Beginning
1 यह आमोस के पुत्र यशायाह का दर्शन है। यहूदा और यरूशलेम में जो घटने वाला था, उसे परमेश्वर ने यशायाह को दिखाया। यशायाह ने इन बातों को उज्जिय्याह, योताम, आहाज और हिजकिय्याह के समय में देखा था। ये यहूदा के राजा थे।
अपने लोगों के विरुद्ध परमेश्वर की शिकायत
2 स्वर्ग और धरती, तुम यहोवा की वाणी सुनो! यहोवा कहता है,
“मैंने अपने बच्चों का विकास किया। मैंने उन्हें बढ़ाने में अपनी सन्तानों की सहायता की।
किन्तु मेरी सन्तानों ने मुझ से विद्रोह किया।
3 बैल अपने स्वामी को जानता है
और गधा उस जगह को जानता है जहाँ उसका स्वामी उसको चारा देता है।
किन्तु इस्राएल के लोग
मुझे नहीं समझते हैं।”
4 इस्राएल देश पाप से भर गया है। यह पाप एक ऐसे भारी बोझ के समान है जिसे लोगों को उठाना ही है। वे लोग बुरे और दुष्ट बच्चों के समान हैं। उन्होंने यहोवा को त्याग दिया। उन्होंने इस्राएल के पवित्र (परमेश्वर) का अपमान किया। उन्होंने उसे छोड़ दिया और उसके साथ अजनबी जैसा व्यवहार किया।
5 परमेश्वर कहता है, “मैं तुम लोगों को दण्ड क्यों देता रहूँ मैंने तुम्हें दण्ड दिया किन्तु तुम नहीं बदले। तुम मेरे विरुद्ध विद्रोह करते ही रहे। अब हर सिर और हर हृदय रोगी है। 6 तुम्हारे पैर के तलुओं से लेकर सिर के ऊपरी भाग तक तुम्हारे शरीर का हर अंग घावों से भरा है। उनमें चोटें लगी हैं और फूटे हुए फोड़े हैं। तुमने अपने फोड़ों की कोई परवाह नहीं की। तुम्हारे घाव न तो साफ किये हीं गये हैं और न ही उन्हें ढका गया है।”
7 तुम्हारी धरती बर्बाद हो गयी है। तुम्हारे नगर आग से जल गये हैं। तुम्हारी धरती तुम्हारे शत्रुओं ने हथिया ली है। तुम्हारी भूमि ऐसे उजाड़ दी गयी है कि जैसे शत्रुओं के द्वारा उजाड़ा गया कोई प्रदेश हो।
8 सिय्योन की पुत्री (यरूशलेम) अब अँगूर के बगीचे में किसी छोड़ दी गयी झोपड़ी जैसी हो गयी है। यह एक ऐसी पुरानी झोपड़ी जैसी दिखती है जिसे ककड़ी के खेत में वीरान छोड़ दिया गया हो। यह उस नगरी के समान है जिसे शत्रुओं द्वारा हरा दिया गया हो। 9 यह सत्य है किन्तु फिर भी सर्वशक्तिशाली यहोवा ने कुछ लोगों को वहाँ जीवित रहने के लिये छोड़ दिया था। सदोम और अमोरा नगरों के समान हमारा पूरी तरह विनाश नहीं किया गया था।
10 हे सदोम के मुखियाओं, यहोवा के सन्देश को सुनो! हे अमोरा के लोगों, परमेश्वर के उपदेशों पर ध्यान दो। 11 परमेश्वर कहता है, “मुझे यें सभी बलियाँ नहीं चाहिये। मैं तुम्हारे भेड़ों और पशुओं की चर्बी की पर्याप्त होमबलियाँ ले चुका हूँ। बैलों, मेमनों, बकरों के खून से मैं प्रसन्न नहीं हूँ। 12 तुम लोग जब मुझसे मिलने आते हो तो मेरे आँगन की हर वस्तु रौंद डालते हो। ऐसा करने के लिए तुमसे किसने कहा है
13 “बेकार की बलियाँ तुम मुझे मत चढ़ाते रहो। जो सुगंधित सामग्री तुम मुझे अर्पित करते हो, मुझे उससे घृणा है। नये चाँद की दावतें, विश्राम और सब्त मुझ से सहन नहीं हो पाते। अपनी पवित्र सभाओं के बीच जो बुरे कर्म तुम करते हो, मुझे उनसे घृणा है। 14 तुम्हारी मासिक बैठकों और सभाओं से मुझे अपने सम्पूर्ण मन से घृणा है। ये सभाएँ मेरे लिये एक भारी भरकम बोझ सी बन गयी है और इन बोझों को उठाते उठाते अब मैं थक चुका हूँ।
15 “तुम लोग हाथ उठाकर मेरी प्रार्थना करोगे किन्तु मैं तुम्हारी ओर देखूँगा तक नहीं। तुम तोग अधिकाधिक प्रार्थना करोगे, किन्तु मैं तुम्हारी सुनने तक को मना कर दूँगा क्योंकि तुम्हारे हाथ खून से सने हैं।
16 “अपने को धो कर पवित्र करो। तुम जो बुरे कर्म करते हो, उनका करना बन्द करो। मैं उन बुरी बातों को देखना नहीं चाहता। बुरे कामों को छोड़ो। 17 अच्छे काम करना सीखो। दूसरे लोगों के साथ न्याय करो। जो लोग दूसरों को सताते हैं, उन्हें दण्ड दो। अनाथ बच्चों के अधिकारों के लिए संघर्ष करो। जिन स्त्रियों के पति मर गये हैं, उन्हें न्याय दिलाने के लिए उनकी पैरवी करो।”
18 यहोवा कहता है, “आओ, हम इन बातों पर विचार करें। तुम्हारे पाप यद्यपि रक्त रंजित हैं, किन्तु उन्हें धोया जा सकता है। जिससे तुम बर्फ के समान उज्जवल हो जाओगे। तुम्हारे पाप लाल सुर्ख हैं। किन्तु वे सन के समान श्वेत हो सकते हो।
19 “यदि तुम मेरी कही बातों पर ध्यान देते हो, तो तुम इस धरती की अच्छी वस्तुएँ प्राप्त करोगे। 20 किन्तु यदि तुम सुनने से मना करते हो तुम मेरे विरुद्ध होते हो, और तुम्हारे शत्रु तुम्हें नष्ट कर डालेंगे।” यहोवा ने ये बातें स्वयं ही कहीं थीं।
यरूशलेम परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्य नहीं है
21 परमेश्वर कहता है, “यरूशलेम की ओर देखो। यरूशलेम एक ऐसी नगरी थी जो मुझमें विश्वास रखती थी और मेरा अनुसरण करती थी। वह वेश्या की जैसी किस कारण बन गई अब वह मेरा अनुसरण नहीं करती। यरूशलेम को न्याय से परिपूर्ण होना चाहिये। यरूशलेम के निवासियों को, जैसे परमेश्वर चाहता है, वैसे ही जीना चाहिये। किन्तु अब तो वहाँ हत्यारे रहते हैं।”
22 तुम्हारी नेकी चाँदी के समान है। किन्तु अब तुम्हारी चाँदी खोटी हो गयी है। तुम्हारी दाखमधु में पानी मिला दिया गया है। सो अब यह कमजोर पड़ गयी है। 23 तुम्हारे शासक विद्रोही हैं और चोरों के साथी हैं। तुम्हारे सभी शासक घूस लेना चाहते हैं। गलत काम करने के लिए वेघूस का धन ले लेते हैं। तुम्हारे सभी शासक लोगों को ठगने के लिये मेहनताना लेते हैं। तुम्हारे शासक अनाथ बच्चों को सहारा देने का यत्न नहीं करते। तुम्हारे शासक अनाथ बच्चों को सहारा देने का यत्न नहीं करते। तुम्हारे शासक उन स्त्रियों की आवश्यकताओं पर कान नहीं देते जिनके पति मर चुके हैं।
24 इन सब बातों के कारण, स्वामी सर्वशक्तिमान यहोवा इस्राएल का सर्वशक्तिमान कहता है, “हे मेरे बैरियो मैं तुम्हें दण्ड दूँगा। तुम मुझे अब और अधिक नहीं सता पाओगे। 25 जैसे लोग चाँदी को साफ करने के लिए खार मिले पानी का प्रयोग करते हैं, वैसे ही मैं तुम्हारे सभी खोट दूर करुँगा। सभी निरर्थक वस्तुओं को तुमसे ले लूँगा। 26 जैसे न्यायकर्ता तुम्हारे पास प्रारम्भ में थे अब वैसे ही न्यायकर्ता मैं फिर से वापस लाऊँगा। जैसे सलाहकार बहुत पहले तुम्हारे पास हुआ करते थे, वैसे ही सलाहकार तुम्हारे पास फिर होंगे। तुम तब फिर ‘नेक और विश्वासी नगरी’ कहलाओगी।”
27 परमेश्वर नेक है और वह उचित करता है। इसलिये वह सिय्योन की रक्षा करेगा और वह उन लोगों को बचायेगा जो उसकी ओर वापस मुड़ आयेंगे। 28 किन्तु सभी अपराधियों और पापियों का नाश कर दिया जायेगा। (ये वे लोग हैं जो यहोवा का अनुसरण नहीं करते हैं।)
29 भविष्य में, तुम लोग उन बांजवृक्षों के पेड़ों के लिए और उन विशेष उद्यानों के लिए, जिन्हें पूजने के लिए तुमने चुना था, लज्जित होंगे। 30 यह इसलिए घटित होगा क्योंकि तुम लोग ऐसे बांजवृक्ष के पेड़ों जैसे हो जाओगे जिनकी पत्तियाँ मुरझा रही हो। तुम एक ऐसे बगीचे के समान हो जाओगे जो पानी के बिना मर रहा होगा। 31 बलशाली लोग सूखी लकड़ी के छोटे—छोटे टुकड़ों जैसे हो जायेंगे और वे लोग जो काम करेंगे, वे ऐसी चिंगारियों के समान होंगे जिनसे आग लग जाती है। वे बलशाली लोग और उनके काम जलने लगेंगे और कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं होगा जो उस आग को रोक सकेगा।
2 आमोस के पुत्र यशायाह ने यहूदा और यरूशलेम के बारे में यह सन्देश देखा।
2 यहोवा का मन्दिर पर्वत पर है।
भविष्य में, उस पर्वत को अन्य सभी पर्वतों में सबसे ऊँचा बनाया जायेगा।
उस पर्वत को सभी पहाड़ियों से ऊँचा बनाया जायेगा।
सभी देशों के लोग वहाँ जाया करेंगे।
3 बहुत से लोग वहाँ जाया करेंगे।
वे कहा करेंगे, “हमे यहोवा के पर्वत पर जाना चाहिये।
हमें याकूब के परमेश्वर के मन्दिर में जाना चाहिये।
तभी परमेश्वर हमें अपनी जीवन विधि की शिक्षा देगा
और हम उसका अनुसरण करेंगे।”
सिय्योन पर्वत पर यरूशलेम में, परमेश्वर यहोवा के उपदेशों का सन्देश का आरम्भ होगा
और वहाँ से वह समूचे संसार में फैलेगा।
4 तब परमेश्वर सभी देशों का न्यायी होगा।
परमेश्वर बहुत से लोगों के लिये विवादों का निपटारा कर देगा
और वे लोग लड़ाई के लिए अपने हथियारों का प्रयोग करना बन्द कर देंगे।
अपनी तलवारों से वे हल के फाले बनायेंगे
तथा वे अपने भालों को पौधों को काटने की दँराती के रुप में काम में लायेंगे।
लोग दूसरे लोगों के विरुद्ध लड़ना बन्द कर देंगे।
लोग युद्ध के लिये फिर कभी प्रशिक्षित नहीं होंगे।
5 हे याकूब के परिवार, तू यहोवा का अनुसरण कर।
6 हे यहोवा! तूने अपने लोगों का त्याग कर दिया है। तेरे लोग पूर्व के बुरे विचारों से भर गये हैं। तेरे लोग पलिश्तियों के समान भविष्य बताने का यत्न करने लगे हैं। तेरे लोगों ने पूरी तरह से उन विचित्र विचारों को स्वीकार कर लिया है। 7 तेरे लोगों की धरती दूसरे देशों के सोने चाँदी से भर गयी है। वहाँ अनगिनत खजाने हैं। तेरे लोगों की धरती घोड़ों से भरपूर हैं। वहाँ बहुत सारे रथ भी हैं। 8 उनकी धरती पर मूर्तियाँ भरी पड़ी हैं, लोग जिनकी पूजा करते हैं। लोगों ने ही इन मूर्तियों को बनाया है और वे ही उन की पूजा करते हैं। 9 लोग बुरे से बुरे हो गये हैं। लोग बहुत नीच हो गये हैं। हे परमेश्वर, निश्चय ही तू उन्हें क्षमा नहीं करेगा, क्या तू ऐसा करेगा परमेश्वर के शत्रु भयभीत होंगे
10 जा, कहीं किसी गक़े में या किसी चट्टान के पीछे छुप जा! तू परमेश्वर से डर और उसकी महान शक्ति के सामने से ओझल हो जा!
11 अहंकारी लोग अहंकार करना छोड़ देंगे। अहंकारी लोग धरती पर लाज से सिर नीचे झुका लेंगे। उस समय केवल यहोवा ही ऊँचे स्थान पर विराजमान होगा।
12 यहोवा ने एक विशेष दिन की योजना बनायी है। उस दिन, यहोवा अहंकारियों और बड़े बोलने वाले लोगों को दण्ड देगा। तब उन अहंकारी लोगों को साधारण बना दिया जायेगा। 13 वे अहंकारी लोग लबानोन के लम्बे देवदार वृक्षों के समान हैं। वे बासान के बांजवृक्षों जैसे हैं किन्तु परमेश्वर उन लोगों को दण्ड देगा। 14 वे अहंकारी लोग ऊँची पहाड़ियों जैसे लम्बे और पहाड़ों जैसे ऊँचे हैं। 15 वे अहंकारी लोग ऐसे हैं जैसे लम्बी मीनारें और ऊँचा तथा मजबूत नगर परकोटा हो। किन्तु परमेश्वर उन लोगों को दण्ड देगा। 16 वे अहंकारी लोग तर्शीश के विशाल जहाजों के समान हैं। इन जहाज़ों में महत्वपूर्ण वस्तुएँ भरी हैं। किन्तु परमेश्वर उन अहंकारी लोगों को दण्ड देगा।
17 उस समय, लोग अहंकार करना छोड़ देंगे। वे लोग जो अब अहंकारी हैं, धरती पर नीचे झुका दिए जायेंगे। फिर उस समय केवल यहोवा ही ऊँचे विराजमान होगा। 18 सभी मूर्तियाँ झूठे देवता समाप्त हो जायेंगी। 19 लोग चट्टानों, गुफाओं और धरती के भीतर जा छिपेंगे। वे यहोवा और उसकी महान शक्ति से डर जायेंगे। ऐसा उस समय होगा जब यहोवा धरती को हिलाने के लिए खड़ा होगा।
20 उस समय, लोग अपनी सोने चाँदी की मूर्तियों को दूर फेंक देंगे। (इन मूर्तियों को लोगों ने इसलिये बनाया था कि लोग उनको पूज सकें।) लोग उन मूर्तियों को धरती के उन बिलों में फेंक देंगे जहाँ चमगादड़ और छछूंदर रहते हैं। 21 फिर लोग चट्टानों की गुफाओं में छुप जायेंगे। वे यहोवा और उसकी महान शक्ति से डरकर ऐसा करेंगे। ऐसा उस समय घटित होगा जब यहोवा धरती को हिलाने के लिये खड़ा होगा। इस्राएल को परमेश्वर का विश्वास करना चाहिये।
22 ओ इस्राएल के लोगों तुम्हें अपनी रक्षा के लिये अन्य लोगों पर निर्भर रहना छोड़ देना चाहिये। वे तो मनुष्य़ मात्र है और मनुष्य मर जाता है। इसलिये, तुझे यह नहीं सोचना चाहिये कि वे परमेश्वर के समान शक्तिशाली है।
3 ये बातें मैं तुझे बता रहा हूँ, तू समझ ले। सर्वशक्तिशाली यहोवा स्वामी, उन सभी वस्तुओं को छीन लेगा जिन पर यहूदा और यरूशलेम निर्भर रहते हैं। परमेश्वर समूचा भोजन और जल भी छीन लेगा। 2 परमेश्वर सभी नायकों और महायोद्धाओं को छीन लेगा। सभी न्यायाधीशों, भविष्यवक्ताओं, ज्योतिषियों और बुजुर्गों को परमेश्वर छीन लेगा। 3 परमेश्वर सेना नायकों और प्रशासनिक नेताओं को छीन लेगा। परमेश्वर सलाहकारों और उन बुद्धिमान को छीन लेगा जो जादू करते हैं और भविष्य बताने का प्रयत्न करते हैं।
4 परमेश्वर कहता है, “मैं जवान बच्चों को उनका नेता बना दूँगा। बच्चे उन पर राज करेंगे। 5 हर व्यक्ति आपस में एक दूसरे के विरुद्ध हो जायेगा। नवयुवक बड़े बूढ़ों का आदर नहीं करेंगे। साधारण लोग महत्वपूर्ण लोगों को आदर नहीं देंगे।”
6 उस समय, अपने ही परिवार से कोई व्यक्ति अपने ही किसी भाई को पकड़ लेगा। वह व्यक्ति अपने भाई से कहेगा, “क्योंकि तेरे पास एक वस्त्र है, सो तू हमारा नेता होगा। इन सभी खण्डहरों का तू नेता बन जा।”
7 किन्तु वह भाई खड़ा हो कर कहेगा, “मैं तुम्हें सहारा नहीं दे सकता। मेरे घर पर्याप्त भोजन और वस्त्र नहीं हैं। तू मुझे अपना मुखिया नहीं बनायेगा।”
8 ऐसा इसलिये होगा क्योंकि यरूशलेम ने ठोकर खायी और उसने बुरा किया। यहूदा का पतन हो गया और उसने परमेश्वर का अनुसरण करना त्याग दिया। वे जो कहते हैं और जो करते हैं वह यहोवा के विरुद्ध है। उन्होंने यहोवा की महिमा के प्रति विद्रोह किया।
9 लोगों के चेहरों पर जो भाव हैं उनसे साफ़ दिखाई देता है कि वे बुरे कर्म करने के अपराधी हैं। किन्तु वे इन अपराधों को छुपाते नहीं है, बल्कि उन पर गर्व करते हुए अपने पापों की डोंडी पीटते हैं। वे ढीठ हैं। वे सदोम नगरी के लोगों के जैसे हैं। उन्हें इस बात की परवाह नही। है कि उनके पापों को कौन देख रहा है। यह उनके लिये बहुत बुरा होगा। अपने ऊपर इतनी बड़ी विपत्ति उन्होनें स्वयं बुलाई है।
10 अच्छे लोगों को बता दो कि उनके साथ अच्छी बातें घटेंगी। जो अच्छे कर्म वे करते हैं, उनका सुफल वे पायेंगे। 11 किन्तु बुरे लोगों के लिए यह बहुत बुरा होगा। उन पर बड़ी विपत्ति टूट पड़ेगी। जो बुरे काम उन्होंने किये हैं, उन सब के लिये उन्हें दण्ड दिया जायेगा। 12 मेरे लोगों को बच्चे निर्दयतापूर्वक सताएँगे। उन पर स्त्रियाँ राज करेंगी।
हे मेरे लोगों, तुम्हारे अगुआ तुम्हें बुरे रास्ते पर ले जायेंगे। सही मार्ग से वे तुम्हें भटका देंगे।
अपने लोगों के बारे में परमेश्वर का निर्णय
13 यहोवा अपने लोगों के विरोध में मुकदमा लड़ने के लिए खड़ा होगा। वह अपने लोगों का न्याय करने के लिए खड़ा होगा। 14 बुजुर्गों और अगुवाओं ने जो काम किये हैं यहोवा उनके विरुद्ध अभियोग चलाएगा।
यहोवा कहता है, “तुम लोगों ने अँगूर के बागों को (यहूदा को) जला डाला है। तुमने गरीब लोगों की वस्तुएँ ले लीं और वे वस्तुएँ अभी भी तुम्हारे घरों में हैं। 15 मेरे लोगों को सताने का अधिकार तुम्हें किसने दिया गरीब लोगों को मुँह के बल धूल में धकेलने का अधिकार तुम्हें किसने दिया” मेरे स्वामी, सर्वशक्तिशाली यहोवा ने यें बातें कहीं थीं।
16 यहोवा कहता है, “सिय्योन की स्त्रियाँ बहुत घमण्डी हो गयी हैं। वे सिर उठाये हुए और ऐसा आचरण करते हुए, जैसे वे दूसरे लोगों से उत्तम हों, इधर—उधर घूमती रहती हैं। वे स्त्रियाँ अपनी आँखें मटकाती रहती हैं तथा अपने पैरों की पाजेब झंकारती हुई इधर—उधर ठुमकती फिरती हैं।”
17 सिय्योन की ऐसी स्त्रियों के सिरों पर मेरा स्वामी फोड़े निकालेगा। यहोवा उन स्त्रियों को गंजा कर देगा। 18 उस समय, यहोवा उनसे वे सब वस्तुएँ छीन लेगा जिन पर उन्हें नाज़ थाः पैरों के सुन्दर पाजेब, सूरज और चाँद जैसे दिखने वाले कंठहार, 19 बुन्दे, कंगन तथा ओढ़नी, 20 माथापट्टी, पैर की झाँझर, कमरबंद, इत्र की शीशियाँ और ताबीज़ जिन्हें वे अपने कण्ठहारों में धारण करती थीं। 21 मुहरदार अंगूठियाँ, नाक की बालियाँ, 22 उत्तम वस्त्र, टोपियाँ, चादरें, बटुए, 23 दर्पण, मलमल के कपड़े, पगड़ीदार टोपियाँ और लम्बे दुशाले।
24 वे स्त्रियाँ जिनके पास इस समय सुगंधित इत्र हैं, उस समय उनकी वह सुगंध फफूंद और सड़ाहट से भर जायेगी। अब वे तगड़ियाँ पहनती है। किन्तु उस समय पहनने को बस उनके पास रस्से होंगे। इस समय वे सुशोभित जूड़े बाँधती हैं। किन्तु उस समय उनके सिर मुड़वा दिये जायेंगे। उनके एक बाल तक नहीं होगा। आज उनके पास सुन्दर पोशाकें हैं। किन्तु उस समय उनके पास केवल शोक वस्त्र होंगे। जिनके मुख आज खूबसूरत हैं उस समय वे शर्मनाक होंगे।
25 उस समय, तेरे योद्धा युद्धों में मार दिये जायेंगे। तेरे बहादुर युद्ध में मारे जायेंगे। 26 नगर द्वार के निकट सभा स्थलों में रोना बिलखना और दुःख ही फैला होगा। यरूशलेम उस स्त्री के समान हर वस्तु से वंचित हो जायेगी जिसका सब कुछ चोर और लुटेरे लूट गये हों। वह धरती पर बैठेगी और बिलखेगी।
4 उस समय, सात सात स्त्रियाँ एक पुरुष को दबोच लेंगी और उससे कहेंगी, “अपने खाने के लिये हम, अपनी रोटियों का जुगाड़ स्वयं कर लेंगी, अपने पहनने के लिए कपड़े हम स्वयं बनायेंगी। बस तू हमसे विवाह कर ले! ये सब काम हमारे लिए हम खुद ही कर लेंगी। बस तू हमें अपना नाम दे। कृपा कर के हमारी शर्म पर पर्दा डाल दे।”
2 उस समय, यहोवा का पौधा (यहूदा) बहुत सुन्दर और बहुत विशाल होगा। वे लोग, जो उस समय इस्राएल में रह रहे होंगे उन वस्तुओं पर बहुत गर्व करेंगे जिन्हें उनकी धरती उपजाती है। 3 उस समय वे लोग जो अभी भी सिय्योन और यरूशलेम में रह रहे होंगे, पवित्र लोग कहलाएँगे। यह उन सभी लोगों के साथ घटेगा जिनका एक विशेष सूची में नाम अंकित है। यह सूची उन लोगों की होगी जिन्हें जीवित रहने की अनुमति दे दी जायेगी।
4 यहोवा सिय्योन की स्त्रियों की अशुद्धता को धो देगा। यहोवा यरूशलेम से खून को धो कर बहा देगा। यहोवा न्याय की चेतना का प्रयोग करेगा और बिना किसी पक्षपात के निर्णय लेगा। वह दाहक चेतना का प्रयोग करेगा और हर वस्तु को शुद्ध (उत्तम) कर देगा। 5 उस समय, परमेश्वर यह प्रमाणित करेगा कि वह अपने लोगों के साथ है। दिन के समय, वह धुएँ के एक बादल की रचना करेगा और रात के समय एक चमचमाती लपट युक्त अग्नि। सिय्योन पर्वत पर, लोगों की हर सभा के ऊपर, उसके हर भवन के ऊपर आकाश में यें संकेत प्रकट होंगे। सुरक्षा के लिये हर व्यक्ति के ऊपर मण्डप का एक आवरण छा जायेगा। 6 मण्डप का यह आवरण एक सुरक्षा स्थल होगा। यह आवरण लोगों को सूरज की गर्मी से बचाएगा। मण्डप का यह आवरण सब प्रकार की बाढ़ों और वर्षा से बचने का एक सुरक्षित स्थान होगा।
© 1995, 2010 Bible League International