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Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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यिर्मयाह 1-3

यिर्मयाह के ये सन्देश हैं। यिर्मयाह हिल्किय्याह नामक व्यक्ति का पुत्र था। यिर्मयाह उन याजकों के परिवार से था जो अनातोत नगर में रहते थे। वह नगर उस प्रदेश में है जो बिन्यामीन परिवार का था। यहोवा ने यिर्मयाह से उन दिनों बातें करनी आरम्भ की। जब योशिय्याह यहूदा राष्ट्र का राजा था। योशिय्याह आमोन नामक राजा का पुत्र था। यहोवा ने यिर्मयाह से योशिय्याह के राज्यकाल के तेरहवें वर्ष में बातें करनी आरम्भ की। यहोवा यिर्मयाह से उस समय बातें करता रहा जब यहोयाकीम यहूदा का राजा था। यहोयाकीम योशिय्याह का पुत्र था। यिर्मयाह को सिदकिय्याह के राज्यकाल के ग्यारह वर्ष पाँच महीने तक, यहोवा की वाणी सुनाई पड़ती रही। सिदकिय्याह भी योशिय्याह का एक पुत्र था। सिदकिय्याह के राज्यकाल के ग्यारहवें वर्ष के पाँचवें महीने में यरूशलेम के निवासियों को देश—निकाला दिया गया था।

परमेश्वर यिर्मयाह को अपने पास बुलाता है

यहोवा का सन्देश यिर्मयाह को मिला। यहोवा का सन्देश यह था:

“तुम्हारी माँ के गर्भ में रखने के पहले
    मैंने तुमको जान लिया।
तुम्हारे जन्म लेने के पहले,
    मैंने तुम्हें विशेष कार्य के लिये चुना था।
    मैंने तुम्हें राष्ट्रों का नबी होने को चुना था।”

तब मैंने अर्थात् यिर्मयाह ने कहा, “किन्तु सर्वशक्तिमान यहोवा, मैं तो बोलना भी नहीं जानता। मैं तो अभी बालक ही हूँ।”

किन्तु यहोवा ने मुझसे कहा,

“मत कहो, ‘मै बालक ही हूँ।’
    तुम्हें हर उन स्थानों पर जाना है जहाँ मैं भेंजूँ।
    तुम्हें वह सब कहना है जिसे मैं कहने को कहूँ।
किसी से मत डरो।
    मैं तुम्हारे साथ हूँ, और मैं तुम्हारी रक्षा करूँगा।”
यह सन्देश यहोवा का है।

तब यहोवा ने अपना हाथ बढ़ाया और मेरे मुँह को छू लिया। यहोवा ने मुझसे कहा,

“यिर्मयाह, मैं अपने शब्द तेरे मुँह में दे रहा हूँ।
10 आज मैंने तुम्हें राज्यों और राष्ट्रों का अधिकारी बनाया है।
    तुम इन्हें उखाड़ और उजाड़ सकते हो। तुम इन्हें नष्ट और उठा फेंक सकते हो।
तुम इन्हें और उठा फेंक सकते हो।
    तुम निर्माण और रोपण कर सकते हो।”

दो अर्न्तदृश्य

11 यहोवा का सन्देश मुझे मिला। यह सन्देश यहोवा का था: “यिर्मयाह, तुम क्या देखते हो”

मैंने यहोवा को उत्तर दिया और कहा, “मैं बादाम की लकड़ी की एक छड़ी देखता हूँ।”

12 यहोवा ने मुझसे कहा, “तुमने बहुत ठीक देखा और मैं इस बात की चौकसी कर रहा हूँ कि तुमको दिया गया मेरा सन्देश ठीक उतरे।”

13 यहोवा का सन्देश मुझे फिर मिला। यहोवा के यहाँ का सन्देश यह था, “यिर्मयाह, तुम क्या देखते हो”

मैंने यहोवा को उत्तर दिया और कहा, “मैं उबलते पानी का एक बर्तन देख रहा हूँ। यह बर्तन उत्तर की ओर से टपक रहा है।”

14 यहोवा ने मुझसे कहा, “उत्तर से कुछ भयानक आएगा।
    यह उन सब लोगों के लिए होगा जो इस देश में रहते हैं।
15 कुछ समय बाद मैं उत्तर के राज्यों के सभी लोगों को बुलाऊँगा।”
    ये बातें यहोवा ने कहीं।

“उन देशों के राजा आएंगे।
    वे यरूशलेम के द्वार के सामने अपने सिंहासन जमाएंगे।
वे यरूशलेम के सभी नगर दीवारों पर आक्रमण करेंगे।
    वे यहूदा प्रदेश के सभी नगरों पर आक्रमण करेंगे।
16 और मैं अपने लोगों के विरूद्ध अपने निर्णय की घोषणा करूँगा।
    मैं यह इसलिये करूँगा, क्योंकि वे बुरे लोग हैं, और वे मेरे विरुद्ध चले गए हैं।
मेरे लोगों ने मुझे छोड़ा।
उन्होंने अन्य देवताओं को बलि चढ़ाई।
    उन्होंने अपने हाथों से बनाई गई मूर्तियों को पूजा की।

17 “यिर्मयाह, जहाँ तक तुम्हारी बात है, उठो।
    तैयार हो जाओ! उठो और लोगों को सन्देश दो।
वह सब कुछ लोगों से कहो जो मैं कहने को कहूँ।
    लोगों से मत डरो।
यदि तुम लोगों से डरे तो मैं उनसे डरने का अच्छा कारण तुम्हें दे दूँगा।
18 जहाँ तक मेरी बात है, मैं आज ही तुझे
    एक दृढ़ नगर, एक लौह स्तम्भ, एक काँसे की दीवार बनाने जा रहा हूँ।
तुम देश में हर एक के विरूद्ध खड़े होने योग्य होगे,
    यहूदा देश के राजाओं के विरूद्ध, यहूदा के प्रमुखों के विरूद्ध, यहूदा के याजकों के विरूद्ध और यहूदा देश के लोगों के विरूद्ध भी।
19 वे सब लोग तुम्हारे विरूद्ध लड़ेंगे,
    किन्तु वे तुझे पराजित नहीं करेंगे।
क्यों क्योंकि मैं तुम्हारे साथ हूँ,
    और मैं तेरी रक्षा करूँगा।”
यह सन्देश यहोवा का है।

यहूदा विश्वासयोग्य नहीं रहा

यहोवा का सन्देश यिर्मयाह को मिला। यहोवा का सन्देश यह था: “यिर्मयाह, जाओ और यरूशलेम के लोगों को सन्देश दो। उनसे कहो:

“जिस समय तुम नव राष्ट्र थे, तुम मेरे विश्वासयोग्य थे।
    तुमने मेरा अनुगमन नयी दुल्हन सा किया।
तुमने मेरा अनुगमन मरुभूमि में से होकर किया, उस प्रदेश में अनुगमन किया जिसे कभी कृषि भूमि न बनाया गया था।
इस्राएल के लोग यहोवा को एक पवित्र भेंट थे।
    वे यहोवा द्वारा उतारे गये प्रथम फल थे।
इस्राएल को चोट पहुँचाने का प्रयत्न करने वाले हर एक लोग अपराधी निर्णीत किये गए थे।
    उन बुरे लोगों पर बुरी आपत्तियाँ आई थीं।”
यह सन्देश यहोवा का था।
याकूब के परिवार, यहोवा का सन्देश सुनो।
    इस्राएल के तुम सभी परिवार समूहो, सन्देश सुनो।
जो यहोवा कहता है, वह यह है:
    “क्या तुम समझते हो कि, मैं तुम्हारे पूर्वजों का हितैषी नहीं था?
    तब वे क्यों मुझसे दूर हो गए तुम्हारे पूर्वजों ने निरर्थक हो गये।
तुम्हारे पूर्वजों ने यह नहीं कहा,
    ‘यहोवा ने हमें मिस्र से निकाला।
यहोवा ने मरुभूमि में हमारा नेतृत्व किया।
    यहोवा हमे सूखे चट्टानी प्रदेश से लेकर आया,
यहोवा ने हमें अन्धकारपूर्ण और भयपूर्ण देशों में राह दिखाई।
    कोई भी लोग वहाँ नहीं रहते कोई भी लोग उस देश से यात्रा नहीं करते।
लेकिन यहोवा ने उस प्रदेश में हमारा नेतृत्व किया।
    अत: वह यहोवा अब कहाँ हैं?’

“यहोवा कहता है, मैं तुम्हें अनेक अच्छी चीज़ों से भरे उत्तम देश में लाया।
    मैंने यह किया जिससे तुम वहाँ उगे हुये फल और पैदावार को खा सके।
    किन्तु तुम आए और मेरे देश को तुमने ‘गन्दा’ किया।
मैंने वह देश तुम्हें दिया था,
    किन्तु तुमने उसे बुरा स्थान बनाया।”

“याजकों ने नहीं पूछा, ‘यहोवा कहाँ हैं’ व्यवस्था को जाननेवाले लोगों ने मुझको जानना नहीं चाहा।
    इस्राएल के लोगों के प्रमुख मेरे विरुद्ध चले गए।
नबियों ने झूठे बाल देवता के नाम भविष्यवाणी की।
    उन्होंने निरर्थक देव मूर्तियों की पूजा की।”

यहोवा कहता है, “अत: मैं अब तुम्हें फिर दोषी करार दूँगा,
    और तुम्हारे पौत्रों को भी दोषी ठहराऊँगा।
10 समुद्र पार कित्तियों के द्वीपों को जाओ
    और देखो किसी को केदार प्रदेश को भेजो
और उसे ध्यान से देखने दो।
    ध्यान से देखो क्या कभी किसी ने ऐसा काम किया:
11 क्या किसी राष्ट्र के लोगों ने कभी अपने पुराने देवताओं को नये देवता से बदला है नहीं!
    निसन्देह उनके देवता वास्तव में देवता हैं ही नहीं।
किन्तु मेरे लोगों ने अपने यशस्वी परमेश्वर को निरर्थक देव मूर्तियों से बदला हैं।

12 “आकाश, जो हुआ है उससे अपने हृदय को आघात पहुँचने दो!
    भय से काँप उठो!”
    यह सन्देश यहोवा का था।
13 “मेरे लोगों ने दो पाप किये हैं।
    उन्होंने मुझे छोड़ दिया (मैं ताजे पानी का सोता हूँ।)
और उन्होंने अपने पानी के निजी हौज खोदे हैं।
(वे अन्य देवताओं के भक्त बने हैं।)
    किन्तु उनके हौज टूटे हैं।
उन हौजों में पानी नहीं रुकेगा।

14 “क्या इस्राएल के लोग दास हो गए हैं
    ल के लोगों की सम्पत्ति अन्य लोगों ने क्यों ले ली
15 जवान सिंह (शत्रु) इस्राएल राष्ट्र पर दहाड़ते हैं, गुरते हैं।
    सिंहों ने इस्राएल के लोगों का देश उजाड़ दिया हैं।
इस्राएल के नगर जला दिये गए हैं।
    उनमें कोई भी नहीं रह गया है।
16 नोप और तहपन्हेस नगरों के लोगों ने तुम्हारे सिर के शीर्ष को कुचल दिया है।
17 यह परेशानी तुम्हारे अपने दोष के कारण है।
    तुम अपने यहोवा परमेश्वर से विमुख हो गए, जबकि वह सही दिशा में तुम्हें ले जा रहा था।
18 यहूदा के लोगों, इसके बारे में सोचो:
    क्या उसने मिस्र जाने में सहायता की क्या इसने नील नदी का पानी पीने में सहायता की नहीं!
    क्या इसने अश्शूर जाने में सहायता की क्या इसने परात नदी का जल पीने में सहायता की नहीं!
19 तुमने बुरे काम किये, और वे बुरी चीजें तुम्हें केवल दण्ड दिलाएंगी।
    विपत्तियाँ तुम पर टूट पड़ेंगी और ये विपत्तियाँ तुम्हें पाठ पढ़ाएंगी।
इस विषय में सोचो: तब तुम यह समझोगे कि अपने परमेश्वर से विमुख हो जाना कितना बुरा है।
    मुझसे न डरना बुरा है।”
यह सन्देश मेरे स्वामी सर्वशक्तिमान यहोवा का था।
20 “यहूदा बहुत पहले तुमने अपना जुआ फेंक दिया था।
    तुमने वह रस्सियाँ तोड़ फेंकी जिसे मैं तुम्हें अपने पास रखने में काम में लाता था।
तुमने मुझसे कहा, ‘मै आपकी सेवा नहीं करूँगा!’
    सच्चाई यह है कि तुम वेश्या की तरह हर एक ऊँची पहाड़ी पर
और हर एक हरे पेड़ के नीचे लेटे और काम किये।
21 यहूदा, मैंने तुम्हें विशेष अंगूर की बेल की तरह रोपा।
    तुम सभी अच्छे बीज के समान थे।
तुम उस भिन्न बेल में कैसे बदले
    जो बुरे फल देती है
22 यदि तुम अपने को ल्ये से भी धोओ,
    बहुत साबुन भी लगाओ,
तो भी मैं तुम्हारे दोष के दाग को देख सकता हूँ।”
    यह सन्देश परमेश्वर यहोवा का था।
23 “यहूदा, तुम मुझसे कैसे कह सकते हो,
    ‘मै अपराधी नहीं हूँ, मैंने बाल की मूर्तियों की पूजा नहीं की है!’
उन कामों के बारे में सोचों
    जिन्हें तुमने घाटी में किये।
उस बारे में सोचों, तुमने क्या कर डाला है।
    तुम उस तेज ऊँटनी के समान हो जो एक स्थान से दूसरे स्थान को दौड़ती है।
24 तुम उस जँगली गधी की तरह हो जो मरुभूमि में रहती है
    और सहभोग के मौसम में जो हवा को सूंघती है (गन्ध लेती है।)
कोई व्यक्ति उसे कामोत्तेजना के समय लौटा कर ला नहीं सकता।
    सहभोग के समय हर एक गधा जो उसे चाहता है, पा सकता है।
उसे खोज निकालना सरल है।
25 यहूदा, देवमूर्तियों के पीछे दौड़ना बन्द करो।
    उन अन्य देवताओं के लिये प्यास को बुझ जाने दो।
किन्तु तुम कहते हो, ‘यह व्यर्थ है! मैं छोड़ नहीं सकता!
    मैं उन अन्य देवताओं से प्रेम करता हूँ।
मैं उनकी पूजा करना चाहता हूँ।’

26 “चोर लज्जित होता है जब उसे लोग पकड़ लेते हैं।
    उसी प्रकार इस्राएल का परिवार लज्जित है।
राजा और प्रमुख, याजक और नबी लज्जित हैं।
27 वे लोग लकड़ी के टुकड़ो से बातें करते हैं, वे कहते हैं,
    ‘तुम मेरे पिता हो।’
वे लोग चट्टान से बात करते हैं, वे कहते हैं,
    ‘तुमने मुझे जन्म दिया है।’
वे सभी लोग लज्जित होंगे।
वे लोग मेरी ओर ध्यान नहीं देते।
    उन्होंने मुझसे पीठ फेर ली है।
किन्तु जब यहूदा के लोगों पर विपत्ति आती है
    तब वे मुझसे कहते हैं, ‘आ और हमें बचा!’
28 उन देवमूर्तियों को आने और तुमको बचाने दो!
    वे देवमूर्तियाँ कहाँ हैं जिसे तुमने अपने लिये बनाया है हमें देखने दो,
क्या वे मूर्तियाँ आती हैं और तुम्हारी रक्षा विपत्ति से करती हैं
    यहूदा के लोगों, तुम लोगों के पास उतनी मूर्तियाँ हैं जितने नगर।

29 “तुम मुझसे विवाद क्यों करते हो
    तुम सभी मेरे विरुद्ध हो गए हो।”
    यह सन्देश यहोवा का था।
30 “यहूदा के लोगों, मैंने तुम्हारे लोगों को दण्ड दिया,
    किन्तु इसका कोई परिणाम न निकला।
तुम तब लौट कर नहीं आए जब दण्डित किये गये।
    तुमने उन नबियों को तलवार के घाट उतारा जो तुम्हारे पास आए।
तुम खूंखार सिंह की तरह थे
    और तुमने नबियों को मार डाला।”
31 इस पीढ़ी के लोगों, यहोवा के सन्देश पर ध्यान दो:

“क्या मैं इस्राएल के लोगों के लिये मरुभूमि सा बन गया?
    क्या मैं उनके लिये अंधेरे और भयावने देश सा बन गया?
मेरे लोग कहते है, ‘हम अपनी राह जाने को स्वतन्त्र हैं,
    यहोवा, हम फिर तेरे पास नहीं लौटेंगे!’
वे उन बातों को क्यों कहते हैं?
32 क्या कोई युवती अपने आभूषण भूलती है नहीं।
    क्या कोई दुल्हन अपने श्रृंगार के लिए अपना टुपट्टा भूल जाती है नहीं।
किन्तु मेरे लोग मुझे अनगिनत दिनों से भूल गए हैं।

33 “यहूदा, तुम सचमुच प्रेमियों (झूठे देवताओं) के पीछे पड़ना जानते हो।
    अत: तुमने पाप करना स्वयं ही सीख लिया है।
34 तुम्हारे हाथ खून से रंगे हैं! यह गरीब और भोले लोगों का खून है।
    तुमने लोगों को मारा और वे लोग ऐसे चोर भी नहीं थे जिन्हें तुमने पकड़ा हो!
तुम वे बुरे काम करते हो!
35 किन्तु तुम फिर कहते रहते हो, ‘हम निरपराध हैं।
    परमेश्वर मुझ पर क्रोधित नहीं है।’
अत: मैं तुम्हें झूठ बोलने वाला अपराधी होने का भी निर्णय दूँगा।
    क्यों क्योंकि तुम कहते हो, “मैंने कुछ भी बुरा नहीं किया है।”
36 तुम्हारे लिये इरादे को बदलना बहुत आसान हैं।
    अश्शूर ने तुम्हें हताश किया! अत: तुमने अश्शूर को छोड़ा और सहायता के लिये मिस्र पहुँचे।
मिस्र तुम्हें हताश करेगा।
37 ऐसा होगा कि तुम मिस्र भी छोड़ोगे
    और तुम्हारे हाथ लज्जा से तुम्हारी आँखों पर होंगे।
तुमने उन देशों पर विश्वास किया।
    किन्तु तुम्हें उन देशों में कोई सफलता नहीं मिलेगी।
    क्यों क्योंकि यहोवा ने उन देशों को अस्वीकार कर दिया है।

“यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को तलाक देता है,
    और वह पत्नी उसे छोड़ देती है तथा अन्य व्यक्ति से विवाह कर लेती है
    तो क्या वह व्यक्ति अपनी पत्नी के पास फिर आ सकता है नहीं!
यदि वह व्यक्ति उस स्त्री के पास लौटेगा तो देश पूरी तरह गन्दा हो जाएगा।
    यहूदा, तुमने वेश्या की तरह अनेक प्रेमियों (असत्य देवताओं) के साथ काम किये
    और अब तुम मेरे पास लौटना चाहते हो!” यह सन्देश यहोवा का था।
“यहूदा, खाली पहाड़ी की चोटी को देखो।
    क्या कोई ऐसी जगह है जहाँ तुम्हारा अपने प्रेमियों (असत्य देवताओं) के साथ शारीरिक सम्बन्ध न चला
तुम सड़क के किनारे प्रेमियों की प्रतीक्षा करती बैठी हो।
    तुम वहाँ मरुभूमि में प्रतीक्षा करते अरब की तरह बैठी।
तुमने देश को गन्दा किया है!
    कैसे तुमने बहुत से बुरे काम किये
    और तुम मेरी अभक्त रही।
तुमने पाप किये अत: वर्षा नहीं आई!
    बसन्त समय की कोई वर्षा नहीं हुई।
किन्तु अभी भी तुम लज्जित होने से इन्कार करती हो।
किन्तु अब तुम मुझे बुलाती हो।
    ‘मेरे पिता, तू मेरे बचपन से मेरे प्रिय मित्र रहा है।’
तुमने ये भी कहा,
    ‘परमेश्वर सदैव मुझ पर क्रोधित नहीं रहेगा।
    परमेश्वर का क्रोध सदैव बना नहीं रहेगा।’

“यहूदा, तुम यह सब कुछ कहती हो,
    किन्तु तुम उतने ही पाप करती हो जितने तुम कर सकती हो।”

उन दिनों जब योशिय्याह यहूदा राष्ट्र पर शासन कर रहा था। यहोवा ने मुझसे बातें की। यहोवा ने कहा, “यिर्मयाह, तुमने उन बुरे कामों को देखा जो इस्राएल ने किये तुमने देखा कि उसने कैसे मेरे साथ विश्वासघात किया। उसने हर एक पहाड़ी के ऊपर और हर एक हरे पेड़ के नीच झूठी मूर्तियों की पूजा करके व्यभिचार करने का पाप किया। मैंने अपने से कहा, ‘इस्राएल मेरे पास तब लौटेगी जब वह इन बुरे कामों को कर चुकेगी।’ किन्तु वह मेरे पास लौटी नहीं और इस्राएल की अविश्वासी बहन यहूदा ने देखा कि उसने क्या किया है इस्राएल विश्वासघातिनी थी और यहूदा जानती थी कि मैंने उसे क्यों दूर हटाया। यहूदा जानती थी कि मैंने उसको इसलिए अस्वीकृत किया कि उसने व्यभिचार का पाप किया था। किन्तु इसने उसकी विश्वासघाती बहन को डराया नहीं। यहूदा डरी नहीं। यहूदा भी निकल गई और उसने वेश्या की तरह काम किया। यहूदा ने यह ध्यान भी नहीं दिया कि वह वेश्या की तरह काम कर रही है। अत: उसने अपने देश को ‘गन्दा’ किया। उसने लकड़ी और पत्थर की बनी देवमूर्तियों की पूजा करके व्यभिचार का पाप किया। 10 इस्राएल की अविश्वासी बहन (यहूदा) अपने पूरे हृदय से मेरे पास नहीं लौटी। उसने केवल बहाना बनाया कि वह मेरे पास लौटी है।” यह सन्देश यहोवा का था।

11 यहोवा ने मुझसे कहा, “इस्राएल मेरी भक्त नहीं रही। किन्तु उसके पास कपटी यहूदा की अपेक्षा अच्छा बहाना था। 12 यिर्मयाह, उत्तर की ओर देखो और यह सन्देश बोलो:

“‘अविश्वासी इस्राएल के लोगों तुम लौटो।’
    यह सन्देश यहोवा का था।
‘मैं तुम पर भौहे चढ़ाना छोड़ दूँगा, मैं दयासागर हूँ।’
    यह सन्देश यहोवा का था।
    ‘मैं सदैव तुम पर क्रोधित नहीं रहूँगा।’
13 तुम्हें केवल इतना करना होगा कि तुम अपने पापों को पहचानो।
    तुम यहोवा अपने परमेश्वर के विरुद्ध गए, यह तुम्हारा पाप है।
तुमने अन्य राष्ट्रों के लोगों की देव मूर्तियों को अपना प्रेम दिया।
    तुमने देव मूर्तियों की पूजा हर एक हरे पेड़ के नीचे की।
तुमने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया।”
    यह सन्देश यहोवा का था।

14 “अभक्त लोगों, मेरे पास लौट आओ।” यह सन्देश यहोवा का था। “मैं तुम्हारा स्वामी हूँ। मैं हर एक नगर से एक व्यक्ति लूँगा और हर एक परिवार से दो व्यक्ति और तुम्हें सिय्योन पर लाऊँगा। 15 तब मैं तुम्हें नये शासक दूँगा। वे शासक मेरे भक्त होंगे। वे तुम्हारे मार्ग दर्शन ज्ञान और समझ से करेंगे। 16 उन दिनों तुम लोग बड़ी संख्या में देश में होगे।” यह सन्देश यहोवा का है।

“उस समय लोग फिर यह कभी नहीं कहेंगे, ‘मैं उन दिनों को याद करता हूँ जब हम लोगों के पास यहोवा का साक्षीपत्र का सन्दूक था।’ वे पवित्र सन्दूक के बारे में फिर कभी सोचेंगे भी नहीं। वे न तो इसे याद करेंगे और न ही उसके लिये अफसोस करेंगे। वे दूसरा पवित्र सन्दूक कभी नहीं बनाएंगे। 17 उस समय, यरूशलेम नगर ‘यहोवा का सिंहासन’ कहा जाएगा। सभी राष्ट्र एक साथ यरूशलेम नगर में यहोवा के नाम को सम्मान देने आएंगे। वे अपने हठी और बुरे हृदय के अनुसार अब कभी नहीं चलेंगे। 18 उन दिनों यहूदा का परिवार इस्राएल के परिवार के साथ मिल जायेगा। वे उत्तर में एक देश से एक साथ आएंगे। वे उस देश में आएंगे जिसे मैंने उनके पूर्वजों को दिया था।”

19-20 मैंने अर्थात् यहोवा ने अपने से कहा,

“मैं तुमसे अपने बच्चों का सा व्यवहार करना चाहता हूँ,
    मैं तुम्हें एक सुहावना देश देना चाहता हूँ।
    वह देश जो किसी भी राष्ट्र से अधिक सुन्दर होगा।
मैंने सोचा था कि तुम मुझे ‘पिता’ कहोगे।
    मैंने सोचा था कि तुम मेरा सदैव अनुसरण करोगे।
किन्तु तुम उस स्त्री की तरह हुए जो पतिव्रता नहीं रही।
    इस्राएल के परिवार, तुम मेरे प्रति विश्वासघाती रहे!”
    यह सन्देश यहोवा का था।
21 तुम नंगी पहाड़ियों पर रोना सुन सकते हो।
    इस्राएल के लोग कृपा के लिये रो रहे और प्रार्थना कर रहे हैं।
वे बहुत बुरे हो गए थे।
    वे अपने परमेश्वर यहोवा को भूल गए थे।

22 यहोवा ने यह भी कहा:
“इस्राएल के अविश्वासी लोगों, तुम मेरे पास लौट आओ।
    मेरे पास लौटो, और मैं तुम्हारे अविश्वासी होने के अपराध को क्षमा करूँगा।”

लोगों को कहना चाहिये, “हाँ, हम लोग तेरे पास आएँगे
    तू हमारा परमेश्वर यहोवा है।
23 पहाड़ियों पर देवमूर्तियों की पूजा मूर्खता थी।
    पर्वतों के सभी गरजने वाले दल केवल थोथे निकले।
निश्चय ही इस्राएल की मुक्ति,
    यहोवा अपने परमेश्वर से है।
24 हमारे पूर्वजों की हर एक अपनी चीज बलिरूप में उस घृणित ने खाई है।
    यह तब हुआ जब हम लोग बच्चे थे।
उस घृणित ने हमारे पूर्वजों के पशु भेड़, पुत्र, पुत्री लिये।
25 हम अपनी लज्जा में गड़ जायँ, अपनी लज्जा को हम कम्बल की तरह अपने को लपेट लेने दें।
    हमने अपने परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध पाप किया है।
बचपन से अब तक हमने और हमारे पूर्वजों ने पाप किये हैं।
    हमने अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा नहीं मानी है।”

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