Beginning
अपने विनाश पर यरूशलेम का विलाप
1 एक समय वह था जब यरूशलेम में लोगों की भीड़ थी।
किन्तु आज वही नगरी उजाड़ पड़ी हुई हैं!
एक समय वह था जब देशों के मध्य यरूशलेम महान नगरी थी!
किन्तु आज वही ऐसी हो गयी है जैसी कोई विधवा होती है!
वह समय था जब नगरियों के बीच वह एक राजकुमारी सी दिखती थी।
किन्तु आज वही नगरी दासी बना दी गयी है।
2 रात में वह बुरी तरह रोती है
और उसके अश्रु गालों पर टिके हुए है!
उसके पास कोई नहीं है जो उसको ढांढस दे।
उसके मित्र देशों में कोई ऐसा नहीं है जो उसको चैन दे।
उसके सभी मित्रों ने उससे मुख फेर लिया।
उसके मित्र उसके शत्रु बन गये।
3 बहुत कष्ट सहने के बाद यहूदा बंधुआ बन गयी।
बहुत मेहनत के बाद भी यहूदा दूसरे देशों के बीच रहती है,
किन्तु उसने विश्राम नहीं पाया है।
जो लोग उसके पीछे पड़े थे,
उन्होंने उसको पकड़ लिया।
उन्होंने उसको संकरी घाटियों के बीच में पकड़ लिया।
4 सिय्योन की राहें बहुत दु:ख से भरी हैं।
वे बहुत दु:खी हैं क्योंकि अब उत्सव के दिनों के हेतु
कोई भी व्यक्ति सिय्योन पर नहीं जाता है।
सिय्योन के सारे द्वार नष्ट कर दिये गये है।
सिय्योन के सब याजक दहाड़ें मारते हैं।
सिय्योन की सभी युवा स्त्रियाँ उससे छीन ली गयी हैं
और यह सब कुछ सिय्योन का गहरा दु:ख है।
5 यरूशलेम के शत्रु विजयी हैं।
उसके शत्रु सफल हो गये हैं,
ये सब इसलिये हो गया क्योंकि यहोवा ने उसको दण्ड दिया।
उसने यरूशलेम के अनगिनत पापों के लिये उसे दण्ड दिया।
उसकी संताने उसे छोड़ गयी।
वे उनके शत्रुओं के बन्धन में पड़ गये।
6 सिय्योन की पुत्री की सुंदरता जाती रही है।
उसकी राजकन्याएं दीन हरिणी सी हुई।
वे वैसी हरिणी थीं जिनके पास चरने को चरागाह नहीं होती।
बिना किसी शक्ति के वे इधर—उधर भागती हैं।
वे ऐसे उन व्यक्तियों से बचती इधर—उधर फिरती हैं जो उनके पीछे पड़े हैं।
7 यरूशलेम बीती बात सोचा करती है,
उन दिनों की बातें जब उस पर प्रहार हुआ था और वह बेघर—बार हुई थी।
उसे बीते दिनों के सुख याद आते थे।
वे पुराने दिनों में जो अच्छी वस्तुएं उसके पास थीं, उसे याद आती थीं।
वह ऐसे उस समय को याद करती है
जब उसके लोग शत्रुओं के द्वारा बंदी किये गये।
वह ऐसे उस समय को याद करती है
जब उसे सहारा देने को कोई भी व्यक्ति नहीं था।
जब शत्रु उसे देखते थे, वे उसकी हंसी उड़ाते थे।
वे उसकी हंसी उड़ाते थे क्योंकि वह उजड़ चुकी थी।
8 यरूशलेम ने गहन पाप किये थे।
उसने पाप किये थे कि जिससे वह ऐसी वस्तु हो गई
कि जिस पर लोग अपना सिर नचाते थे।
वे सभी लोग उसको जो मान देते थे,
अब उससे घृणा करने लगे।
वे उससे घृणा करने लगे क्योंकि उन्होंने उसे नंगा देख लिया है।
यरूशलेम दहाड़े मारती है
और वह मुख फेर लेती है।
9 यरूशलेम के वस्त्र गंदे थे।
उसने नहीं सोचा था कि उसके साथ क्या कुछ घटेगा।
उसका पतन विचित्र था, उसके पास कोई नहीं था जो उसको शांति देता।
वह कहा करती है, “हे यहोवा, देख मैं कितनी दु:खी हूँ!
देख मेरा शत्रु कैसा सोच रहा है कि वह कितना महान है!”
10 शत्रु ने हाथ बढ़ाया और उसकी सब उत्तर वस्तु लूट लीं।
दर असल उसने वे पराये देश उसके पवित्र स्थान में भीतर प्रवेश करते हुये देखे।
हे यहोवा, यह आज्ञा तूने ही दी थी कि वे लोग तेरी सभा में प्रवेश नहीं करेंगे!
11 यरूशलेम के सभी लोग कराह रहे हैं, उसके सभी लोग खाने की खोज में है।
वे खाना जुटाने को अपने मूल्यवान वस्तुयें बेच रहे हैं।
वे ऐसा करते हैं ताकि उनका जीवन बना रहे।
यरूशलेम कहता है, “देख यहोवा, तू मुझको देख!
देख, लोग मुझको कैसे घृणा करते है।
12 मार्ग से होते हुए जब तुम सभी लोग मेरे पास से गुजरते हो तो ऐसा लगता है जैसे ध्यान नहीं देते हो।
किन्तु मुझ पर दृष्टि डालो और जरा देखो,
क्या कोई ऐसी पीड़ा है जैसी पीड़ा मुझको है
क्या ऐसा कोई दु:ख है जैसा दु:ख मुझ पर पड़ा है
क्या ऐसा कोई कष्ट है जैसे कष्ट का दण्ड यहोवा ने मुझे दिया है
उसने अपने कठिन क्रोध के दिन पर मुझको दण्डित किया है।
13 यहोवा ने ऊपर से आग को भेज दिया और वह आग मेरी हड्डियों के भीतर उतरी।
उसने मेरे पैरों के लिये एक फंदा फेंका।
उसने मुझे दूसरी दिशा में मोड़ दिया है।
उसने मुझे वीरान कर डाला है।
सारे दिन मैं रोती रहती हूँ।
14 “मेरे पाप मुझ पर जुए के समान कसे गये।
यहोवा के हाथों द्वारा मेरे पाप मुझ पर कसे गये।
यहोवा का जुआ मेरे कन्धों पर है।
यहोवा ने मुझे दुर्बल बना दिया है।
यहोवा ने मुझे उन लोगों को सौंपा जिनके सामने मैं खड़ी नहीं हो सकती।
15 “यहोवा ने मेरे सभी वीर योद्धा नकार दिये।
वे वीर योद्धा नगर के भीतर थे।
यहोवा ने मेरे विरुद्ध में फिर एक भीड़ भेजी,
वह मेरे युवा सैनिक को मरवाने उन लोगों को लाया था।
यहोवा ने मेरे अंगूर गरठ में कुचल दिये।
वह गरठ यरूशलेम की कुमारियों का होता था।
16 “इन सभी बातों को लेकर मैं चिल्लाई।
मेरे नयन जल में डूब गये।
मेरे पास कोई नहीं मुझे चैन देने।
मेरे पास कोई नहीं जो मुझे थोड़ी सी शांति दे।
मेरे संताने ऐसी बनी जैसे उजाड़ होता है।
वे ऐसे इसलिये हुआ कि शत्रु जीत गया था।”
17 सिय्योन अपने हाथ फैलाये हैं।
कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था जो उसको चैन देता।
यहोवा ने याकूब के शत्रुओं को आज्ञा दी थी।
यहोवा ने उसे घेर लेने की आज्ञा दी थी।
यरूशलेम ऐसी हो गई जैसी कोई अपवित्र वस्तु थी।
18 यरूशलेम कहा करती है,
“यहोवा तो न्यायशील है
क्योंकि मैंने ही उस पर कान देना नकारा था।
सो, हे सभी व्यक्तियों, सुनो!
तुम मेरा कष्ट देखो!
मेरे युवा स्त्री और पुरुष बंधुआ बना कर पकड़े गये हैं।
19 मैंने अपने प्रेमियों को पुकारा।
किन्तु वे आँखें बचा कर चले गये।
मेरे याजक और बुजुर्ग मेरे नगर में मर गये।
वे अपने लिये भोजन को तरसते थे।
वे चाहते थे कि वे जीवित रहें।
20 “हे यहोवा, मुझे देख! मैं दु:ख में पड़ी हूँ!
मेरा अंतरंग बेचैन है!
मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मेरा हृदय उलट—पलट गया हो!
मुझे मेरे मन में ऐसा लगता है क्योंकि मैं हठी रही थी!
गलियों में मेरे बच्चों को तलवार ने काट डाला है।
घरों के भीतर मौत का वास था।
21 “मेरी सुन, क्योंकि मैं कराह रही हूँ!
मेरे पास कोई नहीं है जो मुझको चैन दे,
मेरे सब शत्रुओं ने मेरी दु:खों की बात सुन ली है।
वे बहुत प्रसन्न हैं।
वे बहुत ही प्रसन्न हैं क्योंकि तूने मेरे साथ ऐसा किया।
अब उस दिन को ले आ
जिसकी तूने घोषणा की थी।
उस दिन तू मेरे शत्रुओं को वैसी ही बना दे जैसी मैं अब हूँ।
22 “मेरे शत्रुओं का बंदी तू अपने सामने आने दे।
फिर उनके साथ तू वैसा ही करेगा
जैसा मेरे पापों के बदले में तूने मेरे साथ किया।
ऐसा कर क्योंकि मैं बार बार कराह रहा।
ऐसा कर क्योंकि मेरा हृदय दुर्बल है।”
यहोवा द्वारा यरूशलेम का विनाश
2 देखें यहोवा ने सिय्योन की पुत्री को,
कैसे बादल से ढक दिया है।
उसने इस्राएल की महिमा
आकाश से धरती पर फेंक दी।
यहोवा ने उसे याद तक नहीं रखा कि
सिय्योन अपने क्रोध के दिन पर उसके चरणों की चौकी हुआ करता था।
2 यहोवा ने याकूब के भवन निगल लिये।
वह दया से रहिन होकर उसको निगल गया।
उसने यहूदा की पुत्री के गढ़ियों को भर क्रोध में मिटाया।
यहोवा ने यहूदा के राजा को गिरा दिया; और यहूदा के राज्य को धरती पर पटक दिया।
उसने राज्य को बर्बाद कर दिया।
3 यहोवा ने क्रोध में भर कर के इस्राएल की सारी शक्ति उखाड़ फेंकी।
उसने इस्राएल के ऊपर से अपने दाहिना हाथ उठा लिया है।
उसने ऐसा उस घड़ी में किया था
जब शत्रु उस पर चढ़ा था।
वह याकूब में धधकती हुई आग सा भड़की।
वह एक ऐसी आग थी जो आस—पास का सब कुछ चट कर जाती है।
4 यहोवा ने शत्रु के समान अपना धनुष खेंचा था।
उसके दाहिने हाथ में उसके तलवार का मुटठा था।
उसने यहूदा के सभी सुन्दर पुरुष मार डाले।
यहोवा ने उन्हें मार दिया मानों जैसे वे शत्रु हों।
यहोवा ने अपने क्रोध को बरसाया।
यहोवा ने सिय्योन के तम्बुओं पर उसको उडेंल दिया जैसे वह आग हो।
5 यहोवा शत्रु हो गया था
और उसने इस्राएल को निगल लिया।
उसकी सभी महलों को उसने निगल लिया
उसके सभी गढ़ियों को उसने निगल लिया था।
यहूदा की पुत्री के भीतर मरे हुए लोगों के हेतु उसने हाहाकार
और शोक मचा दिया।
6 यहोवा ने अपना ही मन्दिर नष्ट किया था
जैसे वह कोई उपवन हो,
उसने उस ठांव को नष्ट किया
जहाँ लोग उसकी उपासना करने के लिये मिला करते थे।
यहोवा ने लोगों को ऐसा बना दिया कि वे सिय्योन में विशेष सभाओं को
और विश्राम के विशेष दिनों को भूल जायें।
यहोवा ने याजक और राजा को नकार दिया।
उसने बड़े क्रोध में भर कर उन्हें नकारा।
7 यहोवा ने अपनी ही वेदी को नकार दिया
और उसने अपना उपासना का पवित्र स्थान को नकार दिया था।
यरूशलेम के महलों की दिवारें उसने शत्रु को सौंप दी।
यहोवा के मन्दिर में शत्रु शोर कर रहा था।
वे ऐसे शोर करते थे जैसे कोई छुट्टी का दिन हो।
8 उसने सिय्योन की पुत्री का परकोटा नष्ट करना सोचा है।
उसने किसी नापने की डोरी से उस पर निशान डाला था।
उसने स्वयं को विनाश से रोका नहीं।
इसलिये उसने दु:ख में भर कर के बाहरी फसीलों को
और दूसरे नगर के परकोटों को रूला दिया था।
वे दोनों ही साथ—साथ व्यर्थ हो गयीं।
9 यरूशलेम के दरवाजे टूट कर धरती पर बैठ गये।
द्वार के सलाखों को तोड़कर उसने तहस—नहस कर दिया।
उसके ही राजा और उसकी राजकुमारियाँ आज दूसरे लोगों के बीच है।
उनके लिये आज कोई शिक्षा ही नहीं रही।
यरूशलेम के नबी भी यहोवा से कोई दिव्य दर्शन नहीं पाते।
10 सिय्योन के बुजुर्ग अब धरती पर बैठते हैं।
वे धरती पर बैठते हैं और चुप रहते है।
अपने माथों पर धूल मलते हैं
और शोक वस्त्र पहनते हैं।
यरूशलेम की युवतियाँ दु:ख में
अपना माथा धरती पर नवाती हैं।
11 मेरे नयन आँसुओं से दु:ख रहे हैं!
मेरा अंतरंग व्याकुल है!
मेरे मन को ऐसा लगता है जैसे वह बाहर निकल कर धरती पर गिरा हो!
मुझको इसलिये ऐसा लगता है कि मेरे अपने लोग नष्ट हुए हैं।
सन्तानें और शिशु मूर्छित हो रहें हैं।
वे नगर के गलियों और बाजारों में मूर्छित पड़े हैं।
12 वे बच्चे बिलखते हुए अपनी माँओं से पूछते हैं, “कहाँ है माँ, कुछ खाने को और पीने को”
वे यह प्रश्न ऐसे पूछते हैं जैसे जख्मी सिपाही नगर के गलियों में गिरते प्राणों को त्यागते, वे यह प्रश्न पूछते हैं।
वे अपनी माँओं की गोद में लेटे हुए प्राणों को त्यागते हैं।
13 हे सिय्योन की पुत्री, मैं किससे तेरी तुलना करूँ?
तुझको किसके समान कहूँ?
हे सिय्योन की कुँवारी कन्या,
तुझको किससे तुलना करूँ?
तुझे कैसे ढांढस बंधाऊँ तेरा विनाश सागर सा विस्तृत है!
ऐसा कोई भी नहीं जो तेरा उपचार करें।
14 तेरे नबियों ने तेरे लिये दिव्य दर्शन लिये थे।
किन्तु वे सभी व्यर्थ झूठे सिद्ध हुए।
तेरे पापों के विरुद्ध उन्होंने उपदेश नहीं दिये।
उन्होंने बातों को सुधारने का जतन नहीं किया।
उन्होंने तेरे लिये उपदेशों का सन्देश दिया, किन्तु वे झूठे सन्देश थे।
तुझे उनसे मूर्ख बनाया गया।
15 बटोही राह से गुजरते हुए स्तब्ध होकर
तुझ पर ताली बजाते हैं।
यरूशलेम की पुत्री पर वे सीटियाँ बजाते
और माथा नचाते हैं।
वे लोग पूछते है, “क्या यही वह नगरी है जिसे लोग कहा करते थे,
‘एक सम्पूर्ण सुन्दर नगर’ तथा ‘सारे संसार का आनन्द’?”
16 तेरे सभी शत्रु तुझ पर अपना मुँह खोलते हैं।
तुझ पर सीटियाँ बजाते हैं और तुझ पर दाँत पीसते हैं।
वे कहा करते है, “हमने उनको निगल लिया!
सचमुच यही वह दिन है जिसकी हमको प्रतीक्षा थी।
आखिरकार हमने इसे घटते हुए देख लिया।”
17 यहोवा ने वैसा ही किया जैसी उसकी योजना थी।
उसने वैसा ही किया जैसा उसने करने के लिये कहा था।
बहुत—बहुत दिनों पहले जैसा उसने आदेश दिया था, वैसा ही कर दिया।
उसने बर्बाद किया, उसको दया तक नहीं आयी।
उसने तेरे शत्रुओं को प्रसन्न किया कि तेरे साथ ऐसा घटा।
उसने तेरे शत्रुओं की शक्ति बढ़ा दी।
18 हे यरूशलेम की पुत्री परकोटे, तू अपने मन से यहोवा की टेर लगा!
आँसुओं को नदी सा बहने दे!
रात—दिन अपने आँसुओं को गिरने दे!
तू उनको रोक मत!
तू अपनी आँखों को थमने मत दे!
19 जाग उठ! रात में विलाप कर!
रात के हर पहर के शुरु में विलाप कर!
आँसुओ में अपना मन बाहर निकाल दे जैसा वह पानी हो!
अपना मन यहोवा के सामने निकाल रख!
यहोवा की प्रार्थना में अपने हाथ ऊपर उठा।
उससे अपनी संतानों का जीवन माँग।
उससे तू उन सन्तानों का जीवन माँग ले जो भूख से बेहोश हो रहें है।
वे नगर के हर कूँचे गली में बेहोश पड़ी है।
20 हे यहोवा, मुझ पर दृष्टि कर!
देख कौन है वह जिसके साथ तूने ऐसा किया!
तू मुझको यह प्रश्न पूछने दे: क्या माँ उन बच्चों को खा जाये जिनको वह जनती है?
क्या माँ उन बच्चों को खा जाये जिनको वे पोसती रही है?
क्या यहोवा के मन्दिर में याजक और नबियों के प्राणों को लिया जाये?
21 नवयुवक और वृद्ध,
नगर की गलियों में धरती पर पड़े रहें।
मेरी युवा स्त्रियाँ, पुरुष और युवक
तलवार के धार उतारे गये थे।
हे यहोवा, तूने अपने क्रोध के दिन पर उनका वध किया है!
तूने उन्हें बिना किसी करुणा के मारा है!
22 तूने मुझ पर घिर आने को चारों ओर से आतंक बुलाया।
आतंक को तूने ऐसे बुलाया जैसे पर्व के दिन पर बुलाया हो।
उस दिन जब यहोवा ने क्रोध किया था ऐसा कोई व्यक्ति नहीं था जो बचकर भाग पाया हो अथवा उससे निकल पाया हो।
जिनको मैंने बढ़ाया था और मैंने पाला—पोसा, उनको मेरे शत्रुओं ने मार डाला है।
एक व्यक्ति द्वारा अपनी यातनाओं पर विचार
3 मैं एक ऐसा व्यक्ति हूँ जिसने बहुतेरी यातनाएँ भोगी है;
यहोवा के क्रोध के तले मैंने बहुतेरी दण्ड यातनाएँ भोगी है!
2 यहोवा मुझको लेकर के चला
और वह मुझे अन्धेरे के भीतर लाया न कि प्रकाश में।
3 यहोवा ने अपना हाथ मेरे विरोध में कर दिया।
ऐसा उसने बारम्बार सारे दिन किया।
4 उसने मेरा मांस, मेरा चर्म नष्ट कर दिया।
उसने मेरी हड्डियों को तोड़ दिया।
5 यहोवा ने मेरे विरोध में, कड़वाहट और आपदा फैलायी है।
उसने मेरी चारों तरफ कड़वाहट और विपत्ति फैला दी।
6 उसने मुझे अन्धेरे में बिठा दिया था।
उसने मुझको उस व्यक्ति सा बना दिया था जो कोई बहुत दिनों पहले मर चुका हो।
7 यहोवा ने मुझको भीतर बंद किया, इससे मैं बाहर आ न सका।
उसने मुझ पर भारी जंजीरें घेरी थीं।
8 यहाँ तक कि जब मैं चिल्लाकर दुहाई देता हूँ,
यहोवा मेरी विनती को नहीं सुनता है।
9 उसने पत्थर से मेरी राह को मूंद दिया है।
उसने मेरी राह को विषम कर दिया है।
10 यहोवा उस भालू सा हुआ जो मुझ पर आक्रमण करने को तत्पर है।
वह उस सिंह सा हुआ हैं जो किसी ओट में छुपा हुआ हैं।
11 यहोवा ने मुझे मेरी राह से हटा दिया।
उसने मेरी धज्जियाँ उड़ा दीं।
उसने मुझे बर्बाद कर दिया है।
12 उसने अपना धनुष तैयार किया।
उसने मुझको अपने बाणों का निशाना बना दिया था।
13 मेरे पेट में बाण मार दिया।
मुझ पर अपने बाणों से प्रहार किया था।
14 मैं अपने लोगों के बीच हंसी का पात्र बन गया।
वे दिन भर मेरे गीत गा—गा कर मेरा मजाक बनाते है।
15 यहोवा ने मुझे कड़वी बातों से भर दिया कि मैं उनको पी जाऊँ।
उसने मुझको कड़वे पेयों से भरा था।
16 उसने मेरे दांत पथरीली धरती पर गडा दिये।
उसने मुझको मिट्टी में मिला दिया।
17 मेरा विचार था कि मुझको शांति कभी भी नहीं मिलेगा।
अच्छी भली बातों को मैं तो भूल गया था।
18 स्वयं अपने आप से मैं कहने लगा था, “मुझे तो बस अब और आस नहीं है कि
यहोवा कभी मुझे सहारा देगा।”
19 हे यहोवा, तू मेरे दुखिया पन याद कर,
और यह कि कैसा मेरा घर नहीं रहा।
याद कर उस कड़वे पेय को और उस जहर को जो तूने मुझे पीने को दिया था।
20 मुझको तो मेरी सारी यातनाएँ याद हैं
और मैं बहुत ही दु:खी हूँ।
21 किन्तु उसी समय जब मैं सोचता हूँ, तो मुझको आशा होने लगती हैं।
मैं ऐसा सोचा करता हूँ:
22 यहोवा के प्रेम और करुणा का तो अत कभी नहीं होता।
यहोवा की कृपाएं कभी समाप्त नहीं होती।
23 हर सुबह वे नये हो जाते हैं!
हे यहोवा, तेरी सच्चाई महान है!
24 मैं अपने से कहा करता हूँ, “यहोवा मेरे हिस्से में है।
इसी कारण से मैं आशा रखूँगा।”
25 यहोवा उनके लिये उत्तम है जो उसकी बाट जोहते हैं।
यहोवा उनके लिये उत्तम है जो उसकी खोज में रहा करते हैं।
26 यह उत्तम है कि कोई व्यक्ति चुपचाप यहोवा की प्रतिक्षा करे कि
वह उसकी रक्षा करेगा।
27 यह उत्तम है कि कोई व्यक्ति यहोवा के जुए को धारण करे,
उस समय से ही जब वह युवक हो।
28 व्यक्ति को चाहिये कि वह अकेला चुप बैठे ही रहे
जब यहोवा अपने जुए को उस पर धरता है।
29 उस व्यक्ति को चाहिये कि यहोवा के सामने वह दण्डवत प्रणाण करे।
सम्भव है कि कोई आस बची हो।
30 उस व्यक्ति को चाहिये कि वह आपना गाल कर दे, उस व्यक्ति के सामने जो उस पर प्रहार करता हो।
उस व्यक्ति को चाहिये कि वह अपमान झेलने को तत्पर रहे।
31 उस व्यक्ति को चाहिये वह याद रखे कि यहोवा किसी को भी
सदा—सदा के लिये नहीं बिसराता।
32 यहोवा दण्ड देते हुए भी अपनी कृपा बनाये रखता है।
वह अपने प्रेम और दया के कारण अपनी कृपा रखता है।
33 यहोवा कभी भी नहीं चाहता कि लोगों को दण्ड दे।
उसे नहीं भाता कि लोगों को दु:खी करे।
34 यहोवा को यह बातें नहीं भाती है:
उसको नहीं भाता कि कोई व्यक्ति अपने पैरों के तले धरती के सभी बंदियों को कुचल डाले।
35 उसको नहीं भाता है कि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को छले।
कुछ लोग उसके मुकदमें में परम प्रधान परमेश्वर के सामने ही ऐसा किया करते है।
36 उसको नहीं भाता कि कोई व्यक्ति अदालत में किसी से छल करे।
यहोवा को इन में से कोई भी बात नहीं भाती है।
© 1995, 2010 Bible League International