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Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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नहेमायाह 10-11

10 मुहर लगी वाचा पर निम्न लिखित नाम लिखे थे:

हकल्याह का पुत्र राज्यपाल नहेमायाह। सिदकिय्याह, सरायाह, अजर्याह, यिर्मयाह, पशहूर, अमर्याह, मल्किय्याह, हत्तूश, शबन्याह, मल्लूक, हारीम, मरेमोत, ओबद्याह, दानिय्येल, गिन्नतोन, बारुक, मशूल्लाम, अबिय्याह, मिय्यामीन, माज्याह, बिलगै और शमायाह। ये उन याजकों के नाम हैं जिन्हेंने मुहर लगी वाचा पर अपने नाम अंकित किये।

ये उन लेवीवंशियों के नाम हैं जिन्होंने मुहर लगी वाचा पर अपने नाम अंकित किये:

आजन्याह का पुत्र येशू, हेनादाद का वंशज बिन्नई और कदमिएल 10 और उनके भाइयों के नाम ये थे: शबन्याह, होदियाह, कलीता, पलायाह, हानान, 11 मीका, रहोब, हशब्याह, 12 जक्कर, शेरेब्याह, शकन्याह, 13 होदियाह, बानी और बनीन।

14 ये नाम उन मुखियाओं के हैं जिन्होंने उस मुहर लगी वाचा पर अपने नाम अंकित किये:

परोश, पहत—मोआब, एलाम, जत्तू बानी, 15 बुन्नी, अजगाद, बेबै, 16 अदोनिय्याह, बिग्वै, आदीन, 17 आतेर, हिजकिय्याह, अज्जूर, 18 होदियाह, हाशूम, बैसै, 19 हारीफ़, अनातोत, नोबै, 20 मगपिआश, मशूल्लम, हेजीर, 21 मेशजबेल, सादोक, यददू, 22 पलत्याह, हानान, अनायाह, 23 होशे, हनन्याह, हश्शूब, 24 हल्लोहेश, पिलहा, शोबेक, 25 रहूम, हशब्ना, माशेयाह, 26 अहियाह, हानान, आनान, 27 मल्लूक, हारीम, और बाना।

28-29 सो अब ये सभी लोग जिनके नाम ऊपर दिये गये हैं परमेश्वर के सामने यह विशेष प्रतिज्ञा लेतें हैं। यदि ये अपने वचन का पालन न करें तो उन के साथ बुरी बातें घटें! ये सभी लोग परमेश्वर के विधान का पालन करने की प्रतिज्ञा लेते हैं। परमेश्वर का यह विधान हमें परमेश्वर के सेवक मूसा द्वारा दिया गया था। ये सभी लोग सभी आदेशों, सभी नियमों और हमारे यहोवा परमेश्वर के उपदेशों का सावधानीपूर्वक पालन करने की प्रतिज्ञा लेते हैं। बाकी ये लोग भी प्रतिज्ञा लेते हैं: याजक लेवीवंशी, द्वारपाल, गायक, यहोवा के भवन के सेवक, तथा वे सभी लोग जिन्होंने आस—पास रहने वाले लोगों से, परमेश्वर के नियमों का पालन करने के लिए, अपने आपको अलग कर लिया था। उन लोगों की पत्नियाँ, पुत्र—पुत्रियाँ और हर वह व्यक्ति जो सुन समझ सकता था, अपने भाई बंधुओं, अपने मुखिया के साथ इस प्रतिज्ञा को अपनाने में सम्मिलित होते हैं कि परमेश्वर के सेवक मूसा के द्वारा दिये गये विधान का वे पालन करेंगे। यदि न करें तो उन पर विपत्तियाँ पड़े। वे सावधानी के साथ अपने स्वामी परमेश्वर के आदेशों, अध्यादेशों और निर्णयों का पालन करेंगे।

30 “हम प्रतिज्ञा करते हैं कि अपने आस—पास रहने वाले लोगों के साथ अपनी पुत्रियों का ब्याह नहीं करेगें और हम यह प्रतिज्ञा भी करते हैं कि उनकी लड़कियों के साथ अपने लड़कों को नहीं ब्याहेंगे।

31 “हम प्रतिज्ञा करते हैं कि सब्त के दिन काम नहीं करेंगे और यदि हमारे आस—पास रहने वाले लोग सब्त के दिन बेचने को अनाज या दूसरी वस्तुएँ लायेंगे तो विश्राम के उस विशेष दिन या किसी भी अन्य विशेष के दिन, उन वस्तुओं को नहीं खरीदेंगे। हर सातवें बरस हम न तो अपनी धरती को जोतेंगे और न बोएंगे, तथा हर सातवें वर्ष चक्र में हम दूसरे लोगों को दिये गये हर कर्ज को माफ़ कर देंगे।

32 “परमेश्वर के भवन का ध्यान रखने के लिये उसके आदेशों पर चलने के उत्तरदायित्व को हम ग्रहण करेंगे। हम हर साल एक तिहाई शेकेल हमारे परमेश्वर के सम्मान में भवन की सेवा, उपासना को बढ़ावा देने के लिये दिया करेंगे। 33 इस धन से उस विशेष रोटी का खर्च चला करेगा जिसे याजक मन्दिर की वेदी पर अर्पित करता है। इस धन से ही अन्नबलि और होमबलि का खर्च उठाया जायेगा। सब्त नये चाँद के त्यौहार तथा दूसरी सभाओं पर इसी धन से खर्चा होगा। उन पवित्र चढ़ावों और पापबलियों पर खर्च भी इस धन से ही किया जायेगा जिनसे इस्राएल के लोग शुद्ध बनते हैं। इस धन से ही हर उस काम का खर्च चलेगा जो हमारे परमेश्वर के मन्दिर के लिए आवश्यक है।

34 “हम यानी याजक, लेवीवंशी तथा लोगों ने मिल कर यह निश्चित करने के लिए पासे फैंके कि हमारे प्रत्येक परिवार को हर वर्ष एक निश्चित समय हमारे परमेश्वर के मन्दिर में लकड़ी का उपहार कब लाना है। वह लकड़ी जिसे हमारे परमेश्वर यहोवा की वेदी पर जलाया जाता है। हमें इस काम को अवश्य करना चाहिये क्योंकि यह हमारी व्यवस्था के विधान में लिखा है।

35 “हम अपने फलों के हर पेड़ और अपनी फसल के पहले फलों को लाने का उत्तरदीयित्व भी ग्रहण करते हैं। हर वर्ष यहोवा के मन्दिर में हम उस फल को लाकर अर्पित किया करेंगे।

36 “क्योंकि व्यवस्था के विधान में यह भी लिखा है इसलिए हम इसे भी किया करेंगे: हम अपने पहलौठे पुत्र, पहलौठे गाय के बच्चे, भेड़ों और बकरियों के पहले छौनो को लेकर परमेश्वर के मन्दिर में आया करेंगे। उन याजकों के पास हम इन सब को ले जाया करेंगे जो वहाँ मन्दिर में सेवा आराधना करते हैं।

37 “हम परमेश्वर के मन्दिर के भण्डार में याजकों के पास ये वस्तुएँ भी लाया करेंगे: पहला पिसा खाना, पहली अन्न—बलियाँ, हमारे सभी पेड़ों के पहले फल, हमारी नयी दाखमधु और तेल का पहला भाग। हम लेवीवंशियों के लिये अपनी उपज का दसवाँ हिस्सा भी दिया करेंगे क्योंकि प्रत्येक नगर में जहाँ हम काम करते हैं, लेवीवंशी हमसे ये वस्तुएँ लिया करते हैं। 38 लेवीवंशी जब उपज का यह भाग एकत्र करें तो हारुन के परिवार का एक याजक उनके साथ अवश्य होना चाहिये, और फिर इन सब वस्तुओं के दसवें हिस्से को वहाँ से लेकर लेवीवंशियों को चाहिये कि वे उन्हें हमारे परमेश्वर के मन्दिर मे ले आयें और उन्हें मन्दिर के खजाने की कोठियारों में रख दें। 39 इस्राएल के लोगों और लेवीवंशियों को चाहिये कि वे अपने उपहारों को कोठियारों में ले आयें। उपहार के अन्न, नयी दाखमधु और तेल को उन्हें वहाँ ले आना चाहिये। मन्दिर में काम आने वाली सभी वस्तुएँ उन कोठियारों में रखी जाती हैं और अपने कार्य पर नियुक्त याजक, गायक और द्वारपालों के कमरे भी वही थे।

“हम सभी प्रतिज्ञा करते हैं कि हम अपने परमेश्वर के मन्दिर की देख—रेख किया करेंगे!”

यरूशेलम में नये लोगों का प्रवेश

11 देखो अब इस्राएल के लोगों के मुखिया यरूशलेम में बस गए। इस्राएल के दूसरे लोगों को यह निश्चित करना था कि नगर में और कौन लोग बसेंगे। इसलिए उन्होंने पासे फेंके जिसके अनुसार हर दस व्यक्तियों में से एक को यरूशलेम के पवित्र नगर में रहना था और दूसरे नौ व्यक्तियों को अपने—अपने मूल नगरों में बसना था। यरूशलेम में रहने के लिए कुछ लोगों ने स्वयं अपने आप को प्रस्तुत किया। अपने आप को स्वयं प्रस्तुत करने के लिए दूसरे व्यक्तियों ने उन्हें धन्यवाद देते हुए आशीर्वाद दिये।

ये प्रांतों के वे मुखिया हैं जो यरूशलेम में बस गये। (कुछ इस्राएल के निवासी कुछ याजक लेवीवंशी मन्दिर के सेवक और सुलैमान के उन सेवकों के वंशज अलग—अलग नगरों में अपनी निजी धरती पर यहूदा में रहा करते थे, तथा यहूदा और बिन्यामीन परिवारों के दूसरे लोग यरूशलेम में ही रह रहे थे।)

यहूदा के वे वंशज जो यरूशलेम में बस गये थे, वे ये हैं:

उज्जियाह का पुत्र अतायाह (उज्जियाह जकर्याह का पुत्र था, जकर्याह अमर्याह का पुत्र था, और अमर्याह, शपत्याह का पुत्र था। शपत्याह महललेल का पुत्र था और महललेल पेरेस का वंशज था) मासेयाह बारुक का पुत्र था (और बारुक कोल—होजे का पुत्र था। कोल होजे हजायाह का पुत्र था। हजायाह योयारीब के पुत्र अदायाह का पुत्र था। योयारीब का पिता जकर्याह था जो शिलोई का वंशज था) पेरेस के जो वंशज यरूशलेम में रह रहे थे, उनकी संख्या थी चार सौ अड़सठ। वे सभी लोग शूरवीर थे।

बिन्यामीन के जो वंशज यरूशलेम में आये वे ये थे:

सल्लू जो योएद के पुत्र मशूल्लाम का पुत्र था (मशूल्लाम योएद का पुत्र था। योएद पदायाह का पुत्र था और पदायाह कोलायाह का पुत्र था। कोलायाह इतीएह के पुत्र मासेयाह का पुत्र था और इतीएह का पिता यशायाह था) जिन लोगों ने यशायाह का अनुसारण किया वे थे गब्बै और सल्लै। इनके साथ नौ सौ अटठाईस पुरुष थे। जिक्री का पुत्र योएल इनका प्रधान था और हस्सनूआ का पुत्र यहूदा यरूशलेम नगर का उपप्रधान था।

10 यरूशलेम में जो याजक बस गए, वे हैं:

योयारीब का पुत्र यदायाह और याकीन, 11 तथा सरायाह जो हिलकियाह का पुत्र था। (हिल्किय्याह सादोक के पुत्र मशुल्लाम का पुत्र था और सादोक अहीतूब के पुत्र मरायोत का पुत्र) अहीतूब परमेश्वर के भवन की देखभाल करने वाला था। 12 उनके भाईयों के आठ सौ बाइस पुरुष, जो भवन के लिये काम किया करते थे। तथा यरोहाम का पुत्र अदायाह। (यरोहाम, जो अस्सी के पुत्र पलल्याह का पुत्र था। अस्सी के पिता का नाम जकर्याह औऱ दादा का नाम पशहूर था। पशहूर जो मल्किय्याह का पुत्र था) 13 अदायाह और उसके साथियों की संख्या दो सौ बयालीस थी। ये लोग अपने—अपने परिवारों के मुखिया थे। अमशै जो अज़रेल का पुत्र था। (अज़रेल अहजै का पुत्र था। अहजै का पिता मशिल्लेमोत था। जो इम्मेर का पुत्र था), 14 अमशै और उसके साथी वीर योद्धा थे। वे संख्या में एक सौ चौबीस थे। (हग्गदोलीन का पुत्र जब्दिएल उनका अधिकारी हुआ करता था।)

15 ये वे लेवीवंशी हैं, जो यरूशलेम में जा बसे थे:

शमायाह जो हश्शूब का पुत्र था (हश्शूब अज्रीकाम का पुत्र और हुशब्याह का पोता था। हुशब्याह बुन्नी का पुत्र था)। 16 शब्बत और योजाबाद (ये दो व्यक्ति लेवीवंशियों के मुखिया थे। परमेश्वर के भवन के बाहरी कामों के ये अधिकारी थे)। 17 मत्तन्याह, (मत्तन्याह मीका का पुत्र था और मीका जब्दी का, तथा जब्दी आसाप का।) आसाप गायक मण्डली का निर्देशक था। आसाप स्तुति गीत और प्रार्थनाओं के गायन में लोगों की अगुवाई किया करता था बकबुकियाह (बकबुकियाह अपने भाइयों के ऊपर दूसरे दर्जे का अधिकारी था)। और शम्मू का पुत्र अब्दा (शम्मू यदूतन का पोता और गालाल का पुत्र था)। 18 इस प्रकार दो सौ चौरासी लेवीवंशी यरूशलेम के पवित्र नगर में जा बसे थे।

19 जो द्वारपाल यरूशलेम चले गये थे, उनके नाम ये थे:

अक्कूब, तलमोन, और उनके साथी। ये लोग नगर—द्वारों पर नजर रखते हुए उनकी रखवाली किया करते थे। ये संख्या में एक सौ बहत्तर थे।

20 इस्राएल के दूसरे लोग, अन्य याजक और लेवीवंशी यहूदा के सभी नगरों में रहने लगे। हर कोई व्यक्ति उस धरती पर रहा करता था जो उनके पूर्वजों की थी। 21 मन्दिर में सेवा आराधना करने वाले लोग ओपेल की पहाड़ी पर बस गये। सीहा और गिश्पा मन्दिर के उन सेवकों के मुखिया थे।

22 यरूशलेम में लेवीवंशियों के ऊपर उज्जी को अधिकारी बनाया गया। उज्जी बानी का पुत्र था। (बानी, मीका का पड़पोता, मत्तन्याह का पोता, और हशब्याह का पुत्र था)। उज्जी आसाप का वंशज था। आसाप के वंशज वे गायक थे जिन पर परमेश्वर के मन्दिर की सेवा का भार था। 23 ये गायक राजा की आज्ञाओं का पालन किया करते थे। राजा की आज्ञाएँ इन गायकों को बताती थीं कि प्रतिदिन क्या करना है। 24 वह व्यक्ति जो राजा को लोगों से सम्बन्धित मामलों में सलाह दिया करता था वह था पतहियाह (पतहियाह जेरह के वंशज मशेजबेल का पुत्र था और जेरह यहूदा का पुत्र था।)

25 यहूदा के लोग इन कस्बों में बस गये: किर्यतर्बा और उसके आस—पास के छोटे—छोटे गाँव, दिबोन और उसके आसपास के छोटे—छोटे गाँव, यकब्सेल और उसके आसपास के छोटे—छोटे गाँव, 26 तथा येशू, मोलादा, बेतपेलेत, 27 हसर्यूआल बेरशेबा तथा उस के आसपास के छोटे—छोटे गाँव 28 और सिकलग, मकोना और उसके आसपास के छोटे गाँव। 29 एन्निम्मोन, सोरा, यर्मूत, 30 जानोह और अदुल्लाम तथा उसके आसपास के छोटे छोटे गाँव। लाकीश और उसके आसपास के खेतों, अजेका और उसके आसपास के छोटे—छोटे गाँव। इस प्रकार बरशेबा से लेकर हिन्नैाम की तराई तक के इलाके में यहूदा के लोग रहने लगे।

31 जिन स्थानों में बिन्यामीन के वंशज रहने लगे थे, वे ये थे: गेबा मिकमश, अय्या, बेतेल, ओर उसके आस—पास के छोटे—छोटे गाँव, 32 अनातोत, नोब, अनन्याह 33 हासोर रामा, गित्तैम, 34 हादीद, सबोईम, नबल्लत, 35 लोद, ओनो तथा कारीगरों की तराई। 36 लेवीवंशियों के कुछ समुदाय जो यहूदा में रहा करते थे बिन्यामीन की धरती पर बस गये थे।

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