपने लोग हैं। आज तक उस घटना के कारण तू जाना माना जाता है। हे यहोवा, हमने पाप किये हैं। हमने भयानक काम किये हैं। 16 हे यहोवा, यरूशलेम पर क्रोध करना छोड़ दे। यरूशलेम तेरे पवित्र पर्वतों पर स्थित है। तू जो करता है, ठीक ही करता है। सो यरूशलेम पर क्रोध करना छोड़ दे। हमारे आसपास के लोग हमारा अपमान करते हैं और हमारे लोगों की हँसी उड़ाते हैं। हमारे पूर्वजों ने तेरे विरूद्ध पाप किया था। यह सब कुछ इसलिये हो रहा है।

17 “अब, हे यहोवा, तू मेरी प्रार्थना सुन ले। मैं तेरा दास हूँ। सहायता के लिये मेरी विनती सुन। अपने पवित्र स्थान के लिए तू अच्छी बातें कर। वह भवन नष्ट कर दिया गया था। किन्तु हे स्वामी, तू स्वयं अपने भले के लिए इन भली बातों को कर। 18 हे मेरे परमेश्वर, मेरी सुन! जरा अपनी आँखें खोल और हमारे साथ जो भयानक बातें घटी हैं, उन्हें देख! वह नगर जो तेरे नाम से पुकारा जाता था, देख उसके साथ क्या हो गया है! मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि हम अच्छे लोग हैं। इसलिये मैं इन बातों की याचना कर रहा हूँ। यह याचना तो मैं इसलिये कर रहा हूँ कि मैं जानता हूँ कि तू दयालु है। 19 हे यहोवा मेरी सुन, हे यहोवा, हमें क्षमा कर दें। यहोवा, हम पर ध्यान दे, और फिर कुछ कर! अब और प्रतीक्षा मत कर! इसी समय कुछ कर! उसे तू स्वयं अपने भले के लिये कर! हे परमेश्वर, अब तो अपने नगर और अपने उन लोगों के लिये, जो तेरे नाम से पुकारे जाते हैं, कुछ कर।”

सत्तर सप्ताहों के बारे में दर्शन

20 मैं परमेश्वर से प्रार्थना करते हुए ये बातें कर रहा था। मैं इस्राएल के लोगों के और अपने पापों के बारे में बता रहा था। मैं परमेश्वर के पवित्र पर्वत पर प्रार्थना कर रहा था। 21 मैं अभी प्रार्थना कर ही हा था कि जिब्राएल मेरे पास आया। जिब्राएल वही स्वर्गदूत था जिसे मैंने दर्शन में देखा था। जिब्राएल शीघ्रता से मेरे पास आया। वह सांझ की बलि के समय आया था। 22 मैं जिन बातों को समझना चाहता था, उन बातों को समझने में जिब्राएल ने मेरी सहायता की। जिब्राएल ने कहा, “हे दानिय्येल, मैं तुझे बुद्धि प्रदान करने और समझने में तेरी सहायता को आया हूँ। 23 जब तूने पहले प्रार्थना आरम्भ की थी, मुझे तभी आदेश दे दिया गया था और देख मैं तुझे बताने आ गया हूँ। परमेश्वर तुझे बहुत प्रेम करता है! यह आदेश तेरी समझ में आ जायेगा और तू उस दर्शन का अर्थ जान लेगा।

24 “हे दानिय्येल, परमेश्वर ने तेरी प्रजा और तेरी नगरी के लिए सत्तर सप्ताहों का समय निश्चित किया है। सत्तर सप्ताहों के समय का यह आदेश इसलिये दिया गया है कि बुरे कर्म करना छाड़ दिया जाये, पाप करना बन्द कर दिया जाये, सब लोगों को शुद्ध किया जाये, सदा—सदा बनी रहने वाली नेकी को लाया जाये, दर्शन और नबियों पर मुहर लगा दी जाये, और एक अत्यंत पवित्र स्थान को समर्पित किया जाये।

25 “दानिय्येल, तू इन बातों को समझ ले। इन बातों को जान ले! वापस आने और यरूशलेम के पुननिर्माण की आज्ञा को समय से लेकर अभिषिक्त के आने के समय तक सात सप्ताह बीतेंगे। इसके बाद यरूशलेम फिर से बसाया जायेगा। यरूशलेम में लोगों के परस्पर मिलने के स्थान फिर से ब जायेंगे। नगर की रक्षा करने के लिये नगर के चारों ओर खाई भी होगी। बासठ सप्ताह तक यरूशलेम को बसाया जायेगा। किन्तु उस समय बहुत सी विपत्तियाँ आयेंगी। 26 बासठ सप्ताह बाद उस अभिषिक्त पुरूष की हत्या कर दी जायेगी। वह चला जायेगा। फिर होने वाले नेता के लोग नगर को और उस पवित्र ठांव को तहस—नहस कर देंगे। वह अंत ऐसे आयेगा जैसे बाढ़ आती है। अंत तक युद्ध होता रहेगा। उस स्थान को पूरी तरह तहस—नहस कर देने की परमेश्वर आज्ञा दे चुका है।

27 “इसके बाद वह भावी शासक बहुत से लोगों के साथ एक वाचा करेगा। वह वाचा एक सप्ताह तक चलेगा। भेंटे और बलियाँ आधे सप्ताह तक रूकी रहेंगी और फिर एक विनाश कर्त्ता आयेगा। वह भयानक विध्वंसक बातें करेगा। किन्तु परमेश्वर उस विनाश कर्ता के सम्पूर्ण विनाश की आज्ञा दे चुका है।”

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