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Read the Bible from start to finish, from Genesis to Revelation.
Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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यिर्मयाह 4-6

यह सन्देश यहोवा का है।
“इस्राएल, यदि तुम लौट आना चाहो,
    तो मेरे पास आओ।
अपनी देव मूर्तियों को फेंको।
    मुझसे दूर न भटको।
यदि तुम वे काम करोगे तो प्रतिज्ञा करने के लिये मेरे नाम का उपयोग करने योग्य बनोगे, तुम यह कहने योग्य होगे,
    ‘जैसा कि यहोवा शाश्वत है।’
    तुम इन शब्दों का उपयोग सच्चे, ईमानदारी भरे और सही तरीके से करने योग्य बनोगे।
यदि तुम ऐसा करोगे तो राष्ट्र यहोवा द्वारा वरदान पाएगा
    और वे यहोवा द्वारा किये गए कामों को गर्व से बखान करेंगे।”

यहूदा राष्ट्र के मनुष्यों और यरूशलेम नगर से, यहोवा जो कहता है, वह यह है:

“तुम्हारे खेतों में हर नहीं चले हैं।
    खेतों में हल चलाओ।
    काँटो में बीज न बोओ।
यहोवा के लोग बनो, अपने हृदय को बदलो।
    यहूदा के लोगों और यरूशलेम के निवासियों, यदि तुम नहीं बदले, तो मैं बहुत क्रोधित होऊँगा।
मेरा क्रोध आग की तरह फैलेगा और मेरा क्रोध तुम्हें जला देगा
    और कोई व्यक्ति उस आग को बुझा नहीं पाएगा।
यह क्यों होगा क्योंकि तुमने बुरे काम किये हैं।”
    उत्तर दिशा से विध्वंस
यहूदा के लोगों में इस सन्देश की घोषणा करो:
    यरूशलेम नगर के हर एक व्यक्ति से कहो, “सारे देश में तुरही बजाओ।”
जोर से चिल्लाओ और कहो,
    “एक साथ आओ,
    हम सभी रक्षा के लिये दृढ़ नगरों को भाग निकलें।”
सिय्योन की ओर सूचक ध्वज उठाओ, अपने जीवन के लिये भागो, प्रतीक्षा न करो।
    यह इसलिये करो कि मैं उत्तर से विध्वंस ला रहा हूँ।
मैं भयंकर विनाश ला रहा हूँ।
एक सिंह अपनी गुफा से निकला है, राष्ट्रों का विध्वंसक तेज कदम बढ़ाना आरम्भ कर चुका है।
    वह तुम्हारे देश को नष्ट करने के लिये अपना घर छोड़ चुका है।
तुम्हारे नगर ध्वस्त होंगे।
    उनमें रहने वाला कोई व्यक्ति नहीं बचेगा।
अत: टाट के कपड़े पहनो, रोओ,
    क्यों क्योंकि यहोवा हम पर बहुत क्रोधित है।
यह सन्देश यहोवा का है, “ऐसे समय यह होता है।
    राजा और प्रमुख साहस खो बैंठेंगे,
याजक डरेंगे,
    नबियों का दिल दहलेगा।”

10 तब मैंने अर्थात् यिर्मयाह ने कहा, “मेरे स्वामी यहोवा, तूने सचमुच यहूदा और यरूशलेम के लोगों को धोखे में रखा है। तूने उनसे कहा, ‘तुम शान्तिपूर्वक रहोगे।’ किन्तु अब उनके गले तर तलवार खिंची हुई है।”

11 उस समय एक सन्देश यहूदा और यरूशलेम के लोगों को दिया जाएगा:
    “नंगी पहाड़ियों से गरम आँधी चल रही है।
यह मरुभूमि से मेरे लोगों की ओर आ रही है।
    यह वह मन्द हवा नहीं जिसका उपयोग किसान भूसे से अन्न निकालने के लिये करते हैं।
12 यह उससे अधिक तेज हवा है और मुझसे आ रही है।
    अब मैं यहूदा के लोगों के विरुद्ध अपने न्याय की घोषणा करूँगा।”
13 देखो! शत्रु मेघ की तरह उठ रहा है, उसके रथ चक्रवात के समान है।
    उसके घोड़े उकाब से तेज हैं। यह हम सब के लिये बुरा होगा, हम बरबाद हो जाएंगे।
14 यरूशलेम के लोगों, अपने हृदय से बुराइयों को धो डालो।
    अपने हृदयों को पवित्र करो, जिससे तुम बच सको। बुरी योजनायें मत बनाते चलो।
15 दान देश के दूत की वाणी, जो वह बोलता है, ध्यान से सुनो।
    कोई एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश से बुरी खबर ला रहा है।
16 “इस राष्ट्र को इसका विवरण दो।
    यरूशलेम के लोगों में इस खबर को फैलाओ।
शत्रु दूर देश से आ रहे हैं। वे शत्रु यहूदा के नगरों के विरुद्ध युद्ध—उद्घोष कर रहे हैं।
17 शत्रुओं ने यरूशलेम को ऐसे घेरा है जैसे खेत की रक्षा करने वाले लोग हो।
    यहूदा, तुम मेरे विरुद्ध गए, अत: तुम्हारे विरुद्ध शत्रु आ रहे हैं!” यह सन्देश यहोवा का है!

18 “जिस प्रकार तुम रहे और तुमने पाप किया उसी से तुम पर यह विपत्ति आई।
    यह तुम्हारे पाप ही हैं जिसने जीवन को इतना कठिन बनाया है।
यह तुम्हारा पाप ही है जो उस पीड़ा को लाया जो तुम्हारे हृदय को बेधती है।”

यिर्मयाह का रुंदन

19 आह, मेरा दुःख और मेरी परेशानी मेरे पेट में दर्द कर रही हैं।
    मेरा हृदय धड़क रहा है।
हाय, मैं इतना भयभीत हूँ।
    मेरा हृदय मेरे भीतर तड़प रहा है।
मैं चुप नहीं बैठ सकता। क्यों क्योंकि मैंने तुरही का बजना सुना है।
    तुरही सेना को युद्ध के लिये बुला रही है।
20 ध्वंस के पीछे विध्वंस आता है। पूरा देश नष्ट हो गया है।
    अचानक मेरे डेरे नष्ट कर दिये गये हैं, मेरे परदे फाड़ दिये गए हैं।
21 हे यहोवा, मैं कब तक युद्ध पताकायें देखुँगा युद्ध की तुरही को कितने समय सुनूँगा

22 परमेश्वर ने कहा, “मेरे लोग मूर्ख हैं। वे मुझे नहीं जानते।
    वे बेवकूफ बच्चे हैं।
वे समझते नहीं। वे पाप करने में दक्ष हैं, किन्तु वे अच्छा करना नहीं जानते।”
    विनाश आ रहा है

23 मैंने धरती को देखा।
    धरती खाली थी, इस पर कुछ नहीं था।
मैंने गगन को देखा, और इसका प्रकाश चला गया था।
24 मैंने पर्वतों पर नजर डाली और वे काँप रहे थे। सभी पहाड़ियाँ लड़खड़ा रही थीं।
25 मैंने ध्यान से देखा, किन्तु कोई मनुष्य नहीं था, आकाश के सभी पक्षी उड़ गए थे।
26 मैंने देखा कि सुहावना प्रदेश मरुभूमि बन गया था।
    उस देश के सभी नगर नष्ट कर दिये गये थे। यहोवा ने यह कराया।
यहोवा और उसके प्रचण्ड क्रोध ने यह कराया।

27 यहोवा ये बातें कहता है: “पूरा देश बरबाद हो जाएगा।
    (किन्तु मैं देश को पूरी तरह नष्ट नहीं करूँगा।)
28 अत: इस देश के लोग मेरे लोगों के लिये रोयेंगे।
    आकाश अँधकारपूर्ण होगा।
मैंने कह दिया है, और बदलूँगा नहीं।
मैंने एक निर्णय किया है, और मैं अपना विचार नहीं बदलूँगा।”

29 यहूदा के लोग घुड़सवारों और धनुर्धारियों का उद्घोष सुनेंगे, और लोग भाग जायेंगे।
    कुछ लोग गुफाओं में छिपेंगे कुछ झाड़ियों में तथा कुछ चट्टानों पर चढ़ जाएंगे।
यहूदा के सभी नगर खाली हैं।
    उनमें कोई नहीं रहता।

30 हे यहूदा, तुम नष्ट कर दिये गये हो, तुम क्या कर रहे हो तुम अपने सुन्दरतम लाल वस्त्र क्यों पहनते हो
    तुम अपने सोने के आभूषण क्यों पहने हो तुम अपनी आँखों में अन्जन क्यों लगाते हो।
तुम अपने को सुन्दर बनाते हो, किन्तु यह सब व्यर्थ है।
    तुम्हारे प्रेमी तुमसे घृणा करते हैं, वे मार डालने का प्रयत्न कर रहे हैं।
31 मैं एक चीख सुनता हूँ जो उस स्त्री की चीख की तरह है जो बच्चा जन्म रही हो।
    यह चीख उस स्त्री की तरह है जो प्रथम बच्चे को जन्म रही हो।
यह सिय्योन की पुत्री की चीख है।
    वह अपने हाथ प्रार्थना में यह कहते हुए उठा रही है, “आह! मैं मूर्छित होने वाली हूँ, हत्यारे मेरे चारों ओर हैं!”

यहूदा के लोगों के पाप

यहोवा कहता है, “यरूशलेम की सड़कों पर ऊपर नीचे जाओ। चारों ओर देखो और इन चीजों के बारे में सोचो। नगर के सार्वजनिक चौराहो को खोजो, पता करो कि क्या तुम किसी एक अच्छे व्यक्ति को पा सकते हो, ऐसे व्यक्ति को जो ईमानदारी से काम करता हो, ऐसा जो सत्य की खोज करता हो। यदि तुम एक अच्छे व्यक्ति को ढूँढ निकालोगे तो मैं यरूशलेम को क्षमा कर दूँगा! लोग प्रतिज्ञा करते हैं और कहते हैं, ‘जैसा कि यहोवा शाश्वत है।’ किन्तु वे सच्चाई से यही तात्पर्य नहीं रखते।”

हे यहोवा, मैं जानता हूँ कि तू लोगों में सच्चाई देखना चाहता है।
    तूने यहूदा के लोगों को चोट पहुँचाई, किन्तु उन्होंने किसी पीड़ा का अनुभव नहीं किया।
तूने उन्हें नष्ट किया, किन्तु उन्होंने अपना सबक सीखने से इन्करा कर दिया।
    वे बहुत हठी हो गए।
उन्होंने अपने पापों के लिये पछताने से इन्कार कर दिया।
किन्तु मैं (यिर्मयाह) ने अपने से कहा,
    “वे केवल गरीब लोग ही है जो उतने मूर्ख हैं।
ये वही लोग हैं जो यहोवा के मार्ग को नहीं सीख सके!
    गरीब लोग अपने परमेश्वर की शिक्षा को नहीं जानते।
इसलिये मैं यहूदा के लोगों के प्रमुखों के पास जाऊँगा।
    मैं उनसे बातें करूँगा।
निश्चय ही प्रमुख यहोवा के मार्ग को समझते हैं।
    मुझे विश्वास है कि वे अपने परमेश्वर के नियमों को जानते हैं।”
किन्तु सभी प्रमुख यहोवा की सेवा करने से इन्कार करने में एक साथ हो गए।
वे परमेश्वर के विरुद्ध हुए, अत: जंगल का एक सिंह उन पर आक्रमण करेगा।
    मरुभूमि में एक भेड़िया उन्हें मार डालेगा।
एक तेंदुआ उनके नगरों के पास घात लगाये है।
    नगरों के बाहर जाने वाले किसी को भी तेंदुआ टुकड़ों में चीर डालेगा।
यह होगा, क्यैं कि यहूदा के लोगों ने बार—बार पाप किये हैं।
    वे कई बार यहोवा से दूर भटक गए हैं।
परमेश्वर ने कहा, “यहूदा, मुझे कारण बताओ कि मुझे तुमको क्षमा क्यों कर देना चाहिये तुम्हारी सन्तानों ने मुछे त्याग दिया है।
उन्होंने उन देवमूर्तियों से प्रतिज्ञा की है जो परमेश्वर हैं ही नहीं।
    मैंने तुम्हारी सन्तानों को हर एक चीज़ दी जिसकी जरुरत उन्हें थी।
किन्तु फिर भी वे विश्वासघाती रहे!
    उन्होंने वेश्यालयों में बहुत समय बिताया।
वे उन घोड़ों जैसे रहे जिन्हें बहुत खाने को है, और जो जोड़ा बनाने को हो।
    वे उन घोड़ों जैसे रहे जो पड़ोसी कीर् पॅत्नयों पर हिन हिना रहे हैं।
क्या मुझे यहूदा के लोगों को ये काम करने के कारण, दण्ड देना चाहिए यह सन्देश यहोवा का है।
    हाँ! तुम जानते हो कि मुझे इस प्रकार के राष्ट्र को दण्ड देना चाहिये।
मुझे उन्हें वह दण्ड देना चाहिए जिसके वे पात्र हैं।
10 यहूदा की अंगूर की बेलों की कतारों के सहारे से निकलो।
    बेलों को काट डालो। (किन्तु उन्हें पूरी तरह नष्ट न करो।)
    उनकी सारी शाखायें छाँट दो क्योंकि ये शाखाये यहोवा की नहीं हैं।
11 इस्राएल और यहूदा के परिवार हर प्रकार से मेरे विश्वासघाती रहे हैं।”
    यह सन्देश यहोवा के यहाँ से है।

12 “उन लोगों ने यहोवा के बारे में झूठ कहा है।
उन्होंने कहा है, ‘यहोवा हमारा कुछ नहीं करेगा।
    हम लोगों का कुछ भी बुरा न होगा।
हम किसी सेना का आक्रमण अपने ऊपर नहीं देखेंगे।
    हम कभी भूखों नहीं मरेंगे।’
13 झूठे नबी मरे प्राण हैं।
    परमेश्वर का सन्देश उनमें नहीं उतरा है।
विपत्तियाँ उन पर आयेंगी।”

14 सर्वशक्तिमान परमेश्वर यहोवा ने यह सब कहा, “उन लोगों ने कहा कि मैं उन्हें दण्ड नहीं दूँगा।
    अत: यिर्मयाह, जो सन्देश मैं तुझे दे रहा हूँ, वह आग जैसा होगा और वे लोग लकड़ी जैसे होंगे।
आग सारी लकड़ी जला डालेगी।”
15 इस्राएल के परिवार, यह सन्देश यहोवा का है, “तुम पर आक्रमण के लिये मैं एक राष्ट्र को बहुत दूर से जल्दी ही लाऊँगा।
यह एक पुराना राष्ट्र है।
    यह एक प्राचीन राष्ट्र है।
उस राष्ट्र के लोग वह भाषा बोलते हैं जिसे तुम नहीं समझते।
    तुम नहीं समझ सकते कि वे क्या कहते हैं
16 उनके तरकश खुली कब्र हैं, उनके सभी लोग वीर सैनिक हैं।
17 वे सैनिक तुम्हारी घर लाई फसल को खा जाएंगे।
    वे तुम्हारा सारा भोजन खा जाएंगे।
वे तुम्हारे पुत्र—पुत्रियों को खा जाएंगे (नष्ट कर देंगे) वे तुम्हारे रेवड़ और पशु झुण्ड को चट कर जाएंगे।
    वे तुम्हारे अंगूर और अंजीर को चाट जाएंगे।
वे तुम्हारे दृढ़ नगरों को अपनी तलवारों से नष्ट कर डालेंगे।
    जिन नगरों पर तुम्हारा विश्वास है उन्हें वे नष्ट कर देंगे।”

18 यह सन्देश यहोवा का है:
“किन्तु कब वे भयैंनक दिन आते हैं,
    यहूदा मैं तुझे पूरी तरह नष्ट नहीं करूँगा।
19 यहूदा के लोग तुमसे पूछेंगे,
    ‘यिर्मयाह, हमारे परमेश्वर यहोवा ने हमारा ऐसा बुरा क्यों किया?’
उन्हें यह उत्तर दो,
‘यहूदा के लोगों, तुमने यहोवा को त्याग दिया है,
    और तुमने अपने ही देश में विदेशी देव मूर्तियों की पूजा की है।
तुमने वे काम किये,
    अत: तुम अब उस देश में जो तुम्हारा नहीं है, विदेशियों की सेवा करोगे।’”

20 यहोवा ने कहा, “याकूब के परिवार में, इस सन्देश की घोषणा करो।
    इस सन्देश को यहूदा राष्ट्र में सुनाओ।
21 इस सन्देश को सुनो,
    तुम मूर्ख लोगों, तुम्हें समझ नहीं हैं:
    तुम लोगों की आँखें है, किन्तु तुम देखते नहीं!
    तुम लोगों के कान हैं, किन्तु तुम सनते नहीं!
22 निश्चय ही तुम मुझसे भयभीत हो।”
यह सन्देश यहोवा का है।
“मेरे सामने तुम्हें भय से काँपना चाहिये।
    मैं ही वह हूँ, जिसने समुद्र तटों को समुद्र की मर्यादा बनाई।
    मैंने बालू की ऐसी सीमा बनाई जिसे पानी तोड़ नहीं सकती।
    तरंगे तट को कुचल सकती हैं, किन्तु वे इसे नष्ट नहीं करेंगी।
    चढ़ती हुई तरंगे गरज सकती हैं, किन्तु वे तट की मर्यादा तोड़ नहीं सकती।
23 किन्तु यहूदा के लोग हठी हैं।
    वे हमेशा मेरे विरुद्ध जाने की योजना बनाते हैं।
    वे मुझसे मुड़े हैं और मुझसे दूर चले गए हैं।
24 यहूदा के लोग कभी अपने से नहीं कहते, ‘हमें अपने परमेश्वर यहोवा से डरना
    और उसका सम्मान करना चाहिए।
    वह हमे ठीक समय पर पतझड़ और बसन्त की वर्षा देता है।
    वे यह निश्चित करता है कि हम ठीक समय पर फसल काट सकें।’
25 यहूदा के लोगों, तुमने अपराध किया है। अत: वर्षा और पकी फसल नहीं आई।
    तुम्हारे पापों ने तुम्हें यहोवा की उन अच्छी चीज़ों का भोग नहीं करने दिया है।
26 मेरे लोगों के बीच पापी लोग हैं।
    वे पापी लोग पक्षियों को फँसाने के लिये जाल बनाने वालों के समान हैं।
वे लोग अपना जाल बिछाते हैं, किन्तु वे पक्षी के बदले मनुष्यों को फँसाते हैं।
27 इन व्यक्तियों के घर झूठ से वैसे भरे होते हैं, जैसे चिड़ियों से भरे पिंजरे हों।
    उनके झूठ ने उन्हें धनी और शक्तिशाली बनाया है।
28 जिन पापों को उन्होंने किया है उन्ही से वे बड़े और मोटे हुए हैं।
    जिन बुरे कामों को वे करते हैं उनका कोई अन्त नहीं।
वे अनाथ बच्चों के मामले के पक्ष में बहस नहीं करेंगे, वे अनाथों की सहायता नहीं करेंगे।
    वे गरीब लोगों को उचित न्याय नहीं पानें देंगे।
29 क्या मुझे इन कामों के करने के कारण यहूदा को दण्ड देना चाहिये?
यह सन्देश यहोवा का है।
तुम जानते हो कि मुझे ऐसे राष्ट्र को दण्ड देना चाहिये।
    मुझे उन्हें वह दण्ड देना चाहिए जो उन्हें मिलना चाहिए।”

30 यहोवा कहता है, “यहूदा देश में एक भयानक और दिल दहलाने वाली घटना घट रही है।
    जो हुआ है वह यह है कि:
31 नबी झूठ बोलते हैं,
याजक अपने हाथ में शक्ति लेते हैं।
    मेरे लोग इसी तरह खुश हैं।
किन्तु लोगों, तुम क्या करोगे
    जब दण्ड दिया जायेगा

शत्रु द्वारा यरूशलेम का घेराव

“बिन्यामीन के लोगों, अपनी जान लेकर भागो,
    यरूशलेम नगर से भाग चलो!
युद्ध की तुरही तकोआ नगर में बजाओ!
    बेथक्केरेम नगर में खतरे का झण्डा लगाओ!
ये काम करो क्योंकि उत्तर की ओर से विपत्ति आ रही है।
    तुम पर भयंकर विनाश आ रहा है।
    सिय्योन की पुत्री,
तुम एक सुन्दर चरागाह के समान हो।
गडेरिये यरूशलेम आते हैं, और वे अपनी रेवड़ लाते हैं।
    वे उसके चारों ओर अपने डेरे डालते हैं।
हर एक गडेरिया अपनी रेवड़ की रक्षा करता है।”

“यरूशलेम नगर के विरुद्ध लड़ने के लिये तैयार हो जाओ!
    उठो, हम लोग दोपहर को नगर पर आक्रमण करेंगे, किन्तु पहले ही देर हो चुकी है।”
संध्या की छाया लम्बी हो रही है,
अत: उठो! हम नगर पर रात में आक्रमण करेंगे!
    हम यरूशलेम के दृढ़ रक्षा—साधनों को नष्ट करेंगे।

सर्वशक्तिमान यहोवा जो कहता है, वह यही है:
    “यरूशलेम के चारों ओर के पेड़ों को काट डालो
    और यरूशलेम के विरुद्ध घेरा डालने का टीला बनाओ।
इस नगर को दण्ड मिलना चाहिये।
    इस नगर के भीतर दमन करने के अतिरिक्त कुछ नहीं है।
जैसे कुँआ अपना पानी स्वच्छ रखता है उसी प्रकार यरूशलेम अपनी दुष्टता को नया बनाये रखता है।
    इस नगर में हिंसा और विध्वंस सुना जाता हैं।
मैं सदैव यरूशलेम की बीमारी और चोटों को देख सकता हूँ।
यरूशलेम, इस चेतावनी को सुनो।
    यदि तुम नहीं सुनोगे तो मैं अपनी पीठ तुम्हारी ओर कर लूँगा।
मैं तुम्हारे प्रदेश को सूनी मरुभूमि कर दूँगा।
    कोई भी व्यक्ति वहाँ नहीं रह पायेगा।”
सर्वशक्तिमान यहोवा जो कहता है, वह यह है:
    “उन इस्राएल के लोगों को इकट्ठा करो जो अपने देश में बच गए थे।
उन्हें इस प्रकार इकट्ठे करो, जैसे तुम अंगूर की बेल से आखिरी अंगूर इकट्ठे करते हो।
    अंगूर इकट्ठे करने वाले की तरह हर एक बेल की जाँच करो।”
10 मैं किससे बात करुँ?
    मैं किसे चेतावनी दे सकता हूँ?
    मेरी कौन सुनेगा?
इस्राएल के लोगों ने अपने कानो को बन्द किया है।
    अत: वे मेरी चेतावनी सुन नहीं सकते।
लोग यहोवा की शिक्षा पसन्द नहीं करते।
    वे यहोवा का सन्देश सुनना नहीं चाहते।
11 किन्तु मैं (यिर्मयाह) यहोवा के क्रोध से भरा हूँ।
    मैं इसे रोकते—रोकते थक गया हूँ।
“सड़क पर खेलते बच्चों पर यहोवा का क्रोध उंडेलो।
    एक साथ एकत्रित युवकों पर इसे उंडेलो।
पति और उसकी पत्नी दोनों पकड़े जाएंगे।
    बूढ़े और अति बूढ़े लोग पकड़े जाएंगे।
12 उनके घर दूसरे लोगों को दे दिए जाएंगे।
    उनके खेत और उनकी पत्नियाँ दूसरों को दे दी जाएंगी।
मैं अपने हाथ उठाऊँगा और यहूदा देश के लोगों को दण्ड दूँगा।”
    यह सन्देश यहोवा का था।

13 “इस्राएल के सभी लोग धन और अधिक धन चाहते हैं।
    छोटे से लेकर बड़े तक सभी लालची हैं।
यहाँ तक कि याजक और नबी झूठ पर जीते हैं।
14 मेरे लोग बहुत बुरी तरह चोट खाये हुये हैं।
    नबी और याजक मेरे लोगों के घाव भरने का प्रयत्न ऐसे करते हैं, मानों वे छोटे से घाव हों।
वे कहते हैं, ‘यह बहुत ठीक है, यह बिल्कुल ठीक है।’
    किन्तु यह सचमुच ठीक नहीं हुआ है।
15 नबियों और याजकों को उस पर लज्जित होना चाहिये, जो बुरा वे करते हैं।
    किन्तु वे तनिक भी लज्जित नहीं।
वे तो अपने पाप पर संकोच करना तक भी नहीं जानते।
    अत: वे अन्य हर एक के साथ दण्डित होंगे।
    जब मैं दण्ड दूँगा, वे जमीन पर फेंक दिये जायेंगे।”
यह सन्देश यहोवा का है।

16 यहोवा यह सब कहता है:
“चौराहों पर खड़े होओ और देखो।
    पता करो कि पुरानी सड़क कहाँ थी।
    पता करो कि अच्छी सड़क कहाँ है, और उस सड़क पर चलो।
यदि तुम ऐसा करोगे, तुम्हें आराम मिलेगा! किन्तु तुम लोगों ने कहा है,
‘हम अच्छी सड़क पर नहीं चलेंगे!’
17 मैंने तुम्हारी चौकसी के लिये चौकीदार चुने!
    मैंने उनसे कहा, ‘युद्ध—तुरही की आवाज पर कान रखो।’
    किन्तु उन्होंने कहा, ‘हम नहीं सुनेंगे!’
18 अत: तुम सभी राष्ट्रों, उन देशों के तुम सभी लोगों, सुनो ध्यान दो!
    वह सब सुनो जो मैं यहूदा के लोगों के साथ करूँगा।
19 पृथ्वी के लोगों, यह सुनो:
    मैं यहूदा के लोगों पर विपत्ति ढाने जा रहा हूँ।
    क्यों क्योंकि उन लोगों ने सभी बुरे कामों की योजनायें बनाई।
    यह होगा क्योंकि उन्होंने मेरे सन्देशों की ओर ध्यान नहीं दिया है।
    उन लोगों ने मेरे नियमों का पालन करने से इन्कार किया है।”

20 यहोवा कहता है, “तुम शबा देश से मुझे सुगन्धि की भेंट क्यों लाते हो
    तुम भेंट के रूप में दूर देशों से सुगन्धि क्यों लाते हो
तुम्हारी होमबलि मुझे प्रसन्न नहीं करती।
    तुम्हारी बलि मुझे खुश नहीं करती।”
21 अत: यहोवा जो कहता है, वह यह है:
“मैं यहूदा के लोगों के सामने समस्यायें रखूँगा।
    वे लोगों को गिराने वाले पत्थर से होंगे।
पिता और पुत्र उन पर ठोकर खाकर गिरेंगे।
    मित्र और पड़ोसी मरेंगे।”

22 यहोवा जो कहता है, वह यह है:
“उत्तर के देश से एक सेना आ रही है,
    पृथ्वी के दूर स्थानों से एक शक्तिशाली राष्ट्र आ रहा है।
23 सैनिकों के हाथ में धनुष और भाले हैं, वे क्रूर हैं।
    वे कृपा करना नहीं जानते।
वे बहुत शक्तिशाली हैं।
    वे सागर की तरह गरजते हैं, जब वे अपने घोड़ों पर सवार होते हैं।
वह सेना युद्ध के लिये तैयार होकर आ रही है।
    हे सिय्योन की पुत्री, सेना तुम पर आक्रमण करने आ रही हैं।”
24 हमने उस सेना के बारे में सूचना पाई है।
    हम भय से असहाय हैं।
हम स्वयं को विपत्तियों के जाल में पड़ा अनुभव करते हैं।
    हम वैसे ही कष्ट में हैं जैसे एक स्त्री को प्रसव—वेदना होती है।
25 खेतों में मत जाओ, सड़कों पर मत निकलो।
    क्यों क्योंकि शत्रु के हाथों में तलवार है,
क्योंकि खतरा चारों ओर है।
26 हे मेरे लोगों, टाट के वस्त्र पहन लो।
    राख में लोट लगा लो।
मरे लोगों के लिए फूट—फूट कर रोओ।
    तुम एकमात्र पुत्र के खोने पर रोने सा रोओ।
ये सब करो क्योंकि विनाशक अति शीघ्रता से हमारे विरुद्ध आएंगे।

27 “यिर्मयाह, मैंने (यहोवा ने)
    तुम्हें प्रजा की कच्ची धातु का पारखी बनाया है।
तुम हमारे लोगों की जाँच करोगे
    और उनके व्यवहार की चौकसी रखोगे।
28 मेरे लोग मेरे विरुद्ध हो गए हैं,
    और वे बहुत हठी हैं।
    वे लोगों के बारे में बुरी बातें कहते घूमते हैं।
वे उस काँसे और लोहे की तरह हैं जो चकमहीन
    और जंग खाये हैं।
29 वे उस श्रमिक की तरह हैं जिसने चाँदी को शुद्ध करने की कोशिश की।
उसकी धोकनी तेज चली, आग भी तेज जली,
    किन्तु आग से केवल रांगा निकला।
यह समय की बरबादी थी जो शुद्ध चाँदी बनाने का प्रयत्न किया गया।
    ठीक इसी प्रकार मेरे लोगों से बुराई दूर नहीं की जा सकी।
30 मेरे लोग ‘खोटी चाँदी’ कहे जायेंगे।
    उनको यह नाम मिलेगा क्योंकि यहोवा ने उन्हें स्वीकार नहीं किया।”

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