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Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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1 इतिहास 9-11

इस्रएल के लोगों के नाम उनके परिवार के इतिहास में अंकित थे। वे परिवार इस्राएल के राजाओं के इतिहास में रखे गए थे।

यरूशलेम के लोग

यहूदा के लोग बन्दी बनाए गए थे और बाबेल को जाने को विवश किये गये थे। वे उस स्थान पर इसलिये ले जाए गए, क्योंकि वे परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्य नहीं थे। सबसे पहले लौट कर आने वाले और अपने नगरों और अपमने प्रदेश में रहने वाले लोगों में कुछ इस्राएली, याजक, लेवीवंशी और मन्दिर में सेवा करने वाले सेवक थे।

यरूशलेम में रहने वाले यहूदा, बिन्यामीन, एप्रैमी और मनश्शे के परिवार समूह के लोग ये हैं:

ऊतै अम्मीहूद का पुत्र था। अम्मीहूद ओम्री का पुत्र था। ओम्री इम्री का पुत्र था। इम्री बानी का पुत्र था। बानी पेरेस का वंशज था। पेरेस यहूदा का पुत्र था।

शिलोई लोग जो यरूशलेम में रहते थे, ये थेः असायाह, सबसे बड़ा पुत्र था और असायाह के पुत्र थे।

जेरह लोग, जो यरूशलेम में रहते थे, ये थेः यूएल और उसके सम्बन्धी, वे सब मिलाकर छः सौ नब्बे थे।

बिन्यामीन के परिवार समूह से जो लोग यरूशलेम में थे, वे ये हैं सल्लू मशुल्लाम का पुत्र था। मशुल्लाम होदव्याह का पुत्र था। होदव्याह हस्सनूआ का पुत्र था। यिब्रिय्याह यरोहाम का पुत्र था। एला उज्जी का पुत्र था। उज्जी मिक्री का पुत्र था। मशुल्लाम शपत्याह का पुत्र था। शपत्याह रूएल का पुत्र था। रुएल यीब्निय्याह का पुत्र था। बिन्यामीन का परिवार इतिहास बताता है कि यरूशलेम में उनके नौ सौ छप्पन व्यक्ति रहते थे। वे सभी व्यक्ति अपने परिवारों के प्रमुख थे।

10 ये वे याजक हैं जो यरूशलेम में रहते थेः यदायाह, यहोयारीब, याकीन और अजर्याह! 11 अजर्याह हिलकिय्याह का पुत्र था। हिलकिय्याह मशुल्लाम का पुत्र था। मशुल्लाम सादोक का पुत्र था। सादोक मरायोत का पुत्र था। मरायोत अहीतूब परमेश्वर के मन्दिर के लिये विशेष उत्तरदायी अधिकारी था। 12 वहाँ यरोहाम का पुत्र अदायाह भी था। यरोहाम पशहूर का पुत्र था। पशहूर मल्कियाह का पुत्र था और वहाँ अदोएल का पुत्र मासै था। अदोएल जहजेश का पुत्र था। जेरा मशुल्लाम का पुत्र था। मशुल्लाम मशिल्लीत का पुत्र था। मशिल्लीत इम्मेर का पुत्र था।

13 वहाँ एक हजार सात सौ साठ याजक थे। वे अपने परिवारों के प्रमुख थे। वे परमेश्वर के मन्दिर में सेवा करने के कार्य के लिये उत्तरदायी थे।

14 लेवी के परिवार समूह से जो लोग यरूशलेम में रहते थे, वे ये हैः हश्शूब का पुत्र शमायाह। हश्शूब अज्रीकाम का पुत्र था। अज्रीकाम हशव्याह का पुत्र था। हशव्याह मरारी का वंशज था। 15 यरूशलेम में बकबक्कर, हेरेश, गालाल और मत्तन्याह भी रहे थे। मत्तन्याह मीका का पुत्र था। मीका जिक्री का पुत्र था। जिक्री आसाप का पुत्र था। 16 ओबाद्याह शमायाह का पुत्र था। शमायाह गालाल का पुत्र था। गालाल यदूतून का पुत्र था और आसा का पुत्र बेरेक्याह यरूशलेम में रहता था। आसा एल्काना का पुत्र था। अल्काना तोपा लोगों के पास एक छोटे नगर में रहता था।

17 ये वे द्वारपाल हैं जो यरूशलेम में रहते थेः शल्लूम, अक्कूब, तल्मोन, अहीमान और उनके सम्बन्धी। शल्लूम उनका प्रमुख था। 18 अब ये व्यक्ति पूर्व की ओर राजा के द्वार के ठीक बाद में खड़े रहते हैं। वे द्वारपाल लेवी परिवार समूह से थे। 19 शल्लूम कोरे का पुत्र था। कोरे एब्यासाप का पुत्र था। एब्यासाप कोरह का पुत्र था। शल्लूम और उसके भाई द्वारपाल थे। वे कोरे परिवार से थे। उन्हें पवित्र तम्बू के द्वार की रक्षा करने का कार्य करना था। वे इसे वैसे ही करते थे जैसे इनके पूर्वजों ने इनके पहले किया था। उनेक पूर्वजों का यह कार्य था कि वे पवित्र तम्बू के द्वार की रक्षा करें। 20 अतीत में, पीनहास द्वारपालों का निरीक्षक था। पीनहास एलीआजर का पुत्र था। यहोवा पीनहास के साथ था। 21 जकर्याह पवित्र तम्बू के द्वार का द्वारपाल था।

22 सब मिलाकर दो सौ बारह व्यक्ति पवित्र तम्बू के द्वार की रक्षा के लिये चुने गए थे। उनके नाम उनेक परिवार इतिहास में उनके छोटे नगरों में लिखे हुए थे। दाऊद और समूएल नबी ने उन लोगों को चुना, क्यों कि उन पर विश्वास किया जा सकता था। 23 द्वारपालों और उनके वंशजों का उत्तरदायित्व यहोवा के मन्दिर, पवित्र तम्बू की रक्षा करना था। 24 वहाँ चारों तरफ द्वार थेः पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण। 25 द्वारपालों के सम्बन्धियों को, जो छोटे नगर में रहते थे, समय समय पर आकर उनको सहायता करनी पड़ती थी। वे आते थे और हर बार सात दिन तक द्वारपालों की सहायता करते थे।

26 द्वारपालों के चार प्रमुख द्वारपाल वहाँ थे। वे लेवीवंशी पुरुष थे। उनका कर्तव्य परमेश्वर के मन्दिर के कमरों और खजाने की देखभाल करना था। 27 वे रात भर परमेश्वर के मन्दिर की रक्षा में खड़े रहते थे और परमेश्वर के मन्दिर को प्रतिदिन प्रातः खोलने का उनका काम था।

28 कुछ द्वारपालों का काम मन्दिर की सेवा में काम आने वाली तश्तरियों की देखभाल करना था। वे इन तश्तरियों को तब गिनते थे जब वे भीतर लाई जाती थीं। वे इन तश्तरियों को तब गिनते थे जब वह बाहर जाती थीं। 29 अन्य द्वारपाल सज्जा—सामग्री और उन विशेष तश्तरियों की देखभाल के लिये चुने जाते थे। वे आटे, दाखमधु, तेल, सुगन्धि और विशेष तेल की भी देखभाल करते थे। 30 किन्तु केवल याजक ही विशेष तेल को मिश्रित करने का काम करते थे।

31 एक मतित्याह नामक लेवीवंशी था जिसका काम भेंट में उपयोग के लिये रोटी पकाना था। मतित्याह शल्लूम का सबसे बड़ा पुत्र था। शल्लूम कोरह परिवार का था। 32 द्वारपालों में से कुछ जो कोरह परिवार के थे, प्रत्येक सब्त को मेज पर रखी जाने वाली रोटी को तैयार करने का काम करते थे।

33 वे लेवी वंशी जो गायक थे और अपने परिवारों के प्रमुख थे, मन्दिर के कमरों में ठहरते थे। उन्हें अन्य काम नहीं करने पड़ते थे क्योंकि वे मन्दिर में दिन रात काम के लिये उत्तरदायी थे।

34 ये सभी लेवीवंशी अपने परिवारों के प्रमुख थे। वे अपने परिवार के इतिहास में प्रमुख के रूप में अंकित थे। वे यरूशलेम में रहते थे।

राजा शाऊल का परिवार इतिहास

35 यीएल गिबोन का पिता था। यीएल गिबोन नगर में रहता था। यीएल की पत्नी का नाम माका था। 36 यीएल का सबसे बड़ा पुत्र अब्दोन था। अन्य पुत्र सूर, कीश, बाल, नेर, नादाब, 37 गदोर, अह्यो, जकर्याह और मिल्कोत थे। 38 मिल्कोत शिमाम का पिता था। यीएल का परिवार अपने सम्बन्धियों के साथ यरूशलेम में रहता था।

39 नेर कीश का पिता था। कीश शाऊल का पिता था और शाऊल योनातान, मल्कीश, अबीनादाब, और एशबाल का पिता था।

40 योनातान का पुत्र मरीब्बाल था। मरीब्बाल मीका का पिता था।

41 मीका के पुत्र पीतोन, मेलेक, तहरे, और अहाज थे। 42 अहाज जदा का पिता था। जदा यारा का पिता था[a] यारा आलेमेत, अजमावेत और जिम्री का पिता था। जिम्री मोसा का पिता था। 43 मोसा बिना का पुत्र था। रपायाह बिना का पुत्र था। एलासा रपायाह का पुत्र था और आसेल एलासा का पुत्र था।

44 आसेल के छः पुत्र थे। उनके नाम थेः अज्रीकाम, बोकरू, यिश्माएल, शार्याह, ओबद्याह, और हनाना। वे आसेल के बच्चे थे।

राजा शाऊल की मुत्यु

10 पलिश्ती लोग इस्राएल के लोगों के विरुद्ध लड़े। इस्राए के लोग पलिश्तियों के सामने भाग खड़े हुए। बहुत से इस्राएली लोग गिलबो पर्वत पर मारे गए। पलिश्ती लोग शाऊल और उसके पुत्रों का पीछा लगातार करते रहे। उन्होंने उनको पकड़ लिया और उन्हें मार डाला। पलिश्तियों ने शाऊल के पुत्रों योनातान, अबीनादाब और मल्कीशू को मार डाला। शाऊल के चारों ओर युद्ध घमासान हो गया। धनुर्धारियों ने शाऊल पर अपने बाण छोड़े और उसे घायल कर दिया।

तब शाऊल ने अपने कवच वाहक से कहा, “अपनी तलवार बाहर खींचो और इसका उपयोग मुझे मारने में करो। तब वे खतनारहित जब आएंगे तो न मुझे चोट पहुँचायेंगे न ही मेरी हँसी उड़ायेंगे।”

किन्तु शाऊल का कवच वाहक भयभीत था। उसने शाऊल को मारना अस्वीकार किया। तब शाऊल ने आपनी तलवार का उपयोग स्वयं को मारने के लिये किया। वह अपनी तलवार की नोक पर गिरा। कवच वाहक ने देखा कि शाऊल मर गया। तब उसने स्वयं को भी मार डाला। वह अपनी तलवार की नोक पर गिरा और मर गया। इस प्रकार शाऊल और उसके तीन पुत्र मर गए। शाऊल का सारा परिवार एक साथ मर गया।

घाटी में रहने वाले इस्राएल के सभी लोगों ने देखा कि उनकी अपनी सेना भाग गई। उन्होंने देखा कि शाऊल और उसके पुत्र मर गए। इसलिए उन्होंने अपने नगर छोड़े और भाग गए। तब पलिश्ती उन नगरों में आए जिन्हें इस्राएलियों ने छोड़ दिया था और पलिश्ती उन नगरों में रहने लगे।

अगले दिन, पलिश्ती लोग शवों की बहुमूल्य वस्तुएँ लेने आए। उन्होंने शाऊल के शव और उसके पुत्रों के शवों को गिबोन पर्वत पर पाया। पलिश्तियों ने शाऊल के शव से चीजें उतारीं। उन्होंने शाऊल का सिर और कवच लिया। उन्होंने अपने पूरे देश में अपने असत्य देवताओं और लोगों को सूचना देने के लिये दूत भेजे। 10 पलिश्तियों ने शाऊल के कवच को अपने असत्य देवता के मन्दिर में रखा। उन्होंने शाऊल के सिर को दोगोन के मन्दिर में लटकाया।

11 याबेश गिलाद नगर में रहने वाले सब लोगों ने वह हर एक बात सुनी जो पलिश्ती लोगों ने शाऊल के साथ की थी। 12 याबेश के सभी वीर पुरुष शाऊल और उसके पुत्रों का शव लेने गए। वे उन्हें याबेश में शाउल और उसके पुत्रों का शव लेने गए। वे उन्हे याबेश में वापस ले आए। उन वीर पूरुषों ने शाउल और उसके पुत्रों की अस्थियों को, याबेश में एक विशाल पेड़ के नीचे दफनाया। तब उन्होंने अपना दुःख प्रकट किया और सात दिन तक उपवास रखा।

13 शाऊल इसलिये मरा कि वह यहोवा के प्रति विश्वासपात्र नहीं था। शाउल ने यहोवा के आदेशों का पालन नाहीं किया। शाऊल एक माध्यम के पास गया और 14 यहोवा को छोड़कर उससे सलाह माँगी। यही कारण है कि यहोवा ने उसे मार डाला और यिशै के पुत्र दाऊद को राज्य दिया।

दाऊद इस्राएल का राजा होता है

11 इस्राएल के सभी लोग हेब्रोन नगर में दाऊद के पास आए। उन्होंने दाऊद से कहा, “हम तुम्हारे ही रक्त माँस हैं। अतीत में, तुमने युद्ध में हमारा संचालन किया। तुमने हमारा तब भी संचालन किया जब शाऊल राजा था। हे दाऊद, यहोवा ने तुझ से कहा, तुम मेरे लोगों अर्थात् इस्राएल के लोगों के गड़रिया हो। तूम मेरे लोगों के ऊपर शासक होगे।”

इस्राएल के सभी प्रमुख दाऊद के पास हेब्रोन नगर में आए। दाऊद ने हेब्रोन में उन प्रमुखों के साथ यहोवा के सामने एक वाचा की। प्रमुखों ने दाऊद का अभिषेक किया। इस प्रकार उसे इस्राएल का राजा बनाया गया। यहोवा ने वचन दिया था कि यह होगा। यहोवा ने शमूएल का उपयोग यह वचन देने के लिये किया था।

दाऊद यरूशलेम पर अधिकार करता है

दाऊद और इस्राएल के सभी लोग यरूशलेम नगर को गए। यरूशलेम उन दिनों यबूस कहा जाता था। उस नगर में रहने वाले लोग यबूसी कहे जाते थे। उस नगर के निवासियों ने दाऊद से कहा, “तुम हमारे नगर के भीतर प्रवेश नहीं कर सकते।” किन्तु दाऊद ने उन लोगों को पराजित कर दिया। दाऊद ने सिय्योन के किले पर अधिकार कर लिया। यह स्थान “दाऊद नगर” बना।

दाऊद ने कहा, “वह व्यक्ति जो यबूसी लोगों पर आक्रमण का संचालन करेगा, मेरी पूरी सेना का सेनापति होगा।” अतः योआब ने आक्रमण का संचालन किया। योआब सरूयाह का पुत्र था। योआब सेना का सेनापति हो गया।

तब दाऊद ने किले में अपना महल बनाया। यही कारण है उसका नाम दाऊद नगर पड़ा। दाऊद ने किले के चारों ओर नगर बसाया। उसने इसे मिल्लो से नगर के चारों ओर की दीवार तक बसाया। योआब ने नगर के अन्य भागों की मरम्मत की। दाऊद महान बनता गया। सर्वशक्तिमान यहोवा उसके साथ था।

दाऊद के विशिष्ठ वीर

10 दाऊद के विशिष्ठ वीरों के ऊपर के प्रमुखों की यह सूची हैः ये वीर दाऊद के साथ उसके राज्य में बहुत शक्तिशाली बन गये। उन्होंने और इस्राएल के सभी लोगों ने दाऊद की सहायाता की और उसे राजा बनाया। यह ठीक वैसा ही हुआ जैसा परमेश्वर ने वचन दिया था।

11 यह दाऊद के विशिष्ठ वीरों की सूची हैः

यशोबाम हक्मोनी लोगों में से था। यशोबाम रथ अधिकारियों[b] का प्रमुख था। यशोबाम ने अपने भाले का उपयोग तीन सौ व्यक्तियों से युद्ध करने के लिये किया। उसने एक ही बार में उन तीन सौ व्यक्तियों को मार डाला।

12 एलीआजार दाऊद के विशिष्ठ वीरों में दूसरा था। एलीआजार दोदो का पुत्र था। दोदो अहोही से था। एलीआजार तीन वीरों में से एक था। 13 एलीआजर पसदम्मीम में दाऊद के साथ था। पलिश्ती लोग उस स्थान पर युद्ध करने आये। उस स्थान पर एक जौ से भरा खेत था। वही स्थान, जहाँ इस्राएली लोग पलिश्ती लोगों से भागे थे। 14 किन्तु वे तीन वीर उस खेत के बीच रुक गए थे और पलिश्तियों से लड़े तथा उन्हें हरा डाला था और इस प्रकार यहोवा ने इस्राएलियों को बड़ी विजय दी थी।

15 एक बार, दाऊद अदुल्लाम गुफा के पास था और पलिश्ती सेना नीचे रपाईम की घाटी में थी। तीस वीरों में से तीन वीर उस गुफा तक, लगातार रेंगते हुए दाऊद के पास पहुँचे।

16 अन्य अवसर पर, दाऊद किले में था, और पलिश्ती सेना का एक समूह बेतलेहेम में था। 17 दाऊद प्यासा था। अतः उसने कहा, “मैं चाहता हूँ कि मुझे कोई थोड़ा पानी बेतलेहेम में नगर द्वार के पास के कुएँ से दे।”[c] दाऊद सचमुच यह नहीं चाहता था। वह केवल बात कर रहा था। 18 तब तीन वीरों ने पलिश्ती सेना के बीच से युद्ध करते हुए अपना रास्ता बनाया और नगर—द्वार के निकट बेतलेहेम के कुएँ से पानी लिया। तीनों वीर दाऊद के पास पानी ले गए। किन्तु दाऊद ने पानी पीने से इन्कार कर दिया। उसने पानी को यहोवा के नाम पर अर्पण कर, उण्डेल दिया। 19 दाऊद ने कहा, “परमेश्वर, मैं इस पानी को नहीं पी सकता। इन व्यक्तियों ने मेरे लिये इस पानी को लाने में अपने जीवन को खतरे में डाला। अतः यदि मैं इस पानी को पीता हूँ तो यह उनका खून पीने के समान होगा।” इसलिये दाऊद ने उस जल को पीने से इन्कार किया। तीनों वीरों ने उस तरह के बहुत से वीरता के काम किये।

अन्य वीर योद्धा

20 योआब का भाई, अबीशै, तीन वीरों का प्रमुख था। वह अपने भाले से तीन सौ व्यक्तियों से लड़ा और उन्हें मार डाला। अबीशै तीन वीरों की तरह प्रसिद्ध हो गाया। 21 अबीशै तीस विरों से अधिक प्रसिद्ध था। वह उनका प्रमुख हो गया, यद्यपि वह तीन प्रमुख वीरों में से नहीं था।

22 यहोयादा का पुत्र बनायाह, कबजेल का एक वीर योद्धा था। बनायाह ने बड़े पराक्रम किये। उसने मोआब देश के दो सर्वोत्तम व्यक्तियों को मार डाला। वह जमीन के अन्दर एक माँद में घुसा और वहाँ एक शेर को भी मार डाला। वह उस दिन हुआ जब बर्फ गिर रही थी। 23 बनायाह ने मिस्र के एक व्यक्ति को मार डाला। वह व्यक्ति लगभग पाँच हाथ ऊँचा था। उस मिस्र के पुरुष के पास एक बहुत बड़ा और भारी भाला था। यह बुनकर के करघे के विशाल डण्डे के समान था और बनायाह के पास केवल एक लाठी थी। किन्तु बनायाह ने मिस्री से भाला छीन लिया। बनायाह ने मिस्री के अपने भाले का उपयोग किया और उसे मार डाला। 24 ये कार्य थे जिन्हें योहयादा के पुत्र बनायह ने किये। बनायाह तीन वीरों की तरह प्रसिद्ध हुआ। 25 बनायाह तीस वीरों में सबसे अधिक प्रसिद्ध था, किन्तु वह तीन प्रमुख वीरों में सम्मिलित नहीं किया गया। दाऊद ने बनायाह को अपने अंगरक्षकों का प्रमुख चुना।

तीस वीर

26 बलिष्ठ वीर (तीस वीर) ये थेः

असाहेल, योआब का भाई,

एल्हानान, दोदो का पुत्र एल्हानान बेतलेहेम नगर का थाः

27 हरोरी लोगों में से शम्मोत,

पलोनी लोगों में से हेलेस;

28 इक्केश का पुत्र, ईरा, ईरा तकोई नगर का था,

अनातोत नगर का अबीएजेर;

29 होसाती लोगों में से सिब्बके,

अहोही से ईलै,

30 नतोपाई लोगों में से महरै;

बाना का पुत्र हेलेद नतोपाई लोगों में से था;

31 रीबै का पुत्र इतै, इतै बिन्यामीन के गिबा नगर से था,

पिरातोनी लोगों में से बनायाह;

32 गाश घाटीयों से हूरै;

अराबा लोगों में से अबीएल,

33 बहूरीमी लोगों में से अजमावेत;

शल्बोनी लोगों में से एल्याबा;

34 हाशेम के पुत्र गीजोई हाशेम लोगों में से था;

शागे का पुत्र योनातान, योनातान हरारी लोगों मे से था;

35 सकार का पुत्र अहीआम, अहीआम हरारी लोगों में से था;

ऊर का पुत्र एलीपाल;

36 मेकराई लोगों में से हेपेर;

पलोनी लोगों में से अहिय्याह;

37 कर्मेली लोगों में से हेस्रो,

एज्बै का पुत्र नारै;

38 नातान का भाई योएल;

हग्री का पुत्र मिभार;

39 अम्मोनी लोगों में से सेलेक,

बेरोती नहरै (नहरै योआब का कवचवाहक था। योआब सरूयाह का पुत्र था)

40 येतेरी लोगों में से ईरा;

इथ्री लोगों में से गारेब;

41 हित्ती लोगों में से ऊरिय्याह;

अहलै का पुत्र जाबाद;

42 शीजा का पुत्र अदीना, शीजा रूबेन के परिवार समूह से था (अदीना रूबेन के परिवार समूह का प्रमुख था। परन्तु वह भी अपने साथ के तीस वीरों में से एक था।)

43 माका का पुत्र हानान;

मेतेनी लोगों में से योशापात;

44 अशतारोती लोगों में से उज्जिय्याह;

होताम के पुत्र शामा और यीएल, होताम अरोएरी लोगों में से था;

45 शिम्री का पुत्र यदीएल;

तीसी लोगों से योहा, योहा यदीएल का भाई था;

46 महवीमी लोगों में से एलीएल;

एलनाम के पुत्र यरीबै और योशव्याह;

मोआबी लोगों में से यित्मा;

47 मसोबाई लोगों में से एलीएल; ओबेद; और यासीएल।

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