Beginning
बाबुल को परमेश्वर का सन्देश
13 आमोस के पुत्र यशायाह को परमेश्वर ने बाबुल के बारे में यह शोक सन्देश प्रकट किया। 2 परमेश्वर ने कहा:
“पर्वत पर ध्वजा उठाओ जिस पर्वत पर कुछ नहीं है।
उन लोगों को पुकारो।
सिपाहियों, अपने हाथ संकेत के रुप में हिलाओ उन लोगों से कहो
कि वे उन द्वार से प्रवेश करे जो बडे लोगों के हैं।”
3 “मैंने लोगों से उन पुरुषों को अलग किया है,
और मैं स्वयं उन को आदेश दूँगा।
मैं क्रोधित हूँ, मैंने अपने उत्तम पुरुषों को लोगों को दण्ड देने के लिये एकत्र किया है।
मुझको इन प्रसन्न लोगों पर गर्व है!
4 “पहाड़ में एक तीव्र शोर हुआ है, तुम उस शोर को सुनो!
ये शोर ऐसा लगता है जैसे बहुत ढेर सारे लोगों का।
बहुत सारे देशों के लोग आकर इकट्ठे हुए हैं।
सर्वशक्तिमान यहोवा अपनी सेना को एक साथ बुला रहा है।
5 यहोवा और यह सेना किसी दूर के देश से आते हैं।
ये लोग क्षितिज के पार से क्रोध प्रकट करने आ रहे हैं।
यहोवा इस सेना का उपयोग ऐसे करेगा जैसे कोई किसी शस्त्र का उपयोग करता है।
यह सेना सारे देश को नष्ट कर देगी।”
6 यहोवा के न्याय का विशेष दिन आने को है। इसलिये रोओ! और स्वयं अपने लिये दु:खी होओ! समय आ रहा है जब शत्रु तुम्हारी सम्पत्ति चुरा लेगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर वैसा करवाएगा। 7 लोग अपना साहस छोड़ बैठेंगे और भय लोगों को दुर्बल बना देगा। 8 हर कोई भयभीत होगा। डर से लोगों को ऐसे दुख लगेंगे जैसे किसी बच्चे को जन्म देने वाली माँ का पेट दुखने लगता है। उनके मुँह लाल हो जायेंगे, जैसे कोई आग हो। लोग अचरज में पड़ जायेंगे क्योंकि उनके सभी पड़ोसियों के मुखों पर भी भय दिखाई देगा।
बाबुल के विरुद्ध परमेश्वर का न्याय
9 देखो यहोवा का विशेष दिन आने को है। वह एक भयानक दिन होगा। परमेश्वर बहुत अधिक क्रोध करके इस देश का विनाश कर देगा। वह पापियों को विवश करेगा कि वे उस देश को छोड़ दें। 10 आकाश काले पड़ जायेंगे; सूरज, चाँद और तारे नहीं चमकेंगे।
11 परमेशवर कहता है, “मैं इस दुनिया पर बुरी—बुरी बातें घटित करुँगा। मैं दुष्टों को उनकी दुष्टता का दण्ड दूँगा। मैं अभिमानियों के अभिमान को मिटा दूँगा। ऐसे लोग जो दूसरे के प्रति नीच हैं, मैं उनके बड़े बोल को समाप्त कर दूँगा। 12 वहाँ बस थोड़े से लोग ही बचेंगे। जैसे सोने का मिलना दुर्लभ होता है, वैसे ही वहाँ लोगों का मिलना दुर्लभ हो जायेगा। किन्तु जो लोग मिलेंगे, वे शुद्ध सोने से भी अधिक मूल्यवान होंगे। 13 अपने क्रोध से मैं आकाश को हिला दूँगा। धरती अपनी धुरी से डिगा दी जायेगी।”
यह सब उस समय घटेगा जब सर्वशक्तिमान यहोवा अपना क्रोध दर्शायेगा। 14 तब बाबुल के निवासी ऐसे भागेंगे जैसे घायल हरिण भागता है। वे ऐसे भागेंगे जैसे बिना गडेरिये की भेड़ भागती हैं। हर कोई व्यक्ति भाग कर अपने देश और अपने लोगों की तरफ मुड़ जायेगा। 15 किन्तु बाबुल के लोगों का पीछा उनके शत्रु नहीं छोड़ेगे और जब शत्रु किसी व्यक्ति को धर पकड़ेगा तो वह उसे तलवार के घाट उतार देगा। 16 उनके घरों की हर वस्तु चुरा ली जायेगी। उनकी पत्नियों के साथ कुकर्म किया जायेगा और उनके छोटे—छोटे बच्चों को लोगों के देखते पीट पीटकर मार डाला जायेगा।
17 परमेश्वर कहता है, “देखो, मैं मादी की सेनाओं से बाबुल पर आक्रमण कराऊँगा। मादी की सेनाएँ यदि सोने और चाँदी का भुगतान ले भी लेंगी तो भी वे उन पर आक्रमण करना बंद नहीं करेंगी। 18 बाबुल के युवकों को सैनिक आक्रमण करके मार डालेंगे। वे बच्चों तक पर दया नहीं दिखायेंगे। छोटे बालकों तक के प्रति वे करुणा नहीं करेंगे। 19 बाबुल का विनाश होगा और यह विनाश सदोम और अमोरा के विनाश के समान ही होगा। इस विनाश को परमेश्वर करायेगा और वहाँ कुछ भी नहीं बचेगा।
“बाबुल सबसे सुन्दर राजधानी है। बाबुल के निवासियों को अपने नगर पर गर्व है। 20 किन्तु बाबुल का सौन्दर्य बना नहीं रहेगा। भविष्य में वहाँ लोग नहीं रहेंगे। अराबी के लोग वहाँ अपने तम्बू नहीं गाड़ेंगे। गडेरिये चराने के लिये वहाँ अपनी भेड़ों को नहीं लायेंगे। 21 जो पशु वहाँ रहेंगे वे बस मरुभूमि के पशु ही होंगे। बाबुल में अपने घरों में लोग नहीं रह पायेंगे। घरों में जंगली कुत्ते और भेड़िए चिल्लाएंगे। घरों के भीतर जंगली बकरे विहार करेंगे। 22 बाबुल के विशाल भवनों में कुत्ते और गीदड़ रोयेंगे। बाबुल बरबाद हो जायेगा। बाबुल का अंत निकट है। अब बाबुल के विनाश की मैं और अधिक प्रतीक्षा नहीं करता रहूँगा।”
इस्राएल घर लौटेगा
14 आगे चल कर, यहोवा याकूब पर फिर अपना प्रेम दर्शायेगा। यहोवा इस्राएल के लोगों को फिर चुनेगा। उस समय यहोवा उन लोगों को उनकी धरती देगा। फिर गैर यहूदी लोग, यहूदी लोगों के साथ अपने को जोड़ेंगे। दोनों ही जातियों के लोग एकत्र हो कर याकूब के परिवार के रूप में एक हो जायेंगे। 2 वे जातियाँ इस्राएल की धरती के लिये इस्राएल के लोगों को फिर वापस ले लेंगी। दूसरी जातियों के वे स्त्री पुरुष इस्राएल के दास हो जायेंगे। बीते हुए समय में उन लोगों ने इस्राएल के लोगों को बलपूर्वक अपना दास बनाया था। इस्राएल के लोग उन जातियों को हरायेंगे और फिर इस्राएल उन पर शासन करेगा। 3 यहोवा तुम्हारे श्रम को समाप्त करेगा और तुम्हें आराम देगा। पहले तुम दास हुआ करते थे, लोग तुम्हें कड़ी मेहनत करने को विवश करते थे किन्तु यहोवा तुम्हारी इस कड़ी मेहनत को अब समाप्त कर देगा।
बाबुल के राजा के विषय में एक गीत
4 उस समय बाबुल के राजा के बारे में तुम यह गीत गाने लगोगे:
वह राजा दुष्ट था जब वह हमारा शासक था
किन्तु अब उसके राज्य का अन्त हुआ।
5 यहोवा दुष्ट शासकों का राज दण्ड तोड़ देता है।
यहोवा उनसे उनकी शक्ति छीन लेता है।
6 बाबुल का राजा क्रोध में भरकर लोगों को पीटा करता है।
उस दुष्ट शासक ने लोगों को पीटना कभी बंद नहीं किया।
उस दुष्ट राजा ने क्रोध में भरकर लोगों पर राज किया।
उसने लोगों के साथ बुरे कामों का करना नहीं छोड़ा।
7 किन्तु अब सारा देश विश्राम में है।
देश में शान्ति है।
लोगों ने अब उत्सव मनाना शुरु किया है।
8 तू एक बुरा शासक था,
और अब तेरा अन्त हुआ है।
यहाँ तक की चीड़ के वृक्ष भी प्रसन्न हैं।
लबानोन में देवदार के वृक्ष मगन हैं।
वृक्ष यह कहते हैं, “जिस राजा ने हमें गिराया था।
आज उस राजा का ही पतन हो गया है,
और अब वह राजा कभी खड़ा नहीं होगा।”
9 अधोलोक, यानी मृत्यु का प्रदेश उत्तेजित है क्योंकि तू आ रहा है।
धरती के प्रमुखों की आत्माएँ जगा रहा है।
तेरे लिये अधोलोक है।
अधोलोक तेरे लिये सिंहासन से राजाओं को खड़ा कर रहा है।
तेरी अगुवायी को वे सब तैयार होंगे।
10 ये सभी प्रमुख तेरी हँसी उड़ायेंगे।
वे कहेंगे, “तू भी अब हमारी तरह मरा हुआ है।
तू अब ठीक हम लोगों जैसा है।”
11 तेरे अभिमान को मृत्यु के लोक में नीचे उतारा गया।
तेरे अभिमानी आत्मा की आने की घोषणा तेरी वीणाओं का संगीत करता है।
तेरे शरीर को मक्खियाँ खा जायेंगी।
तू उन पर ऐसे लेटेगा मानों वे तेरा बिस्तर हो।
कीड़े ऐसे तेरी देह को ढक लेंगे मानों कोई कम्बल हों।
12 तेरा स्वरुप भोर के तारे सा था, किन्तु तू आकाश के ऊपर से गिर पड़ा।
धरती के सभी राष्ट्र पहले तेरे सामने झुका करते थे।
किन्तु तुझको तो अब काट कर गिरा दिया गया।
13 तू सदा अपने से कहा करता था कि, “मैं सर्वोच्च परमेश्वर सा बनूँगा।
मैं आकाशों के ऊपर जीऊँगा।
मैं परमेशवर के तारों के ऊपर अपना सिंहासन स्थापित करुँगा।
मैं जफोन के पवित्र पर्वत पर बैठूँगा।
मैं उस छिपे हुए पर्वत पर देवों से मिलूँगा।
14 मैं बादलों के वेदी तक जाऊँगा।
मैं सर्वोच्च परमेश्वर सा बनूँगा।”
15 किन्तु वैसा नहीं हुआ। तू परमेश्वर के साथ ऊपर आकाश में नहीं जा पाया।
तुझे अधोलोक के नीचे गहरे पाताल में ले आया गया।
16 लोग जो तुझे टकटकी लगा कर देखा करते हैं, वे तुझे तेरे लिये सोचा करते हैं।
लोगों को आज यह दिखता है कि तू बस मरा हुआ है,
और लोग कहा करते हैं, “क्या यही वह व्यक्ति है
जिसने धरती के सारे राज्यों में भय फैलाया हुआ है,
17 क्या यह वही व्यक्ति है जिसने नगर नष्ट किये
और जिसने धरती को उजाड़ में बदल दिया
क्या यह वही व्यक्ति है जिसने लोगों को युद्ध में बन्दी बनाया
और उनको अपने घरों में नहीं जाने दिया”
18 धरती का हर राजा शान से मृत्यु को प्राप्त किया।
हर किसी राजा का मकबरा (घर) बना है।
19 किन्तु हे बुरे राजा, तुझको तेरी कब्र से निकाल फेंका दिया गया है।
तू उस शाखा के समान है जो वृक्ष से कट गयी और उसे काट कर दूर फेंक दिया गया।
तू एक गिरी हुई लाश है जिसे युद्ध में मारा गया,
और दूसरे सैनिक उसे रौंदते चले गये।
अब तू ऐसा दिखता है जैसे अन्य मरे व्यक्ति दिखते हैं।
तुझको कफन में लपेटा गया है।
20 बहुत से और भी राजा मरे।
उनके पास अपनी अपनी कब्र हैं।
किन्तु तू उनमें नहीं मिलेगा।
क्योंकि तूने अपने ही देश का विनाश किया।
अपने ही लोगों का तूने वध किया है।
जैसा विनाश तूने मचाया था।
21 उसकी सन्तानों के वध की तैयारी करो।
तुम उन्हें मृत्यु के घाट उतारो क्योंकि उनका पिता अपराधी है।
अब कभी उसके पुत्र नहीं होंगे।
उसकी सन्तानें अब कभी भी संसार को अपने नगरों से नहीं भरेंगी।
तेरी संतानें वैसा करती नहीं रहेगी।
तेरी संतानों को वैसा करने से रोक दिया जायेगा।
22 सर्वशक्तिमान यहोवा ने कहा, “मैं खड़ा होऊँगा और उन लोगों के विरुद्ध लडूँगा। मैं प्रसिद्ध नगर बाबुल को उजाड़ दूँगा। बाबुल के सभी लोगों को मैं नष्ट कर दूँगा। मैं उनकी संतानों, पोते—पोतियों और वंशजों को मिटा दूँगा।” ये सब बातें यहोवा ने स्वयं कही थी।
23 यहोवा ने कहा था, “मैं बाबुल को बदल डालूँगा। उस स्थान में पशुओं का वास होगा, न कि मनुष्यों का। वह स्थान दलदली प्रदेश बन जायेगा। मैं ‘विनाश की झाडू’ से बाबुल को बाहर कर दूँगा।” सर्वशक्तिमान यहोवा ने ये बातें कही थीं।
परमेश्वर अश्शूर को भी दण्ड देगा
24 सर्वशक्तिमान यहोवा ने एक वचन दिया था। यहोवा ने कहा था, “मैं वचन देता हूँ, कि यें बातें ठीक वैसे ही घटेंगी, जैसे मैंने इन्हें सोचा है। ये बातें ठीक वैसे ही घटेंगी जैसी कि मेरी योजना है। 25 मैं अपने देश में अश्शूर के राजा का नाश करुँगा अपने पहाड़ों पर मैं अश्शूर के राजा को अपने पावों तले कुचलूँगा। उस राजा ने मेरे लोगों को अपना दास बनाकर उनके कन्धों पर एक जूआ रख दिया है। यहूदा की गर्दन से वह जूआ उठा लिया जायेगा। उस विपत्ति को उठाया जायेगा। 26 मैं अपने लोगों के लिये ऐसी ही योजना बना रहा हूँ। सभी जातियों को दण्ड देने के लिए, मैं अपनी शक्ति का प्रयोग करुँगा।”
27 यहोवा जब कोई योजना बनाता है तो कोई भी व्यक्ति उस योजना को रोक नहीं सकता! यहोवा लोगों को दण्ड देने के लिये जब अपना हाथ उठाता है तो कोई भी व्यक्ति उसे रोक नहीं सकता।
पलिश्तियों को परमेश्वर का सन्देश
28 यह दुखद सन्देश उस वर्ष दिया गया था जब राजा आहाज की मृत्यु हुई थी।
29 हे, पलिश्तियों के प्रदेशों! तू बहुत प्रसन्न है क्योंकि जो राजा तुझे मार लगाया करता था, आज मर चुका है। किन्तु तुझे वास्तव में प्रसन्न नहीं होना चाहिये। यह सच है कि उसके शासन का अंत हो चुका है। किन्तु उस राजा का पुत्र अभी आकर राज करेगा और वह एक ऐसे साँप के समान होगा जो भयानक नागों को जन्म दिया करता है। यह नया राजा तुम लोगों के लिये एक बड़े फुर्तीले भयानक नाग के जैसा होगा। 30 किन्तु मेरे दीन जन सुरक्षा पूर्वक खाते पीते रह पायेंगे। उनकी संतानें भी सुरक्षित रहेंगी। मेरे दीन जन, सो सकेंगे और सुरक्षित अनुभव करेंगे। किन्तु तुम्हारे परिवार को मैं भूख से मार डालूँगा और तुम्हारे सभी बचे हुए लोग मर जायेंगे।
31 हे नगर द्वार के वासियों, रोओ!
नगर में रहने वाले तुम लोग, चीखो—चिल्लाओ!
पलिश्ती के तुम सब लोग भयभीत होंगे।
तुम्हारा साहस गर्म मोम की भाँति पिघल कर ढल जायेगा।
उत्तर दिशा की ओर देखो!
वहाँ धूल का एक बादल है! देखो,
अश्शूर से एक सेना आ रही है!
उस सेना के सभी लोग बलशाली हैं!
32 वह सेना अपने नगर में दूत भेजेंगे।
दूत अपने लोगों से क्या कहेंगे वे घोषणा करेंगे: “पलिश्ती पराजित हुआ,
किन्तु यहोवा ने सिय्योन को सुदृढ़ बनाया है, और उसके दीन जन वहाँ रक्षा पाने को गये।”
मोआब को परमेश्वर का सन्देश
15 यह बुरा सन्देश मोआब के विषय में है।
एक रात मोआब में स्थित आर के नगर का धन सेनाओं ने लूटा।
उसी रात नगर को तहस नहस कर दिया गया।
एक रात मोआब का किर नाम का नगर सेनाओं ने लूटा।
उसी रात वह नगर तहस नहस किया गया।
2 राजा का घराना और दिबोन के निवासी अपना दु:ख रोने को ऊँचे पर पूजास्थलों में चले गये।
मोआब के निवासी नबो और मेदबा के लिये रोते हैं।
उन सभी लोगों ने अपनी दाढ़ी और सिर अपना शोक दर्शाने के लिये मुड़ाये थे।
3 मोआब में सब कहीं घरों और गलियों में,
लोग शोक वस्त्र पहनकर हाय हाय करते हैं।
4 हेशबोन और एलाले नगरों के निवासी बहुत ऊँचे स्वर में विलाप कर रहे हैं।
बहुत दूर यहस की नगरी तक वह विलाप सुना जा सकता है।
यहाँ तक कि सैनिक भी डर गये हैं। वे सैनिक भय से काँप रहे हैं।
5 मेरा मन दु:ख से मोआब के लिये रोता है।
लोग कहीं शरण पाने को दौड़ रहे हैं।
वे सुदूर जोआर में जाने को भाग रहे हैं।
लोग दूर के देश एग्लतशलीशिय्या को भाग रहे हैं।
लोग लूहीत की पहाड़ी चढ़ाई पर रोते बिलखाते हुए भाग रहे हैं।
लोग होरोनैम के मार्ग पर और वे बहुत ऊँचे स्वर में रोते बिलखते हुए जा रहे हैं।
6 किन्तु निम्रीम का नाला ऐसे सूख गया जैसे रेगिस्तान सूखा होता है।
वहाँ सभी वृक्ष सूख गये।
कुछ भी हरा नहीं हैं।
7 सो लोग जो कुछ उनके पास है उसे इकट्ठा करते हैं,
और मोआब को छोड़ते हैं।
उन वस्तुओं को लेकर वे नाले (पाप्लर या अराबा) से सीमा पार कर रहे हैं।
8 मोआब में हर कहीं विलाप ही सुनाई देता है।
दूर के नगर एगलैम में लोग बिलख रहे हैं।
बेरेलीम नगर के लोग विलाप कर रहे हैं।
9 दीमोन नगर का जल खून से भर गया है,
और मैं (यहोवा) दीमोन पर अभी और विपत्तियाँ ढाऊँगा।
मोआब के कुछ निवासी शत्रु से बच गये हैं।
किन्तु उन लोगों को खा जाने को मैं सिंहों को भेजूँगा।
16 उस प्रदेश के राजा के लिये तुम लोगों को एक उपहार भेजना चाहिये। तुम्हें रेगिस्तान से होते हुए सिय्योन की पुत्री के पर्वत पर सेला नगर से एक मेमना भेजना चाहिये।
2 अरी ओ मोआब की स्त्रियों,
अर्नोन की नदी को पार करने का प्रयत्न करो।
वे सहारे के लिये इधर—उधर दौड़ रही हैं।
वे ऐसी उन छोटी चिड़ियों जैसी है जो धरती पर पड़ी हुई है जब उनका घोंसला गिर चुका।
3 वे पुकार रही हैं, “हमको सहारा दो!
बताओ हम क्या करें! हमारे शत्रुओं से तुम हमारी रक्षा करो।
तुम हमें ऐसे बचाओ जैसे दोपहर की धूप से धरती बचाती है।
हम शत्रुओं से भाग रहे हैं, तुम हमको छुपा लो।
हम को तुम शत्रुओं के हाथों में मत पड़ने दो।”
4 उन मोआब वासियों को अपना घर छोड़ने को विवश किया गया था।
अत: तुम उनको अपनी धरती पर रहने दो।
तुम उनके शत्रुओं से उनको छुपा लो।
यह लूट रुक जायेगी।
शत्रु हार जायेंगे और ऐसे पुरुष जो दूसरों की हानि करते हैं,
इस धरती से उखड़ेंगे।
5 फिर एक नया राजा आयेगा।
यह राजा दाऊद के घराने से होगा।
वह सत्यपूर्ण, करुण और दयालु होगा।
यह राजा न्यायी और निष्पक्ष होगा।
वह खरे और नेक काम करेगा।
6 हमने सुना है कि मोआब के लोग बहुत अभिमानी और गर्वीले हैं।
ये लोग हिंसक हैं और बड़ा बोले भी।
इनका बड़ा बोल सच्चा नहीं है।
7 समूचा मोआब देश अपने अभिमान के कारण कष्ट उठायेगा।
मोआब के सारे लोग विलाप करेंगे।
वे लोग बहुत दु:खी रहेंगे।
वे ऐसी वस्तुओं की इच्छा करेंगेजैसी उनके पास पहले हुआ करती थीं।
वे कीरहरासत में बने हुए अंजीर के पेंड़ों की इच्छा करेंगे।
8 वे लोग बहुत दु:खी रहा करेंगे क्योंकि हेशबोन के खेत और सिबमा की अँगूर की बेलों में अँगूर नहीं लगा पा रहे हैं।
बाहर के शासकों ने अँगूर की बेलों को काट फेंका है।
याजेर की नगरी से लेकर मरुभूमि में दूर—दूर तक शत्रु की सेनाएँ फैल गयी हैं।
वे समुद्र के किनारे तक जा पहुँची हैं।
9 मैं उन लोगों के साथ विलाप करुँगा जो याजेर और सिबमा के निवासी हैं
क्योंकि अंगूर नष्ट किये गये।
मैं हेशबोन और एलाले के लोगों के साथ शोक करुँगा
क्योंकि वहाँ फसल नहीं होगी।
वहाँ गर्मी का कोई फल नहीं होगा।
वहाँ पर आनन्द के ठहाके भी नहीं होंगे।
10 अंगूर के बगीचे में आनन्द नहीं होगा और न ही वहाँ गीत गाये जायेंगे।
मैं कटनी के समय की सारी खुशी समाप्त कर दूँगा।
दाखमधु बनने के लिये अंगूर तो तैयार है,
किन्तु वे सब नष्ट हो जायेंगे।
11 इसलिए मैं मोआब के लिये बहुत दु:खी हूँ।
मैं कीरहैरेम के लिये बहुत दु:खी हूँ।
मैं उन नगरों के लिये अत्याधिक दु:खी हूँ।
12 मोआब के निवासी अपने ऊँचे पूजा के स्थानों पर जायेंगे।
वे लोग प्रार्थना करने का प्रयत्न करेंगे।
किन्तु वे उन सभी बातों को देखेंगे जो कुछ घट चुकी है,
और वे प्रार्थना करने को दुर्बल हो जायेंगे।
13 यहोवा ने मोआब के बारे में पहले अनेक बार ये बातें कही थीं 14 और अब यहोवा कहता है, “तीन वर्ष में (उस रीति से जैसे किराये का मजदूर समय गिनता है) वे सभी व्यक्ति और उनकी वे वस्तुएँ जिन पर उन्हें गर्व था, नष्ट हो जायेंगी। वहाँ बहुत थोड़े से लोग ही बचेंगे, बहुत से नहीं।”
आराम के लिए परमेश्वर का सन्देश
17 यह दमिश्क के लिये दु:खद सन्देश है। यहोवा कहता है कि दमिश्क के साथ में बातें घटेंगी:
“दमिश्क जो आज नगर है किन्तु कल यह उजड़ जायेगा।
दमिश्क में बस टूटे फूटे भवन ही बचेंगे।
2 अरोएर के नगरों को लोग छोड़ जायेंगे।
उन उजड़े हुए नगरों में भेड़ों की रेवड़े खुली घूमेंगी।
वहाँ कोई उनको डराने वाला नहीं होगा।
3 एप्रैम (इस्राएल) के गढ़ नगर ध्वस्त हो जायेंगे।
दमिश्क के शासन का अन्त हो जायेगा।
जैसे घटनाएँ इस्राएल में घटती हैं वैसी ही घटनाएँ अराम में भी घटेंगी।
सभी महत्त्वपूर्ण व्यक्ति उठा लिये जायेंगे।” सर्वशक्तिमान यहोवा ने बताया कि ये बातें घटेंगी।
4 उन दिनों याकूब की (इस्राएल की) सारी सम्पति चली जायेगी।
याकूब वैसा हो जायेगा जैसा व्यक्ति रोग से दुबला हो।
5 “वह समय ऐसा होगा जैसे रपाईम घाटी में फसल काटने के समय होता है। मजदूर उन पौधों को इकट्ठा करते हैं जो खेत में उपजते हैं। फिर वे उन पौधों की बालों को काटते हैं और उनसे अनाज के दाने निकालते हैं।
6 “वह समय उस समय के भी समान होगा जब लोग जैतून की फसल उतारते हैं। लोग जैतून के पेड़ों से जैतून झाड़ते हैं। किन्तु पेड़ की चोटी पर प्राय: कुछ फल तब भी बचे रह जाते हैं। चोटी की कुछ शाखाओं पर चार पाँच जैतून के फल छूट जाते हैं। उन नगरों में भी ऐसा ही होगा।” सर्वशक्तिमान यहोवा ने ये बातें कही थीं।
7 उस समय लोग परमेश्वर की ओर निहारेंगे। परमेश्वर, जिसने उनकी रचना की है। वे इस्राएल के पवित्र की ओर सहायता के लिये देखेगें। 8 लोग उन वेदियों पर विश्वास करना समाप्त कर देंगे जिनको उन्होंने स्वयं अपने हाथों से बनाया था। अशेरा देवी के जिन खम्भों और धूप जलाने की वेदियों को उन्होंने अपनी उँगलियों से बनाया था, वे उन पर भरोसा करना बंद कर देंगे। 9 उस समय, सभी गढ़—नगर उजड़ जायेंगे। वे नगर ऐसे पर्वत और जंगलों के समान हो जायेंगे, जैसे वे इस्राएलियों के आने से पहले हुआ करते थे। बीते हुए दिनों में वहाँ से सभी लोग दूर भाग गये थे क्योंकि इस्राएल के लोग वहाँ आ रहे थे। भविष्य में यह देश फिर उजड़ जायेगा। 10 ऐसा इसलिये होगा क्योंकि तुमने अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर को भुला दिया है। तुमने यह याद नहीं रखा कि परमेश्वर ही तुम्हारा शरण स्थल है।
तुम सुदूर स्थानों से कुछ बहुत अच्छी अँगूर की बेलें लाये थे। तुम अंगूर की बेलों को रोप सकते हो किन्तु उन पौधों में बढ़वार नहीं होगी। 11 एक दिन तुम अपनी अँगूर की उन बेलों को रोपोगे और उनकी बढ़वार का जतन करोगे। अगले दिन, वे पौधे बढ़ने भी लगेंगे किन्तु फसल उतारने के समय जब तुम उन बेलों के फल इकट्ठे करने जाओगे तब देखोगे कि सब कुछ सूख चुका है। एक बीमारी सभी पौधों का अंत कर देगी।
12 बहुत सारे लोगों का भीषणा नाद सुनो!
यह नाद सागर के नाद जैसा भयानक है।
लोगों का शोर सुनो।
ये शोर ऐसा है जैसे सागर की लहरे टकरा उठती हो।
13 लोग उन्हीं लहरों जैसे होंगे।
परमेश्वर उन लोगों को झिड़की देगा, और वे दूर भाग जायेंगे।
लोग उस भूसे के समान होंगे जिस की पहाड़ी पर हवा उड़ाती फिरती है।
लोग वैसे हो जायेंगे जैसे आँधी उखाड़े जा रही है।
आँधी उसे उड़ाती है और दूर ले जाती है।
14 उस रात लोग बहुत ही डर जायेंगे।
सुबह होने से पहले, कुछ भी नहीं बच पायेगा।
सो शत्रुओं को वहाँ कुछ भी हाथ नहीं आयेगा।
वे हमारी धरती की ओर आयेंगे,
किन्तु वहाँ भी कुछ नहीं होगा।
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