Beginning
अराम का राजा हिजकिय्याह को परेशान करने का प्रयत्न करता है
32 हिजकिय्याह ने ये सब कार्य जो विश्वासपूर्वक पूरे किये। अश्शूर का राजा सन्हेरीब यहूदा देश पर आक्रमण करने आया। सन्हेरीब और उसकी सेना ने किले के बाहर डेरा डाला। उसने यह इसलिये किया कि वह नगरों को जीतने की योजना बना सके। सन्हेरीब इन नगरों को अपने लिये जीतना चाहता था। 2 हिजकिय्याह जानता था कि वह यरूशलेम, इस पर आक्रमण करने आया है। 3 तब हिजकिय्याह ने अपने अधिकारियों और सेना के अधिकरियों से सलाह ली। वे एकमत हो गए कि नगर के बाहर के सोतों का पानी रोक दिया जाये। उन अधिकारियों और सेना के अधिकारियों ने हिजकिय्याह की सहायता की। 4 बहुत से लोग एक साथ आए और उन्होंने सभी सोतों और नालों को जो देश के बीच से होकर बहते थे, रोक दिया। उन्होंने कहा, “अश्शूर के राजा को यहाँ आने पर पर्याप्त पानी नहीं मिलेगा!” 5 हिजकिय्याह ने यरूशलेम को पहले से अधिक मजबूत बनाया। यह उसने इस प्रकार किया: उसने दीवार के टूटे भागों को फिर बनवाया। उसने दीवारों पर मीनारें बनाईं। उसने पहली दीवार के बाहर दूसरी दीवार बनाईं। उसने फिर पुराने यरूशलेम के पूर्व की ओर के स्थानों को मजबूत किया। उसने अनेकों हथियार और ढालें बनवाईं। 6-7 हिजकिय्याह ने युद्ध के अधिकारियों को लोगों का अधीक्षक होने के लिये चुना। वह इन अधिकारियों से नगर द्वार के बाहर खुले स्थान में मिला। हिजकिय्याह ने उन अधिकारियों से सलाह की और उन्हें उत्साहित किया। उसने कहा, “दृढ़ और साहसी बनो। अश्शूर के राजा या उसके साथ की विशाल सेना से मत डरना, न ही उससे परेशान होना। अश्शूर के राजा के पास जो शक्ति है उससे भी बड़ी शक्ति हम लोगों के साथ है! 8 अश्शूर के राजा के पास केवल व्यक्ति हैं। किन्तु हम लोगों के साथ यहोवा, अपना परमेश्वर है। हमारा परमेश्वर हमारी सहायता करेगा। वह हमारा युद्ध स्वयं लड़ेगा।” इस प्रकार यहूदा के राजा हिजकिय्याह ने लोगों को उत्साहित किया और उन्हें पहले से अधिक शक्तिशाली होने का अनुभव कराया।
9 अश्शूर के राजा सन्हेरीब और उसकी सारी सेना लाकीश नगर के पास डेरा डाले पड़ी थी। ताकि वे इसे हरा सकें तब अश्शूर के राजा सन्हेरीब ने यरूशलेम में यहूदा के राजा हिजकिय्याह के पास और यहूदा के सभी लोगों के पास अपने सेवक भेजे। सन्हेरीब के सेवक हिजकिय्याह और यरूशलेम के सभी लोगों के लिये एक सन्देश ले गए।
10 उन्होंने कहा, “अश्शूर का राजा सन्हेरीब यह कहता है: ‘तुम किसमें विश्वास करते हो जो तुम्हें यरूशलेम में युद्ध की स्थिति में ठहरना सिखाता है? 11 हिजकिय्याह तुम्हें मूर्ख बना रहा है। तुम्हें यरूशलेम में ठहरे रखने के लिये धोखा दिया जा रहा है। इस प्रकार तुम भूख—प्यास से मर जाओगे। हिजकिय्याह तुमसे कहता है, “यहोवा, हमारा परमेश्वर हमें अश्शूर के राजा से बचायेगा।” 12 हिजकिय्याह ने स्वयं यहोवा के उच्चस्थानों और वेदियों को हटाया है। उसने यहूदा और इस्राएल के तुम लोगों से कहा कि तुम लोगों को केवल एक वेदी पर उपासना करनी और सुगन्धि चढ़ानी चाहिए। 13 निश्चय ही, तुम जानते हो कि मेरे पूर्वजों और मैंने अन्य देशों के लोगों के साथ क्या किया है? अन्य देशों के देवता अपने लोगों को नहीं बचा सके। वे देवता मुझे उनके लोगों को नष्ट करने से न रोक सके। 14 मेरे पूर्वजों ने उन देशों को नष्ट किया। कोई भी ऐसा देवता नहीं जो मुझसे अपने लोगों को नष्ट होने से बचा ले। फिर भी तुम सोचते हो कि तुम्हारा देवता तुम्हें मुझसे बचा लेगा 15 हिजकिय्याह को तुम्हें मूर्ख बनाने और धोखा देने मत दो। उस पर विश्वास न करो क्योंकि किसी राष्ट्र या राज्य का कोई देवता कभी हमसे या हमारे पूर्वजों से अपने लोगों को बचाने में समर्थ नहीं हुआ है। इसलिये यह मत सोचो कि तुम्हारा देवता मुझे तुमको नष्ट करने से रोक लेगा।’”
16 अश्शूर के राजा के सेवकों ने इससे भी बुरी बातें यहोवा परमेश्वर तथा परमेश्वर के सेवक हिजकिय्याह के विरुद्ध कहीं। 17 अश्शूर के राजा ने ऐसे पत्र भी लिखे जो इस्राएल के यहोवा परमेश्वर का अपमान करते थे। अश्शूर के राजा ने उन पत्रों में जो कुछ लिखा था वह यह है: “अन्य राज्यों के देवता मुझसे नष्ट होने से अपने लोगों को न बचा सके। उसी प्रकार हिजकिय्याह का परमेश्वर अपने लोगों को मेरे द्वारा नष्ट किये जाने से नहीं रोक सकता।” 18 तब अश्शूर के राजा के सेवक यरूशलेम के उन लोगों पर जोर से चिल्लाये जो नगर की दीवार पर थे। उन सेवकों ने उस समय हिब्रू भाषा का प्रयोग किया जब वे दीवार पर के लोगों के प्रति चिल्लाये। अश्शूर के राजा के उन सेवकों ने यह सब इसलिये किया कि यरूशलेम के लोग डर जायें। उन्होंने वे बातें इसलिये कहीं कि यरूशलेम नगर पर अधिकार कर सकें। 19 उन सेवकों ने उन देवताओं के विरुद्ध बुरी बातें कहीं जिनकी पूजा संसार के लोग करते थे। वे देवता सिर्फ ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें मनुष्यों ने अपने हाथ से बनाया है। इस प्रकार उन सेवकों ने वे ही बुरी बातें यरूशलेम के परमेश्वर के विरुद्ध कहीं।
20 राजा हिजकिय्याह और आमोस के पुत्र यशायाह नबी ने इस समस्या के बारे में प्रार्थना की। उन्होंने जोर से स्वर्ग को पुकारा। 21 तब यहोवा ने अश्शूर के राजा के खेमे में एक स्वर्गदूत को भेजा। उस स्वर्गदूत ने अश्शूर की सेना के सब अधिकारियों, प्रमुखों और सैनिकों को मार डाला। इसलिये अश्शूर का राजा अपने देश में अपने घर लौट गया और उसके लोग उसकी वजह से बहुत लज्जित हुए। वह अपने देवता के मन्दिर में गया और उसी के पुत्रों में से किसी ने उसे वहीं तलवार से मार डाला। 22 इस प्रकार यहोवा ने हिजकिय्याह और यरूशलेम के लोगों को अश्शूर के राजा सन्हेरीब और सभी अन्य लोगों से बचाया। यहोवा ने हिजकिय्याह और यरूशलेम के लोगों की देखभाल की। 23 बहुत से लोग यरूशलेम में यहोवा के लिये भेंट लाए। वे यहूदा के राजा हिजकिय्याह के पास बहुमूल्य चीज़ें ले आए। उस समय के बाद सभी राष्ट्रों ने हिजकिय्याह को सम्मान दिया।
24 उन दिनों हिजकिय्याह बहुत बीमार पड़ा और मृत्यु के निकट था। उसने यहोवा से प्रार्थना की। यहोवा हिजकिय्याह से बोला और उसे एक चिन्ह दिया।[a] 25 किन्तु हिजकिय्याह का हृदय घमण्ड से भर गया इसलिये उसने परमेश्वर की कृपा के लिये परमेश्वर को धन्यवाद नहीं किया। यही कारण था कि परमेश्वर हिजकिय्याह और यरूशलेम तथा यहूदा के लोगों पर क्रोधित हुआ। 26 किन्तु हिजकिय्याह और यरूशलेम में रहने वाले लोगों ने अपने हृदय तथा जीवन को बदल दिया। वे विनम्र हो गये और घमण्ड करना छोड़ दिया। इसलिये जब तक हिजकिय्याह जीवित रहा यहोवा का क्रोध उस पर नहीं उतरा।
27 हिजकिय्याह को बहुत धन औऱ सम्मान प्राप्त था। उसने चाँदी, सोने, कीमती रत्न, मसालें, ढालें और सभी प्रकार की चीज़ों के रखने के लिये स्थान बनाए। 28 हिजकिय्याह के पास लोगों द्वारा भेजे गये अन्न, नया दाखमधु और तेल के लिये भंडारण भवन थे। उसके पास पशुओं के लिये पशुशालायें और भेड़ों के लिये भेड़शालायें थीं। 29 हिजकिय्याह ने बहुत से नगर भी बनाये और उसे अनेक पशुओं के झुँड और भेड़ों के रेवड़ें मिलीं। परमेश्वर ने हिजकिय्याह को बहुत अधिक धन दिया। 30 यह हिजकिय्याह ही था जिसने यरूशलेम में गिहोन सोते की ऊपरी जल धाराओं के उदगर्मो को रोका और उन जल धाराओं को दाऊद नगर के ठीक पश्चिम को बहाया और हिजकिय्याह उन सबमें सफल रहा जो कुछ उसने किया।
31 किसी समय बाबुल के प्रमुखों ने हिजकिय्याह के पास दूत भेजे। उन दूतों ने एक विचित्र दृश्य के विषय में पूछा जो राष्ट्रों में प्रकट हुआ था। जब वे आए तो परमेश्वर ने हिजकिय्याह को अकेले छोड़ दिया जिससे कि वह अपनी जाँच कर सके औऱ वह सब कुछ जान सके जो हिजकिय्याह के हृदय में था।[b]
32 हिजकिय्याह का शेष इतिहास औऱ कैसे उसने यहोवा को प्रेम किया, का विवरण आमोस के पुत्र यशायाह नबी के दर्शन ग्रन्थ और यहूदा और इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में मिलता है। 33 हिजकिय्याह मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया। लोगों ने हिजकिय्याह को उस पहाड़ी पर दफनाया जहाँ दाऊद के पुत्रों की कब्रें हैं। जब वह मरा तो यहूदा के सभी लोगों ने तथा यरूशलेम के रहने वालों ने हिजकिय्याह को सम्मान दिया। हिजकिय्याह के स्थान पर मनश्शे नया राजा हुआ। मनश्शे हिजकिय्याह का पुत्र था।
यहूदा का राजा मनशशे
33 मनशशे जब यहूदा का राजा हुआ वह बारह वर्ष का था। वह यरूशलेम में पचपन वर्ष तक राजा रहा। 2 मनशशे ने वे सब कार्य किये जिन्हें यहोवा ने गलत कहा था। उसने अन्य राष्ट्रों के भयंकर और पापपूर्ण तरीकों का अनुसरण किया। यहोवा ने उन राष्ट्रों को इस्राएल के लोगों के सामने बाहर निकल जाने के लिये विवश किया था। 3 मनशशे ने फिर उन उच्च स्थानों को बनाया जिन्हें उसके पिता हिजकिय्याह ने तोड़ गिराया था। मनशशे ने बाल देवताओं की वेदियाँ बनाईं और अशेरा—स्तम्भ खड़े किये। वह नक्षत्र—समूह को प्रणाम करता था तथा उन्हें पूजता था। 4 मनश्शे ने यहोवा के मन्दिर में असत्य देवताओं के लिये वेदियाँ बनाईं। यहोवा ने मन्दिर के बारे में कहा था, “मेरा नाम यरूशलेम में सदैव रहेगा।” 5 मनश्शे ने सभी नक्षत्र—समूहों के लिये यहोवा के मन्दिर के दोनों आँगनों में वेदियाँ बनाईं। 6 मनश्शे ने अपने बच्चों को भी बलि के लिये हिन्नोम की घाटी में जलाया। मनश्शे ने शान्तिपाठ, दैवीकरण और भविष्य कथन के रूप में जादू का उपयोग किया। उसने ओझाओं और भूत सिद्धि करने वालों के साथ बातें कीं। मनशशे ने यहोवा की दृष्टि में बहुत पाप किया। मनशशे के पापों ने यहोवा को क्रोधित किया। 7 उसने एक देवता की मूर्ति बनाई और उसे परमेश्वर के मन्दिर में रखा। परमेश्वर ने दाऊद और उसके पुत्र सुलैमान से मन्दिर के बारे में कहा था, “मैं इस भवन तथा यरूशलेम में अपना नाम सदा के लिये अंकित करता हूँ। मैंने यरूशलेम को इस्राएल के सभी परिवार समूहों में से चुना। 8 मैं फिर इस्राएलियों को उस भूमि से बाहर नहीं करुँगा जिसे मैंने उनके पूर्वजों को देने के लिये चुना। किन्तु उन्हें उन नियमों का पालन करना चाहिए जिनका आदेश मैंने दिया है। इस्राएल के लोगों को उन सभी विधियों, नियमों और आदेशों का पालन करना चाहिए जिन्हें मैंने मूसा को उन्हें देने के लिये दिया।”
9 मनशशे ने यहूदा के लोगों और यरूशलेम में रहने वाले लोगों को पाप करने के लिये उत्साहित किया। उसने उन राष्ट्रों से भी बड़ा पाप किया जिन्हें यहोवा ने नष्ट किया था और जो इस्राएलियों से पहले उस प्रदेश में थे!
10 यहोवा ने मनश्शे और उसके लोगों से बातचीत की। किन्तु उन्होंने सुनने से इन्कार कर दिया। 11 इसलिये यहोवा ने यहूदा पर आक्रमण करने के लिये अश्शूर के राजा के सेनापतियों को वहाँ पहुँचाया। इन सेनापतियों ने मनश्शे को पकड़ लिया और उसे बन्दी बना लिया। उन्होंने उसको बेड़ियाँ पहना दीं और उसके हाथों में पीतल की जंजीरे डालीं। उन्होंने मनश्शे को बन्दी बनाया और उसे बाबुल देश ले गए।
12 मनश्शे को कष्ट हुआ। उस समय उसने यहोवा अपने परमेश्वर से याचना की। मनश्शे ने स्वयं को अपने पूर्वजों के परमेश्वर के सामने विनम्र बनाया। 13 मनश्शे ने परमेश्वर से प्रार्थना की और परमेश्वर से सहायता की याचना की। यहोवा ने मनश्शे की याचना सुनी और उसे उस पर दया आई। यहोवा ने उसे यरूशलेम अपने सिंहासन पर लौटने दिया। तब मनश्शे ने समझा कि यहोवा सच्चा परमेश्वर है।
14 जब यह सब हुआ तो मनश्शे ने दाऊद नगर के लिये बाहरी दीवार बनाई। बाहरी दीवार गिहोन सोते के पश्चिम की ओर घाटी (किद्रोन) में मछली द्वार के साथ थी। मनश्शे ने इस दीवार को ओपेल पहाड़ी के चारों ओर बना दिया। उसने दीवार को बहुत ऊँचा बनाया। तब उसने अधिकारियों को यहूदा के सभी किलों में रखा। 15 मनश्शे ने विचित्र देवमूर्तियों को हटाया। उसने यहोवा के मन्दिर से देवमूर्ति को बाहर किया। उसने उन सभी वेदियों को हटाया जिन्हें उसने मन्दिर की पहाड़ी पर और यरूशलेम में बनाया था। मनश्शे ने उन सभी वेदियों को यरूशलेम नगर से बाहर फेंका। 16 तब उसने यहोवा की वेदी स्थापित की और मेलबलि तथा धन्यवाद भेंट इस पर चढ़ाई। मनश्शे ने यहूदा के सभी लोगों को इस्राएल के यहोवा परमेश्वर की सेवा करने का आदेश दिया। 17 लोगों ने उच्च स्थानों पर बलि देना जारी रखा, किन्तु उनकी भेंटें केवल यहोवा उनके परमेश्वर के लिये थीं।
18 मनश्शे ने जो कुछ अन्य किया और उसकी परमेश्वर से प्रार्थनाऐं और उन दृष्टाओं के कथन जिन्होंने इस्राएल के यहोवा परमेश्वर के नाम पर उससे बातें की थीं, वे सभी इस्राएल के राजा नामक पुस्तक में लिखी हैं। 19 मनश्शे ने कैसे प्रार्थना की और परमेश्वर ने वह कैसे सुनी और उस पर दया की, यह दृष्टाओं की पुस्तक में लिखा है। मनश्शे के सभी पाप और बुराईयाँ जो उसने स्वयं को विनम्र करने से पूर्व कीं और वे स्थान जहाँ उसने उच्च स्थान बनाए और अशेरा—स्तम्भ खड़े किये, दृष्टाओं की पुस्तक में लिखे हैं। 20 अन्त में मनश्शे मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफना दिया गया। लोगों ने मनश्शे को उसके अपने राजभवन में दफनाया। मनश्शे के स्थान पर आमोन नया राजा हुआ। आमोन मनश्शे का पुत्र था।
यहूदा का राजा आमोन
21 आमोन जब यहूदा का राजा हुआ, बाईस वर्ष का था। वह दो वर्ष तक यरूशलेम का राजा रहा। 22 आमोन ने यहोवा के सामने बुरे काम किये। यहोवा उससे जो कराना चाहता था उन्हें उसने ठीक अपने पिता मनश्शे की तरह नहीं किया। आमोन ने सभी खुदी हुई मूर्तियों तथा अपने पिता मनश्शे की बनाई मूर्तियों को बलि चढ़ाई। आमोन ने उन मूर्तियों की पूजा की। 23 आमोन ने स्वयं को अपने पिता मनश्शे की तरह यहोवा के सामने विनम्र नहीं बनाया। किन्तु आमोन अधिक से अधिक पाप करता गया। 24 आमोन के सेवकों ने उसके विरुद्ध योजना बनाई। उन्होंने आमोन को उसके घर में मार डाला। 25 किन्तु यहूदा के लोगों ने उन सभी सेवकों को मार डाला जिन्होंने राजा आमोन के विरुद्ध योजना बनाई थी। तब लोगों ने योशिय्याह को नया राजा चुना। योशिय्याह आमोन का पुत्र था।
यहूदा का राजा योशिय्याह
34 योशिय्याह जब राजा बना, आठ वर्ष का था। वह यरूशलेम में इकतिस वर्ष तक राजा रहा। 2 योशिय्याह ने वही किया जो उचित था। उसने वही किया जो यहोवा उससे करवाना चाहता था। उसने अपने पूर्वज दाऊद की तरह अच्छे काम किये। योशिय्याह उचित काम करने से नहीं हटा। 3 जब योशिय्याह आठ वर्ष तक राजा रह चुका तो वह अपने पूर्वज दाऊद के अनुसार परमेश्वर का अनुसरण करने लगा। योशिय्याह बच्चा ही था जब उसने परमेश्वर की आज्ञा माननी आरम्भ की। जब योशिय्याह राजा के रूप में बारह वर्ष का हुआ, उसने उच्च स्थानों, अशेरा—स्तम्भों पर खुदी मूर्तियों औऱ यहूदा और यरूशलेम में ढली मूर्तियों को नष्ट करना आरम्भ कर दिया। 4 लोगों ने बाल देवताओं की वेदियाँ तोड़ दीं। उन्होंने यह योशिय्याह के सामने किया। तब योशिय्याह ने सुगन्धि के लिये बनी उन वेदियों को नष्ट कर डाला जो लोगों से भी बहुत ऊँची उठी थीं। उसने खुदी मूर्तियों तथा ढली मूर्तियों को तोड़ डाला। उसने उन मूर्तियों को पीटकर चूर्ण बना दिया। तब योशिय्याह ने उस चूर्ण को उन लोगों की कब्रों पर डाला जो बाल देवताओं को बलि चढ़ाते थे। 5 योशिय्याह ने उन याजकों की हड्डियों तक को जलाया जिन्होंने अपनी वेदियों पर बाल—देवताओं की सेवा की थी। इस प्रकार योशिय्याह ने मूर्तियों और मूर्ति पूजा को यहूदा और यरूशलेम से नष्ट किया। 6 योशिय्याह ने यही काम मनश्शे, एप्रैम, शिमोन और नप्ताली तक के राज्यों के नगरों में किया। उसने वही उन सब नगरों के पास के खंडहरों के साथ किया। 7 योशिय्याह ने वेदियों और अशेरा—स्तम्भों को तोड़ दिया। उसने मूर्तियों को पीटकर चूर्ण बना दिया। उसने पूरे इस्राएल देश में उन सुगन्धि—वेदियों को काट डाला जो बाल की पूजा में काम आती थीं। तब योशिय्याह यरूशलेम लौट गया।
8 जब योशिय्याह यहूदा के राजा के रूप में अपने अट्ठारहवें वर्ष में था, उसने शापान, मासेयाह और योआह को अपने यहोवा परमेश्वर के मन्दिर की मरम्मत करने के लिये भेजा। शापान के पिता का नाम असल्याह था। मासेयाह नगर प्रमुख था और योआह के पिता का नाम योआहाज था। योआह वह व्यक्ति था जिसने जो कुछ हुआ उसे लिखा (वह लेखक था)।
योशिय्याह ने मन्दिर को स्थापित करने का आदेश दिया जिससे वह यहूदा और मन्दिर दोनों को स्वच्छ रख सके। 9 वे लोग महा याजक हिल्किय्याह के पास आए। उन्होंने वह धन उसे दिया जो लोगों ने परमेश्वर के मन्दिर के लिये दिया था। लेवीवंशी द्वारपालों ने यह धन मनश्शे, एप्रैम और बचे सभी इस्राएलियों से इकट्ठा किया। उन्होंने यह धन सारे यहूदा, बिन्यामीन और यरूशलेम में रहने वाले सभी लोगों से भी इकट्ठा किया। 10 तब लेवीवंशियों ने उन व्यक्तियों को यह धन दिया जो यहोवा के मन्दिर के काम की देख—रेख कर रहे थे और निरीक्षकों ने उन मज़दूरों को यह धन दिया जो यहोवा के मन्दिर को फिर बना कर स्थापित कर रहे थे। 11 उन्होंने बढ़ईयों और राजगीरों को पहले से कटी बड़ी चट्टानों को खरीदने के लिये और लकड़ी खरीदने के लिये धन दिया। लकड़ी का उपयोग भवनों को फिर से बनाने और भवन के शहतीरों के लिये किया गया। भूतकाल में यहूदा के राजा मन्दिरों की देखभाल नहीं करते थे। वे भवन पुराने और खंडहर हो गए थे। 12-13 लोगों ने विश्वासपूर्वक काम किया। उनके निरीक्षक यहत और ओबद्याह थे। यहत और ओबद्याह लेवीवंशी थे और वे मरारी के वंशज थे। अन्य निरीक्षक जकर्याह और मशुल्लाम थे। वे कहात के वंशज थे। जो लेवीवंशी संगीत—वाद्या बजाने में कुशल थे, वे भी चिज़ों को ढोने वाले तथा अन्य मज़दूरों का निरीक्षण करते थे। कुछ लेवीवंशी सचिव, अधिकारी और द्वारपाल का काम करते थे।
व्यवस्था की पुस्तक मिली
14 लेवीवंशियों ने उस धन को निकाला जो यहोवा के मन्दिर में था। उस समय याजक हिल्किय्याह ने यहोवा के व्यवस्था की वह पुस्तक प्राप्त की जो मूसा द्वारा दी गई थी। 15 हिल्किय्याह ने सचिव शापान से कहा, “मैंने यहोवा के मन्दिर में व्यवस्था की पुस्तक पाई है!” हिल्कय्याह ने शापान को पुस्तक दी। 16 शापान उस पुस्तक को राजा योशिय्याह के पास लाया। शापान ने राजा को सूचना दी, “तुम्हारे सेवक हर काम कर रहे हैं जो तुमने करने को कहा है। 17 उन्होंने यहोवा के मन्दिर से धन को निकाला और उसे निरीक्षकों एवं मज़दूरों को दे रहे हैं।” 18 तब शापान ने राजा योशिय्याह से कहा, “याजक हिल्किय्याह ने मुझे एक पुस्तक दी है।” तब शापान ने पुस्तक से पढ़ा। जब वह पढ़ रहा था, तब वह राजा के सामने था। 19 जब राजा योशिय्याह ने नियमों को पढ़े जाते हुए सुना, उसने अपने वस्त्र फाड़ लिये। 20 तब राजा ने हिल्किय्याह शापान के पुत्र अहीकाम, मीका के पुत्र अब्दोन, सचिव शापान और सेवक असायाह को आदेश दिया। 21 राजा ने कहा, “जाओ, मेरे लिये तथा इस्राएल और यहूदा में जो लोग बचे हैं उनके लिये यहोवा से याचना करो। जो पुस्तक मिली है उसके कथनों के बारे में पूछो। यहोवा हम लोगों पर बहुत क्रोधित है क्योंकि हमारे पूर्वजों ने यहोवा के कथनों का पालन नहीं किया। उन्होंने वे सब काम नहीं किये जो यह पुस्तक करने को कहती है!”
22 हिल्किय्याह और राजा के सेवक नबिया हुल्दा के पास गए, हुल्दा शल्लूम की पत्नी थी। शल्लूम तोखत का पुत्र था। तोखत हस्रा का पुत्र था। हस्रा राजा के वस्त्रों की देखरेख करता था। हुल्दा यरूशलेम के नये भाग में रहती थी। हिल्किय्याह और राजा के सेवकों ने हुल्दा को सब कुछ बताया जो हो चुका था। 23 हुल्दा ने उनसे कहा, “हस्राएल का परमेश्वर यहोवा जो कहता है वह यह है: राजा योशिय्याह से कहो: 24 यहोवा जो कहता है वह यह है, ‘मैं इस स्थान और यहाँ के निवासियों पर विपत्ति डालूँगा। मैं सभी भंयकर विपत्तियों को जो यहूदा के राजा के सामने पढ़ी पुस्तक में लिखी गई हैं, लाऊँगा। 25 मैं यह इसलिये करूँगा कि लोगों ने मुझे छोड़ा और अन्य देवताओं के लिये सुगन्धि जलाई। उन लोगों ने मुझे क्रोधित किया क्योंकि उन्होंने सभी बुरी बातें की हैं। इसलिये मैं अपना क्रोध इस स्थान पर उतारुँगा। मेरा क्रोध तप्त अग्निज्वाला की तरह बुझाया नहीं जा सकता!’
26 “किन्तु यहूदा के राजा योशिय्याह से कहो। उसने यहोवा से पूछने के लिये तुम्हें भेजा। इस्राएल का यहोवा परमेश्वर, ‘जिन कथनों को तुमने कुछ समय पहले सुना है, उनके विषय में कहता है: 27 योशिय्याह तुमने पश्चाताप किया और तुमने अपने को विनम्र किया और अपने वस्त्रों को फाड़ा, तथा तुम मेरे सामने चिल्लाए। अत: क्योंकि तुम्हारा हृदय कोमल है। 28 मैं तुम्हें तुम्हारे पूर्वजों के पास ले जाऊँगा। तुम अपनी कब्र में शान्तिपूर्वक जाओगे। तुम्हें उन विपत्तियों में से कोई भी नहीं देखनी पड़ेंगी जिन्हें मैं इस स्थान और यहाँ रहने वाले लोगों पर लाऊँगा।’” हिल्किय्याह और राजा के सेवक योशिय्याह के पास यह सन्देश लेकर लौटे।
29 राजा योशिय्याह ने यहूदा औऱ यरूशलेम के सभी अग्रजों को अपने पास आने और मिलने के लिये बुलाया। 30 राजा, यहोवा के मन्दिर में गया। यहूदा के सभी लोग, यरूशलेम में रहने वाले लोग, याजक, लेवीवंशी और सभी साधारण व असाधारण लोग योशिय्याह के साथ थे। योशिय्याह ने उन सबके सामने साक्षी की पुस्तक के कथन पढ़े। वह पुस्तक यहोवा के मन्दिर में मिली थी। 31 तब राजा अपने स्थान पर खड़ा हुआ। उसने यहोवा के साथ वाचा की। उसने यहोवा का अनुसरण करने की और यहोवा के आदेशों, विधियों और नियमों का पालन करने की वाचा की। योशिय्याह पूरे हृदय और आत्मा से आज्ञा पालन करने को सहमत हुआ। वह पुस्तक में लिखे वाचा के कथनों का पालन करने को सहमत हुआ। 32 तब योशिय्याह ने यरूशलेम और बिन्यामीन के सभी लोगों से वाचा को स्वीकार करने की प्रतिज्ञा कराई। यरूशलेम में लोगों ने परमेश्वर की वाचा का पालन किया, उस परमेश्वर की वाचा का जिसकी आज्ञा का पालन उनके पूर्वर्जों ने किया था। 33 योशिय्याह ने उन सभी स्थानों से मूर्तियों को फेंक दिया जो स्थान इस्राएल के लोगों के थे। यहोवा उन मूर्तियों से घृणा करता है। योशिय्याह ने इस्राएल के हर एक व्यक्ति को अपने यहोवा परमेश्वर की सेवा में पहुँचाया। जब तक योशिय्याह जीवित रहा, लोगों ने पूर्वजों के यहोवा परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना बन्द नहीं किया।
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