Beginning
परमेश्वर अपने लोगों को वापस लाता है
54 हे स्त्री, तू प्रसन्न से हो जा!
तूने बच्चों को जन्म नहीं दिया किन्तु फिर भी
तुझे अति प्रसन्न होना है।
यहोवा ने कहा, “जो स्त्री अकेली है,
उसकी बहुत सन्तानें होंगी निस्बत उस स्त्री के जिस के पास उसका पति है।”
2 “अपने तम्बू विस्तृत कर,
अपने द्वार पूरे खोल।
अपने तम्बू को बढ़ने से मत रोक।
अपने रस्सियाँ बढ़ा और खूंटे मजबूत कर।
3 क्यों क्योंकि तू अपनी वंश—बेल दायें और बायें फैलायेगी।
तेरी सन्तानें अनेकानेक राष्ट्रों की धरती को ले लेंगी
और वे सन्तानें उन नगरों में फिर बसेंगी जो बर्बाद हुए थे।
4 तू भयभीत मत हो, तू लज्जित नहीं होगी।
अपना मन मत हार क्योंकि तुझे अपमानित नहीं होना होगा।
जब तू जवान थी, तू लज्जित हुई थी किन्तु उस लज्जा को अब तू भूलेगी।
अब तुझको वो लाज नहीं याद रखनी हैं तूने जिसे उस काल में भोगा था जब तूने अपना पति खोया था।
5 क्यों क्योंकि तेरा पति वही था जिसने तुझको रचा था।
उसका नाम सर्वशक्तिमान यहोवा है।
वही इस्राएल की रक्षा करता है, वही इस्राएल का पवित्र है और वही समूची धरती का परमेश्वर कहलाता है!
6 “तू एक ऐसी स्त्री के जैसी थी जिसको उसके ही पति ने त्याग दिया था।
तेरा मन बहुत भारी था किन्तु तुझे यहोवा ने अपना बनाने के लिये बुला लिया।
तू उस स्त्री के समान है जिसका बचपन में ही ब्याह हुआ और जिसे उसके पति ने त्याग दिया है।
किन्तु परमेश्वर ने तुम्हें अपना बनाने के लिये बुला लिया है।”
7 तेरा परमेश्वर कहता है, “मैंने तुझे थोड़े समय के लिये त्यागा था।
किन्तु अब मैं तुझे फिर से अपने पास आऊँगा और अपनी महा करूणा तुझ पर दर्शाऊँगा।
8 मैं बहुत कुपित हुआ
और थोड़े से समय के लिये तुझसे छुप गया किन्तु अपनी महाकरूणा से मैं तुझको सदा चैन दूँगा।”
तेरे उद्धारकर्ता यहोवा ने यह कहा है।
9 परमेश्वर कहता है, “यह ठीक वैसा ही है जैसे नूह के काल में मैंने बाढ़ के द्वारा दुनियाँ को दण्ड दिया था।
मैंने नूह को वरदान दिया कि फिर से मैं दुनियाँ पर बाढ़ नहीं लाऊँगा।
उसी तरह तुझको, मैं वह वचन देता हूँ, मैं तुझसे कुपित नहीं होऊँगा
और तुझसे फिर कठोर वचन नहीं बोलूँगा।”
10 यहोवा कहता है, “चाहे पर्वत लुप्त हो जाये
और ये पहाड़ियाँ रेत में बदल जायें
किन्तु मेरी करूणा तुझे कभी भी नहीं त्यागेगी।
मैं तुझसे मेल करूँगा और उस मेल का कभी अन्त न होगा।”
यहोवा तुझ पर करूणा दिखाता है
और उस यहोवा ने ही ये बातें बतायी हैं।
11 “हे नगरी, हे दुखियारी!
तुझको तुफानों ने सताया है
और किसी ने तुझको चैन नहीं दिया है।
मैं तेरा मूल्यवान पत्थरों से फिर से निर्माण करूँगा।
मैं तेरी नींव फिरोजें और नीलम से धरूँगा।
12 मैं तेरी दीवारें चुनने में माणिक को लगाऊँगा।
तेरे द्वारों पर मैं दमकते हुए रत्नों को जड़ूँगा।
तेरी सभी दीवारें मैं मूल्यवान पत्थरों से उठाऊँगा।
13 तेरी सन्तानें यहोवा द्वारा शिक्षित होंगी।
तेरी सन्तानों की सम्पन्नता महान होगी।
14 मैं तेरा निर्माण खरेपन से करूँगा ताकि तू दमन और अन्याय से दूर रहे।
फिर कुछ नहीं होगा जिससे तू डरेगी।
तुझे हानि पहुँचाने कोई भी नहीं आयेगा।
15 मेरी कोई भी सेना तुझसे कभी युद्ध नहीं करेगी
और यदि कोई सेना तुझ पर चढ़ बैठने का प्रयत्न करे तो तू उस सेना को पराजित कर देगा।
16 “देखो, मैंने लुहार को बनाया है। वह लोहे को तपाने के लिए धौंकनी धौंकता है। फिर वह तपे लोहे से जैसे चाहता है, वैसे औजार बना लेता है। उसी प्रकार मैंने ‘विनाशकर्त्ता’ को बनाया है जो वस्तुओं को नष्ट करता है।
17 “तुझे हराने के लिए लोग हथियार बनायेंगे किन्तु वे हथियार तुझे कभी हरा नहीं पायेंगे। कुछ लोग तेरे विरोध में बोलेंगे। किन्तु हर ऐसे व्यक्ति को बुरा प्रमाणित किया जायेगा जो तेरे विरोध में बोलेगा।”
यहोवा कहता है, “यहोवा के सेवकों को क्या मिलता है उन्हें न्यायिक विजय मिलती है। यह उन्हें मुझसे मिलती हैं।”
परमेश्वर ऐसा भोजन देता है जिससे सच्ची तृप्ति मिलती है
55 “हे प्यासे लोगों, जल के पास आओ।
यदि तुम्हारे पास धन हीं है तो इसकी चिन्ता मत करो।
आओ, खाना लो और खाओ।
आओ, भोजन लो।
तुम्हें इसकी कीमत देने की आवश्यकता नहीं है।
बिना किसी कीमत के दूध और दाखमधु लो।
2 व्यर्थ ही अपना धन ऐसी किसीवस्तु पर क्यों बर्बाद करते हो जो सच्चा भोजन नहीं है
ऐसी किसी वस्तु के लिये क्यों श्रम करते हो जो सचमुच में तुम्हें तृप्त नहीं करती
मेरी बात ध्यान से सुनो। तुम सच्चा भोजन पाओगे।
तुम उस भोजन का आनन्द लोगे। जिससे तुम्हारा मन तृप्त हो जायेगा।
3 जो कुछ मैं कहता हूँ, ध्यान से सुनो।
मुझ पर ध्यान दो कि तुम्हारा प्राण सजीव हो।
तुम मेरे पास आओ और मैं तुम्हारे साथ एक वाचा करूँगा जो सदा—सदा के लिये बना रहेगा।
यह वाचा वैसी ही होगी जैसी वाचा दाऊद के संग मैंने की थी।
मैंने दाऊद को वचन दिया था कि मैं उस पर सदा करूणा करूँगा
और तुम उस वाचा के भरोसे रह सकते हो।
4 मैंने अपनी उस शक्ति का दाऊद को साक्षी बनाया था जो सभी राष्ट्रों के लिये थी।
मैंने दाऊद का बहुत देशों का प्रशासक और उनका सेनापति बनाया था।”
5 अनेक अज्ञात देशों में अनेक अनजानी जातियाँ हैं।
तू उन सभी जातियों को बुलायेगा, जो जातियाँ तुझ से अपरिचित हैं
किन्तु वे भागकर तेरे पास आयेंगी। ऐसा घटेगा क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा ऐसा ही चाहता है।
ऐसा घटेगा क्योंकि वह इस्राएल का पवित्र तुझको मान देता है।
6 सो तुम यहोवा को खोजो।
कहीं बहुत देर न हो जाये।
अब तुम उसको पुकार लो जब तक वह तुम्हारे पास है।
7 हे पापियों! अपने पापपूर्ण जीवन को त्यागो।
तुमको चाहिये कि तुम बुरी बातें सोचना त्याग दो।
तुमको चाहिये कि तुम यहोवा के पास लौट आओ।
जब तुम ऐसा करोगे तो यहोवा तुम्हें सुख देगा।
उन सभी को चाहिये कि वे यहोवा की शरण में आयें क्योंकि परमेश्वर हमें क्षमा करता है।
लोग परमेश्वर को नहीं समझ पायेंगे
8 यहोवा कहता है, “तुम्हारे विचार वैसे नहीं, जैसे मेरे हैं।
तुम्हारी राहें वैसी नहीं जैसी मेरी राहें हैं।
9 जैसे धरती से ऊँचे स्वर्ग हैं वैसे ही तुम्हारी राहों से मेरी राहें ऊँची हैं
और मेरे विचार तुम्हारे विचारों से ऊँचे हैं।”
ये बातें स्वयं यहोवा ने ही कहीं हैं।
10 “आकाश से वर्षा और हिम गिरा करते हैं
और वे फिर वहीं नहीं लौट जाते जब तक वे धरती को नहीं छू लेते हैं
और धरती को गीला नहीं कर देते हैं।
फिर धरती पौधों को अंकुरित करती है
और उनको बढ़ाती है और वे पौधे किसानों के लिये बीज को उपजाते हैं
और लोग उन बीजों से खाने के लिये रोटियाँ बनाते हैं।
11 ऐसे ही मेरे मुख में से मेरे शब्द निकलते हैं
और जब तक घटनाओं को घटा नहीं लेते, वे वापस नहीं आते हैं।
मेरे शब्द ऐसी घटनाओं को घटाते हैं जिन्हें मैं घटवाना चाहता हूँ।
मेरे शब्द वे सभी बातें पूरी करा लेते हैं जिनको करवाने को मैं उनको भेजता हूँ।
12 “जब तुम्हें आनन्द से भरकर शांति और एकता के साथ में उस धरती से छुड़ाकर ले जाया जा रहा होगा जिसमें तुम बन्दी थे, तो तुम्हारे सामने खुशी में पहाड़ फट पड़ेंगे और थिरकने लगेंगे।
पहाड़ियाँ नृत्य में फूट पड़ेंगी।
तुम्हारे सामने जंगल के सभी पेड़ ऐसे हिलने लगेंगे जैसे तालियाँ पीट रहे हो।
13 जहाँ कंटीली झाड़ियाँ उगा करती हैं वहाँ देवदार के विशाल वृक्ष उगेंगे।
जहाँ खरपतवार उगा करते थे, वहाँ हिना के पेड़ उगेंगे।
ये बातें उस यहोवा को प्रसिद्ध करेंगी।
ये बातें प्रमाणित करेंगी कि यहोवा शक्तिपूर्णहै।
यह प्रमाण कभी नष्ट नहीं होगा।”
सभी जातियाँ यहोवा का अनुसरण करेंगी
56 यहोवा ने यें बातें कही थीं, “सब लोगों के साथ वही काम करो जो न्यायपूर्ण हों! क्यों क्योंकि मेरा उद्धार शीघ्र ही तुम्हारे पास आने को है। सारे संसार में मेरा छुटकारा शीघ्र ही प्रकट होगा।”
2 ऐसा व्यक्ति जो सब्त के दिन—सम्बन्धी परमेश्वर के नियम का पालन करता है, धन्य होगा और वह वक्ति जो बुरा नहीं करेगा, प्रसन्न रहेगा। 3 कुछ ऐसे लोग जो यहूदी नहीं हैं, अपने को यहोवा से जोड़ेंगे। ऐसे व्यक्तियों को यह नहीं कहना चाहिये: “यहोवा अपने लोगों में मुझे स्वीकार नहीं करेगा।” किसी हिजड़े को यह नहीं कहना चाहिये: “मैं लकड़ी का एक सूखा टुकड़ा हूँ। मैं किसी बच्चे को जन्म नहीं दे सकता।”
4 इन हिजड़ों को एसी बातें नहीं कहनी चाहिये क्योंकि यहोवा ने कहा है “इनमें से कुछ हिजड़े सब्त के नियमों का पालन करते हैं और जो मैं चाहता हूँ, वे वैसा ही करना चाहते हैं। वे सच्चे मन से मेरी वाचा का पालन करते हैं। 5 इसलिये मैं अपने मन्दिर में उनके लिए यादगार का एक पत्थर लगाऊँगा। मेरे नगर में उनका नाम याद किया जायेगा। हाँ! मैं उन्हें पुत्र—पुत्रियों से भी कुछ अच्छा दूँगा। उन हिजड़ों को मैं एक नाम दूँगा जो सदा—सदा बना रहेगा। मेरे लोगों से वे काट कर अलग नहीं किये जायेंगे।”
6 “कुछ ऐसे लोग जो यहूदी नहीं हैं, अपने आपको यहोवा से जोड़ेंगे। वे ऐसा इसलिये करेंगे कि यहोवा की सेवा और यहोवा के नाम को प्रेम कर पायें। यहोवा के सेवक बनने के लिये वे स्वयं को उससे जोड़ लेंगे। वे सब्त के दिन को उपासना के एक विशेष दिन के रूप में माना करेंगे और वे मेरी वाचा (विधान) का गम्भीरता से पालन करेंगे। 7 मैं उन लोगों को अपने पवित्र पर्वत पर लाऊँगा। अपने प्रार्थना भवन में मैं उन्हें आनन्द से भर दूँगा। वे जो भेंट और बलियाँ मुझे अर्पित करेंगे, मैं उनसे प्रसन्न होऊँगा। क्यों क्योंकि मेरा मन्दिर सभी जातियों का प्रार्थना का गृह कहलायेगा।” 8 परमेश्वर ने इस्राएल के देश निकाला दिये इस्राएलियों को परस्पर इकट्ठा किया।
मेरा स्वामी यहोवा जिसने यह किया, कहता है, “मैंने जिन लोगों को एक साथ इकट्ठा किया, उन लोगों के समूह में दूसरे लोगों को भी इकट्ठा करूँगा।”
9 हे वन के पशुओं!
तुम सभी खाने पर आओ।
10 ये धर्म के रखवाले (नबी) सभी नेत्रहीन हैं।
उनको पता नहीं कि वे क्या कर रहे हैं।
वे उस गूँगे कुत्ते के समान हैं
जो नहीं जानता कि कैसे भौंका जाता है वे धरती पर लोटते हैं
और सो जाते हैं। हाय!
उनको नींद प्यारी है।
11 वे लोग ऐसे हैं जैसे भूखें कुत्ते हों।
जिनको कभी भी तृप्ति नहीं होती।
वे ऐसे चरवाहे हैं जिनको पता तक नहीं कि वे क्या कर रहे हैं
वे उस की अपनी उन भेड़ों से हैं जो अपने रास्ते से भटक कर कहीं खो गयी।
वे लालची हैं उनको तो बस अपना पेट भरना भाता है।
12 वे कहा करते हैं,
“आओ थोड़ी दाखमधु ले
और उसे पीयें यव सुरा भरपेट पियें।
हम कल भी यही करेंगे,
कल थोड़ी और अधिक पियेंगे।”
इस्राएल परमेश्वर की नहीं मानता है
57 अच्छे लोग चले गये किन्तु
इस पर तो ध्यान किसी ने नहीं दिया।
लोग समझते नहीं हैं कि क्या कुछ घट रहा है।
भले लोग एकत्र किये गये।
लोग समझते नहीं कि विपत्तियाँ आ रही हैं।
उन्हें पता तक नहीं हैं कि भले लोग रक्षा के लिये एकत्र किये गये।
2 किन्तु शान्ति आयेगी
और लोग आराम से अपने बिस्तरों में सोयेंगे और लोग उसी तरह जीयेंगे जैसे परमेश्वर उनसे चाहता है।
3 “हे चुड़ैलों के बच्चों, इधर आओ।
तुम्हारा पिता व्यभिचार का पापी है।
तुम्हारी माता अपनी देह यौन व्यापार में बेचा करती है।
इधर आओ!
4 हे विद्रोहियों और झूठी सन्तानों,
तुम मेरी हँसी उड़ाते हो।
मुझ पर अपना मुँह चिढ़ाते हो।
तुम मुझ पर जीभ निकालते हो।
5 तुम सभी लोग हरे पेड़ों के तले झूठे देवताओं के कारण
कामातुर होते हो।
हर नदी के तीर पर तुम बाल वध करते हो
और चट्टानी जगहों पर उनकी बलि देते हो।
6 नदी की गोल बट्टियों को तुम पूजना चाहते हो।
तुम उन पर दाखमधु उनकी पूजा के लिये चढ़ाते हो।
तुम उन पर बलियों को चढ़ाया करते हो किन्तु तुम उनके बदले बस पत्थर ही पाते हो।
क्या तुम यह सोचते हो कि मैं इससे प्रसन्न होता हूँ नहीं! यह मुझको प्रसन्न नहीं करता है।
तुम हर किसी पहाड़ी और हर ऊँचे पर्वत पर अपना बिछौना बनाते हो।
7 तुम उन ऊँची जगहों पर जाया करते हो
और तुम वहाँ बलियाँ चढ़ाते हो।
8 और फिर तुम उन बिछौने के बीच जाते हो
और मेरे विरूद्ध तुम पाप करते हो।
उन देवों से तुम प्रेम करते हो।
वे देवता तुमको भाते हैं।
तुम मेरे साथ में थे किन्तु उनके साथ होने के लिये तुमने मुझको त्याग दिया।
उन सभी बातों पर तुमने परदा डाल दिया जो तुम्हें मेरी याद दिलाती हैं।
तुमने उनको द्वारों के पीछे और द्वार की चौखटों के पीछे छिपाया
और तुम उन झूठे देवताओं के पास उन के संग वाचा करने को जाते हो।
9 तुम अपना तेल और फुलेल लगाते हो
ताकि तुम अपने झूठे देवता मोलक के सामने अच्छे दिखो।
तुमने अपने दूत दूर—दूर देशों को भेजे हैं
और इससे ही तुम नरक में, मृत्यु के देश में गिरोगे।
10 इन बातों को करने में तूने परिश्रम किया है।
फिर भी तू कभी भी नहीं थका।
तुझे नई शक्ति मिलती रही
क्योंकि इन बातों में तूने रस लिया।
11 तूने मुझको कभी नहीं याद
किया यहाँ तक कि तूने मुझ पर ध्यान तक नहीं दिया!
सो तू किसके विषय में चिन्तित रहा करता था
तू किससे भयभीत रहता था
तू झूठ क्यों कहता था
देख मैं बहुत दिनों से चुप रहता आया हूँ
और फिर भी तूने मेरा आदर नहीं किया।
12 तेरी ‘नेकी’ का मैं बखान कर सकता था और तेरे उन धार्मिक कर्मों का जिनको तू करता है, बखान कर सकता था।
किन्तु वे बातें अर्थहीन और व्यर्थ हैं!
13 जब तुझको सहारा चाहिये तो तू उन झूठे देवों को जिन्हें तूने अपने चारों ओर जुटाया है,
क्यों नहीं पुकारता है।
किन्तु मैं तुझको बताता हूँ कि उन सब को आँधी उड़ा देगी।
हवा का एक झोंका उन्हें तुम से छीन ले जायेगा।
किन्तु वह व्यक्ति जो मेरे सहारे है, धरती को पायेगा।
ऐसा ही व्यक्ति मेरे पवित्र पर्वत को पायेगा।”
यहोवा अपने भक्तों की रक्षा करेगा
14 रास्ता साफ कर! रास्ता साफ करो!
मेरे लोगों के लिये राह को साफ करो!
15 वह जो ऊँचा है और जिसको ऊपर उठाया गया है,
वह जो अमर है,
वह जिसका नाम पवित्र है,
वह यह कहता है, “एक ऊँचे और पवित्र स्थान पर रहा करता हूँ,
किन्तु मैं उन लोगों के बीच भी रहता हूँ जो दु:खी और विनम्र हैं।
ऐसे उन लोगों को मैं नया जीवन दूँगा जो मन से विनम्र हैं।
ऐसे उन लोगों को मैं नया जीवन दूँगा जो मन से विनम्र हैं।
ऐसे उन लोगों को मैं नया जीवन दूँगा जो हृदय से दु:खी हैं।
16 मैं सदा—सदा ही मुकद्दमा लड़ता रहूँगा।
सदा—सदा ही मैं तो क्रोधित नहीं रहूँगा।
यदि मैं कुपित ही रहूँ तो मनुष्य की आत्मा यानी वह जीवन जिसे मैंने उनको दिया है,
मेरे सामने ही मर जायेगा।
17 उन्होंने लालच से हिंसा भरे स्वार्थ साधे थे और उसने मुझको क्रोधित कर दिया था।
मैंने इस्राएल को दण्ड दिया।
मैंने उसे निकाल दिया क्योंकि मैं उस पर क्रोधित था और इस्राएल ने मुझको त्याग दिया।
जहाँ कहीं इस्राएल चाहता था, चला गया।
18 मैंने इस्राएल की राहें देख ली थी।
किन्तु मैं उसे क्षमा (चंगा) करूँगा।
मैं उसे चैन दूँगा और ऐसे वचन बोलूँगा जिस से उसको आराम मिले और मैं उसको राह दिखाऊँगा।
फिर उसे और उसके लोगों को दु:ख नहीं छू पायेगा।
19 उन लोगों को मैं एक नया शब्द शान्ति सिखाऊँगा।
मैं उन सभी लोगों को शान्ति दूँगा जो मेरे पास हैं और उन लोगों को जो मुझ से दूर हैं।
मैं उन सभी लोगों को चंगा (क्षमा) करूँगा!”
ने ये सभी बातें बतायी थी।
20 किन्तु दुष्ट लोग क्रोधित सागर के जैसे होते हैं।
वे चुप या शांत नहीं रह सकते।
वे क्रोधित रहते हैं और समुद्र की तरह कीचड़ उछालते रहते हैं।
मेरे परमेश्वर का कहना है: 21 “दुष्ट लोगों के लिए कहीं कोई शांति नहीं है।”
लोगों से कहो कि वे परमेश्वर का अनुसरण करें
58 जोर से पुकारो, जितना तुम पुकार सको! अपने को मत रोको!
जोर से पुकारो जैसे नरसिंगा गरजता है!
लोगों को उनके बुरे कामों के बारे में जो उन्होंने किये हैं, बताओ!
याकूब के घराने को उनके पापों के बारे में बताओ!
2 वे सभी प्रतिदिन मेरी उपासना को आते हैं
और वे मेरी राहों को समझना चाहते हैं
वे ठीक वैसा ही आचरण करते हैं जैसे वे लोग किसी ऐसी जाति के हों जो वही करती है जो उचित होता है।
जो अपने परमेश्वर का आदेश मानते हैं।
वे मुझसे चाहते हैं कि उनका न्याय निष्पक्ष हो।
वे चाहते हैं कि परमेश्वर उनके पास रहे।
3 अब वे लोग कहते हैं, “तेरे प्रति आदर दिखाने के लिये हम भोजन करना बन्द कर देते हैं। तू हमारी ओर देखता क्यों नहीं तेरे प्रति आदर व्यक्त करने के लिये हम अपनी देह को क्षति पहुँचाते हैं। तू हमारी ओर ध्यान क्यों नहीं देता”
किन्तु यहोवा कहता है, “उपवास के उन दिनों में उपवास रखते हुए तुम्हें आनन्द आता है किन्तु उन्हीं दिनों तुम अपने दासों का खून चूसते हो। 4 जब तुम उपवास करते हो तो भूख की वजह से लड़ते—झगड़ते हो और अपने दुष्ट मुक्कों से आपस में मारा—मारी करते हो। यदि तुम चाहते हो कि स्वर्ग में तुम्हारी आवाज सुनी जाये तो तुम्हें उपवास ऐसे नहीं रखना चाहिये जैसे तुम आज कल रखते हो। 5 तुम क्या यह सोचते हो कि भोजन नहीं करने के उन विशेष दिनों में बस मैं लोगों को अपने शरीरों को दु:ख देते देखना चाहता हूँ क्या तुम ऐसा सोचते हो कि मैं लोगों को दु:खी देखना चाहता हूँ क्या तुम यह सोचते हो कि मैं लोगों को मुरझाये हुए पौधों के समान सिर लटकाये और शोक वस्त्र पहनते देखना चाहता हूँ क्या तुम यह सोचते हो कि मैं लोगों को अपना दु:ख प्रकट करने के लिये राख में बैठे देखना चाहता हूँ यही तो वह सब कुछ है जो तुम खाना न खाने के दिनों में करते हो। क्या तुम ऐसा सोचते हो कि यहोवा तुमसे बस यही चाहता है
6 “मैं तुम्हें बताऊँगा कि मुझे कैसा विशेष दिन चाहिये—एक ऐसा दिन जब लोगों को आज़ाद किया जाये। मुझे एक ऐसा दिन चाहिये जब तुम लोगों के बोझ को उन से दूर कर दो। मैं एक ऐसा दिन चाहता हूँ जब तुम दु:खी लोगों को आज़ाद कर दो। मुझे एक ऐसा दिन चाहिये जब तुम उनके कंधों से भार उतार दो। 7 मैं चाहता हूँ कि तुम भूखे लोगों के साथ अपने खाने की वस्तुएँ बाँटो। मैं चाहता हूँ कि तुम ऐसे गरीब लोगों को ढूँढों जिनके पास घर नहीं है और मेरी इच्छा है कि तुम उन्हें अपने घरों में ले आओ। तुम जब किसी ऐसे व्यक्ति को देखो, जिसके पास कपड़े न हों तो उसे अपने कपड़े दे डालो। उन लोगों की सहायता से मुँह मत मोड़ो, जो तुम्हारे अपने हों।”
8 यदि तुम इन बातों को करोगे तो तुम्हारा प्रकाश प्रभात के प्रकाश के समान चमकने लगेगा। तुम्हारे जख्म भर जायेंगे। तुम्हारी “नेकी” (परमेश्वर) तुम्हारे आगे—आगे चलने लगोगी और यहोवा की महिमा तुम्हारे पीछे—पीछे चली आयेगी। 9 तुम तब यहोवा को जब पुकारोगे, तो यहोवा तुम्हें उसका उत्तर देगा। जब तुम यहोवा को पुकारोगे तो वह कहेगा, “मैं यहाँ हूँ।”
तुम्हें लोगों का दमन करना और लोगों को दु:ख देना छोड़ देना चाहिये। तुम्हें लोगों से किसी बातों के लिये कड़वे शब्द बोलना और उन पर लांछन लगाना छोड़ देना चाहिये। 10 तुम्हें भूखों की भूख के लिये दु:ख का अनुभव करते हुए उन्हें भोजन देना चाहिये। दु:खी लोगों की सहायता करते हुए तुम्हें उनकी आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिये। जब तुम ऐसा करोगे तो अन्धेरे में तुम्हारी रोशनी चमक उठेगी और तुम्हें कोई दु:ख नहीं रह जायेगा। तुम ऐसे चमक उठोगे जैसे दोपहर के समय धूप चमकती है।
11 यहोवा सदा तुम्हारी अगुवाई करेगा। मरूस्थल में भी वह तेरे मन की प्यास बुझायेगा। यहोवा तेरी हड्डियों को मज़बूत बनायेगा। तू एक ऐसे बाग़ के समान होगा जिसमें पानी की बहुतायत है। तू एक ऐसे झरने के समान होगा जिसमें सदा पानी रहता है।
12 बहुत वर्षों पहले तुम्हारे नगर उजाड़ दिये गये थे। इन नगरों को तुम नये सिरे से फिर बसाओगे। इन नगरों का निर्माण तुम इनकी पुरानी नीवों पर करोगे। तुम टूटे परकोटे को बनाने वाले कहलाओगे और तुम मकानों और रास्तों को बहाल करने वाले कहलाओगे।
13 ऐसा उस समय होगा जब तू सब्त के बारे में परमेश्वर के नियमों के विरूद्ध पाप करना छोड़ देगा और ऐसा उस समय होगा जब तू उस विशेष दिन, स्वयं अपने आप को प्रसन्न करने के कामों को करना रोक देगा। सब्त के दिन को तुझे एक खुशी का दिन कहना चाहिये। यहोवा के इस विशेष दिन का तुझे आदर करना चाहिये। जिन बातों को तू हर दिन कहता और करता है, उनको न करते हुए तुझे उस विशेष दिन का आदर करना चाहिये।
14 तब तू यहोवा में प्रसन्नता प्राप्त करेगा, और मैं यहोवा धरती के ऊँचे—ऊँचे स्थानों पर “मैं तुझको ले जाऊँगा। मैं तेरा पेट भरूँगा। मैं तुझको ऐसी उन वस्तुओं को दूँगा जो तेरे पिता याकूब के पास हुआ करती थीं।” ये बातें यहोवा ने बतायी थीं!
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