Beginning
यहोवा और देवमूर्तियाँ
10 इस्राएल के परिवार, यहोवा की सुनो। 2 जो यहोवा कहता है, वह यह है:
“अन्य राष्ट्रों के लोगों की तरह न रहो।
आकाश के विशेष संकेतों से न डरो।
अन्य राष्ट्र उन संकेतों से डरते हैं जिन्हें वे आकाश में देखते हैं।
किन्तु तुम्हें उन चीज़ों से नहीं डरना चाहिये।
3 अन्य लोगों के रीति रिवाज व्यर्थ हैं।
उनकी देव मूर्तियाँ जंगल की लकड़ी के अतिरिक्त कुछ नहीं।
उनकी देव मूर्तियाँ कारीगर की छैनी से बनी हैं।
4 वे अपनी देव मूर्तियों को सोने चाँदी से सुन्दर बनाते हैं।
वे अपनी देव मूर्तियों को हथौड़े और कील से लटकाते हैं
जिससे वे लटके रहें, गिर न पड़े।
5 अन्य देशों की देव मूर्तियों,
ककड़ी के खेत में खड़े फूस के पुतले के समान हैं।
वे न बोल सकती हैं, और न चल सकती हैं।
उन्हें उठा कर ले जाना पड़ता है क्योंकि वे चल नहीं सकते।
उनसे मत डरो। वे न तो तुमको चोट पहुँचा सकती हैं
और न ही कोई लाभ!”
6 यहोवा तुझ जैसा कोई अन्य नहीं है!
तू महान है! तेरा नाम महान और शक्तिपूर्ण है।
7 परमेश्वर, हर एक व्यक्ति को तेरा सम्मान करना चाहिए।
तू सभी राष्ट्रों का राजा है।
तू उनके सम्मान का पात्र है।
राष्ट्रों में अनेक बुद्धिमान व्यक्ति हैं।
किन्तु कोई व्यक्ति तेरे समान बुद्धिमान नहीं है।
8 अन्य राष्ट्रों के सभी लोग शरारती और मूर्ख हैं।
उनकी शिक्षा निरर्थक लकड़ी की मूर्तियों से मिली है।
9 वे अपनी मूर्तियों को तर्शीश नगर की चाँदी
और उफाज नगर के सोने का उपयोग करके बनाते हैं।
वे देवमूर्तियाँ वढइयों और सुनारो द्वारा बनाई जाती हैं।
वे उन देवमूर्तियों को नीले और बैंगनी वस्त्र पहनाते हैं।
निपुण लोग उन्हें “देवता” बनाते हैं।
10 किन्तु केवल यहोवा ही सच्चा परमेश्वर है।
वह एकमात्र परमेश्वर है जो चेतन है।
वह शाश्वत शासक है।
जब परमेश्वर क्रोध करता है तो धरती काँप जाती है।
राष्ट्रों के लोग उसके क्रोध को रोक नहीं सकते।
11 यहोवा कहता है, “उन लोगों को यह सन्देश दो:
‘उन असत्य देवताओं ने पृथ्वी और स्वर्ग नहीं बनाए
और वे असत्य देवता नष्ट कर दिए जाएंगे,
और पृथ्वी और स्वर्ग से लुप्त हो जाएंगे।’”
12 वह परमेश्वर एक ही है जिसने अपनी शक्ति से पृथ्वी बनाई।
परमेश्वर ने अपने बुद्धि का उपयोग किया
और संसार की रचना कर डाली।
अपनी समझ के अनुसार परमेश्वर ने पृथ्वी के ऊपर आकाश को फैलाया।
13 परमेश्वर कड़कती बिजली बनाता है
और वह आकाश से बड़े जल की बाढ़ को गिराता है।
वह पृथ्वी के हर एक स्थान पर,
आकाश में मेघों को उठाता है।
वह बिजली को वर्षा के साथ भेजता है।
वह अपने गोदामों से पवन को निकालता है।
14 लोग इतने बेवकूफ हैं!
सुनार उन देवमूर्तियों से मूर्ख बनाए गये हैं
जिन्हें उन्होंने स्वयं बनाया है।
ये मूर्तियाँ झूठ के अतिरिक्त कुछ नहीं हैं, वे निष्क्रिय हैं।
15 वे देवमूर्तियाँ किसी काम की नहीं।
वे कुछ ऐसी हैं जिनका मजाक उड़ाया जा सके।
न्याय का समय आने पर वे देवमूर्तियाँ नष्ट कर दी जाएंगी।
16 किन्तु याकूब का परमेश्वर उन देवमूर्तियों के समान नहीं है।
परमेश्वर ने सभी वस्तुओं की सृष्टि की,
और इस्राएल वह परिवार है जिसे परमेश्वर ने अपने लोग के रूप में चुना।
परमेश्वर का नाम “सर्वशक्तिमान यहोवा” है।
विनाश आ रहा है
17 अपनी सभी चीज़ें लो और जाने को तैयार हो जाओ।
यहूदा के लोगों, तुम नगर में पकड़ लिये गए हो
और शत्रु ने इसका घेरा डाल लिया है।
18 यहोवा कहता है,
“इस समय मैं यहूदा के लोगों को इस देश से बाहर फेंक दूँगा।
मैं उन्हें पीड़ा और परेशानी दूँगा।
मैं ऐसा करूँगा जिससे वे सबक सीख सकें।”
19 ओह, मैं (यिर्मयाह) बुरी तरह घायल हूँ।
घायल हूँ और मैं अच्छा नहीं हो सकता।
तो भी मैंने स्वयं से कहा, “यह मेरी बीमारी है,
मुझे इससे पीड़ित होना चाहिये।”
20 मेरा डेरा बरबाद हो गया।
डेरे की सारी रस्सियाँ टूट गई हैं।
मेरे बच्चे मुझे छोड़ गये।
वे चले गये।
कोई व्यक्ति मेरा डेरा लगाने को नहीं बचा है।
कोई व्यक्ति मेरे लिये शरण स्थल बनाने को नहीं बचा है।
21 गडेरिये (प्रमुख) मूर्ख हैं।
वे यहोवा को प्राप्त करने का प्रयत्न नहीं करते।
वे बुद्धिमान नहीं है,
अत: उनकी रेवड़ें (लोग) बिखर गई और नष्ट हो गई हैं।
22 ध्यान से सुनो! एक कोलाहल!
कोलाहल उत्तर से आ रहा है।
यह यहूदा के नगरों को नष्ट कर देगा।
यहूदा एक सूनी मरुभूमि बन जायेगा।
यह गीदड़ों की माँद बन जायेगा।
23 हे यहोवा, मैं जानता हूँ कि व्यक्ति सचमुच अपनी
जिन्दगी का मालिक नहीं है।
लोग सचमुच अपने भविष्य की योजना नहीं बना सकते हैं।
लोग सचमुच नहीं जानते कि कैसे ठीक जीवित रहा जाये।
24 हे यहोवा, हमें सुधार! किन्तु न्यायी बन!
क्रोध में हमे दण्ड न दे! अन्यथा तू हमें नष्ट कर देगा!
25 यदि तू क्रोधित है तो अन्य राष्ट्रों को दण्ड दे।
वे, न तुझको जानते हैं न ही तेरा सम्मान करते हैं।
वे लोग तेरी आराधना नहीं करते।
उन राष्ट्रों ने याकूब के परिवार को नष्ट किया।
उन्होंने इस्राएल को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
उन्होंने इस्राएल की जन्मभूमि को नष्ट किया।
वाचा टूटी
11 यह वह सन्देश है जो यिर्मयाह को मिला। यहोवा का यह सन्देश आया: 2 “यिर्मयाह इस वाचा के शब्दों को सुनो। इन बातों के विषय में यहूदा के लोगों से कहो। ये बातें यरूशलेम में रहने वाले लोगों से कहो। 3 यह वह है, जो इस्राएल का परमेश्वर यहोवा कहता है, ‘जो व्यक्ति इस वाचा का पालन नहीं करेगा उस पर विपत्ति आएगी। 4 मैं उस वाचा के बारे में कह रहा हूँ जिसे मैंने तुम्हारे पूर्वजों के साथ की। मैंने वह वाचा उनके साथ तब की जब मैं उन्हें मिस्र से बाहर लाया। मिस्र अनेक मुसीबतों की जगह थी यह लोहे को पिघला देने वाली गर्म भट्टी की तरह थी।’ मैंने उन लोगों से कहा, ‘मेरी आज्ञा मानो और वह सब करो जिसका मैं तुम्हें आदेश दूँ। यदि तुम यह करोगे तो तुम मेरे लोग रहोगे और मैं तुम्हारा परमेश्वर होऊँगा।’
5 “मैंने यह तुम्हारे पूर्वजों को दिये गये वचन को पूरा करने के लिये किया। मैंने उन्हें बहुत उपजाऊ भूमि देने की प्रतिज्ञा की, ऐसी भूमि जिसमें दूध और शहद की नदी बहती हो और आज तुम उस देश में रह रहे हो।”
मैं (यिर्मयाह) ने उत्तर दिया, “यहोवा, आमीन।”
6 यहोवा ने मुझसे कहा, “यिर्मयाह, इस सन्देश की शिक्षा यहूदा के नगरों और यरूशलेम की सड़कों पर दो। सन्देश यह है, ‘इस वाचा की बातों को सुनो और तब उन नियमों का पालन करो। 7 मैंने तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र देश से बाहर लाने के समय एक चेतावनी दी थी। मैंने बार बार ठीक इसी दिन तक उन्हें चेतावनी दी। मैंने उनसे अपनी आज्ञा का पालन करने के लिये कहा। 8 किन्तु तुम्हारे पूर्वजों ने मेरी एक न सुनी। वे हठी थे और वही किया जो उनके अपने बुरे हृदय ने चाहा। वाचा में यह कहा गया है कि यदि वे आज्ञा का पालन नहीं करेंगे तो विपत्तियाँ आएंगे। अत: मैंने उन सभी विपत्तियों को उन पर आने दिया। मैंने उन्हें वाचा को मानने का आदेश दिया, किन्तु उन्होंने नहीं माना।’”
9 यहोवा ने मुझसे कहा, “यिर्मयाह, मैं जानता हूँ कि यहूदा के लोगों और यरूशलेम के निवासियों ने गुप्त योजनायें बना रखी हैं। 10 वे लोग वैसे ही पाप कर रहे हैं जिन्हें उनके पूर्वजों ने किया था। उनके पूर्वजों ने मेरे सन्देश को सुनने से इन्कार किया। उन्होंने अन्य देवताओं का अनुसरण किया और उन्हें पूजा। इस्राएल के परिवार और यहूदा के परिवार ने उस वाचा को तोड़ा है जिसे मैंने उनके पूर्वजों के साथ की थी।”
11 अत: यहोवा कहता है: “मैं यहूदा के लोगों पर शीघ्र ही भयंकर विपत्ति ढाऊँगा। वे बचकर भाग नहीं पाएंगे और वे सहायता के लिये मुझे पुकारेंगे। किन्तु मैं उनकी एक न सुनूँगा। 12 यहूदा के नगरों के लोग और यरूशलेम नगर के लोग जाएंगे और अपनी देवमूर्तियों के प्रार्थना करेंगे। वे लोग उन देवमूर्तियों को सुगन्धि धूप जलाते हैं। किन्तु वे देवमूर्तियाँ यहूदा के लोगों की सहायता नहीं कर पाएंगी जब वह भयंकर विपत्ति का समय आयेगा।
13 “यहूदा के लोगों, तुम्हारे पास बहुत सी देवमूर्तियाँ हैं, वहाँ उतनी देवमूर्तियाँ हैं जितने यहूदा में नगर हैं। तुमने उस घृणित बाल की पूजा के लिये बहुत सी वेदियाँ बना रखी हैं यरूशलेम में जितनी सड़के हैं उतनी ही वेदियाँ हैं।
14 “यिर्मयाह, जहाँ तक तुम्हारी बात है, यहूदा के इन लोगों के लिये प्रार्थना न करो। उनके लिये याचना न करो। उनके लिये प्रार्थनायें न करो। मैं सुनूँगा नहीं। वे लोग कष्ट उठायेंगे और तब वे मुझे सहायता के लिये पुकारेंगे। किन्तु मैं सुनूँगा नहीं।
15 “मेरी प्रिया (यहूदा) मेरे घर (मन्दिर)
में क्यों है उसे वहाँ रहने का अधिकार नहीं है।
उसने बहुत से बुरे काम किये हैं,
यहूदा, क्या तुम सोचती हो कि विशेष प्रतिज्ञायें
और पशु बलि तुम्हें नष्ट होने से बचा लेंगी
क्या तुम आशा करती हो कि तुम मुझे बलि भेंट करके दण्ड पाने से बच जाओगी
16 यहोवा ने तुम्हें एक नाम दिया था।
उन्होंने तुम्हें कहा, ‘हरा भरा जैतून वृक्ष कहा था जिसकी सुन्दरता देखने योग्य है।’
किन्तु एक प्रबल आँधी के गरज के साथ, यहोवा उस वृक्ष में आग लगा देगा
और इसकी शाखायें जल जाएंगी।
17 सर्वशक्तिमान यहोवा ने तुमको रोपा,
और उसने यह घोषणा की है कि तुम पर बरबादी आएगी।
क्यों क्योंकि इस्राएल के परिवार
और यहूदा के परिवार ने बुरे काम किये हैं।
उन्होंने बाल को बलि भेंट करके
मुझको क्रोधित किया है!”
यिर्मयाह के विरुद्ध बुरी योजनाएं
18 यहोवा ने मुझे दिखाया कि अनातोत के व्यक्ति मेरे विरुद्ध षडयन्त्र कर रहे हैं। यहोवा ने मुझे वह सब दिखाया जो वे कर रहे थे। अत: मैंने जाना कि वे मेरे विरुद्ध थे। 19 जब यहोवा ने मुझे दिखाया कि लोग मेरे विरुद्ध हैं इसके पहले मैं उस भोले मेमने के समान था जो काट दिये जाने की प्रतीक्षा में हो। मैं नहीं समझता था कि वे मेरे विरुद्ध हैं। वे मेरे बारे में यह कह रहे थे: “आओ, हम लोग पेड़ और उसके फल को नष्ट कर दें। आओ हम उसे मार डालें। तब लोग उसे भूल जाएंगे।” 20 किन्तु यहोवा तू एक न्यायी न्यायाधीश है। तू लोगों के हृदय और मन की परीक्षा करना जानता है। मैं अपने तकर्ों को तेरे सामने प्रस्तुत करूँगा और मैं तुझको उन्हें दण्ड देने को कहूँगा जिसके वे पात्र हैं।
21 अनातोत के लोग यिर्मयाह को मार डालने की योजना बना रहे थे। उन लोगों ने यिर्मयाह से कहा, “यहोवा के नाम भविष्यवाणी न करो वरना हम तुम्हें मार डालेंगे।” यहोवा ने अनातोत के उन लोगों के बारे में एक निर्णय किया। 22 सर्वशक्तिमान यहोवा ने कहा, “मैं शीघ्र ही अनातोत के उन लोगों को दण्ड दूँगा उनके युवक युद्ध में मारे जाएंगे। उनके पुत्र और उनकी पुत्रियाँ भूखों मरेंगी। 23 अनातोत नगर में कोई भी व्यक्ति नहीं बचेगा। कोई व्यक्ति जीवित नहीं रहेगा। मैं उन्हें दण्ड दूँगा। मैं उनके साथ कुछ बुरा घटित होने दूँगा।”
यिर्मयाह परमेश्वर से शिकायत करता है
12 यहोवा यदि मैं तुझसे तर्क करता हूँ,
तू सदा ही सही निकलता है।
किन्तु मैं तुझसे उन सब के बारे में पूछना चाहता हूँ
जो सही नहीं लगतीं।
दुष्ट लोग सफल क्यों हैं जो तुझ पर विश्वास नहीं करते,
उनका उतना जीवन सुखी क्यों है
2 तूने उन दुष्ट लोगों को यहाँ बसाया है।
वे दृढ़ जड़ वाले पौधे जैसे हैं जो बढ़ते तथा फल देते हैं।
अपने मुँह से वे तुझको अपने समीपी और प्रिय कहते हैं।
किन्तु अपने हृदय से वे वास्तव में तुझसे बहुत दूर हैं।
3 किन्तु मेरे यहोवा, तू मेरे हृदय को जानता है।
तू मुझे और मेरे मन को देखता और परखता है,
मेरा हृदय तेरे साथ है।
उन दुष्ट लोगों को मारी जाने वाली भेड़ के समान घसीट।
बलि दिवस के लिये उन्हें चुन।
4 कितने अधिक समय तक भूमि प्यासी पड़ी रहेगी
घास कब तक सूखी और मरी रहेगी
इस भूमि के जानवर और पक्षी मर चुके हैं
और यह दुष्ट लोगों का अपराध है।
फिर भी वे दुष्ट लोग कहते हैं,
“यिर्मयाह हम लोगों पर आने वाली विपत्ति को
देखने को जीवित नहीं रहेगा।”
परमेश्वर का यिर्मयाह को उत्तर
5 “यिर्मयाह, यदि तुम मनुष्यों की पग दौड़ में थक जाते हो
तो तुम घोड़ों के मुकाबले में कैसे दौड़ोगे
यदि तुम सुरक्षित देश में थक जाते हो
तो तुम यरदन नदी के तटों पर उगी भयंकर कंटीली झाड़ियों
में पहुँचकर क्या करोगे
6 ये लोग तुम्हारे अपने भाई हैं।
तुम्हारे अपने परिवार के सदस्य तुम्हारे विरुद्ध योजना बना रहे हैं।
तुम्हारे अपने परिवार के लोग तुम पर चीख रहे हैं।
यदि वे मित्र सच भी बोलें, उन पर विश्वास न करो।”
यहोवा अपने लोगों अर्थात् यहूदा को त्यागता है
7 “मैंने (यहोवा) अपना घर छोड़ दिया है।
मैंने अपनी विरासत अस्वीकार कर दी है।
मैंने जिससे (यहूदा) प्यार किया है,
उसे उसके शत्रुओं को दे दिया है।
8 मेरे अपने लोग मेरे लिये जंगली शेर बन गये हैं।
वे मुझ पर गरजते हैं, अत: मैं उनसे घृणा करता हूँ।
9 मेरे अपने लोग गिद्धों से घिरा, मरता हुआ जानवर बन गये हैं।
वे पक्षी उस पर मंडरा रहे हैं। जंगली जानवरों आओ।
आगे बढ़ो, खाने को कुछ पाओ।
10 अनेक गडेरियों (प्रमुखों) ने मेरे अंगूर के खेतों को नष्ट किया है।
उन गडेरियों ने मेरे खेत के पौधों को रोंदा है।
उन गडेरियों ने मेरे सुन्दर खेत को सूनी मरुभूमि में बदला है।
11 उन्होंने मेरे खेत को मरुभूमि में बदल दिया है।
यह सूख गया और मर गया।
कोई भी व्यक्ति वहाँ नहीं रहता।
पूरा देश ही सूनी मरुभूमि है।
उस खेत की देखभाल करने वाला कोई व्यक्ति नहीं बचा है।
12 अनेक सैनिक उन सूनी पहाड़ियों को रौंदते गए हैं।
यहोवा ने उन सेनाओं का उपयोग उस देश को दण्ड देने के लिये किया।
देश के एक सिरे से दूसरे सिरे तक के लोग दण्डित किये गये हैं।
कोई व्यक्ति सुरक्षित न रहा।
13 लोग गेहूँ बोएंगे, किन्तु वे केवल काँटे ही काटेंगे।
वे अत्याधिक थकने तक काम करेंगे,
किन्तु वे अपने सारे कामों के बदले कुछ भी नहीं पाएंगे।
वे अपनी फसल पर लज्जित होंगे। यहोवा के क्रोध ने यह सब कुछ किया।”
इस्राएल के पड़ोसियों को यहोवा का वचन
14 यहोवा जो कहता है, वह यह है: “मैं तुम्हें बताऊँगा कि मैं इस्राएल देश के चारों ओर रहने वाले सभी लोगों के लिये क्या करुँगा। वे लोग बहुत दुष्ट हैं। उन्होंने उस देश को नष्ट किया जिसे मैंने इस्राएल के लोगों को दिया था। मैं उन दुष्ट लोगों को उखाडूँगा और उनके देश से उन्हें बाहर फेंक दूँगा। मैं उनके साथ यहूदा के लोगों को भी उखाड़ूँगा। 15 किन्तु उन लोगों को उनके देश से उखाड़ फेंकने के बाद मैं उनके लिये अफसोस करुँगा। मैं हर एक परिवार को उनकी अपनी सम्पत्ति और अपनी भूमि पर वापस लाऊँगा। 16 मैं चाहता हूँ कि वे लोग अब मेरे लोगों की तरह रहना सीख लें। बीते समय में उन लोगों ने हमारे लोगों को शपथ खाने के लिये बाल के नाम का उपयोग करना सिखाया। अब, मैं चाहता हूँ कि वे लोग अपना पाठ ठीक वैसे ही अच्छी तरह पढ़ लें। मैं चाहता हूँ कि वे लोग मेरे नाम का उपयोग करना सीखें। मैं चाहता हूँ कि वे लोग कहें, ‘क्योंकि यहोवा शाश्वत है।’ यदि वे लोग वैसा करते हैं तो मैं उन्हें सफल होने दूँगा और उन्हें अपने लोगों के बीच रहने दूँगा। 17 किन्तु यदि कोई राष्ट्र मेरे सन्देश को अनसुना करता है तो मैं उसे पूरी तरह नष्ट कर दूँगा। मैं उसे सूखे पौधे की तरह उखाड़ डालूँगा।” यह सन्देश यहोवा का है।
अधोवस्त्र
13 जो यहोवा ने मुझसे कहा वह यह है: “यिर्मयाह, जाओ और एक सन (बहुमूल्य सूती वस्त्र) का अधोवस्त्र खरीदो। तब इसे अपनी कमर में लपेटो। अधोवस्त्र को गीला न होने दो।”
2 अत: मैंने एक सन (बहुमूल्य सूती वस्त्र) का अधोवस्त्र खरीदा, जैसा कि यहोवा ने करने को कहा था और मैंने इसे अपनी कमर में लपेटा। 3 तब यहोवा का सन्देश मेरे पास दुबारा आया। 4 सन्देश यह था: “यिर्मयाह, अपने खरीदे गये और पहने गये अधोवस्त्र को लो और परात को जाओ। अधोवस्त्र को चट्टानों की दरार में छिपा दो।”
5 अत: मैं परात गया और जैसा यहोवा ने कहा था, मैंने अधोवस्त्र को वहाँ छिपा दिया। 6 कई दिनों बाद यहोवा ने मुझसे कहा, “यिर्मयाह, अब तुम परात जाओ। उस अधोवस्त्र को लो जिसे मैंने छिपाने को कहा था।”
7 अत: मैं परात को गया और मैंने खोदकर अधोवस्त्र को निकाला, मैंने उसे चट्टानों की दरार से निकाला जहाँ मैंने उसे छिपा रखा था। किन्तु अब मैं अधोवस्त्र को पहन नहीं सकता था क्योंकि वह गल चुका था, वह किसी भी काम का नहीं रह गया था।
8 तब यहोवा का सन्देश मुझे मिला। 9 यहोवा ने जो कहा, वह यह है: “अधोवस्त्र गल चुका है और किसी भी काम का नहीं रह गया है। इसा प्रकार मैं यहूदा और यरूशलेम के घमंडी लोगों को बरबाद करुँगा। 10 मैं उन घमंडी और दुष्ट यहूदा के लोगों को नष्ट करूँगा। उन्होंने मेरे सन्देशों को अनसुना किया है। वे हठी हैं और वे केवल वह करते हैं जो वे करना चाहते हैं। वे अन्य देवताओं का अनुसरण और उनकी पूजा करते हैं। वे यहूदा के लोग इन सन के अधोवस्त्र की तरह हो जाएंगे। वे बरबाद होंगे और किसी काम के नहीं रहेंगे। 11 अधोवस्त्र व्यक्ति के कमर से कस कर लपेटा जाता है। उसी प्रकार मैंने पूरे इस्राएल और यहूदा के परिवारों को अपने चारों ओर लपेटा।” यह सन्देश यहोवा के यहाँ से है। “मैंने वैसा इसलिये किया कि वे लोग मेरे लोग होंगे। तब मेरे लोग मुझे यश, प्रशंसा और प्रतिष्ठा प्रदान करेंगे। किन्तु मेरे लोगों ने मेरी एक न सुनी।”
यहूदा को चेतावनियाँ
12 “यिर्मयाह, यहूदा के लोगों से कहो: ‘इस्राएल का परमेश्वर यहोवा जो कहता है, वह यह है: हर एक दाखमधु की मशक दाखमधु से भरी जानी चाहिये।’ वे लोग हँसेंगे और तुमसे कहेंगे, ‘निश्चय ही हम जानते हैं कि हर एक दाखमधु की मशक दाखमधु से भरी जानी चाहिये।’ 13 तब तुम उनसे कहोगे, ‘यहोवा जो कहता है वह यह है: मैं इस देश के हर एक रहने वाले को मदमत्त सा असहाय करुँगा। मैं उन राजाओं के बारे में कह रहा हूँ जो दाऊद के सिंहासन पर बैठते हैं। मैं यरूशलेम के निवासी याजकों, नबियों और सभी लोगों के बारे में कह रहा हूँ। 14 मैं यहूदा के लोगों को ठोकर खाने और एक दूसरे पर गिरने दूँगा। पिता और पुत्र एक दूसरे पर गिरेंगे।’ यह सन्देश यहोवा का है। ‘मैं उनके लिए अफसोस नहीं करूँगा और न उन पर दया। मैं करुणा को, यहूदा के लोगों को नष्ट करने से रोकने नहीं दूँगा।’”
15 सुनो और ध्यान दो।
यहोवा ने तुम्हें सन्देश दिया है।
घमण्डी मत बनो।
16 अपने परमेश्वर यहोवा का सम्मान करो,
उसकी स्तुति करो नहीं तो वह अंधकार लाएगा।
अंधेरी पहाड़ियों पर लड़खड़ाने
और गिरने से पहले उसकी स्तुति करो।
यहूदा के लोगों, तुम प्रकाश की आशा करते हो।
किन्तु यहोवा प्रकाश को घोर अंधकार में बदलेगा।
यहोवा प्रकाश को अति गहन अंधकार से बदल देगा।
17 यहूदा के लोगों, यदि तुम यहोवा की अनसुनी करते हो
तो मैं छिप जाऊँगा और रोऊँगा।
तुम्हारा घमण्ड मुझे रूलायेगा।
मैं फूट—फूट कर रोऊँगा।
मेरा आँखें आँसुओं से भर जाएंगी।
क्यों क्योंकि यहोवा की रेवड़ पकड़ी जाएगी।
18 ये बातें राजा और उसकी पत्नी से कहो,
“अपने सिंहासनों से उतरो।
तुम्हारे सुन्दर मुकुट तुम्हारे सिरों से गिर चुके हैं।”
19 नेगव मरुभूमि के नगरों में ताला पड़ चुका है,
उन्हें कोई खोल नहीं सकता।
यहूदा के लोगों को देश निकाला दिया जा चुका है।
उन सभी को बन्दी के रूप में ले जाया गया है।
20 यरूशलेम, ध्यान से देखो!
शत्रुओं को उत्तर से आते देखो।
तुम्हारी रेवड़ कहाँ है परमेश्वर ने तुम्हें सुन्दर रेवड़ दी थी।
तुमसे उस रेवड़ की देखभाल की आशा थी।
21 जब यहोवा उस रेवड़ का हिसाब तुमसे माँगेगा
तो तुम उसे क्या उत्तर दोगे तुमसे आशा थी कि
तुम परमेश्वर के बारे में लोगों को शिक्षा दोगे।
तुम्हारे नेताओं से लोगों का नेतृत्व करने की आशा थी।
लेकिन उन्होंने यह कार्य नहीं किये।
अत: तुम्हें अत्यन्त दुःख व पीड़ा भुगतनी होगी।
22 तुम अपने से पूछ सकते हो,
“यह बुरी विपत्ति मुझ पर क्यों आई”
ये विपत्तियाँ तुम्हारे अनेक पापों के कारण आई।
तुम्हारे पापों के कारण तुम्हें निर्वस्त्र किया गया
और जूते ले लिये गए।
उन्होंने यह तुम्हें लज्जित करने को किया।
23 एक काला आदमी अपनी चमड़ी का रंग बदल नहीं सकता।
और कोई चीता अपने धब्बे नहीं बदल सकता।
ओ यरूशलेम, उसी तरह तुम भी बदल नहीं सकते,
अच्छा काम नहीं कर सकते।
तुम सदैव बुरा काम करते हो।
24 “मैं तुम्हें अपना घर छोड़ने को विवश करुँगा,
जब तुम भागोगे तब हर दिशा में दौड़ोगे।
तुम उस भूसे की तरह होगे
जिसे मरुभूमि की हवा उड़ा ले जाती है।
25 ये वे सब चीज़ें हैं जो तुम्हारे साथ होंगी,
यह मेरी योजना का तुम्हारा हिस्सा है।”
यह सन्देश यहोवा का है।
“यह क्यों होगा क्योंकि तुम मुझे भूल गए,
तुमने असत्य देवताओं पर विश्वास किया।
26 यरूशलेम, मैं तुम्हारे वस्त्र उतारुँगा
लोग तुम्हारी नग्नता देखेंगे
और तुम लज्जा से गड़ जाओगे।
27 मैंने उन भयंकर कामों को देखा जो तुमने किये।
मैंने तुम्हें हँसते और अपने प्रेमियों के साथ शारीरिक सम्बन्ध करते देखा।
मै जानता हूँ कि तुमने वेश्या की तरह दुष्कर्म किया है।
मैंने तुम्हें पहाड़ियों और खेतों में देखा है।
यरूशलेम, यह तुम्हारे लिये बहुत बुरा होगा।
मुझे बताओ कि तुम कब तक अपने गंदे पापों को करते रहोगे”
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