Beginning
यिर्मयाह एक खेत खरीदता है
32 सिदकिय्याह के यहूदा में राज्य काल के दसवें वर्ष, यिर्मयाह को यहोवा का यह सन्देश मिला। सिदकिय्याह का दसवाँ वर्ष नबूकदनेस्सर का अट्ठारहवाँ वर्ष था। 2 उस समय बाबुल के राजा की सेना यरूशलेम नगर को घेरे हुए थी और यिर्मयाह रक्षक प्रांगण में बन्दी था। यह प्रागंण यहूदा के राजा के महल में था। 3 यहूदा के राजा सिदकिय्याह ने उस स्थान पर यिर्मयाह को बन्दी बना रखा था। सिदकिय्याह यिर्मयाह की भविष्यवाणियों को पसन्द नहीं करता था। यिर्मयाह ने कहा, “यहोवा यह कहता है: ‘मैं यरूशलेम को शीघ्र ही बाबुल के राजा को दे दूँगा। नबूकदनेस्सर इस नगर पर अधिकार कर लेगा। 4 यहूदा का राजा सिदकिय्याह कसदियों की सेना से बचकर निकल नहीं पाएगा। किन्तु वह निश्चय ही बाबुल के राजा को दिया जायेगा और सिदकिय्याह बाबुल के राजा से आमने—सामने बातें करेगा। सिदकिय्याह उसे अपनी आँखों से देखेगा। 5 बाबुल का राजा सिदकिय्याह को बाबुल ले जाएगा। सिदकिय्याह तब तक वहाँ ठहरेगा जब तक मैं उसे दण्ड नहीं दे लेता।’ यह सन्देश यहोवा का है। ‘यदि तुम कसदियों की सेना से लड़ोगे, तुम्हें सफलता नहीं मिलेगी।’”
6 जिस समय यिर्मयाह बन्दी था, उसने कहा, “यहोवा का सन्देश मुझे मिला। वह सन्देश यह था: 7 ‘यिर्मयाह, तुम्हारा चचेरा भाई हननेल शीघ्र ही तुम्हारे पास आएगा। वह तुम्हारे चाचा शल्लूम का पुत्र है।’ हननेल तुमसे यह कहेगा, ‘यिर्मयाह, अनातोत नगर के पास मेरा खेत खरीद लो। इसे खरीद लो क्योंकि तुम मेरे सबसे समीपी रिश्तेदार हो। उस खेत को खरीदना तुम्हारा अधिकार तथा तुम्हारा उत्तरदायित्व है।’”
8 “तब यह वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने कहा था। मेरा चचेरा भाई रक्षक प्रांगण में मेरे पास आया। हननेल ने मुझसे कहा, ‘यिर्मयाह, बिन्यामीन परिवार समूह के प्रदेश में अनातोत नगर के पास मेरा खेत खरीद लो। उस भूमि को तुम अपने लिये खरीदो क्योंकि यह तुम्हारा अधिकार है कि तुम इसे खरीदो और अपना बनाओ।’”
अत: मुझे ज्ञात हुआ कि यह यहोवा का सन्देश है। 9 मैंने अपने चचेरे भाई हननेल से अनातोत में भूमि खरीद ली। मैंने उसके लिये सत्तरह शेकेल चाँदी तौली। 10 मैंने पट्टे पर हस्ताक्षर किये और मुझे पट्टे की एक प्रति मुहरबन्द मिली और जो मैंने किया था उसके साक्षी के रूप से कुछ लोगों को बुला लिया तथा मैंने तराजू पर चाँदी तौली। 11 तब मैंने पट्टे की मुहरबन्द प्रति और मुहर रहित प्रति प्राप्त की 12 और मैंने उसे बारूक को दिया। बारुक नोरिय्याह का पुत्र था। नोरिय्याह महसेयाह का पुत्र था। मुहरबन्द पट्टे में मेरी खरीद की सभी शर्ते और सीमायें थीं। मैंने अपने चचेरे भाई हननेल और अन्य साक्षियों के सामने वह पट्टा बारुक को दिया। उन साक्षियों ने भी उस पट्टे पर हस्ताक्षर किये। उस समय यहूदा के बहुत से व्यक्ति प्रांगण में बैठे थे जिन्होंने मुझे बारुक को पट्टा देते देखा।
13 सभी लोगों को साक्षी कर मैंने बारुक से कहा, 14 “इस्राएल का परमेश्वर सर्वशक्तिमान यहोवा यह कहता है, ‘मुहरबन्द और मुहर रहित दोनों पट्टे की प्रतियों को लो और इसे मिट्टी के घड़े में रख दो। यह तुम इसलिये करो कि पट्टा बहुत समय तक रहे।’ 15 इस्राएल का परमेश्वर सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, ‘भविष्य में मेरे लोग एक बार फिर घर, खेत और अंगूर के बाग इस्राएल देश में खरीदेंगे।’”
16 नेरिय्याह के पुत्र बारुक को पट्टा देने के बाद मैंने यहोवा से प्रार्थना की। मैंने कहा:
17 “परमेश्वर यहोवा, तूने पृथ्वी और आकाश बनाया। तूने उन्हें अपनी महान शक्ति से बनाया। तेरे लिये कुछ भी करना अति कठिन नहीं है। 18 यहोवा, तू हज़ारों व्यक्तियों का विश्वासपात्र और उन पर दयालु है। किन्तु तू व्यक्तियों को उनके पूर्वजों के पापों के लिए भी दण्ड देता है। महान और शक्तिशाली परमेश्वर, तेरा नाम सर्वशक्तिमान यहोवा है। 19 हे यहोवा, तू महान कार्यों की योजना बनाता और उन्हें करता है। तू वह सब देखता है जिन्हें लोग करते हैं और उन्हें पुरस्कार देता है जो अच्छे काम करते हैं तथा उन्हें दण्ड देता है जो बुरे काम करते हैं, तू उन्हें वह देता है जिनके वे पात्र हैं। 20 हे यहोवा, तूने मिस्र देश में अत्यन्त प्रभावशाली चमत्कार किया। तूने आज तक भी प्रभावशाली चमत्कार किया है। तूने ये चमत्कार इस्राएल में दिखाया और तूने इन्हें वहाँ भी दिखाये जहाँ कहीं मनुष्य रहते हैं। तू इन चमत्कारों के लिये प्रसिद्ध है। 21 हे यहोवा, तूने प्रभावशाली चमत्कारों का प्रयोग किया और अपने लोग इस्राएल को मिस्र से बाहर ले आया। तूने उन चमत्कारों को करने के लिये अपने शक्तिशाली हाथों का उपयोग किया। तेरी शक्ति आश्चर्यजनक रही!
22 “हे यहोवा, तूने यह धरती इस्राएल के लोगों को दी। यह वही धरती है जिसे तूने उनके पूर्वजों को देने का वचन बहुत पहले दिया था। यह बहुत अच्छी धरती है। यह बहुत सी अच्छी चीज़ों वाली अच्छी धरती है। 23 इस्राएल के लोग इस धरती में आये और उन्होंने इसे अपना बना लिया। किन्तु उन लोगों ने तेरी आज्ञा नहीं मानी। वे तेरे उपदेशों के अनुसार न चले। उन्होंने वह नहीं किया जिसके लिये तूने आदेश दिया। अत: तूने इस्राएल के लोगों पर वे भयंकर विपत्तियाँ ढाई।
24 “अब शत्रु ने नगर पर घेरा डाला है। वे ढाल बना रहे हैं जिससे वे यरूशलेम की चहारदीवारी पर चढ़ सकें और उस पर अधिकार कर लें। अपनी तलवारों का उपयोग करके तथा भूख और भयंकर बीमारी के कारण बाबुल की सेना यरूशलेम नगर को हरायेगी। बाबुल की सेना अब नगर पर आक्रमण कर रही है। यहोवा तूने कहा था कि यह होगा, और अब तू देखता है कि यह घटित हो रहा है।
25 “मेरे स्वामी यहोवा, वे सभी बुरी घटनायें घटित हो रही हैं। किन्तु तू अब मुझसे कह रहा है, ‘यिर्मयाह, चाँदी से खेत खरीदो और खरीद की साक्षी के लिये कुछ लोगों को चुनो।’ तू यह उस समय कह रहा है जब बाबुल की सेना नगर पर अधिकार करने को तैयार है। मैं अपने धन को उस तरह बरबाद क्यों करूँ?”
26 तब यहोवा का सन्देश यिर्मयाह को मिला: 27 “यिर्मयाह, मैं यहोवा हूँ। मैं पृथ्वी के हर एक व्यक्ति का परमेश्वर हूँ। यिर्मयाह, तुम जानते हो कि मेरे लिये कुछ भी असंभव नहीं है।” 28 यहोवा ने यह भी कहा, “मैं शीघ्र ही यरूशलेम नगर को बाबुल की सेना और बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर को दे दूँगा। वह सेना नगर पर अधिकार कर लेगी। 29 बाबुल की सेना पहले से ही यरूशलेम नगर पर आक्रमण कर रही है। वे शीघ्र ही नगर में प्रवेश करेंगे और आग लगा देंगे। वे इस नगर को जला कर राख कर देंगे। इस नगर में ऐसे मकान हैं जिनमें यरूशलेम के लोगों ने असत्य देवता बाल को छतों पर बलि भेंट दे कर मुझे क्रोधित किया है और लोगों ने अन्य देवमूर्तियों को मदिरा भेंट चढ़ाई। बाबुल की सेना उन मकानों को जला देगी। 30 मैंने इस्राएल और यहूदा के लोगों पर नजर रखी है। वे जो कुछ करते हैं, बुरा है। वे तब से बुरा कर रहे हैं जब से वे युवा थे। इस्राएल के लोगों ने मुझे बहुत क्रोधित किया। उन्होंने मुझे क्रोधित किया क्योंकि उन्होंने उन देवमूर्तियों की पूजा की जिन्हें उन्होंने अपने हाथों से बनाया।” यह सन्देश यहोवा का है। 31 “जब से यरूशलेम नगर बसा तब से अब तक इस नगर के लोगों ने मुझे क्रोधित किया है। इस नगर ने मुझे इतना क्रोधित किया है कि मुझे इसे अपनी नजर के सामने से दूर कर देना चाहिये। 32 यहूदा और इस्राएल के लोगों ने जो बुरा किया है, उसके लिये, मैं यरूशलेम को नष्ट करुँगा। जनसाधारण उनके राजा, प्रमुख, उनके याजक और नबी यहूदा के पुरुष और यरूशलेम के लोग, सभी ने मुझे क्रोधित किया है।
33 “उन लोगों को सहायता के लिये मेरे पास आना चाहिये था। लेकिन उन्होंने मुझसे अपना मुँह मोड़ा। मैंने उन लोगों को बार—बार शिक्षा देनी चाही किन्तु उन्होंने मेरी एक न सुनी। मैंने उन्हें सुधारना चाहा किन्तु उन्होंने अनसुनी की। 34 उन लोगों ने अपनी देवमूर्तियाँ बनाई हैं और मैं उन देवमूर्तियों से घृणा करता हूँ। वे उन देवमूर्तियों को उस मन्दिर में रखते हैं जो मेरे नाम पर है। इस तरह उन्होंने मेरे मन्दिर को अपवित्र किया है।
35 “बेनहिन्नोम की घाटी में उन लोगों ने असत्य देवता बाल के लिये उच्च स्थान बनाए। उन्होंने वे पूजा स्थान अपने पुत्र—पुत्रियों को शिशु बलिभेंट के रूप में जला सकने के लिये बनाए। मैंने उनको कभी ऐसे भयानक काम करने के लिये आदेश नहीं दिये। मैंने यह कभी सोचा तक नहीं कि यहूदा के लोग ऐसा भयंकर पाप करेंगे।
36 “तुम सभी लोग कहते हो, ‘बाबुल का राजा यरूशलेम पर अधिकार कर लेगा। वह तलवार, भुखमरी और भयंकर बीमारी का उपयोग इस नगर को पराजित करने के लिये करेगा।’ किन्तु यहोवा इस्राएल के लोगों का परमेश्वर कहता है, 37 ‘मैंने इस्राएल और यहूदा के लोगों को अपना देश छोड़ने को विवश किया है। मैं उन लोगों पर बहुत क्रोधित था। किन्तु मैं उन्हें इस स्थान पर वापस लाऊँगा। मैं उन्हें उन देशों से इकट्ठा करुँगा जिनमें जाने के लिये मैंने उन्हें विवश किया। मैं उन्हें इस देश में वापस लाऊँगा। मैं उन्हें शान्तिपूर्वक और सुरक्षित रहने दूँगा। 38 इस्राएल और यहूदा के लोग मेरे अपने लोग होंगे और मैं उनका परमेश्वर होऊँगा। 39 वे एक उद्देश्य रखेंगे सच ही, जीवन भर मेरी उपासना करना चाहेंगे। उनके लिये शुभ होगा और उनके बाद उनके परिवारों के लिये भी शुभ होगा।
40 “‘मैं इस्राएल और यहूदा के लोगों के साथ एक वाचा करूँगा। यह वाचा सदैव के लिये रहेगी। इस वाचा के अनुसार मैं लोगों से कभी दूर नहीं जाऊँगा। मैं उनके लिये सदैव अच्छा रहूँगा। मैं उन्हें, अपना आदर करने के लिये इच्छुक बनाऊँगा। तब वे मुझसे कभी दूर नहीं हटेंगे। 41 वे मुझे प्रसन्न करेंगे। मैं उनका भला करने में आनन्दित होऊँगा और मैं, निश्चय ही, उन्हें इस धरती में बसाऊँगा और उन्हें बढ़ाऊँगा। यह मैं अपने पूरे हृदय और आत्मा से करूँगा।’”
42 यहोवा जो कहता है, वह यह है, “मैंने इस्राएल और यहूदा के लोगों पर यह बड़ी विपत्ति ढाई है। इसी तरह मैं उन्हें अच्छी चीज़ें दूँगा। मैं उन्हें अच्छी चीज़ें करने का वचन देता हूँ। 43 तुम लोग यह कहते हो, ‘यह देश सूनी मरूभूमि है। यहाँ कोई व्यक्ति और कोई जानवर नहीं है। बाबुल की सेना ने इस देश को पराजित किया।’ किन्तु भविष्य में लोग फिर इस देश में भूमि खरीदेंगे। वे अपनी वाचाओं पर हस्ताक्षर के साक्षी होंगे। लोग उस प्रदेश में फिर खेत खरीदेंगे जिसमें बिन्यामीन परिवार समूह के लोग रहते हैं। 44 लोग अपने धन का उपयोग करेंगे और खेत खरीदेंगे। वे यरूशलेम क्षेत्र के चारों ओर खेत खरीदेंगे। वे यहूदा प्रदेश के नगरों, पहाड़ी प्रदेश, पश्चिमी पर्वत चरण, और दक्षिणी मरुभूमि के क्षेत्र में खेत खरीदेंगे। यह होगा, क्योंकि मैं तुम्हारे लोगों को वापस लाऊँगा।” यह सन्देश यहोवा का है।
परमेश्वर की प्रतिज्ञा
33 यिर्मयाह को दूसरी बार यहोवा का सन्देश मिला। यिर्मयाह अभी भी रक्षक प्रांगण में ताले के अन्दर बन्दी था। 2 “यहोवा ने पृथ्वी को बनाया और उसकी वह रक्षा करता है। उसका नाम यहोवा है। यहोवा कहता है, 3 ‘यहूदा, मुझसे प्रार्थना करो और मैं उसे पूरा करूँगा। मैं तुम्हें महत्वपूर्ण रहस्य बताऊँगा। तुमने उन्हें कभी पहले नहीं सुना है।’ 4 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा है। यहोवा यरूशलेम के मकानों और यहूदा के राजाओं के महलों के बारे में यह कहता है। ‘शत्रु उन मकानों को ध्वस्त कर देगा। शत्रु नगर की चहारदीवारियों के ऊपर तक ढाल बनायेगा। शत्रु तलवार का उपयोग करेगा और इन नगरों के लोगों के साथ युद्ध करेगा।’”
5 “‘यरूशलेम के लोगों ने बहुत बुरे काम किये हैं। मैं उन लोगों पर क्रोधित हूँ। मैं उनके विरुद्ध हो गया हूँ। इसलिये वहाँ मैं असंख्य लोगों को मार डालूँगा। बाबुल की सेना यरूशलेम के विरुद्ध लड़ने के लिये आएगी। यरूशलेम के घरों में असंख्य शव होंगे।
6 “‘किन्तु उसके बाद मैं उस नगर में लोगों को स्वस्थ बनाऊँगा। मैं उन लोगों को शान्ति और सुरक्षा का आनन्द लेने दूँगा। 7 मैं इस्राएल और यहूदा में फिर से सब कुछ अच्छा घटित होने दूँगा। मैं उन लोगों को अतीत की तरह शक्तिशाली बनाऊँगा। 8 उन्होंने मेरे विरुद्ध पाप किये, किन्तु मैं उस पाप को धो दूँगा। वे मेरे विरुद्ध लड़े, किन्तु मैं उन्हें क्षमा कर दूँगा। 9 तब यरूशलेम आश्चर्यचकित करने वाला स्थान हो जायेगा। लोग सुखी होंगे और अन्य राष्ट्रों के लोग इसकी प्रशंसा करेंगे। यह उस समय होगा जब लोग यह सुनेंगे कि वहाँ सब अच्छा हो रहा है। वे उन अच्छे कामों को सुनेंगे जिन्हें मैं यरूशलेम के लिये कर रहा हूँ।’
10 “तुम लोग यह कह रहे हो, ‘हमारा देश सूनी मरुभूमि है। वहाँ कोई व्यक्ति या कोई जानवर जीवित नहीं रहे।’ अब यरूशलेम की सड़कों और यहूदा के नगरों में निर्जन शान्ति है। किन्तु वहाँ शीघ्र ही चहल—पहल होगी। 11 वहाँ सुख और आनन्द की किलोलें होंगी। वहाँ वर—वधु की उमंग भरी चुहल होगी। वहाँ यहोवा के मन्दिर में अपनी भेंट लाने वाले की मधुर वाणी होगी। वे लोग कहेंगे, सर्वशक्तिमान यहोवा की स्तुति करो! यहोवा दयालु है! यहोवा की दया सदा बनी रहती है! लोग ये बातें कहेंगे क्योंकि मैं फिर यहूदा के लिये अच्छे काम करुँगा। यह वैसा ही होगा जैसा आरम्भ में था।” ये बातें यहोवा ने कही।
12 सर्वशक्तिमान यहोवा कहता है, “यह स्थान अब सूना है। यहाँ कोई लोग या जानवर नहीं रह रहें। किन्तु अब यहूदा के सभी नगरों में लोग रहेंगे। वहाँ गडरिये होंगे और चरागाहें होंगी जहाँ वे अपनी रेवड़ों को आराम करने देंगे। 13 गडरिये अपनी भेड़ों को तब गिनते हैं जब भेड़ें उनके आगे चलती हैं। लोग अपनी भेड़ों को पूरे देश में चारों ओर पहाड़ी प्रदेश, पश्चिमी पर्वत चरण, नेगव और यहूदा के सभी नगरों में गिनेंगे।”
अच्छी शाखा
14 यह सन्देश यहोवा का है: “मैंने इस्राएल और यहूदा के लोगों को विशेष वचन दिया है। वह समय आ रहा है जब मैं वह करूँगा जिसे करने का वचन मैंने दिया है। 15 उस समय मैं दाऊद के परिवार से एक अच्छी शाखा उत्पन्न करुँगा। वह अच्छी शाखा वह सब करेगी जो देश के लिये अच्छा और उचित होगा। 16 इस शाखा के समय यहूदा के लोगों की रक्षा हो जाएगी। लोग यरूशलेम में सुरक्षित रहेंगे। उस शाखा का नाम ‘यहोवा हमारी धार्मिकता (विजय) हैं।’”
17 यहोवा कहता है, “दाऊद के परिवार का कोई न कोई व्यक्ति सदैव सिंहासन पर बैठेगा और इस्राएल के परिवार पर शासन करेगा 18 और लेवी के परिवार से याजक सदैव होंगे। वे याजक मेरे सामने सदा रहेंगे और मुझे होमबलि, अन्नबलि और बलिभेंट करेंगे।”
19 यहोवा का यह सन्देश यिर्मयाह को मिला। 20 यहोवा कहता है, “मैंने रात और दिन से वाचा की है। मैंने वाचा की कि वह सदैव रहेगी। तुम उस वाचा को बदल नहीं सकते। दिन और रात सदा ठीक समय पर आएंगे। यदि तुम उस वाचा को बदल सकते हो 21 तो तुम दाऊद और लेवी के साथ की गई मेरी वाचा को भी बदल सकते हो। तब दाऊद और लेवी के परिवार के वंशज राजा और पुरोहित नहीं हो सकेंगे। 22 किन्तु मैं अपने सेवक दाऊद को और लेवी के परिवार समूह को अनेक वंशज दूँगा। वे उतने होंगे जितने आकाश में तारे हैं, और आकाश के तारों को कोई गिन नहीं सकता और वे इतने होंगे जितने सागर तट पर बालू के कण होते हैं और उन बालू के कणों को कोई गिन नहीं सकता।”
23 यहोवा का यह सन्देश यिर्मयाह ने प्राप्त किया: 24 “यिर्मयाह, क्या तुमने सुना है कि लोग क्या कह रहे हैं वे लोग कह रहे हैं: ‘यहोवा ने इस्राएल और यहूदा के दो परिवारों को अस्वीकार कर दिया है। यहोवा ने उन लोगों को चुना था, किन्तु अब वह उन्हें राष्ट्र के रूप में भी स्वीकार नहीं करता।’”
25 यहोवा कहता है, “यदि मेरी वाचा दिन और रात के साथ बनी नहीं रहती, और यदि मैं आकाश और पृथ्वी के लिये नियम नहीं बनाता तभी संभव है कि मैं उन लोगों को छोड़ूँ। 26 तभी यह संभव होगा कि मैं याकूब के वंशजों से दूर हट जाऊँ और तभी यह हो सकता है कि मैं दाऊद के वंशजों को इब्राहीम, इसहाक और याकूब के वंशजों पर शासन करने न दूँ। किन्तु दाऊद मेरा सेवक है और मैं उन लोगों पर दया करूँगा और मैं फिर उन लोगों को उनकी धरती पर वापस लौटा लाऊँगा।”
यहूदा के राजा सिदकिय्याह को चेतावनी
34 यहोवा का यह सन्देश यिर्मयाह को मिला। यह सन्देश उस समय मिला जब बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर यरूशलेम और उसके चारों ओर के सभी नगरों से युद्ध कर रहा था। नबूकदनेस्सर अपने साथ अपनी सारी सेना और शासित राज्यों तथा साम्राज्य के लोगों को मिलाये हुए था।
2 सन्देश यह था: “यहोवा इस्राएल के लोगों का परमेश्वर जो कहता है, वह यह है: यिर्मयाह, यहूदा के राजा सिदकिय्याह के पास जाओ और उसे यह सन्देश दो: ‘सिदकिय्याह, यहोवा जो कहता है, वह यह है: मैं यरूशलेम नगर को बाबुल के राजा को शीघ्र ही दे दूँगा और वह उसे जला डालेगा। 3 सिदकिय्याह, तुम बाबुल के राजा से बचकर निकल नहीं पाओगे। तुम निश्चय ही पकड़े जाओगे और उसे दे दिये जाओगे। तुम बाबुल के राजा को अपनी आँखों से देखोगे। वह तुमसे आमने—सामने बातें करेगा और तुम बाबुल जाओगे। 4 किन्तु यहूदा के राजा सिदकिय्याह यहोवा के दिये वचन को सुनो। यहोवा तुम्हारे बारे में जो कहता है, वह यह है: तुम तलवार से नहीं मारे जाओगे। 5 तुम शान्तिपूर्वक मरोगे। तुम्हारे राजा होने से पहले जो राजा राज्य करते थे तुम्हारे उन पूर्वजों के सम्मान के लिये लोगों ने अग्नि तैयार की। उसी प्रकार तुम्हारे सम्मान के लिये लोग अग्नि बनायेंगे। वे तुम्हारे लिये रोएंगे। वे शोक में डूबे हुए कहेंगे, “हे स्वामी,” मैं स्वयं तुम्हें यह वचन देता हूँ।’” यह सन्देश यहोवा का है।
6 अत: यिर्मयाह ने यहोवा का सन्देश यरूशलेम में सिदकिय्याह को दिया। 7 यह उस समय हुआ जब बाबुल के राजा की सेना यरूशलेम के विरुद्ध लड़ रही थी। बाबुल की सेना यहूदा के उन नगरों के विरुद्ध भी लड़ रही थी जिन पर अधिकार नहीं हो सका था। वे लाकीश और अजेका नगर थे। वे ही केवल किलाबन्द नगर थे जो यहूदा प्रदेश में बचे थे।
लोगों ने वाचाओं में से एक को तोड़ा
8 सिदकिय्याह ने यरूशलेम के सभी निवासियों से यह वाचा की थी कि मैं सभी यहूदी दासों को मुक्त कर दूँगा। जब सिदकिय्याह ने वह वाचा कर ली, उसके बाद यिर्मयाह को यहोवा का सन्देश मिला। 9 हर व्यक्ति से आशा की जाती है कि वह अपने यहूदी दासों को स्वतन्त्र करे। सभी यहूदी दास—दासी स्वतन्त्र किये जाने थे। यहूदा के परिवार समूह के किसी भी व्यक्ति के दास रखने की संभावना किसी भी व्यक्ति से नहीं की जा सकती थी। 10 अत: सभी प्रमुखों और यहूदा के सभी लोगों ने इस वाचा को स्वीकार किया था। हर एक व्यक्ति अपने दास—दासियों को स्वतन्त्र कर देगा और उन्हें और अधिक समय तक दास से रूप में नहीं रखेगा। हर एक व्यक्ति सहमत था और इस प्रकार सभी दास स्वतन्त्र कर दिये गए। 11 किन्तु उसके बाद उन लोगों ने जिनके पास दास थे, अपने निर्णय को बदला दिया। अत: उन्होंने स्वतन्त्र किये गये लोगों को फिर पकड़ लिया और उन्हें दास बनाया।
12 तब यहोवा का सन्देश यिर्मयाह को मिला: 13 “यिर्मयाह, यहोवा इस्राएल के लोगों का परमेश्वर जो कहता है वह यह है: ‘मैं तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र से बाहर लाया जहाँ वे दास थे। जब मैंने ऐसा किया तब मैंने उनके एक वाचा की। 14 मैंने तुम्हारे पूर्वजों से कहा, “हर एक सात वर्ष के अन्त में प्रत्येक व्यक्ति को अपने यहूदी दासों को स्वतन्त्र कर देना चाहिये। यदि तुम्हारे यहाँ तुम्हारा ऐसा यहूदी साथी है जो अपने को तुम्हारे हाथ बेच चुका है तो तुम्हें उसे छ: महीने सेवा के बाद स्वतन्त्र कर देना चाहिये।” किन्तु तुम्हारे पूर्वजों ने न तो मेरी सुनी, न ही उस पर ध्यान दिया। 15 कुछ समय पहले तुमने अपने हृदय को, जो उचित है, उसे करने के लिये बदला। तुममें से हर एक ने अपने उन यहूदी साथियों को स्वतन्त्र किया जो दास थे और तुमने मेरे सामने उस मन्दिर में जो मेरे नाम पर है एक वाचा भी की। 16 किन्तु अब तुमने अपने इरादे बदल दिये हैं। तुमने यह प्रकट किया है कि तुम मेरे नाम का सम्मान नहीं करते। तुमने यह कैसे किया तुम में से हर एक ने अपने दास दासियों को वापस ले लिया है जिन्हें तुमने स्वतन्त्र किया था। तुम लोगों ने उन्हें फिर दास होने के लिये विवश किया है।’
17 “अत: जो यहोवा कहता है, वह यह है: ‘तुम लोगों ने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया है। तुमने अपने साथी यहूदियों को स्वतन्त्रता नहीं दी है। क्योंकि तुमने यह वाचा पूरी नहीं की है, इसलिये मैं स्वतन्त्रता दूँगा। यह यहोवा का सन्देश है। तलवार से, भयंकर बीमारी से और भूख से मारे जाने की स्वतन्त्रता मैं दूँगा। मैं तुम्हें कुछ ऐसा कर दूँगा कि जब वे तुम्हारे बारे में सुनेंगे तो पृथ्वी के सारे राज्य भयभीत हो उठेंगे। 18 मैं उन लोगों को दूसरों के हाथ दूँगा जिन्होंने मेरी वाचा को तोड़ा है और उस प्रतिज्ञा का पालन नहीं किया है जिसे उन्होंने मेरे सामने की है। इन लोगों ने मेरे सामने एक बछड़े को दो टुकड़ों में काटा और वे दोनों टुकड़ों के बीच से गुजरे। 19 ये वे लोग हैं जो उस समय बछड़े के टुकड़ों के बीच से गुजरे जब उन्होंने मेरे साथ वाचा की थी: यहूदा और यरूशलेम के प्रमुख, न्यायालयों के बड़े अधिकारी, याजक और उस देश के लोग। 20 अत: मैं उन लोगों को उनके शत्रुओं और उन व्यक्तियों को दूँगा जो उन्हें मार डालना चाहते हैं। उन व्यक्तियों के शव हवा में उड़ने वाले पक्षियों और पृथ्वी पर के जंगली जानवरों के भोजन बनेंगे। 21 मैं यहूदा के राजा सिदकिय्याह और उसके प्रमुखों को उनके शत्रुओं एवं जो उन्हें मार डालना चाहते हैं, को दूँगा। मैं सिदकिय्याह और उनके लोगों को बाबुल के राजा की सेना को तब भी दूँगा जब वह सेना यरूशलेम को छोड़ चुकी होगी। 22 किन्तु मैं कसदी सेना को यरूशलेम में फिर लौटने का आदेश दूँगा। यह सन्देश यहोवा का है। वह सेना यरूशलेम के विरुद्ध लड़ेगी। वे इस पर अधिकार करेंगे, इसमें आग लगायेंगे तथा इसे जला डालेंगे और मैं यहूदा के नगरों को नष्ट कर दूँगा। वे नगर सूनी मरुभूमि हो जायेंगे। वहाँ कोई व्यक्ति नहीं रहेगा।’”
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