Beginning
5 1-2 “मनुष्य के पुत्र अपने उपवास के समय[a] के बाद तुम्हें ये काम करने चाहिए। तुम्हें एक तेज तलवार लेनी चाहिए। उस तलवार का उपयोग नाई के उस्तरे की तरह करो। तुम अपने बाल और दाढ़ी उससे काट लो। बालों को तराजू में रखो और तौलो। अपने बालों को तीन बराबर भागों में बाँटों। अपने बालों का एक तिहाई भाग उस ईंट पर रखो जिस पर नगर का चित्र बना है। उस नगर में उन बालों को जलाओ। यह प्रदर्शित करता है कि कुछ लोग नगर के अन्दर मरेंगे। तब तलवार का उपयोग करो और अपने बालों के एक तिहाई को छोटे—छोटे टुकड़ों में काट डालो। उन बालों को उस नगर (ईंट) के चारों ओर रखो। यह प्रदर्शित करेगा कि कुछ लोग नगर के बाहर मरेंगे। तब अपने बालों के एक तिहाई को हवा में उड़ा दो। इन्हें हवा को दूर उड़ा ले जाने दो। यह प्रदर्शित करेगा कि मैं अपनी तलवार निकालूँगा और कुछ लोगों का पीछा करके उन्हें दूर देशों में भगा दूँगा। 3 किन्तु तब तुम्हें जाना चाहिए और उन बालों में से कुछ को लाना चाहिए। उन बालों को लाओ, उन्हें ढको और उनकी रक्षा करो। यह प्रदर्शित करेगा कि मैं अपने लोगों में से कुछ को बचाऊँगा 4 और तब उन उड़े हुए बालों में से कुछ और अधिक बालों को लाओ। उन बालों को आग में फेंक दो। यह प्रदर्शित करता है कि आग वहाँ शुरु होगी और इस्राएल के पूरे खानदानको जलाकर नष्ट कर देगी।”
5 तब मेरे स्वामी यहोवा ने मुझसे कहा, “वह ईंट यरूशलेम है, मैंने इस यरूशलेम नगर को अन्य राष्ट्रों के बीच रखा है, इस समय इस्राएल के चारों ओर अन्य देश हैं। 6 यरूशलेम के लोगों ने मेरे आदेशों के प्रति विद्रोह किया। वे अन्य किसी भी राष्ट्र से अधिक बुरे थे! उन्होंने मेरे नियमों को उससे भी अधिक तोड़ा जितना उनके चारों ओर के किसी भी देश के लोगों ने तोड़ा। उन्होंने मेरे आदेशों को सुनने से इनकार कर दिया। उन्होंने मेरी व्यवस्था का पालन नहीं किया!”
7 इसलिये मेरे स्वामी यहोवा, ने कहा, “मैं तुम लोगों पर भयंकर विपत्ति लाऊँगा। क्यों क्योंकि तुमने मेरे आदेशों का पालन नहीं किया। तुम लोगों ने मेरे नियमों को अपने चारों ओर रहने वाले लोगों से भी अधिक तोड़ा! तुम लोगों ने वे काम भी किये जिन्हें वे लोग भी गलत कहते हैं!” 8 इसलिये मेरा स्वामी यहोवा कहता है, “इसलिये मैं भी तुम्हारे विरुद्ध हूँ, मैं तुम्हें इस प्रकार दण्ड दूँगा जिससे दूसरे लोग भी देख सकें। 9 मैं तुम लोगों के साथ वह करुँगा जिसे मैंने पहले कभी नहीं किया। मैं उन भयानक कामों को फिर कभी नहीं करुँगा। क्यों क्योंकि तुमने इतने अधिक भयंकर काम किये। 10 यरूशलेम में लोग भूख से इतने तड़पेंगे कि माता—पिता अपने बच्चों को खा जाएंगें और बच्चे अपने माता—पिता को खा जाएंगे। मैं तुम्हें कई प्रकार से दण्ड दूँगा और जो लोग जीवित बचे हैं, उन्हें मैं हवा में बिखेर दूँगा।”
11 मेरे स्वामी यहोवा कहता है, “यरूशलेम, मैं अपने जीवन की शपथ खाकर कहता हूँ कि मैं तुम्हें दण्ड दूँगा! मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मैं तुम्हें दण्ड दूँगा। क्यों क्योंकि तुमने मेरे ‘पवित्र स्थान’ के विरुद्ध भयंकर पाप किया! तुमने वे भयानक काम किये जिन्होंने इसे गन्दा बना दिया! मैं तुम्हें दण्ड दूँगा। मैं तुम पर दया नहीं करुँगा! मैं तुम्हारे लिए दुःख का अनुभव नहीं करुँगा! 12 तुम्हारे एक तिहाई लोग नगर के भीतर रोग और भूख से मरेंगे। तुम्हारे एक तिहाई लोग युद्ध में नगर के बाहर मरेंगे और तुम्हारे लोगों के एक तिहाई को मैं अपनी तलवार निकाल कर उन का पीछा कर के उन्हें दूर देशों में खदेड़ दूँगा। 13 केवल तब मैं तुम्हारे लोगो पर क्रोधित होना बन्द करुँगा। मैं समझ लूँगा कि वे उन बुरे कामों के लिए दण्डित हुए हैं जो उन्होंने मेरे साथ किये थे और वे समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ और मैंने उनसे बातें उनके प्रति गहरा प्रेम होने के कारण की!”
14 परमेश्वर ने कहा, “यरूशलेम मैं तुझे नष्ट करूँगा तुम पत्थरों के ढेर के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं रह जाओगे। तुम्हारे चारों ओर के लोग तुम्हारी हँसी उड़ाएंगे। हर एक व्यक्ति जो तुम्हारे पास से गुजरेगा, तुम्हारी हँसी उड़ाएगा। 15 तुम्हारे चारों ओर के लोग तुम्हारी हँसी उड़ाएंगे, किन्तु उनके लिए तुम एक सबक भी बनोगे। वे देखेंगे कि मैं क्रोधित था और मैंने तुमको दण्ड दिया। मैं बहुत क्रोधित था। मैंने तुम्हें चेतावनी दी थी। मुझ, यहोवा ने तुमसे कहा था कि मैं क्या करूँगा! 16 मैंने कहा था कि मैं तुम्हारे पास भयंकर भुखमरी का समय भेजूँगा। मैंने तुमसे कहा था, मैं उन चीजों को भेजूँगा जो तुमको नष्ट करेंगी और तुमसे कहा था कि मैं तुम्हारी भोजन की आपूर्ति छीन लूँगा, और वह भूखमरी का वह समय बार—बार आया। 17 मैंने तुमसे कहा था कि मैं तुझ पर भूख तथा जंगली पशु भेजूँगा, जो तुम्हारे बच्चों को मार डालेंगे। मैंने तुमसे कहा था कि पूरे नगर में रोग और मृत्यु का राज्य होगा और मैं उन शत्रु—सैनिकों को तुम्हारे विरुद्ध लड़ने के लिये लाऊँगा। मुझ यहोवा ने यह कहा था, ये सभी बातें घटित होंगी और सभी घटित हुई!”
6 तब यहोवा का वचन मेरे पास फिर आया। 2 उसने कहा, “मनुष्य के पुत्र इस्राएल के पर्वतों की ओर मुड़ो। उनके विरुद्ध मेरे पक्ष में कहो। 3 उन पर्वतों से यह कहो: ‘इस्राएल के पर्वतों, मेरे स्वामी यहोवा की ओर से यह सन्देश सुनो! मेरे स्वामी यहोवा पहाड़ियों, पर्वतों, घाटियों और खार—खड्डों से यह कहता है। ध्यान दो! मैं (परमेश्वर) शत्रु को तुम्हारे विरुद्ध लड़ने के लिये ला रहा हूँ। मैं तुम्हारे उच्च—स्थानों को नष्ट कर दूँगा। 4 तुम्हारी वेदियों को तोड़ कर टुकड़े—टुकड़े कर दिया जायेगा। तुम्हारी सुगन्धि चढ़ाने की वेदियाँ ध्वस्त कर दी जाएंगी! और मैं तुम्हारे शवों को तुम्हारी गन्दी मूर्तियों के सामने फेकूँगा। 5 मैं इस्राएल के लोगों के शवों को उनके देवताओं की गन्दी मूर्तियों के सामने फेंकूँगा। मैं तुम्हारी हड्डियों को तुम्हारी वेदियों के चारों ओर बिखेरूँगा। 6 जहाँ कहीं तुम्हारे लोग रहेंगे उन पर विपत्तियाँ आएंगी। उनके नगर पत्थरों के ढेर बनेंगे। उनके उच्च स्थान नष्ट किये जाएंगे। क्यों इसलिये कि उन पूजा स्थानों का उपयोग दुबारा न हो सके। वे सभी वेदियाँ नष्ट कर दी जायेंगी। लोग फिर कभी उन गन्दी मूर्तियों को नहीं पूजेंगे। उन सुगन्धि—वेदियों को ध्वस्त किया जाएगा। जो चीजें तुम बनाते हो वे पूरी तरह नष्ट की जाएंगी। 7 तुम्हारे लोग मारे जाएंगे और तब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ!’”
8 परमेश्वर ने कहा, “किन्तु मैं तुम्हारे कुछ लोगों को बच निकलने दूँगा। वे थोड़े समय तक विदेशों में रहेंगे। मैं उन्हें बिखेरूँगा और अन्य देशों में रहने के लिये विवश करूँगा। 9 तब वे बचे हुए लोग बन्दी बनाए जाएंगे। वे विदेशों में रहने को विवश किये जाएंगे। किन्तु वे बचे हुए लोग मुझे याद रखेंगे। मैंने उनकी आत्मा (हृदय) को खण्डित किया। जिन पापों को उन्होंने किया, उसके लिये वे स्वयं ही घृणा करेंगे। बीते समय में वे मुझसे विमुख हुए थे और दूर हो गए थे। वे अपनी गन्दी मूर्तियों के पीछे लगे हुए थे। वे उस स्त्री के समान थे जो अपने पति को छोड़कर, किसी दूसरे पुरुष के पीछे दौड़ने लगी। उन्होंने बड़े भयंकर पाप किये। 10 किन्तु वे समझ जाएंगे कि मैं यहोवा हूँ और वे यह जानेंगे कि यदि मैं कुछ करने के लिये कहूँगा तो मैं उसे करुँगा। वे समझ जायेंगे कि वे सब विपत्तियाँ जो उन पर आई हैं, मैंने डाली हैं।”
11 तब मेरे स्वामी यहोवा ने मुझसे कहा, “हाथों से ताली बजाओं और अपने पैर पीटो। उन सभी भयंकर चीजों के विरुद्ध कहो जिन्हें इस्राएल के लोगों ने किया है। उन्हें चेतावनी दो कि वे रोग और भूख से मारे जाएंगे। उन्हें बताओ कि वे युद्ध में मारे जाएंगे। 12 दूर के लोग रोग से मरेंगे। समीप के लोग तलवार से मारे जाएंगे। जो लोग नगर में बचे रहेंगे, वे भूख से मरेंगे। मैं तभी क्रोध करना छोड़ूँगा, 13 और केवल तभी तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ। तुम यह तब समझोगे जब तुम अपने शवों को गन्दी मूर्तियों के सामने और वेदियों के चारों ओर देखोगे। तुम्हारे पूजा के उन हर स्थानों के निकट, हर एक ऊँची पहाड़ी, पर्वत तथा हर एक हरे वृक्ष और पत्ते वाले हर एक बांज वृक्ष के नीचे, वे शव होंगे। उन सभी स्थानों पर तुमने अपनी बलि—भेंट की है। वे तुम्हारी गन्दी मूर्तियों के लिए मधुर गन्ध थी। 14 किन्तु मैं अपना हाथ तुम लोगों पर उठाऊँगा और तुम्हें और तुम्हारे लोगों को जहाँ कही वे रहे, दण्ड दूँगा! मैं तुम्हारे देश को नष्ट करूँगा! यह दिबला मरूभूमि से भी अधिक सूनी होगी। तब वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ!”
7 तब यहोवा का वचन मुझे मिला। 2 उसने कहा, “मनुष्य के पुत्र, अब मेरे स्वामी यहोवा का यह सन्देश है। यह सन्देश इस्राएल देश के लिये है:
“अन्त!
अन्त आ गया है।
पूरा देश नष्ट हो जायेगा।
3 अब तुम्हारा अन्त आ गया है!
मैं दिखाऊँगा कि मैं तुम पर कितना क्रोधित हूँ।
मैं तुम्हें उन बुरे कामों के लिये दण्ड दूँगा जो तुमने किये।
जो भयंकर काम तुमने किये उनके लिए मैं तुमसे भुगतान कराऊँगा।
4 मैं तुम्हारे ऊपर तनिक भी दया नहीं करूँगा।
मैं तुम्हारे लिये अफसोस नहीं करूँगा।
मैं तुम्हें तुम्हारे बुरे कामों के लिये दण्ड दे रहा हूँ।
तुमने भयानक काम किये हैं।
अब तुम समझ जाओगे कि मैं यहोवा हूँ।”
5 मेरे स्वामी यहोवा ने ये बातें कहीं। “एक के बाद एक विपत्तियाँ आयेंगी! 6 अन्त आ रहा है और यह बहुत जल्दी आयेगा! 7 इस्राएल के तुम लोगों, क्या तुमने सीटी सुनी है शत्रु आ रहा है। वह दण्ड का समय शीघ्र आ रहा है! शत्रुओं का शोरगुल पर्वतों पर अधिकाधिक बढ़ता जा रहा है। 8 मैं शीघ्र ही दिखा दूँगा कि मैं कितना क्रोधित हूँ। मैं तुम्हारे विरुद्ध अपने पूरे क्रोध को प्रकट करुँगा। मैं उन बुरे कामों के लिये दण्ड दूँगा जो तुमने किये। मैं उन सभी भयानक कामों के लिये तुमसे भुगतान कराऊँगा जो तुमने किये। 9 मैं तुम पर तनिक भी दया नहीं करूँगा मैं तुम्हारे लिये अफसोस नहीं करूँगा। मैं तुम्हें तुम्हारे बुरे कामों के लिये दण्ड दे रहा हूँ। तुमने जो भयानक काम किये है, अब तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ और मैं दण्ड भी देता हूँ।
10 “दण्ड का वह समय आ गया। क्या तुम सीटी सुन रहे हो परमेश्वर ने संकेत दिया है। दण्ड आरम्भ हो रहा है। डाली अंकुरित होने लगी है। घमण्डी राजा (नबूकदनेस्सर) पहले से अधिक शक्तिशाली होता जा रहा था। 11 वह हिसंक व्यक्ति उन बुरे लोगों को दण्ड देने के लिये तैयार है। इस्राएल में लोगों की संख्या बहुत है, किन्तु वह उनमें से नहीं है। वह उस भीड़ का व्यक्ति नहीं है। वह उन लोगों में से कोई महत्वपूर्ण प्रमुख नहीं है।
12 “वह दण्ड का समय आ गया है। वह दिन आ पहुँचा। जो लोग चीजें खरीदते हैं, प्रसन्न नहीं होंगे और जो लोग चीजें बेचते हैं, वे उन्हें बेचने में बुरा नहीं मानेंगे। क्यों क्योंकि वह भयंकर दण्ड हर एक व्यक्ति के लिये होगा। 13 जो लोग अपनी स्थायी सम्पत्ति बेचेंगे वे उसे कभी नहीं पाएंगे। यदि कोई व्यक्ति जीवित भी बचा रहेगा तो भी वह अपनी स्थायी सम्पत्ति वापस नहीं पा सकता। क्यों क्योंकि यह दर्शन लोगों के पूरे समूह के लिये है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति जीवित भी बच निकलता है, तो भी लोग इससे अधिक संतुष्ट नहीं होंगे।
14 “वे लोगों को चेतावनी देने के लिये तुरही बजाएंगे। लोग युद्ध के लिये तैयार होंगे। किन्तु वे युद्ध करने के लिये नहीं निकलेंगे। क्यों क्योंकि मैं पूरे जन—समूह को दिखाऊँगा कि मैं कितना क्रोधित हूँ। 15 तलवार लिये हुए शत्रु नगर के बाहर हैं। रोग और भूख नगर के भीतर हैं। यदि कोई युद्ध के मैदान में जाएगा तो शत्रु के सैनिक उसे मार डालेंगे। यदि वह नगर में रहता हैं तो भूख और रोग उसे नष्ट करेंगे।
16 “किन्तु कुछ लोग बच निकलेंगे। वे बचे लोग भाग कर पहाड़ों में चल जाएंगे। किन्तु वे लोग सुखी नहीं होंगे। वे अपने पापों के कारण दुःखी होंगे। वे चिल्लायेंगे और कबूतरों की तरह दुःख—भरी आवाज़ निकालेंगे। 17 लोग इतने थके और खिन्न होंगे कि बाहें भी नहीं उठा पाएंगे। उनके पैर पानी की तरह ढीले होंगे। 18 वे शोक—वस्त्र पहनेंगे और भयभीत रहेंगे। तुम हर मुख पर ग्लानि पाओगे। वे (शोक प्रदर्शन के लिये) अपने बाल मुड़वा लेंगे। 19 वे अपनी चाँदी की देव मूर्तियों को सड़कों पर फेक देंगे। वे अपने सोने की देवमूर्तियों को गन्दे चीथड़ो की तरह समझेंगे! क्यों क्योंकि जब यहोवा ने अपना क्रोध प्रकट किया वे मूर्तियाँ उन्हें बचा न सकीं। वे मूर्तियाँ लोगों के लिए पतन (पाप) के जाल के अतिरिक्त अन्य कुछ नहीं थी। वे मूर्तियाँ लोगों को भोजन नहीं देंगी वे मूर्तियाँ उनके पेट में अन्न नहीं पहुँचायेंगी।
20 “उन लोगों ने अपने सुन्दर आभूषण का उपयोग किया और मूर्ति बनाई। उन्हें अपनी मूर्ति पर गर्व था। उन्होंने अपनी भयानक मूर्तियाँ बनाई। उन लोगों ने उन गन्दी चीजों को बनाया। इसलिये मैं (परमेश्वर) उन्हें गन्दें चिथड़े की तरह फेंक दूँगा। 21 मैं उन्हें अजनबियों को लेने दूँगा। वे अजनबी उनका मजाक उड़ाएंगे। वे अजनबी, उन लोगों में से कुछ को मारेंगे और कुछ को बन्दी बनाकर ले जाएंगे। 22 मैं उनसे अपना मुँह फेर लूँगा, मैं उनकी ओर नहीं देखूँगा। वे अजनबी मेरे मन्दिर को नष्ट करेंगे, वे उस पवित्र भवन के गोपनीय भागों में जाएंगे और उसे अपवित्र करेंगे।
23 “बन्दियों के लिये जंजीरें बनाओ! क्यों क्योंकि बहुत से लोग दूसरे लोगों को मारने के कारण दण्डित होंगे। नगर के हर स्थान पर हिंसा भड़केगी। 24 मैं अन्य राष्ट्रों से बुरे लोगों को लाऊँगा और वे लोग इस्राएल के लोगों के सभी घरों को ले लेंगे। मैं तुम शक्तिशाली लोगों को गर्वीला होने से रोक दूँगा। दूसरे राष्ट्रों के वे लोग तुम्हारे पूजा—स्थानों को ले लेंगे।
25 “तुम लोग भय से काँप उठोगे। तुम लोग शान्ति चाहोगे, किन्तु शान्ति नहीं मिलेगी। 26 तुम एक के बाद दूसरी दःख—कथा सुनोगे। तुम बुरी खबरों के अलावा कुछ नहीं सुनोगे। तुम नबी की खोज करोगे और उससे दर्शन पूछोगे। किन्तु कोई मिलेगा नहीं। याजक के पास तुम्हें शिक्षा देने को कुछ भी नहीं होगा और अग्रजों (प्रमुखों) के पास तुम्हें देने को कोई अच्छी सलाह नहीं होगी। 27 तुम्हारा राजा उन लोगों के लिये रोएगा, जो मर गए। प्रमुख शोक—वस्त्र पहनेंगे। साधारण लोग बहुत डर जाएंगे। क्यों क्योंकि मैं उसका बदला दूँगा जो उन्होंने किया। मैं उनका दण्ड निश्चित करूँगा। और मैं उन्हें दण्ड दूँगा। तब वे लोग समझेंगे कि मैं यहोवा हूँ।”
8 एक दिन मैं (यहेजकेल) अपने घर में बैठा था और यहूदा के अग्रज (प्रमुख) वहाँ मेरे सामने बैठे थे। यह देश—निकाले के छठे वर्ष के छठे महीने (सितम्बर) के पाँचवें दिन हुआ। अचानक मेरे स्वामी यहोवा की शक्ति मुझमें उतरी। 2 मैंने कुछ देखा जो आग की तरह था। यह एक मनुष्य शरीर जैसा दिखाई पड़ता था। कमर से नीचे वह आग—सा था। कमर से ऊपर वह आग में तप्त—धातु की तरह चमकीला और कान्तिवाला था। 3 तब मैंने कुछ ऐसा देखा जो बाहु की तरह था। वह बाहु बाहर बढ़ी और उसने मेरे सिर के बालों से मुझे पकड़ लिया। तब आत्मा ने मुझे हवा में उठा लिया और परमेश्वर के दर्शन में वह मुझे यरूशलेम को ले गई। वह मुझे उत्तर की ओर के भीतर फाटक पर ले गई। वह देवमूर्ति, जिससे परमेश्वर को ईर्ष्या होती है, उस फाटक के सहारे है। 4 किन्तु इस्राएल के परमेश्वर का तेज वहाँ था। वह तेज वैसा ही दिखता था जैसा दर्शन मैंने घाटी के किनारे कबार नहर के पास देखा था।
5 परमेश्वर ने मुझसे कहा। उसने कहा, “मनुष्य के पुत्र, उत्तर की ओर देखो!” इसलिये मैंने उत्तर की ओर देखा। और वहाँ प्रवेश मार्ग के सहारे वेदी—द्वार के उत्तर में वह देवमूर्ति थी जिसके प्रति परमेश्वर की ईर्ष्या होती थी।
6 तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम देखते हो कि इस्राएल के लोग कैसा भयंकर काम कर रहे हैं यहाँ उन्होंने उस चीज को मेरे मन्दिर के ठीक बगल में बनाया है। यदि तुम मेरे साथ आओगे तो तुम और भी अधिक भयंकर चीजें देखोगे!”
7 इसलिये मैं आंगन के प्रवेश—द्वार पर गया और मैंने दीवार में एक छेद देखा। 8 परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र! उस दीवार के छेद में से घुसो।” इसलिये मैं दीवार के उस छेद में से होकर गया और वहाँ मैंने एक दरवाजा देखा।
9 तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “अन्दर जाओ, और उन भयानक दुष्ट चीजों को देखो जिन्हें लोग यहाँ कर रहे हैं।” 10 इसलिये मैं अन्दर गया और मैंने देखा। मैंने हर एक प्रकार के रेंगनेवाले जन्तु और जानवरों की देवमूर्तियों को देखा जिनके बारे में सोचने से तुम्हें घृणा होती है। वे देवमूर्तियाँ गन्दी मूर्तियाँ थीं जिन्हें इस्राएल के लोग पूजते थे। वहाँ उन जानवरों के चित्र हर दीवार पर चारों ओर खुदे हुए थे!
11 तब मैंने इस पर ध्यान दिया कि शापान का पुत्र याजन्याह और इस्राएल के सत्तर अग्रज (प्रमुख) उस स्थान पर पूजा करने वालों के साथ थे। वहाँ पर वे, लोगों के ठीक सामने थे, और हर एक प्रभुख के हाथ में अपनी सुगन्धि का थाल था। जलती सुगन्धि का धुँआ हवा में उठ रहा था। 12 तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम देखते हो कि इस्राएल के प्रमुख अंधेरे में क्या करते हैं हर एक व्यक्ति के पास अपने असत्य देवता के लिये एक विशेष कमरा है! वे लोग आपस में बातें करते हैं, ‘यहोवा हमें देख नहीं सकता। यहोवा ने इस देश को छोड़ दिया है।’” 13 तब परमेश्वर ने मुझसे कहा, “यदि तुम मेरे साथ आओगे तो तुम उन लोगों को और भी अधिक भयानक काम करते देखोगे!”
14 तब वह मुझे यहोवा के मन्दिर के प्रवेशद्वार पर ले गया। यह द्वार उत्तर की ओर था। वहाँ मैंने स्त्रियों को बैठे और रोते देखा। वे असत्य देवता तम्मूज के विषय में शोक मना रहीं थीं!
15 परमेश्वर ने मुझसे कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम इन भयंकर चीजों को देखते हो मेरे साथ आओ और तुम इनसे भी बुरे काम देखोगे!” 16 तब वह मुझे मन्दिर के भीतरी आँगन में ले गया। उस स्थान पर मैंने पच्चीस व्यक्तियों को नीचे झुके हुए और पूजा करते देखा। वे बरामदे और वेदी के बीच थे, किन्तु वे गलत दिशा में मुँह किये खड़े थे! उनकी पीठ पवित्र स्थान की ओर थी! वे सूर्य की पूजा करने के लिये नीचे झुके थे!
17 तब परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य के पुत्र, क्या तुम इसे देखते हो यहूदा के लोग मेरे मन्दिर को इतना महत्वहीन समझते हैं कि वे मेरे मन्दिर में यह भयंकर काम करते हैं। यह देश हिंसा से भरा हुआ है। वे लगातार मुझको पागल करने वाला काम करते हैं! देखो, उन्होंने अपने नाकों में असत्य देवता की तरह चन्द्रमा का सम्मान करने के लिये बालियाँ पहन रखी हैं। 18 मैं उन पर अपना क्रोध प्रकट करूँगा। मैं उन पर कोई दया नहीं करूँगा। मैं उनके लिये दुःख का अनुभव नहीं करूँगा। वे मुझे जोर से पुकारेंगे, किन्तु मैं उनको सुनने से इन्कार कर दूँगा!”
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