Beginning
एक नया दिन आने को है
9 पहले लोग सोचा करते थे कि जबूलून और नप्ताली की धरती महत्वपूर्ण नहीं है। किन्तु बाद में परमेश्वर उस धरती को महान बनायेगा। समुद्र के पास की धरती पर, यरदन नदी के पार और गालील में गैर यहूदी लोग रहते हैं। 2 यद्यपि आज ये लोग अन्धकार में निवास करते हैं, किन्तु इन्हें महान प्रकाश का दर्शन होगा। ये लोग एक ऐसे अन्धेरे स्थान में रहते हैं जो मृत्य़ु के देश के समान है। किन्तु वह “अद्भुत ज्योति” उन पर प्रकाशित होगा।
3 हे परमेश्वर! तू इस जाति की बढ़ौतरी कर। तू लोगों को खुशहाल बना। ये लोग तुझे अपनी प्रसन्नता दर्शायेंगे। यह प्रसन्नता वैसी ही होगी जैसी कटनी के समय पर होती है। यह प्रसन्नता वैसी ही होगी जैसी युद्ध में जीतने के बाद लोग जब विजय की वस्तुओं को आपस में बाँटते हैं, तब उन्हें होती है। 4 ऐसा क्यों होगा क्योंकि तुम पर से भारी बोझ उतर जायेगा। लोगों की पीठों पर रखे हुए भारी बल्लों को तुम उतरवा दोगे। तुम उस दण्ड को छीन लोगे जिससे शत्रु तुम्हारे लोगों को दण्ड दिया करता है। यह वैसा समय होगा जैसा वह समय था जब तुमने मिद्यानियों को हराया था।
5 हर वह कदम जो युद्ध में आगे बढ़ा, नष्ट कर दिया जायेगा। हर वह वर्दी जिस पर लहू के धब्बे लगे हुए हैं, नष्ट कर दी जायेगी। ये वस्तुएँ आग में झोंक दी जायेंगी। 6 यह सब कुछ तब घटेगा जब उस विशेष बच्चे का जन्म होगा। परमेश्वर हमें एक पुत्र प्रदान करेगा। यह पुत्र लोगों की अगुवाई के लिये उत्तरदायी होगा। उसका नाम होगा: “अद्भुत, उपदेशक, सामर्थी परमेश्वर, पिता—चिर अमर और शांति का राजकुमार।” 7 उसके राज्य में शक्ति और शांति का निवास होगा। दाऊद के वंशज, उस राजा के राज्य का निरन्तर विकास होता रहेगा। वह राजा नेकी और निष्पक्ष न्याय का अपने राज्य के शासन में सदा—सदा उपयोग करता रहेगा। वह सर्वशक्तिशाली यहोवा अपनी प्रजा से गहरा प्रेम रखता है और उसका यह गहरा प्रेम ही उससे ऐसे काम करवाता है।
परमेश्वर इस्राएल को दण्ड देगा
8 याकूब (इस्राएल) के लोगों के विरूद्ध मेरे यहोवा ने एक आज्ञा दी। इस्राएल के विरूद्ध दी गयी उस आज्ञा का पालन होगा। 9 तब एप्रैम के हर व्यक्ति को और यहाँ तक कि शोमरोन के मुखियाओं तक को यह पता चल जायेगा कि परमेश्वर ने उन्हें दण्ड दिया था।
आज वे लोग बहुत अभिमानी और बडबोला हैं। वे लोग कहा करते हैं, 10 “हो सकता है ईटें गिर जायें किन्तु हम इसका और अधिक मजबूत पत्थरों से निर्माण लेंगे। सम्भव है छोटे—छोटे पेड़ काट गिराये जायें। किन्तु हम वहाँ नये पेड़ खड़े कर देंगे और ये नये पेड़ विशाल तथा मजबूत पेड़ होंगे।” 11 सो यहोवा लोगों को इस्राएल के विरुद्ध युद्ध करने के लिए उकसाएगा। यहोवा रसीन के शत्रुओं को उनके विरोध ले आयेगा। 12 यहोवा पूर्व से आराम के लोगों को और पश्चिम से पलिश्तियों को लायेगा। वे शत्रु अपनी सेना से इस्राएल को हरा देंगे। किन्तु परमेश्वर इस्राएल से तब कुपित रहेगा। यहोवा तब भी लोगों को दण्ड देने को तत्पर रहेगा।
13 परमेश्वर यद्यपि लोगों को दण्ड देगा, किन्तु वे फिर भी पाप करना नहीं छोंड़ेंगे। वे परमेश्वर की ओर नहीं मुड़ेंगे। वे सर्वशक्तिमान यहोवा का अनुसरण नहीं करेंगे। 14 सो यहोवा इस्राएल का सिर और पूँछ काट देगा। एक ही दिन में यहोवा उसकी शाखा और उसके तने को ले लेगा। 15 (यहाँ सिर का अर्थ है अग्रज तथा महत्वपूर्ण अगुवा लोग और पूँछ से अभिप्राय है ऐसे नबी जो झूठ बोला करते हैं।)
16 वे लोग जो लोगों की अगुवाई करते हैं, उन्हें बुरे मार्ग पर ले जाते हैं। सो ऐसे लोग जो उनके पीछे चलते हैं, नष्ट कर दिये जायेंगे। 17 ये सभी लोग दुष्ट हैं। इसलिये यहोवा इन युवकों से प्रसन्न नहीं है। यहोवा उनकी विधवाओं और उनके अनाथ बच्चों पर दया नहीं करेगा। क्यों क्योंकि ये सभी लोग दुष्ट हैं। ये लोग ऐसे काम करते हैं जो परमेश्वर के विरुद्ध हैं। ये लोग झूठ बोलते हैं।
सो परमेश्वर इन लोगों के प्रति कुपित बना रहेगा और उन्हें दण्ड देता रहेगा।
18 बुराई एक छोटी सी आग है, आग पहले घास फूस और काँटों को जलाती है, फिर वह बड़ी—बड़ी झाड़ियों और जंगल को जलाने लगती है और अंत में जाकर वह व्यापक आग का रूप ले लेती है और हर वस्तु धुआँ बन कर ऊपर उड़ जाती है।
19 सर्वशक्तिमान यहोवा कुपित है। इसलिए यह प्रदेश भस्म हो जायेगा। उस आग में सभी लोग भस्म हो जायेंगें। कोई व्यक्ति अपने भाई तक को बचाने का जतन नहीं करेगा। 20 तब उनके आस पास, जो भी कुछ होगा, वे उसे जब दाहिनी ओर से लेंगे, या बाई ओर से लेंगे, भूखे ही रहेंगे। फिर वे लोग आपस में अपने ही परिवार के लोगों को खाने लगेंगे। 21 अर्थात् मनश्शे, एप्रैम के विरुद्ध लड़ेगा और एप्रैम मनश्शे के विरुद्ध लडाई करेगा और फिर दोनों ही यहूदा के विरुद्ध हो जायेंगे।
यहोवा इस्राएल से अभी भी कुपित है। यहोवा उसके लोगों को दण्ड देने के लिये अभी भी तत्पर है।
10 उन नियम बनाने वालों को देखो जो अन्यायपूर्ण नियम बना कर लिखते हैं। ऐसे नियम बनाने वाले ऐसे नियम बना कर लिखते हैं जिससे लोगों का जीवन दूभर होता है। 2 वे नियम बनाने वाले गरीब लोगों के प्रति सच्चे नहीं हैं। वे गरीबों के अधिकार छीनते हैं। वे लोगों को विधवाओं और अनाथों के यहाँ चोरी करने की अनुमति देते हैं।
3 अरे ओ, नियम को बनाने वालों, जब तुम्हें, जो काम तुमने किये हैं, उनका हिसाब देना होगा तब तुम क्या करोगे सुदूर देश से तुम्हारा विनाश आ रहा है। सहायता के लिये तुम किस के पास दौडोगे तुम्हारा धन और तुम्हारी सम्पत्ति तुम्हारी रक्षा नहीं कर पायेंगे। 4 तुम्हें एक बंदी के समान नीचे झुकना ही होंगा। तुम मुर्दे के समान धरती में गिर कर दण्डवत प्रणाम करोगे किन्तु उससे तुम्हें कोई सहायता नहीं मिलेगी। परमेश्वर तब भी कुपित रहेगा। परमेश्वर तुम्हें दण्ड देने के लिए तब भी तत्पर रहेगा।
5 परमेश्वर कहेगा, “मैं एक छड़ी के रुप में अश्शूर का प्रयोग करुँगा। मैं क्रोध में भर कर इस्राएल को दण्ड देने के लिए अश्शूर का प्रयोग करुँगा। 6 ऐसे लोगों के विरुद्ध जो पाप कर्म करते हैं युद्ध करने के लिये मैं अश्शूर को भेजूँगा। मैं उन लोगों से कुपित हूँ और उन लोगों से युद्ध करने के लिये मैं अश्शूर को आदेश दूँगा। अश्शूर उन लोगों को हरा देगा और फिर उनसे उनकी कीमती वस्तुएँ छीन लेगा। अश्शूर के लिए इस्राएल गलियों में पड़ी उस धूल जैसा होगा जिसे वह अपने पैरों तले रौंदेगा।
7 “किन्तु अश्शूर यह नहीं समझता है कि मैं उसका प्रयोग करुँगा। वह यह नहीं सोचता कि वह मेरा एक साधन है। अश्शूर तो बस दूसरे लोगों को नष्ट करना चाहता है। अश्शूर की तो मात्र यह योजना है कि वह बहुत सी जातियों को नष्ट कर दे। 8 अश्शूर अपने मन में कहता है, ‘मेरे सभी व्यक्ति राजाओं के समान हैं। 9 कलनो नगरी कर्कमीश के जैसी है और हमात नगर अर्पद नगर के जैसा है। शोमरोन की नगरी दमिश्क नगर के जैसी है। 10 मैंने इन सभी बुरे राज्यों को पराजित कर दिया है और अब इन पर मेरा अधिकार है। जिन मूर्तियों की वे लोग पूजा करते हैं, वे यरूशलेम और शोमरोन की मूर्तियों से अधिक हैं। 11 मैंने शोमरोन और उसकी मूर्तियों को पराजित कर दिया। मैं यरूशलेम और उसकी मूर्तियों को भी जिन्हें उसके लोगों ने बनाया है पराजित कर दूँगा।’”
12 मेरा स्वामी जब यरूशलेम और सिय्योन पर्वत के लिये, जो उसकी योजना है, उसकी बातों को करना समाप्त कर देगा, तो यहोवा अश्शूर को दण्ड देगा। अश्शूर का राजा बहुत अभिमानी है। उसके अभिमान ने उससे बहुत से बुरे काम करवाये हैं। सो परमेश्वर उसे दण्ड देगा।
13 अश्शूर का राजा कहा करता है, “मैं बहुत बुद्धिमान हूँ। मैंने स्वयं अपनी बुद्धि और शक्ति से अनेक महान कार्य किये हैं। मैंने बहुत सी जातियों को हराया है। मैंने उनका धन छीन लिया है और उनके लोगों को दास बना लिया है। मैं एक बहुत शक्तिशाली व्यक्ति हूँ। 14 मैंने स्वयं अपने हाथों से उन सब लोगों की धन दौलत ऐसे ले ली है जैसे कोई व्यक्ति चिड़ियाँ के घोंसले से अण्डे उठा लेता है। चिड़ियाँ जो प्राय: अपने घोंसले और अण्डों को छोड जाती है और उस घोंसले की रखवाली करने के लिये कोई भी नहीं रह जाता। वहाँ अपने पंखों और अपनी चोंच से शोर मचाने और लड़ाई करने के लिये कोई पक्षी नहीं होता। इसीलिए लोग अण्डों को उठा लेते हैं। इसी प्रकार धरती के सभी लोगों को उठा ले जाने से रोकने के लिए कोई भी व्यक्ति वहाँ नहीं था।”
15 कुल्हाड़ा उस व्यक्ति से अच्छा नहीं होता, जो कुल्हाड़े को चलाता है। कोई आरा उस व्यक्ति से अच्छा नहीं होता, जो उस आरे से काटता है। किन्तु अश्शूर का विचार है कि वह परमेश्वर से भी अधिक महत्वपर्ण और बलशाली है। उसका यह विचार ऐसा ही है जैसे किसी छड़ी का यह सोचना कि वह उस व्यक्ति से अधिक बली और महत्वपूर्ण है जो उसे उठाता है और किसी को दण्ड देने के लिए उसका प्रयोग करता है। 16 अश्शूर का विचार है कि वह महान है किन्तु सर्वशक्तिमान यहोवा अश्शूर को दुर्बल कर डालने वाली महामारी भेजेगा और अश्शूर अपने धन और अपनी शक्ति को वैसे ही खो बैठेगा जैसे कोई बीमार व्यक्ति अपनी शक्ति गवाँ बैठता है। फिर अश्शूर का वैभव नष्ट हो जायेगा। यह उस अग्नि के समान होगा जो उस समय तक जलती रहती है जब तक सब कुछ समाप्त नहीं हो जाता। 17 इस्राएल का प्रकाश (परमेश्वर) एक अग्नि के समान होगा। वह पवित्रतम लपट के जैसा प्रकाशमान होगा। वह उस अग्नि के समान होगा जो खरपतवार और काँटों को तत्काल जला डालती है 18 और फिर बढ़कर बड़े बड़े पेड़ों और अँगूर के बगीचों को जला देती है और अंत में सब कुछ नष्ट हो जाता है यहाँ तक कि लोग भी। ऐसा उस समय होगा जब परमेश्वर अश्शूर को नष्ट करेगा। अश्शूर सड़ते—गलते लट्ठे के जैसा हो जायेगा। 19 जंगल में हो सकता है थोड़े से पेड़ खड़े रह जायें। पर वे इतने थोंड़े से होंगे कि उन्हें कोई बच्चा तक गिन सकेगा।
20 उस समय, वे लोग जो इस्राएल में जीवित बचेंगे, यानी याकूब के वंश के ये लोग उस व्यक्ति पर निर्भर नहीं करते रहेंगे जो उन्हें मारता पीटता है। वे सचमुच उस यहोवा पर निर्भर करना सीख जायेंगे जो इस्राएल का पवित्र (परमेश्वर) है।
21 याकूब के वंश के वे बाकी बचे लोग शक्तिशाली परमेश्वर का फिर अनुसरण करने लगेंगे। 22 तुम्हारे व्यक्ति असंख्य हैं। वे सागर के रेत कणों के समान हैं; किन्तु उनमें से कुछ ही यहोवा की ओर फिर वापस मुड़ आने के लिये बचे रहेंगे। वे लोग परमेश्वर की ओर मुड़ेंगे किन्तु उससे पहले तुम्हारे देश का विनाश हो जायेगा। परमेश्वर ने घोषणा कर दी है कि वह उस धरती का विनाश करेगा और उसके बाद उस धरती पर नेकी का आगमन इस प्रकार होगा जैसे कोई भरपूर नदी बहती है। 23 मेरा स्वामी सर्वशक्तिमान यहोवा, इस प्रदेश को निश्चय ही नष्ट करेगा।
24 मेरा स्वामी सर्वशक्तिशाली यहोवा कहता है, “हे! सिय्योन में रहने वाले मेरे लोगों, अश्शूर से मत डरो! वह भविष्य में तुम्हें अपनी छड़ी से इस तरह पीटेगा जैसे पहले मिस्र ने तुम्हें पीटा था। यह ऐसा होगा जैसे मानो तुम्हें हानि पहुँचाने के लिये अश्शूर किसी लाठी का प्रयोग कर रहा हो। 25 किन्तु थोड़े ही समय बाद मेरा क्रोध शांत हो जायेगा, मुझे संतोष हो जायेगा कि अश्शूर ने तुम्हें काफी दण्ड दे दिया है।”
26 इसके बाद सर्वशक्तिमान यहोवा अश्शूर को कोड़ो से मारेगा। जैसा पहले यहोवा ने जब ओरेब की चट्टान पर मिद्यानियों को पराजित किया था, तब हुआ था। वैसा ही उस समय होगा जब यहोवा अश्शूर पर आक्रमण करेगा। पहले यहोवा ने मिस्र को दण्ड दिया था। उसने सागर के ऊपर छड़ी उठायी थी[a] और मिस्र से अपने लोगों को ले गया था। यहोवा जब अश्शूर से अपने लोगों की रक्षा करेगा, तब भी ऐसा ही होगा।
27 अश्शूर तुम पर विपत्तियाँ लायेगा। वे विपत्तियाँ ऐसे बोझों के समान होंगी, जिन्हें तुम्हें अपने ऊपर एक जुए के रूप में उठाना ही होगा। किन्तु फिर तुम्हारी गर्दन पर से उस जुए को उतार फेंका जायेगा। वह जुआ तुम्हारी शक्ति (परमेश्वर) द्वारा तोड़ दिया जायेगा।
इस्राएल पर अश्शूर की सेना का आक्रमण
28 (अय्यात) के निकट सेनाओं का प्रवेश होगा। मिग्रोन यानी “खलिहानो” को सेनाएँ रौंद डालेंगी। सेनाएँ इसके खाने की सामग्री को “कोठियारों” (मिकमाश) में रख देंगी। 29 “पार करने के स्थान” (माबरा) से सेनाएँ नदी पार करेंगी। वे सेनाएँ जेबा में रात बिताएंगी। रामा डर जायेगा। शाऊल के गिबा के लोग निकल भागेंगे।
30 हे गल्लीम की पुत्री चिल्ला! हे लैशा सुन! हे, अनातोत मुझे उत्तर दे! 31 मदमेना के लोग भाग रहे हैं। गेबीम के लोग छिपे हुए हैं। 32 आज सेना नोब में टिकेगी और यरूशलेम के पर्वत सिय्योन पर चढ़ाई करने की तैयारी करेंगी।
33 देखो! हमारा स्वामी सर्वशक्तिमान यहोवा विशाल वृक्ष (अश्शूर) को काट गिरायेगा। यहोवा अपनी महान शक्ति से ऐसा करेगा। बड़े और महत्वपूर्ण लोग काट गिराये जायेंगे। वे महत्वहीन हो जायेंगे। 34 यहोवा अपने कुल्हाड़े से वन को काट डालेगा और लबानोन के विशाल वृक्ष (मुखिया लोग) गिर पड़ेंगे।
शांति का राजा आ रहा है
11 यिशै के तने (वंश) से एक छोटा अंकुर (पुत्र) फूटना शुरु होगा। यह अब शाखा यिशै के मूल से फूटेगी। 2 उस पुत्र में यहोवा की आत्मा होगी। वह आत्मा विवेक, समझबूझ, मार्ग दर्शन और शक्ति की आत्मा होगी। वह आत्मा इस पुत्र को यहोवा को समझने और उसका आदर करने में सहायता देगी। 3 यह पुत्र यहोवा का आदर करेगा और इससे वह प्रसन्न होगा।
यह पुत्र वस्तुएँ जैसी दिखाई दे रही होगी, उसके अनुसार लोगों का न्याय नहीं करेगा। वह सुनी, सुनाई के आधार पर ही न्याय नहीं करेगा। 4-5 वह गरीब लोगों का न्याय ईमानदारी और सच्चाई के साथ करेगा। धरती के दीन जनों के लिये जो कुछ करने का निर्णय वह लेगा, उसमें वह पक्षपात रहित होगा। यदि वह यह निर्णय करता है कि लोगों पर मार पड़े तो वह आदेश देगा और उन लोगों पर मार पड़ेगी। यदि वह निर्णय करता है कि उन लोगों की मृत्यु होनी चाहिये तो वह आदेश देगा और उन दुष्टों को मौत के घाट उतार दिया जाएगा। नेकी और सच्चाई इस पुत्र को शक्ति प्रदान करेंगी। उसके लिए नेकी और सच्चाई एक ऐसे कमर बंद के समान होंगे जिसे वह अपनी कमर के चारों ओर लपेटता है।
6 उसके समय में, भेड़ और भेड़िये शांति से साथ—साथ रहेंगे, सिंह और बकरी के बच्चों के साथ शांति से पड़े रहेंगे। बछड़े, सिंह और बैल आपस में शांति के साथ रहेंगे। एक छोटा सा बच्चा उनकी अगुवाई करेगा। 7 गायें और रीछनियां शांति से साथ—साथ अपना खाना खाएंगी। उनके बच्चे साथ—साथ बैठा करेंगे और आपस में एक दूसरे को हानि नहीं पहुँचायेंगे। सिंह गायों के समान घास चरेंगे 8 और यहाँ तक कि साँप भी लोगों को हानि नहीं पहुँचायेंगे। काले नाग के बिल के पास एक बच्चा तक खेल सकेगा। कोई भी बच्चा विषधर नाग के बिल में हाथ डाल सकेगा।
9 ये सब बातें दिखाती हैं कि वहाँ सब कहीं शांति होगी। कोई व्यक्ति किसी दूसरे को हानि नहीं पहुँचायेगा। मेरे पवित्र पर्वत के लोग वस्तुओं को नष्ट नहीं करना चाहेंगे। क्यों क्योंकि लोग यहोवा को सचमुच जान लेंगे। वे उसके ज्ञान से ऐसे परिपूर्ण होंगे जैसे सागर जल से परिपूर्ण होता है।
10 उस समय यिशै के परिवार में एक विशेष व्यक्ति होगा। यह व्यक्ति एक ध्वजा के समान होगा। यह “ध्वजा” दर्शायेगी कि समस्त राष्ट्रों को उसके आसपास इकट्ठा हो जाना चाहिये। ये राष्ट्र उससे पूछा करेंगे कि उन्हें क्या करना चाहिये और वह स्थान, जहाँ वह होगा, भव्यता से भर जायेगा।
11 ऐसे अवसर पर, मेरा स्वामी परमेश्वर फिर आयेगा और उसके जो लोग बच गये थे उन्हें वह ले जायेगा। यह दूसरा अवसर होगा जब परमेश्वर ने वैसा किया। (ये परमेश्वर के ऐसे लोग हैं जो अश्शूर, उत्तरी मिस्र, दक्षिणी मिस्र, कूश, एलाम, बाबुल, हमात तथा समस्त संसार के ऐसे ही सुदूर देशों में छूट गये हैं।) 12 परमेश्वर सब लोगों के लिये संकेत के रूप में झंडा उठायेगा। इस्राएल और यहूदा के लोग अपने—अपने देशों को छोड़ने के लिये विवश किये गये थे। वे लोग धरती पर दूर—दूर फैल गये थे किन्तु परमेश्वर उन्हें परस्पर एकत्र करेगा।
13 उस समय एप्रैम (इस्राएल) यहूदा से जलन नहीं रखेगा। यहूदा का कोई शत्रु नहीं बचेगा। यहूदा एप्रैम के लिये कोई कष्ट पैदा नहीं करेगा। 14 बल्कि एप्रैम और यहूदा पलिश्तियों पर आक्रमण करेंगे। ये दोनों देश उड़ते हुए उन पक्षियों के समान होंगे जो किसी छोटे से जानवर को पकड़ने के लिए झपट्टा मारते हैं। एक साथ मिल कर वे दोनों पूर्व की धन दौलत को लूट लेंगे। एप्रैम और यहूदा एदोम, मोआब और अम्मोनी के लोगों पर नियन्त्रण कर लेंगे।
15 यहोवा कुपित होगा और जैसे उसने मिस्र के सागर को दो भागों में बाँट दिया था, उसी प्रकार परात नदी पर वह अपना हाथ उठायेगा और उस पर प्रहार करेगा। जिससे वह नदी सात छोटी धाराओं में बट जायेगी। ये छोटी जल धाराएँ गहरी नहीं होंगी। लोग अपने जूते पहने हुए ही पैदल चल कर उन्हें पार कर लेंगे। 16 परमेश्वर के वे लोग जो वहाँ छूट गये थे अश्शूर को छोड़ देने के लिए रास्ता पा जायेंगे। यह वैसा ही होगा, जैसा उस समय हुआ था, जब परमेश्वर लोगों को मिस्र से बाहर निकाल कर लाया था।
परमेश्वर का स्तुति गीत
12 उस समय तुम कहोगे:
“हे यहोवा, मैं तेरे गुण गाता हूँ!
तू मुझ से कुपित रहा है
किन्तु अब मुझ पर क्रोध मत कर!
तू मुझ पर अपना प्रेम दिखा।”
2 परमेश्वर मेरी रक्षा करता है।
मुझे उसका भरोसा है।
मुझे कोई भय नहीं है।
वह मेरी रक्षा करता है।
यहोवा याह मेरी शक्ति है।
वह मुझको बचाता है, और मैं उसका स्तुति गीत गाता हूँ।
3 तू अपना जल मुक्ति के झरने से ग्रहण कर।
तभी तू प्रसन्न होगा।
4 फिर तू कहेगा, “यहोवा की स्तुति करो!
उसके नाम की तुम उपासना किया करो!
उसने जो कार्य किये हैं उसका लोगों से बखान करो।
तुम उनको बताओ कि वह कितना महान है!”
5 तुम यहोवा के स्तुति गीत गाओ!
क्यों क्योंकि उसने महान कार्य किये हैं!
इस शुभ समाचार को जो परमेशवर का है,
सारी दुनियाँ में फैलाओ ताकि सभी लोग ये बातें जान जायें।
6 हे सिय्योन के लोगों, इन सब बातों का तुम उद्घोष करो!
वह इस्राएल का पवित्र (शक्तिशाली) ढंग से तुम्हारे साथ है।
इसलिए तुम प्रसन्न हो जाओ!
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