Beginning
इस्राएल को परमेश्वर की शक्ति पर भरोसा रखना चाहिये
31 उन लोगों को धिक्कार है जो सहायता पाने के लिये मिस्र की ओर उतर रहे हैं। ये लोग घोड़े चाहते हैं। उनका विचार है, घोड़े उन्हें बचा लेंगे। लोगों को आशा है कि मिस्र के रथ और घुड़सवार सैनिक उन्हें बचा लेंगे। लोग सोचते हैं कि वे सुरक्षित इसलिये हैं कि वह एक विशाल सेना है। लोग इस्राएल के पवित्र (परमेश्वर) पर भरोसा नहीं रखते। लोग यहोवा से सहायता नहीं माँगते।
2 किन्तु, यहोवा ही बुद्धिमान है और वह यहोवा ही है जो उन पर विपत्तियाँ ढायेगा। लोग यहोवा के आदेश को नहीं बदल पायेंगे। यहोवा बुरे लोगों (यहूदा) के विरुद्ध खड़ा होगा और युद्ध करेगा। यहोवा उन लोगों (मिस्र) के विरुद्ध युद्ध करेगा, जो उन्हें सहायता पहुँचाने का यत्न करते हैं।
3 मिस्र के लोग मात्र मनुष्य हैं परमेश्वर नहीं। मिस्र के घोड़े मात्र पशु हैं, आत्मा नहीं। यहोवा अपना हाथ आगे बढ़ायेगा और सहायक (मिस्र) पराजित हो जायेगा और सहायता चाहने वाले लोगों (यहूदा) का पतन होगा। वे सभी लोग साथ साथ मिट जायेंगे।
4 यहोवा ने मुझ से यह कहा, “जब कोई सिंह अथवा सिंह का कोई बच्चा किसी पशु को खाने के लिये पकड़ता है तो वह मरे हुए पशु पर खड़ा हो जाता है और दहाड़ता है। उस समय उस शक्तिशाली सिंह को कोई भी डरा नहीं पाता। यदि चरवाहे आयें और उस सिंह का हॉका करने लगे तो भी वह सिंह डरेगा नहीं। लोग कितना ही शोर करते रहें, किन्तु वह सिंह नहीं भागेगा।”
इसी प्रकार सर्वशक्तिमान यहोवा सिय्योन पर्वत पर उतरेगा। उस पर्वत पर यहोवा युद्ध करेगा। 5 सर्वशक्तिमान यहोवा वैसे ही यरूशलेम की रक्षा करेगा जैसे अपने घोंसलों के ऊपर उड़ती हुई चिड़ियाँ। यहोवा उसे बचायेगा और उसकी रक्षा करेगा। यहोवा ऊपर से होकर निकल जायेगा और यरूशलेम की रक्षा करेगा।
6 हे, इस्राएल के वंशज। तुमने परमेश्वर से विद्रोह किया। तुम्हें परमेश्वर की ओर मुड़ आना चाहिये। 7 तब लोग उन सोने चाँदी की मूर्तियों को पूजना छोड़ेंगे जिन्हें तुमने बनाया है। उन मूर्तियों को बनाकर तुमने सचमुच पाप किया था।
8 यह सच है कि तलवार के द्वारा अश्शूर को हरा दिया जायेगा। किन्तु वह तलवार किसी मनुष्य की तलवार नहीं होगी। अश्शूर नष्ट हो जायेगा किन्तु वह विनाश किसी मनुष्य की तलवार के द्वारा नहीं किया जायेगा। अश्शूर परमेश्वर की तलवार से भाग निकलेगा। वह उस तलवार से भागेगा। किन्तु उसके जवान पुरुषों को पकड़कर दास बना लिया जायेगा। 9 घबराहट में उनका शरण दाता गायब हो जायेगा। उनके नेता पराजित कर दिये जायेंगे और वे अपने झण्डे को छोड़ देंगे।
ये सभी बातें यहोवा ने कही थी। यहोवा की अग्नि स्थल (वेदी) सिय्योन पर है और यहोवा की भट्टी (वेदी) यरूशलेम में है।
मुखियाओं को खरा और सच्चा होना चाहिए
32 मैं जो बातें बता रहा हूँ, उन्हें सुनो! किसी राजा को ऐसे राज करना चाहिये जिससे भलाई आये। मुखियाओं को लोगों का नेतृत्व करते समय निष्पक्ष निर्णय लेने चाहिये। 2 यदि ऐसा होगा तो राजा उस स्थान के समान हो जायेगा जहाँ लोग आँधी और वर्षा से बचने के लिये आश्रय लेते हैं। यह सूखी धरती में जलधाराओं के समान होगा। यह ऐसा ही होगा जैसे गर्म प्रदेश में किसी बड़ी चट्टान की ठण्डी छाया। 3 फिर लोगों की वे आँखे जो देख सकती हैं, वे बंद नहीं रहेगी। उन के कान जो सुनते हैं, वे वास्तव में उस पर ध्यान देंगे। 4 वे लोग जो उतावले हैं, वे सही फैसले लेंगे। वे लोग जो अभी साफ़ साफ़ नहीं बोल पाते हैं, वे साफ़ साफ़ और जल्दी जल्दी बोलने लगेंगे। 5 मूर्ख लोग महान व्यक्ति नहीं कहलायेंगे। लोग षड़यन्त्र करने वालों को सम्मान योग्य नहीं कहेंगे।
6 एक मूर्ख व्यक्ति तो मूर्खतापूर्ण बातें ही कहता है और वह अपने मन में बुरी बातों की ही योजनाएँ बनाता है। मूर्ख व्यक्ति अनुचित कार्य करने की ही सोचता है। मूर्ख व्यक्ति यहोवा के बारे में ग़लत बातें कहता है। मूर्ख व्यक्ति भूखों को भोजन नहीं करने देता। मूर्ख व्यक्ति प्यासे लोगों को पानी नहीं पीने देता। 7 वह मूर्ख व्यक्ति बुराई को एक हथियार के रुप में इस्तेमाल करता है। वह निर्धन लोगों से झूठ के जरिए बरबाद करने के लिये बुरे बुरे रास्ते बताता रहता है। उसकी यें झूठी बातें गरीब लोगों को निष्पक्ष न्याय मिलने से दूर रखती हैं।
8 किन्तु एक अच्छा मुखिया अच्छे काम करने की योजना बनाता है और उसकी वे अच्छी बातें ही उसे एक अच्छा नेता बनाती हैं।
बुरा समय आ रहा है
9 तुममें से कुछ स्त्रियाँ अभी खुश हैं। तुम सुरक्षित अनुभव करती हो। किन्तु तुम्हें खड़े होकर जो वचन मैं बोल रहा उन्हें सुनना चाहिये। 10 स्त्रियों तुम अभी सुरक्षित अनुभव करती हो किन्तु एक वर्ष बाद तुम पर विपत्ति आने वाली है। क्यों क्योंकि तुम अगले वर्ष अँगूर इकट्ठे नहीं करोगी—इकट्ठे करने के लिये अँगूर होंगे ही नहीं।
11 स्त्रियों, अभी तुम चैन से हो, किन्तु तुम्हें डरना चाहिये! स्त्रियों, अभी तुम सुरक्षित अनुभव करती हो, किन्तु तुम्हें चिन्ता करनी चाहिये! अपने सुन्दर वस्त्रों को उतार फेंको और शोक वस्त्रों को धारण कर लो। उन वस्त्रों को अपनी कमर पर लपेट लो। 12 अपनी शोक से भरी छातियों पर उन शोक वस्त्रों को पहन लो।
विलाप करो क्योंकि तुम्हारे खेत उजड़े हुए हैं। तुम्हारे अँगूर के बगीचे जो कभी अँगूर दिया करते थे, अब खाली पड़े हैं। 13 मेरे लोगों की धरती के लिये विलाप करो। विलाप करो, क्योंकि वहाँ बस काँटे और खरपतवार ही उगा करेंगे। विलाप करो इस नगर के लिये और उन सब भवनों के लिये जो कभी आनन्द से भरे हुए थे।
14 लोग इस प्रमुख नगर को छोड़ जायेंगे। यह महल और ये मिनारें वीरान छोड़ दिये जायेंगे। वे जानवरों की माँद जैसे हो जाएँगे। नगर में जंगली गधे विहार करेंगे। वहाँ भेड़े घास चरती फिरेंगी।
15 तब तक ऐसा ही होता रहेगा, जब तक परमेश्वर ऊपर से हमें अपनी आत्मा नहीं देगा। अब धरती पर कोई अच्छाई नहीं है। यह रेगिस्तान सी बनी हुई हैं किन्तु आने वाले समय में यह रेगिस्तान उपजाऊ मैदान हो जायेगा। 16 यह उपजाऊ मैदान एक हरे भरे वन जैसा बन जायेगा। चाहे जंगल हो चाहे उपजाऊ धरती, हर कहीं न्याय और निष्पक्षता मिलेगी। 17 वह नेकी सदा—सदा के लिये शांति और सुरक्षा को लायेगी। 18 मेरे लोग शांति के इस सुन्दर क्षेत्र में निवास करेंगे। मेरे लोग सुरक्षा के तम्बुओं में रहा करेंगे। वे निश्चिंतता के साथ शांतिपूर्ण स्थानों में निवास करेंगे।
19 किन्तु यें बातें घटें इससे पहले उस वन को गिरना होगा। उस नगर को पराजित होना होगा। 20 तुममें से कुछ लोग हर जलधारा के निकट बीज बोतेहो। तुम अपने मवेशियों और अपने गधों को इधर—उधर चरने के लिए खुला छोड़ देते हो। तुम लोग बहुत प्रसन्न रहोगे।
बुराई से और अधिक बुराई ही पैदा होती है
33 देखो, तुम लोग लड़ाई करते हो और उन लोगों की वस्तुएँ लूटते हो और वह भी ऐसे लोगों कि जिन्होंने कभी कोई तुम्हारी वस्तु नहीं चोरी की। तुम ऐसे लोगों को धोखा देते रहे जिन्होंने कभी तुम्हें धोखा नहीं दिया। इसलिये जब तुम चोरी करना बन्द कर दोगे तो दूसरे लोग तुम्हारी वस्तुऐं चोरी करना शुरु कर देंगे। जब तुम लोगों को धोखा देना बंद कर दोगे तो लोग तुम्हें धोखा देना आरम्भ कर देंगे। तब तुम कहोगे।
2 हे यहोवा, हम पर दया कर।
हमने तेरे सहारे की बाट जोही है।
हे यहोवा, हर सुबह तू हमको शक्ति दे।
जब हम विपत्ति में हो, तू हम को बचा ले।
3 तेरी शक्तिशाली ध्वनि से लोग डरा करते हैं और वे तुझ से दूर भाग जाते हैं।
तेरी महानता के कारण राष्ट्र दूर भाग जाते हैं।
4 तुम लोग युद्ध में चोरी किया करते हो। वे सभी वस्तुएँ तुमसे ले ली जायेंगी। अनगिनत लोग आयेंगे और तुम्हारी धन—दौलत तुमसे छीन लेंगे। यह उस समय का जैसा होगा जब टिड्डी दल आता है और तुम्हारी सभी फसलों को चट कर जाता है।
5 यहोवा बहुत महान है। वह बहुत ऊँचे स्थान पर रहता है। यहोवा सिय्योन को खरेपन और सच्चाई से परिपूर्ण करता है।
6 हे यरूशलेम, तू सम्पन्न है। तू परमेश्वर के ज्ञान और विवेक से सम्पन्न है। तू मुक्ति से भरपूर है। तू यहोवा का आदर करता है और वही आदर तुझे सम्पन्न बनाता है। इसीलिए तू जान सकता है कि तू सदा बना रहेगा।
7 किन्तु सुनो! वीर पुरुष बाहर पुकार रहे हैं और सन्देशवाहक जो शांति लाते हैं, ज़ोर—ज़ोर से बोल रहे हैं। 8 रास्ते नष्ट हो गये हैं। गलियों में कोई नहीं चल फिर रहा है। लोगों ने जो सन्धियाँ की थी, वे उन्होंने तोड़ दिये हैं। लोग साक्षियों के प्रमाण पर विश्वास करने से मना करते हैं। कोई भी किसी दूसरे व्यक्ति का आदर नहीं करता। 9 धरती बीमार है और मर रही है। लबानोन मर रहा है और शारोन की घाटी सूखी और उजाड़ है। बाशान और कर्मेल जो कभी एक सुन्दर वृक्ष के समान विकसित हो रहे थे, अब उन वृक्षों का विकास रुक गया है।
10 यहोवा कहता है, “मैं अब खड़ा होऊँगा और अपनी महानता दर्शाऊँगा। अब मैं लोगों के लिए महत्वपूर्ण बनूँगा। 11 तुम लोगों ने बेकार के काम किये हैं। वे चीजें भूसे और सूखी घास के जैसे हैं। वे बेकार हैं। तुम्हारी आत्मा अग्नि के समान हो जायेगी और तुम्हें जला डालेगी। 12 लोग तब तक जलते रहेंगे जब तक उनकी हड्डियाँ जल कर चूने जैसी नहीं हो जातीं। लोग काँटों और सूखी झाड़ियों के समान जल्दी ही जल जायेंगे।
13 “दूर देशों के लोगों, जो काम मैंने किये हैं, तुम उनके बारे में सुनते हो। हे मेरे पास के लोगों, तुम मेरी शक्ति को समझते हो।”
14 सिय्योन में पापी डरे हुए हैं। वे लोग जो बुरे काम किया करते हैं, डर से थर—थऱ काँप रहे हैं। वे कहते हैं, “क्या इस विनाशकारी आग से हम में से कोई बच सकता है कौन रह सकता है इस आग के निकट जो सदा—सदा के लिये जलती रहती है”
15 वे लोग ही इस आग में से बच पायेंगे जो अच्छे हैं, सच्चे हैं। वे लोग पैसे के लिये दूसरों को हानि नहीं पहुँचाना चाहते। वे लोग घूस नहीं लेते। दूसरे लोगों की हत्याओं की योजना को वे सुनने तक से मना कर देते हैं। बुरे काम करने की योजनाओं को वे देखना भी नहीं चाहते। 16 ऐसे लोग ऊँचे स्थानों पर सुरक्षा पूर्वक निवास करेंगे। ऊँची चट्टान की गढ़ियों में वे सुरक्षित रहेंगे। ऐसे लोगों के पास सदा ही खाने को भोजन और पीने को जल रहेगा।
17 तुम्हारी आँखे उस राजा (परमेश्वर) का, उसकी सुंदरता में दर्शन करेंगी। तुम उस महान धरती को देखोगे। 18-19 बीते हुए दिनों में तुमने जो कष्ट उठाये हैं, तुम उनके बारे में सोचोगे। तुम सोचोगे, “दूसरे देशों के वे लोग कहाँ हँ वे लोग ऐसी बोली बोला करते थे, जिसे हम समझ नहीं सकते थे। दूसरे देशों के वे सेवक और कर एकत्र करने वाले कहाँ है वे गुप्तचर जिन्होंने हमारी सुरक्षा मिनारों का लेखा जोखा लिया था, कहाँ हैं वे सब समाप्त हो गये!”
परमेश्वर यरूशलेम को बचायेगा
20 हमारे धर्मिक उत्सवों की नगरी, सिय्योन को देखो। विश्राम निवास के उस सुन्दरस्थान यरूशलेम को देखो। यरूशलेम उस तम्बू के समान है जिसे कभी उखाड़ा नहीं जायेगा। वे खूँटे जो उसे अपने स्थान पर थामे रखते हैं, कभी उखाड़े नहीं जायेंगें। उसके रस्से कभी टूटेंगे नहीं। 21-23 वहाँ हमारे लिए शक्तिशाली यहोवा विस्तृत झरनों और नदियों वाले एक स्थान के समान होगा। किन्तु उन नदियों पर कभी शत्रु की नौकाएँ अथवा शक्तिशाली जहाज़ नहीं होंगे। उन नौकाओं पर काम करने वाले तुम लोग रस्सियों को नहीं थामे रख सके। तुम मस्तूल को मजबूत नहीं बनाये रख सके। सो तुम अपनी पालों को भी नहीं खोल पाओगे। क्यों क्योंकि यहोवा हमारा न्यायकर्ता है। यहोवा हमारे लिए नियम बनाता है। यहोवा हमारा राजा है। वह हमारी रक्षा करता है। इसी से यहोवा हमें बहुत सा धन देगा। यहाँ तक कि अपाहिज लोग भी युद्ध में बहुत सा धन जीत लेंगे। 24 वहाँ रहने वाला कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं कहेगा, “मैं रोगी हूँ।” वहाँ रहने वाले लोग ऐसे लोग हैं जिनके पाप क्षमा कर दिये गये हैं।
परमेश्वर अपने शत्रुओं को दण्ड देगा
34 हे सभी देशों के लोगों, पास आओ और सुनो! तुम सब लोगों को ध्यान से सुनना चाहिये। हे धरती और धरती पर के सभी लोगों, हे जगत और जगत की सभी वस्तुओं, तुम्हें इन बातों पर कान देना चाहिये। 2 यहोवा सभी देशों और उनकी सेनाओं पर कुपित है। यहोवा उन सबको नष्ट कर देगा। वह उन सभी को मरवा डालेगा। 3 उनकी लाशें बाहर फेंक दी जायेंगी। लाशों से दुर्गन्ध उठेगी और पहाड़ के ऊपर से खून नीचे को बहेगा। 4 आकाश चर्म पत्र के समान लपेट कर मूंद दिये जायेंगे। ग्रह—तारे मर कर किसी अँगूर की बेल या अंजीर के पत्तों के समान गिरने लगेंगे। आकाश के सभी तारे पिघल जायेंगे। 5 यहोवा कहता है, “ऐसा उस समय होगा जब आकाश में मेरी तलवार खून में सन जायेगी।”
देखो! यहोवा की तलवार एदोम को काट डालेगी। यहोवा ने उन लोगों को अपराधी ठहराया है सो उन लोगों को मरना ही होगा। 6 क्यों क्योंकि यहोवा ने निश्चय किया कि बोस्रा और एदोम के नगरों में मार काट का एक समय आएगा। 7 सो मेढे, मवेशी और हट्टे कट्टे जंगली बैल मारे जायेंगे। धरती उनके खून से भर जायेगी। मिट्टी उनकी चर्बी से पट जायेगी।
8 ऐसी बातें घटेंगी क्योंकि यहोवा ने दण्ट देने का एक समय निश्चित कर लिया है। यहोवा ने एक वर्ष ऐसा चुन लिया है जिसमें लोग अपने उन बुरे कामों के लिये जो उन्होंने सिय्योन के विरुद्ध किये हैं, अवश्य ही भुगतान कर देंगे। 9 एदोम की नदियाँ ऐसी हो जायेंगी जैसे मानो वे गर्म तारकोल की हों। एदोम की धरती जलती हुई गंधक और तारकोल के समान हो जायेगी। 10 वे आगे रात दिन जला करेंगी। कोई भी व्यक्ति उस आग को रोक नहीं पायेगा। एदोम से सदा धुँआ उठा करेगा। वह धरती सदा—सदा के लिये नष्ट हो जायेगी। उस धरती से होकर फिर कभी कोई नहीं गुज़रा करेगा। 11 वह धरती परिंदों और छोटे—छोटे जानवरों की हो जायेंगी। वहाँ उल्लू और कौवों का वास होगा। परमेश्वर उस धरती को सूनी उजाड़ भूमि में बदल देगा। यह वैसी ही हो जायेगी जैसी यह सृष्टि से पहले थी। 12 स्वतन्त्र व्यक्ति और मुखिया लोग समाप्त हो जायेंगे। उन लोगों को शासन करने के लिए वहाँ कुछ भी नहीं बचेगा।
13 वहाँ के सभी सुन्दर भवनों में काँटे और जंगली झाड़ियाँ उग आयेंगी। जंगली कुत्ते और उल्लू उन मकानों में वास करेंगे। परकोटों से युक्त नगरों को जंगली जानवर अपना निवास बना लेंगे। वहाँ जो घास उगेगी उसमें बड़े—बड़े पक्षी रहेंगे। 14 वहाँ जंगली बिल्लयाँ और लकड़बघ्घे साथ रहा करेंगे तथा जंगली बकरियाँ वहाँ अपने मित्रों को बुलायेंगी। रात के जीव जन्तु वहाँ अपने लिए आश्रय खोजते फिरेंगे और वहीं विश्राम करने के लिए अपनी जगह बना लेंगे। 15 साँप वहाँ अपने घर बना लेंगे। वहाँ साँप अपने अण्डे दिया करेंगें। अण्डे फूटेंगे और उन अन्धकारपूर्ण स्थानों से रेंगते हुए साँप के बच्चे बाहर निकलेंगे। वँहा मरी वस्तुओं को खाने वाले पक्षी एक के बाद एक इकट्ठे होते चले जाएँगे।
16 यहोवा के चर्म पत्र को देखो। पढ़ो उसमें क्या लिखा है। कुछ भी नहीं छुटा है। उस चर्म पत्र में लिखा है कि वे सभी पशु पक्षी इकट्ठे हो जायेंगे। इसलिए परमेश्वर के मुख ने यह आदेश दिया और उसकी आत्मा ने उन्हें एक साथ इकट्ठा कर दिया। परमेश्वर की आत्मा उन्हें परस्पर एकत्र करेगी। 17 परमेश्वर उनके साथ क्या करेगा, यह उसने निश्चय कर लिया है। इसके बाद परमेश्वर ने उनके लिए एक जगह चुनी। परमेश्वर ने एक रेखा खींची और उन्हें उनकी धरती दिखा दी। इसलिए वह धरती सदा सदा पशुओं की हो जायेगी। वे वहाँ वर्ष दर रहते चले जायेंगे।
परमेश्वर अपने लोगों को सुख देगा
35 सूखा रेगिस्तान बहुत खुशहाल हो जायेगा। रेगिस्तान प्रसन्न होगा और एक फूल के समान विकसित होगा। 2 वह रेगिस्तान खिलते हुये फलों से भर उठेगा और अपनी प्रसन्नता दर्शाने लगेगा। ऐसा लगेगा जैसे रेगिस्तान आनन्द में भरा नाच रहा है। यह रेगिस्तान ऐसा सुन्दर हो जायेगा जैसा लबानोन का वन है, कर्मेल का पहाड़ है और शारोन की घाटी है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि सभी लोग यहोवा की महिमा का दर्शन करेंगे। लोग हमारे परमेश्वर की महानता को देखेंगे।
3 दुर्बल बाँहों को फिर से शक्तिपूर्ण बनाओ। दुर्बल घुटनों को मज़बूत करो। 4 लोग डरे हुए हैं और असमंजस में पड़े हैं। उन लोगों से कहो, “शक्तिशाली बनो! डरो मत!” देखो, तुम्हारा परमेश्वर आयेगा और तुम्हारे शत्रुओं को जो उन्होंने किया है, उसका दण्ड देगा। वह आयेगा और तुम्हें तुम्हारा प्रतिफल देगा और तुम्हारी रक्षा करेगा। 5 फिर तो अन्धे देखने लगेंगे। उनकी आँखें खुल जायेंगी। फिर तो बहरे लोग सुन सकेंगे। उन के कान खुल जायेंगे। 6 लूले—लंगड़े लोग हिरन की तरह नाचने लगेंगे और ऐसे लोग जो अभी गूंगे हैं, प्रसन्न गीत गाने में अपनी वाणी का उपयोग करने लगेंगे। ऐसा उस समय होगा जब मरूभूमि में पानी के झरने बहने लगेंगे। सूखी धरती पर झरने बह चलेंगे। 7 लोग अभी जल के रूप में मृग मरीचिका को देखते हैं किन्तु उस समय जल के सच्चे सरोवर होंगे। सूखी धरती पर कुएँ हो जायेंगे। सूखी धरती से जल फूट बहेगा। जहाँ एक समय जंगली जानवरों का राज था, वहाँ लम्बे लम्बे पानी के पौधे उग आयेंगे।
8 उस समय, वहाँ एक राह बन जायेगी और इस राजमार्ग का नाम होगा “पवित्र मार्ग”। उस राह पर अशुद्ध लोगों को चलने की अनुमति नहीं होगी। कोई भी मूर्ख उस राह पर नहीं चलेगा। बस परमेश्वर के पवित्र लोग ही उस पर चला करेंगे। 9 उस सड़क पर कोई खतरा नहीं होगा। लोगों को हानि पहुँचाने के लिये उस सड़क पर शेर नहीं होंगे। कोई भी भयानक जन्तु वहाँ नहीं होगा। वह सड़क उन लोगों के लिए होगी जिन्हें परमेश्वर ने मुक्त किया है।
10 परमेश्वर अपने लोगों को मुक्त करेगा और वे लोग फिर लौट कर वहाँ आयेंगे। लोग जब सिय्योन पर आयेंगे तो वे प्रसन्न होंगे। वे सदा सदा के लिए प्रसन्न हो जायेंगे। उनकी प्रसन्नता उनके माथों पर एक मुकुट के समान होगी। वे अपनी प्रसन्नता और आनन्द से पूरी तरह भर जायेंगे। शोक और दु:ख उनसे दूर बहुत दूर चले जायेंगे।
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