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Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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2 इतिहास 13-17

यहूदा का राजा अबिय्याह

13 जब राजा यारोबाम इस्राएल के राजा के रूप में अट्ठारहवें वर्ष में था अबिय्याह यहूदा का नया राजा बना। अबिय्याह यरूशलेम में तीन वर्ष तक राजा रहा। अबिय्याह की माँ मीकायाह थी। मीकायाह, ऊरीएल की पुत्री थी। ऊरीएल गिबा नगर का था और वहाँ अबिय्याह और यारोबाम के बीच युद्ध चल रहा था। अबिय्याह की सेना में चार लाख वीर सैनिक थे। यारोबाम ने अबिय्याह के विरुद्ध युद्ध के लिये तैयारी की। उसके पास आठ लाख वीर सैनिक थे।

तब अबिय्याह एप्रैम के पर्वतीय प्रदेश में समारैम पर्वत पर खड़ा हुआ। अबिय्याह ने कहा, “यारोबाम और सारे इस्राएली मेरी बात सुनों! तुम लोगों को जानना चाहिये कि यहोवा, इस्राएल के प्ररमेश्वर ने दाऊद और उसकी सन्तानों को इस्राएल का राजा होने का अधिकार सदैव के लिये दिया है। यहोवा ने दाऊद को यह अधिकार नमकवाली वाचा के साथ दिया। किन्तु यारोबाम अपने स्वामी के विरुद्ध हो गया! यारोबाम जो नबात का पुत्र था, दाऊद के पुत्र सुलैमान के अधिकारियों में से एक था। तब निकम्मे, बुरे व्यक्ति यारोबाम के मित्र हो गए तथा यारोबाम और वे बुरे व्यक्ति सुलैमान के पुत्र रहूबियाम के विरुद्ध हो गये। रहूबियाम युवक था और उसे अनुभव नहीं था। इसलिये रहूबियाम यारोबाम और उसके बुरे मित्रों को रोक न सका।

“तुम लोगों ने परमेश्वर के राज्य, जो दाऊद के पुत्रों द्वारा शासित है, हराने की योजना बनाई है। तुम लोगों की संख्या बहुत है और यारोबाम का तुम्हारे लिये बनाया गया सोने का बछड़ा तुम्हारा ईश्वर है! तुम लोगों ने हारून के वंशज यहोवा के याजकों और लेवीवंशियों को निकाल बाहर किया है। तुमने पृथ्वी के अन्य देशों के समान अपने याजकों को चुना है। तब तो कोई भी व्यक्ति जो एक युवा बैल और सात मेंढ़े लाये, उन झूठे ‘ईश्वरों’ की सेवा करने वाला याजक बन सकता है।

10 “किन्तु जहाँ तक हमारी बात है यहोवा हमारा परमेश्वर है। हम यहूदा के निवासी लोगों ने यहोवा की आज्ञा पालन से इन्कार किया नहीं है! हम लोगों ने उसको छोड़ा नहीं है! जो याजक यहोवा की सेवा करते हैं, वे हारून की सन्तान हैं और लेवीवंशी यहोवा की सेवा करने में याजकों की सहायता करते हैं। 11 वे होमबलि चढ़ाते हैं और धूप की सुगन्धि यहोवा को हर सुबह—शाम जलाते हैं। वे मन्दिर में विशेष मेज पर रोटियाँ पंक्तियों में रखते भी हैं और वे सोने के दीपाधार पर रखे हुए दीपकों की देखभाल करते हैं ताकि हर संध्या को वह प्रकाश के साथ चले। हम लोग यहोवा, अपने परमेश्वर की सेवा सावधानी के साथ करते हैं। किन्तु तुम लोगों ने उसको छोड़ दिया है। 12 स्वयं परमेश्वर हम लोगों के साथ है। वह हमारा शासक है और उसके याजक हमारे साथ हैं। परमेश्वर के याजक अपनी तुरही तुम्हें जगाने और तुम्हें उसके पास आने को उत्साहित करने के लिये फूँकते हैं! ऐ इस्राएल के लोगो, अपने पूर्वजों के यहोवा, परमेश्वर के विरुद्ध मत लड़ो! क्योंकि तुम सफल नहीं होगे!”

13 किन्तु यारोबाम ने सैनिकों की एक टुकड़ी को चुपके—चुपके गुप्त रूप से अबिय्याह की सेना के पीछे भेजा। यारोबाम की सेना अबिय्याह की सेना के सामने थी। यारोबाम की सेना के गुप्त सैनिक अबिय्याह की सेना के पीछे थे। 14 जब अबिय्याह की सेना के यहूदा के सैनिकों ने चारों ओर देखा तो उन्होंने यारोबाम की सेना को आगे और पीछे से आक्रमण करते पाया। यहूदा के लोगों ने यहोवा को जोर से पुकारा और याजकों ने तुरहियाँ बजाईं। 15 तब अबिय्याह की सेना के लोगों ने उद्घोष किया। जब यहूदा के लोगों ने उद्घोष किया तो परमेश्वर ने यारोबाम की सेना को हरा दिया। इस्राएल की सारी यारोबाम की सेना अबिय्याह की यहूदा की सेना द्वारा हरा दी गई। 16 इस्राएल के लोग यहूदा के लोगों के सामने भाग खड़े हुए। परमेश्वर ने यहूदा की सेना द्वारा इस्राएल की सेना को हरवा दिया। 17 अबिय्याह की सेना ने इस्राएल की सेना को बुरी तरह हराया और इस्राएल के पाँच लाख उत्तम योद्धा मारे गये। 18 इस प्रकार उस समय इस्राएल के लोग पराजित और यहूदा के लोग विजयी हुए। यहूदा की सेना विजयी हुई क्योंकि वह अपने पूर्वजों के परमेश्वर, यहोवा पर आश्रित रही।

19 अबिय्याह की सेना ने यारोबाम की सेना का पीछा किया। अबिय्याह की सेना ने यारोबाम से बेतेल, यशाना तथा एप्रोन नगरों को ले लिया। उन्होंने उन नगरों और उनके आस पास के छोटे गावों पर अधिकार कर लिया।

20 यारोबाम पर्याप्त शक्तिशाली फिर कभी नहीं हुआ जब तक अबिय्याह जीवित रहा। यहोवा ने यारोबाम को मार डाला। 21 किन्तु अबिय्याह शक्तिशाली हो गया। उसने चौदह स्त्रियों से विवाह किया और वह बाईस पुत्रों तथा सोलह पुत्रियों का पिता था। 22 अन्य जो कुछ अबिय्याह ने किया, वह इद्दो नबी की पुस्तकों में लिखा है।

14 अबिय्याह ने अपने पूर्वजों के साथ विश्राम लिया। लोगों ने उसे दाऊद के नगर में दफनाया। तब अबिय्याह का पुत्र आसा अबिय्याह के स्थान पर नया राजा हुआ। आसा के समय में देश में दस वर्ष शान्ति रही।

यहूदा का राजा आसा

आसा ने यहोवा परमेश्वर के सामने अच्छे और ठीक काम किये। आसा ने उन विचित्र वेदियों को हटा दिया जिनका उपयोग मूर्तियों की पूजा के लिये होता था। आसा ने उच्च स्थानों को हटा दिया और पवित्र पत्थरों को नष्ट कर दिया और आसा ने अशेरा स्तम्भों को तोड़ डाला। आसा ने यहूदा के लोगों को पूर्वजों के यहोवा परमेश्वर का अनुसरण करने का आदेश दिया। वह वही परमेश्वर है जिसका अनुसरण उनके पूर्वजों ने किया था और आसा ने लोगों को यहोवा के नियमों और आदेशों को पालन करने का आदेश दिया। आसा ने उच्च स्थानों को और सुगन्धि की वेदियों को यहूदा के सभी नगरों से हटाया। इस प्रकार जब आसा राजा था, राज्य शान्त रहा। आसा ने यहूदा में शान्ति के समय शक्तिशाली नगर बनाए। आसा इन दिनों युद्ध से मुक्त रहा क्योंकि यहोवा ने उसे शान्ति दी।

आसा ने यहूदा के लोगों से कहा, “हम लोग इन नगरों को बनाऐं और इनके चारों ओर चारदीवारी बनाऐं। हम गुम्बद, द्वार और द्वारों में छड़ें लगायें। जब तक हम लोग देश में हैं, यह करें। यह देश हमारा है क्योंकि हम लोगों ने अपने यहोवा परमेश्वर का अनुसरण किया है। उसने हम लोगों को सब ओर से शान्ति दी है।” इसलिये उन्होंने यह सब बनाया और वे सफल हुए।

आसा के पास यहूदा के परिवार समूह से तीन लाख और बिन्यामीन के परिवार समूह से दो लाख अस्सी हज़ार सेना थी। यहूदा के लोग बड़ी ढालें और भाले ले चलते थे। बिन्यामीन के लोग छोटी ढालें और धनुष से चलने वाले बाण ले चलते थे। वे सभी बलवान और साहसी योद्धा थे।

तब जेरह आसा की सेना के विरुद्ध आया। जेरह कूश का था। जेरह की सेना में एक लाख व्यक्ति और तीन सौ रथ थे। जेरह की सेना मारेशा नगर तक गई। 10 आसा जेरह के विरुद्ध लड़ने के लिये गया। आसा की सेना मारेशा के निकट सापता घाटी में युद्ध के लिये तैयार हुई।

11 आसा ने यहोवा परमेश्वर को पुकारा और कहा, “यहोवा, केवल तू ही बलवान लोगों के विरुद्ध कमजोर लोगों की सहायता कर सकता है! हे मेरे यहोवा परमेश्वर हमारी सहायता कर! हम तुझ पर आश्रित हैं। हम तेरे नाम पर इस विशाल सेना से युद्ध करते हैं। हे यहोवा, तू हमारा परमेश्वर है! अपने विरुद्ध किसी को जीतने न दे!”

12 तब यहोवा ने यहूदा की ओर से आसा की सेना का उपयोग कूश की सेना को पराजित करने के लिये किया और कूश की सेना भाग खड़ी हुई। 13 आसा की सेना ने कूश की सेना का पीछा लगातार गरार नगर तक किया। इतने अधिक कूश के लोग मारे गए कि वे युद्ध करने योग्य एक सेना के रूप में फिर इकट्ठे न हो सके। वे यहोवा और उसकी सेना के द्वारा कुचल दिये गये। आसा और उसकी सेना ने शत्रु से अनेक बहुमूल्य चीज़ें ले लीं। 14 आसा और उसकी सेना ने गरार के निकट के सभी नगरों को हराया। उन नगरों में रहने वाले लोग यहोवा से डरते थे। उन नगरों में असंख्य बहुमूल्य चीज़ें थीं। आसा की सेना उन नगरों से इन बहुमूल्य चीज़ों को साथ ले आई। 15 आसा की सेना ने उन डेरों पर भी आक्रमण किया जिनमें गड़रिये रहते थे। वे अनेक भेड़ें और ऊँट ले आए। तब आसा की सेना यरूशलेम लौट गई।

आसा के परिवर्तन

15 परमेश्वर की आत्मा अजर्याह पर उतरी। अजर्याह ओदेद का पुत्र था। अजर्याह आसा से मिलने गया। अजर्याह ने कहा, “आसा तथा यहूदा और बिन्यामीन के सभी लोगो मेरी सुनो! यहोवा तुम्हारे साथ तब है जब तुम उसके साथ हो। यदि तुम यहोवा को खोजोगे तो तुम उसे पाओगे। किन्तु यदि तुम उसे छोड़ोगे तो वह तुम्हें छोड़ देगा। बहुत समय तक इस्राएल सच्चे परमेश्वर के बिना था और वे शिक्षक याजक और नियम के बिना थे। किन्तु जब इस्राएल के लोग कष्ट में पड़े तो वे फिर इस्राएल के यहोवा परमेश्वर की ओर लौटे। उन्होंने यहोवा की खोज की और उसको उन्होंने पाया। उन विपत्ति के दिनों में कोई व्यक्ति सुरक्षित यात्रा नहीं कर सकता था। सभी राष्ट्र बहुत अधिक उपद्रव ग्रस्त थे। एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र को और एक नगर दूसरे नगर को नष्ट करता था। यह इसलिये हो रहा था कि परमेश्वर हर प्रकार की विपत्तियों से उनको परेशान कर रहा था। किन्तु आसा, तुम तथा यहूदा और बिन्यामीन के लोगो, शक्तिशाली बनो। कमजोर न पड़ो, ढीले न पड़ो क्योंकि तुम्हें अपने अच्छे काम का पुरस्कार मिलेगा!”

आसा ने जब इन बातों और ओदेद नबी के सन्देश को सुना तो वह बहुत उत्साहित हुआ। तब उसने सारे यहूदा और बिन्यामीन देश से घृणित मूर्तियों को हटा दिया और उसने एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश में अपने अधिकार में लाए गए नगरों में मूर्तियों को हटाया और उसने यहोवा की उस वेदी की मरम्मत की जो यहोवा के मन्दिर के द्वार मण्डप के सामने थी।

तब आसा ने यहूदा और बिन्यामीन के सभी लोगों को इकट्ठा किया। उसने एप्रैम, मनश्शे और शिमोन परिवारों को भी इकट्ठा किया जो इस्राएल देश से यहूदा देश में रहने के लिये आ गए थे। उनकी बहुत बड़ी संख्या यहूदा में आई क्योंकि उन्होंने देखा कि आसा का यहोवा परमेश्वर, आसा के साथ है।

10 आसा के शासन के पन्द्रहवें वर्ष के तीसरे महीने में आसा और वे लोग यरूशलेम में इकट्ठे हुए। 11 उस समय उन्होंने यहोवा को सात सौ बैलों और सात हज़ार भेड़ों और बकरों की बलि दी। आसा की सेना ने उन जानवरों और अन्य बहुमूल्य चीज़ों को अपने शत्रुओं से लिया था। 12 तब उन्होंने पूर्वजों के यहोवा परमेश्वर की सेवा पूरे हृदय और पूरी आत्मा से करने की वाचा की। 13 कोई व्यक्ति जो यहोवा परमेश्वर की सेवा से इन्कार करता था, मार दिया जाता था। इस बात का कोई महत्व नहीं था कि वह व्यक्ति महत्त्वपूर्ण या साधारण है अथवा पुरुष या स्त्री है। 14 तब आसा और लोगों ने यहोवा की शपथ ली। उन्होंने उच्च स्वर में उद्घोष किया। उन्होंने तुरही और मेढ़ों के सींगे बजाए। 15 यहूदा से सभी लोग प्रसन्न थे क्योंकि उन्होंने पूरे हृदय से शपथ ली थी। उन्होंने पूरे हृदय से यहोवा का अनुसरण किया तथा येहोवा की खोज की और उसे पाया। इसलिये यहोवा ने उनके पूरे देश में शान्ति दी।

16 राजा आसा ने अपनी माँ माका को राजमाता के पद से हटा दिया। आसा ने यह इसलिये किया क्योंकि माका ने एक भयंकर अशेरा—स्तम्भ बनाया था। आसा ने इस स्तम्भ को काट दिया और इसे छोटे—छोटे टुकड़ों में ध्वस्त कर दिया। तब उसने उन छोटे टुकड़ों को किद्रोन घाटी में जला दिया। 17 उच्च स्थानों को यहूदा से नहीं हटाया गया, किन्तु आसा का हृदय जीवन भर यहोवा के प्रति श्रद्धालु रहा।

18 आसा ने उन पवित्र भेंटों को रखा जिन्हें उसने और उसके पिता ने यहोवा के मन्दिर में दिये थे। वे चीज़ें चाँदी और सोने की बनीं थीं। 19 आसा के शासन के पैंतीस वर्ष तक कोई युद्ध नहीं हुआ।

आसा के अन्तिम वर्ष

16 आसा के राज्यकाल के छत्तीसवें वर्ष[a] बाशा ने यहूदा देश पर आक्रमण किया। बाशा इस्राएल का राजा था। वह रामा नगर में गया और इसे एक किले के रूप में बनाया। बाशा ने रामा नगर का उपयोग यहूदा के राजा आसा के पास जाने और उसके पास से लोगों को आने से रोकने के लिये किया। आसाने यहोवा के मन्दिर के कोषागार में रखे हुए चाँदी और सोने को लिया और उसने राजमहल से चाँदी सोना लिया। तब आसा ने बेन्हदद को सन्देश भेजा। बेन्हदद अराम का राजा था और दमिश्क नगर में रहता था। आसा का सन्देश था: “बेन्हदद मेरे और अपने बीच एक सन्धि होने दो। इस सन्धि को वैसे ही होने दो जैसा वह हमारे पिता और तुम्हारे पिता के बीच की गई थी। ध्यान दो, मैं तुम्हारे पास चाँदी सोना भेज रहा हूँ। अब तुम इस्राएल के राजा बाशा के साथ की गई सन्धि को तोड़ दो जिससे वह मुझे मुक्त छोड़ देगा और मुझे परेशान करना बन्द कर देगा।”

बेन्हदद ने आसा की बात मान ली। बेन्हदद ने अपनी सेना के सेनापतियों को इस्राएल के नगरों पर आक्रमण करने के लिये भेजा। इन सेनापतियों ने इय्योन, दान और आबेल्मैम नगरों पर आक्रमण किया। उन्होंने नप्ताली देश में उन सभी नगरों पर आक्रमण किया जहाँ खजाने रखे थे। बाशा ने इस्राएल के नगरों पर आक्रमण की बात सुनी। इसलिए उसने रामा में किला बनाने का काम रोक दिया और अपना काम छोड़ दिया। तब राजा आसा ने यहूदा के सभी लोगों को इकट्ठा किया। वे रामा नगर को गये और लकड़ी तथा पत्थर उठा लाए जिनका उपयोग बाशा ने किला बनाने के लिये किया था। आसा और यहूदा के लोगों ने पत्थरों और लकड़ी का उपयोग गेवा और मिस्पा नगरों को अधिक मजबूत बनाने के लिये किया।

उस समय दृष्टा हनानी यहूदा के राजा आसा के पास आया। हनानी ने उससे कहा, “आसा, तुम सहायता के लिये अराम के राजा पर आश्रित हुए, अपने यहोवा परमेश्वर पर नहीं। तुम्हें यहोवा पर आश्रित रहना चाहिये था। तुम याहोवा पर सहायता के लिये आश्रित नहीं रहे अतः अराम के राजा की सेना तुमसे भाग निकली। कूश और लूबी अति विशाल और शक्तिशाली सेना रखते थे। उनके पास अनेक रथ और सारथी थे। किन्तु आसा, तुम उस विशाल शक्तिशाली सेना को हराने में सहायता के लिये यहोवा पर आश्रित हुए और यहोवा ने तुम्हें उनको हराने दिया। यहोवा की आँखें सारी पृथ्वी पर उन लोगों को देखती फिरती हैं जो उसके प्रति श्रद्धालु हैं जिससे वह उन लोगों को शक्तिशाली बना सके। आसा, तुमने मूर्खतापूर्ण काम किया। इसलिये अब से लेकर आगे तक तुमसे युद्ध होंगे।”

10 आसा हनानी पर उस बात से क्रोधित हुआ जो उसने कहा। आसा इतना क्रोध से पागल हो उठा कि उसने हनानी को बन्दीगृह में डाल दिया। आसा उस समय कुछ लोगों के साथ नीचता और कठोरता का व्यवहार करता था।

11 आसा ने जो कुछ आरम्भ से अन्त तक किया। वह इस्राएल और यहुदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखा है। 12 आसा का पैर उसके राज्यकाल के उनतालीसवें वर्ष[b] में रोगग्रस्त हो गया। उसका रोग बहुत बुरा था किन्तु उसने यहोवा से सहायाता नहीं चाही। आसा ने वैद्यों से सहायता चाही। 13 आसा अपने राज्यकाल के इकतालीसवें वर्ष में मरा और इस प्रकार आसा ने अपने पूर्वजों के साथ विश्राम किया। 14 लोगों ने आसा को उसकी अपनी कब्र में दफनाया जिसे उसने स्वयं दाऊद के नगर में बनाया था। लोगों ने उसे एक अन्तिम शैया पर रखा जिस पर सुगन्धित द्रव्य और विभिन्न प्रकार के मिले इत्र रखे थे। लोगों ने आसा का सम्मान करने के लिये आग की महाज्वाला की।[c]

यहूदा का राजा यहोशापात

17 आसा के स्थान पर यहोशापात यहूदा का नया राजा हुआ। यहोशापात आसा का पुत्र था। यहोशापात ने यहूदा को शक्तिशाली बनाया जिससे वे इस्राएल के विरुद्ध लड़ सकते थे। उसने यहूदा के उन सभी नगरों में सेना की टुकड़ियाँ रखीं जो किले बना दिये गए थे। यहोशापात ने यहूदा और एप्रैम के उन नगरों में किले बनाए जिन्हें उसके पिता ने अपने अधिकार में किया था।

यहोवा यहोशापात के साथ था क्योंकि उसने वे अच्छे काम किये जिन्हें उसके पूर्वज दाऊद ने किया था। यहोशापात ने बाल की मूर्तियों का अनुसरण नहीं किया। यहोशापात ने उस परमेश्वर को खोजा जिसका अनुसरण उसके पूर्वज करते थे। उसने परमेश्वर के आदेशों का पालन किया। वह उस तरह नहीं रहा जैसे इस्राएल के अन्य लोग रहते थे। यहोवा ने यहोशापात को यहूदा का शक्तिशाली राजा बनाया। यहूदा के सभी लोग यहोशापात को भेंट लाए। इस प्रकार यहोशापात के पास बहुत सी सम्पत्ति और सम्मान दोनों थे। यहोशापात का हृदय यहोवा के मार्ग पर चलने में आनन्दित था। उसने उच्च स्थानों और अशेरा के स्तम्भों को यहूदा देश से बाहर किया।

यहोशापात ने अपने प्रमुखों को यहूदा के नगरों में उपदेश देने के लिये भेजा। यह यहोशापात के राज्यकाल के तीसरे वर्ष हुआ। वे प्रमुख बेन्हैल, ओबद्याह, जकर्याह, नतनेल और मीकायाह थे। यहोशापात ने इन प्रमुखों के साथ लेवीवंशियों को भी भेजा। ये लेवीवंशी शमायाह, नतन्याह, असाहेल, शमीरामोत, यहोनातान, अदोनिय्याह और तोबिय्याह थे। यहोशापात ने याजक एलीशामा और यहोराम को भेजा। उन प्रमुखों, लेवीवंशियों और याजकों ने यहूदा में लोगों को शिक्षा दी। उनके पास यहोवा के नियमों की पुस्तक थी। वे यहूदा के सभी नगरों में गये और लोगों को उन्होंने शिक्षा दी।

10 यहूदा के आसपास के नगर यहोवा से डरते थे। यही कारण था कि उन्होंने यहोशापात के विरुद्ध युद्ध नहीं छेड़ा। 11 कुछ पलिश्ती लोग यहोशापात के पास भेंट लाए। वे यहोशापात के पास चाँदी भी लाए क्योंकि वे जानते थे कि वह बहुत शक्तिशाली राजा है। कुछ अरब के लोग यहोशापात के पास रेवड़े लाये। वे उसके पास सात हज़ार सात सौ भेड़ें और सात हज़ार सात सौ बकरियाँ लाए।

12 यहोशापात अधिक से अधिक शक्तिशाली होता गया। उसने किले और भण्डार नगर यहूदा देश में बनाये। 13 उसने बहुत सी सामग्री भण्डार नगरों में रखी और यहोशापात ने यरूशलेम में प्रशिक्षित सैनिक रखे। 14 उन सैनिकों की अपने परिवार समूह में गिनती थी। यरूशलेम के उन सैनिकों की सूची ये हैः

यहूदा के परिवार समूह से ये सेनाध्यक्ष थेः

अदना तीन लाख सैनिकों का सेनाध्यक्ष था।

15 यहोहानान दो लाख अस्सी हज़ार सैनिकों का सेनाध्यक्ष था।

16 अमस्याह दो लाख सैनिकों का सेनाध्यक्ष था। अमस्याह जिक्री का पुत्र था। अमस्याह अपने को यहोवा की सेवा में अर्पित करने में प्रसन्न था।

17 बिन्यामीन के परिवार समूह से ये सेनाध्यक्ष थेः

एलयादा के पास दो लाख सैनिक थे जो धनुष, बाण और ढाल का उपयोग करते थे। एल्यादा एक साहसी सैनिक था।

18 यहोजाबाद के पास एक लाख अस्सी हज़ार व्यक्ति युद्ध के लिये तैयार थे।

19 वे सभी सैनिक यहोशापात की सेवा करते थे। राजा ने पूरे यहूदा देश के किलों में अन्य व्यक्तियों को भी रखा था।

Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)

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