Print Page Options
Previous Prev Day Next DayNext

Beginning

Read the Bible from start to finish, from Genesis to Revelation.
Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
Version
2 राजा 23-25

लोग नियम को सुनते हैं

23 राजा योशिय्याह ने यहूदा और इस्राएल के सभी प्रमुखों से आने और उससे मिलने के लिये कहा। तब राजा यहोवा के मन्दिर गया। सभी यहूदा के लोग और यरूशलेम में रहने वाले लोग उसके साथ गए। याजक, नबी, और सभी व्यक्ति, सबसे अधिक महत्वपूर्ण से सबसे कम महत्व के सभी उसके साथ गए। तब उसने साक्षीपत्र की पुस्तक पढ़ी। यह वही नियम की पुस्तक थी जो यहोवा के मन्दिर में मिली थी। योशिय्याह ने उस पुस्तक को इस प्रकार पढ़ा कि सभी लोग उसे सुन सकें।

राजा स्तम्भ के पास खड़ा हुआ और उसने यहोवा के साथ वाचा की। उसने यहोवा का अनुसरण करना, उसकी आज्ञा, वाचा और नियमों का पालन करना स्वीकार किया। उसने पूरी आत्मा और हृदय से यह करना स्वीकार किया। उसने उस पुस्तक में लिखी वाचा को मानना स्वीकार किया। सभी लोग यह प्रकट करने के लिये खड़े हुए कि वे राजा की वाचा का समर्थन करते हैं।

तब राजा ने महायाजक हिलकिय्याह, अन्य याजकों और द्वारपालों को बाल, अशेरा और आकाश के नक्षत्रों के सम्मान के लिये बनी सभी चीज़ों को यहोवा के मन्दिर के बाहर लाने का आदेश दिया। तब योशिय्याह ने उन सभी को यरूशलेम के बाहर किद्रोन के खेतों में जला दिया। तब राख को वे बेतेल ले गए।

यहूदा के राजाओं ने कुछ सामान्य व्यक्तियों को याजकों के रूप में सेवा के लिये चुना था। ये लोग हारून के परिवार से नहीं थे! वे बनावटी याजक यहूदा के सभी नगरों और यरूशलेम के चारों ओर के नगरों में उच्च स्थानों पर सुगन्धि जला रहे थे। वे बाल, सूर्य, चन्द्र, राशियों (नक्षत्रों के समूह) और आकाश के सभी नक्षत्रों के सम्मान में सुगन्धि जला रहे थे। किन्तु योशिय्याह ने उन बनावटी याजकों को रोक दिया।

योशिय्याह ने अशेरा स्तम्भ को यहोवा के मन्दिर से हटाया। वह अशेरा स्तम्भ को नगर के बाहर किद्रोन घाटी को ले गया और उसे वहीं जला दिया। तब उसने जले खण्ड़ों को कूटा तथा उस राख को साधारण लोगों की कब्रों पर बिखेरा।[a]

तब राजा योशिय्याह ने यहोवा के मन्दिर में बने पुरषगामियों के कोठों को गिरवा दिया। स्त्रियाँ भी उन घरों का उपयोग करती थीं और असत्य देवी अशेरा के सम्मान के लिये डेरे के आच्छादन बनाती थीं।

8-9 उस समय याजक बलि यरूशलेम को नहीं लाते थे और उसे मन्दिर की वेदी पर नहीं चढ़ाते थे। याजक सारे यहूदा के नगरों में रहते थे और वे उन नगरों में उच्च स्थानों पर सुगन्धि जलाते तथा बलि भेंट करते थे। वे उच्च स्थान गेबा से लेकर बेर्शेबा तक हर जगह थे। याजक अपनी अखमीरी रोटी उन नगरों में साधारण लोगों के साथ खाते थे, किन्तु यरूशलेम के मन्दिर में बने याजकों के लिये विशेष स्थान पर नहीं। परन्तु राजा योशिय्याह ने उन उच्च स्थानों को भ्रष्ट (नष्ट) कर डाला और याजकों को यरूशलेम ले गया। योशिय्याह ने उन उच्च स्थानों को भी नष्ट किया था जो यहोशू—द्वार के पास बायीं ओर थे। (यहोशू नगर का प्रशासक था।)

10 तोपेत “हिन्नोम के पुत्र की घाटी” में एक स्थान था जहाँ लोग अपने बच्चों को मारते थे और असत्य देवता मोलेक के सम्मान में उन्हें वेदी पर जलाते थे।[b] योशिय्याह ने उस स्थान को इतना भ्रष्ट (नष्ट) कर डाला कि लोग उस स्थान का फिर प्रयोग न कर सकें। 11 बीते समय में यहूदा के राजाओं ने यहोवा के मन्दिर के द्वार के पास कुछ घोड़े और रथ रख छोड़े थे। यह नतन्मेलेख नामक महत्वपूर्ण अधिकारी के कमरे के पास था। घोड़े और रथ सूर्य देव के सम्मान के लिये थे। योशिय्याह ने घोड़ों को हटाया और रथ को जला दिया।

12 बीते समय में यहूदा के राजाओं ने अहाब की इमारत की छत पर वेदियाँ बना रखी थीं। राजा मनश्शे ने भी यहोवा के मन्दिर के दो आँगनों में वेदियाँ बना रखी थीं। योशिय्याह ने उन वेदियों को तोड़ डाला और उनके टूटे टुकड़ों को किद्रोन की घाटी में फेंक दिया। 13 बीते समय में राजा सुलैमान ने यरूशलेम के निकट विध्वंसक पहाड़ी पर कुछ उच्च स्थान बनाए थे। उच्च स्थान उस पहाड़ी की दक्षिण की ओर थे। राजा सुलैमान ने पूजा के उन स्थानों में से एक को, सीदोन के लोग जिस भयंकर चीज़ अशतोरेत की पूजा करते थे, उसके सम्मान के लिये बनाया था। सुलैमान ने मोआब लोगों द्वारा पूजित भयंकर कमोश के सम्मान के लिये भी एक वेदी बनाई थी और राजा सुलैमान ने अम्मोन लोगों द्वारा पूजित भयंकर चीज मिल्कोम के सम्मान के लिये एक उच्च स्थान बनाया था। किन्तु राजा योशिय्याह ने उन सभी पूजा स्थानों को भ्रष्ट (नष्ट) कर दिया। 14 राजा योशिय्याह ने सभी स्मृति पत्थरों और अशेरा स्तम्भों को तोड़ डाला। तब उसने उस स्थानों के ऊपर मृतकों की हड्डियाँ बिखेरीं।[c]

15 योशिय्याह ने बेतेल की वेदी और उच्च स्थानों को भी तोड़ डाला। नबात के पुत्र यारोबाम ने इस वेदी को बनाया था। यारोबाम ने इस्राएल से पाप कराया था।[d]

योशिय्याह ने उच्च स्थानों और वेदी दोनों को तोड़ डाला। योशिय्याह ने वेदी के पत्थर के टुकड़े कर दिये। तब उसने उन्हें कूट कर धूलि बना दिया और उसने अशेरा स्तम्भ को जला दिया। 16 योशिय्याह ने चारों ओर नज़र दौड़ाई और पहाड़ पर कब्रों को देखा। उसने व्यक्तियों को भेजा और वे उन कब्रों से हड्डियाँ ले आए। तब उसने वेदी पर उन हड्डियों को जलाया। इस प्रकार योशिय्याह ने वेदी को भ्रष्ट (नष्ट) कर दिया। यह उसी प्रकार हुआ जैसा यहोवा के सन्देश को परमेश्वर के जन ने घोषित किया था।[e] परमेश्वर के जन ने इसकी घोषणा तब की थी जब यारोबाम वेदी की बगल में खड़ा था।

तब योशिय्याह ने चारों ओर निगाह दौड़ाई और परमेश्वर के जन की कब्र देखी।

17 योशिय्याह ने कहा, “जिस स्मारक को मैं देख रहा हूँ, वह क्या है”

नगर के लोगों ने उससे कहा, “यह परमेश्वर के उस जन की कब्र है जो यहूदा से आया था। इस परमेश्वर के जन ने वह सब बताया था जो आपने बेतेल में वेदी के साथ किया। उसने ये बातें बहुत पहले बताई थीं।”

18 योशिय्याह ने कहा, “परमेश्वर के जन को अकेला छोड़ दो। उसकी हडिड्यों को मत हटाओ।” अत: उन्होंने हडिड्याँ छोड़ दीं, और साथ ही शोमरोन से आये परमेश्वर के जन की हडिड्याँ भी छोड़ दीं।

19 योशिय्याह ने शोमरोन नगर के सभी उच्च स्थानों के पूजागृह को भी नष्ट कर दिया। इस्राएल के राजाओं ने उन पूजागृहों को बनाया था और उसने यहोवा को बहुत क्रोधित किया था। योशिय्याह ने उन पूजागृहों को वैसे ही नष्ट किया जैसे उसने बेतेल के पूजा के स्थानों को नष्ट किया।

20 योशिय्याह ने शोमरोन में रहने वाले उच्च स्थानों के सभी पुरोहितों को मार डाला। उसने उन्हीं वेदियों पर पुरोहितों का वध किया। उसने मनुष्यों की हड्डियाँ वेदियों पर जलाईं। इस प्रकार उसने पूजा के उन स्थानों को भ्रष्ट किया। तब वह यरूशलेम लौट गया।

यहूदा के लोग फसह पर्व मनाते हैं

21 तब राजा योशिय्याह ने सभी लोगों को आदेश दिया। उसने कहा, “यहोवा, अपने परमेश्वर का फसह पर्व मनाओ। इसे उसी प्रकार मनाओ जैसा साक्षीपत्र की पुस्तक में लिखा है।”

22 लोगों ने इस प्रकार फसह पर्व तब से नहीं मनाया था जब से इस्राएल पर न्यायाधीश शासन करते थे। इस्राएल के किसी राजा या यहूदा के किसी भी राजा ने कभी फसह पर्व का इतना बड़ा उत्सव नहीं मनाया था। 23 उन लोगों ने यहोवा के लिये यह फसह पर्व योशिय्याह के राज्यकाल के अट्ठारहवें वर्ष में यरूशलेम में मनाया।

24 योशिय्याह ने ओझाओं, भूतसिद्धकों, गृह—देवताओं, देवमूर्तियों और यहूदा तथा इस्राएल में जिन डरावनी चीज़ों की पूजा होती थी, सबको नष्ट कर दिया। योशिय्याह ने यह यहोवा के मन्दिर में याजक हिलकिय्याह को मिली पुस्तक में लिखे नियमों का पालन करने के लिये किया।

25 इसके पहले योशिय्याह के समान कभी कोई राजा नहीं हुआ था। योशिय्याह यहोवा की ओर अपने पूरे हृदय, अपनी पूरी आत्मा और अपनी पूरी शक्ति से गया। योशिय्याह की तरह किसी राजा ने मूसा के सभी नियमों का अनुसरण नहीं किया था और उस समय से योशिय्याह की तरह का कोई अन्य राजा कभी नहीं हुआ।

26 किन्तु यहोवा ने यहूदा के लोगों पर क्रोध करना छोड़ा नहीं। यहोवा अब भी उन पर सारे कामों के लिये क्रोधित था जिन्हें मनश्शे ने किया था। 27 यहोवा ने कहा, “मैंने इस्राएलियों को उनका देश छोड़ने को विवश किया। मैं यहूदा के साथ वैसा ही करूँगा मैं यहूदा को अपनी आँखों से ओझल करूँगा। मैं यरूशलेम को अस्वीकार करूँगा। हाँ, मैंने उस नगर को चुना, और यह वही स्थान है जिसके बारे में मैं (यरूशलेम के बारे में) बातें कर रहा था जब मैंने यह कहा था, ‘मेरा नाम वहाँ रहेगा।’ किन्तु मैं वहाँ के मन्दिर को नष्ट करूँगा।”

28 योशिय्याह ने जो अन्य काम किये वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं।

योशिय्याह की मृत्यु

29 योशिय्याह के समय मिस्र का राजा फिरौन नको अश्शूर के राजा के विरुद्ध युद्ध करने परात नदी को गया। राजा योशिय्याह नको से मिलने मगिद्दो गया।

फ़िरौन नको ने योशिय्याह को देख लिया और तब उसे मार डाला। 30 योशिय्याह के अधिकारियों ने उसके शरीर को एक रथ में रखा और उसे मगिद्दो से यरूशलेम ले गये। उन्होंने योशिय्याह को उसकी अपनी कब्र में दफनाया।

तब साधारण लोगों ने योशिय्याह के पुत्र यहोआहाज को लिया और उसका राज्याभिषेक कर दिया। उन्होंने यहोआहाज को नया राजा बनाया।

यहोआहाज यहूदा का नया राजा बनता है

31 यहोआहाज तेईस वर्ष का था, जब वह राजा बना। उसने यरूशलेम में तीन महीने शासन किया। उसकी माँ लिब्ना के यिर्मयाह की पुत्री हमूतल थी। 32 यहोआहाज ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। यहोआहाज ने वे ही सब काम किये जिन्हें उसके पूर्वजों ने किये थे।

33 फ़िरौन नको ने यहोआहाज को हमात प्रदेश में रिबला में कैद में रखा। अतः यहोआहाज यरूशलेम में शासन नहीं कर सका। फ़िरौन नको ने यहूदा को सात हज़ार पाँच सौ पौंड चाँदी और पचहत्तर पौंड सोना देने को विवश किया।

34 फ़िरौन नको ने योशिय्याह के पुत्र एल्याकीम को नया राजा बनाया। एल्याकीम ने अपने पिता योशिय्याह का स्थान लिया। फ़िरौन—नको ने एल्याकीम का नाम बदलकर यहोयाकीम कर दिया और फ़िरौन—नको यहोआहाज को मिस्र ले गया। योहआहाज मिस्र में मरा। 35 यहोयाकीम ने फ़िरौन को सोना और चाँदी दिया। किन्तु यहोयाकीम ने साधारण जनता से कर वसूले और उस धन का उपयोग फ़िरौन—नको को देने में किया। अतः हर व्यक्ति ने चाँदी और सोने का अपने हिस्से का भुगतान किया और राजा यहोयाकीम ने फ़िरौन को वह धन दिया।

36 यहोयाकीम जब राजा हुआ तो वह पच्चीस वर्ष का था। उसने ग्यारह वर्ष तक यरूशलेम में राज्य किया।

उसकी माँ रुमा के अदायाह की पुत्री जबीदा थी। 37 यहोयाकीम ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। यहोयाकीम ने वे ही सब काम किये जो उसके पूर्वजों ने किये थे।

राजा नबूकदनेस्सर यहूदा आता है

24 यहोयाकीम के समय में बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर यहूदा देश में आया। यहोयाकीम ने नबूकदनेस्सर की सेवा तीन वर्ष तक की। तब यहोयाकीम नबूकदनेस्सर के विरुद्ध हो गया और उसके शासन से स्वतन्त्र हो गया। यहोवा ने कसदियों, अरामियों, मोआबियों और अम्मोनियों के दलों को यहोयाकीम के विरुद्ध लड़ने के लिये भेजा। यहोवा ने उन दलों को यहूदा को नष्ट करने के लिये भेजा। यह वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने कहा था। यहोवा ने अपने सेवक नबियों का उपयोग वह कहने के लिये किया था।

यहोवा ने उन घटनाओं को यहूदा के साथ घटित होने का आदेश दिया। इस प्रकार वह उन्हें अपनी दृष्टि से दूर करेगा। उसने यह उन पापों के कारण किया जो मनश्शे ने किये। यहोवा ने यह इसलिये किया कि मनश्शे ने बहुत से निरपराध व्यक्तियों को मार डाला। मनश्शे ने उनके खून से यरूशलेम को भर दिया था और यहोवा उन पापों को क्षमा नहीं कर सकता था।

यहोयाकीम ने जो अन्य काम किये वे यहूदा के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे हैं। यहोयाकीम मरा और अपने पूर्वजों के साथ दफनाया गया। यहोयाकीम का पुत्र यहोयाकीन उसके बाद नया राजा हुआ।

मिस्र का राजा मिस्र से और अधिक बाहर नहीं निकल सका, क्योंकि बाबेल के राजा ने मिस्र के नाले से परात नदी तक सारे देश पर जिस पर मिस्र के राजा का आधिपत्य था, अधिकार कर लिया था।

नबूकदनेस्सर यरूशलेम पर अधिकार करता है

यहोयाकीन जब शासन करने लगा तब वह अट्ठारह वर्ष का था। उसने यरूशलेम में तीन महीने तक शासन किया। उसकी माँ यरूशलेम के एलनातान की पुत्री नहुश्ता थी। यहोयाकीन ने उन कामों को किया जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। उसने वे ही सब काम किये जो उसके पिता ने किये थे।

10 उस समय बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर के अधिकारी यरूशलेम आए उसे घेर लिया। 11 तब बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर नगर में आया। 12 यहूदा का राजा यहोयाकीन बाबेल के राजा से मिलने बाहर आया। यहोयाकीन की माँ, उसके अधिकारी, प्रमुख और अन्य अधिकारी भी उसके साथ गये। तब बाबेल के राजा ने यहोयाकीन को बन्दी बना लिया। यह नबूकदनेस्सर के शासनकाल का आठवाँ वर्ष था।

13 नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम से यहोवा के मन्दिर का सारा खजाना और राजमहल का सारा खजाना ले लिया। नबूकदनेस्सर ने उन सभी स्वर्ण—पात्रों को टुकड़ों में काट डाला जिन्हें इस्राएल के राजा सुलैमान ने यहोवा के मन्दिर में रखा था। यह वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने कहा था।

14 नबूकदनेस्सर ने यरूशलेम के सभी लोगों को बन्दी बनाया। उसने सभी प्रमुखों और अन्य धनी लोगों को बन्दी बना लिया। उसने दस हज़ार लोगों को पकड़ा और उन्हें बन्दी बनाया। नबूकदनेस्सर ने सभी कुशल मजदूरों और कारीगरों को ले लिया। कोई व्यक्ति, साधारण लोगों में सबसे गरीब के अतिरिक्त, नहीं छोड़ा गया। 15 नबूकदनेस्सर, यहोयाकीन को बन्दी के रूप में बाबेल ले गया। नबूकदनेस्सर राजा की माँ, उसकी पत्नियों, अधिकारी और देश के प्रमुख लोगों को भी ले गया। नबूकदनेस्सर उन्हें यरूशलेम से बाबेल बन्दी के रूप में ले गया। 16 बाबेल का राजा सारे सात हज़ार सैनिक और एक हज़ार कुशल मजदूर और कारीगर भी ले गया। ये सभी व्यक्ति प्रशिक्षित सैनिक थे और युद्ध में लड़ सकते थे। बाबेल का राजा उन्हें बन्दी के रूप में बाबेल ले गया।

राजा सिदकिय्याह

17 बाबेल के राजा ने मत्तन्याह को नया राजा बनाया। मत्तन्याह यहोयाकीन का चाचा था। बाबेल के राजा ने मत्तन्याह का नाम बदलकर सिदकिय्याह रख दिया। 18 सिदकिय्याह ने जब शासन करना आरम्भ किया तो वह इक्कीस वर्ष का था। उसने ग्यारह वर्ष यरूशलेम में शासन किया। उसकी माँ लिब्ना के यिर्मयाह की पुत्री हमूतल थी। 19 सिदकिय्याह ने वे काम किये जिन्हें यहोवा ने बुरा बताया था। सिदकिय्याह ने वे ही सारे काम किये जो यहोयाकीम ने किये थे। 20 यहोवा यरूशलेम और यहूदा पर इतना क्रोधित हुआ कि उसने उन्हें दूर फेंक दिया।

नबूकदनेस्सर, द्वारा सिदकिय्याह के शासन की समाप्ति

सिदकिय्याह ने बाबेल के राजा के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और उसकी आज्ञा मानने से इन्कार कर दिया।

25 अतः बाबेल का राजा नबूकदनेस्सर अपनी सारी सेना के साथ यरूशलेम के विरूद्ध युद्ध करने आया। सिदकिय्याह के राज्य के नौवें वर्ष के दसवें महीने के दसवें दिन यह घटित हुआ। नबूकदेनस्सर ने यरूशलेम के चारों ओर डेरा डाला। उसने यह कार्य यरूशलेम के लोगों को बाहर से भीतर, और भीतर से बाहर आने जाने से रोकने के लिये किया। तब उन्होंने यरूशलेम के चारों ओर मिट्टी की दीवार खड़ी की।

नबूकदनेस्सर की सेना यरूशलेम के चारों ओर सिदकिय्याह के यहूदा में शासनकाल के ग्यारहवें वर्ष तक बनी रही। नगर में भुखमरी की स्थिति बद से बदतर होती जा रही थी। चौथे महीने के नौवें दिन साधारण लोगों के लिये कुछ भी भोजन नहीं रह गया था।

नबूकदनेस्सर की सेना ने नगर प्राचीर में एक छेद बनाया। उस रात को राजा सिदकिय्याह और उसके सारे सैनिक भाग गए। वे राजा के बाग के सहारे दो दीवारों के द्वार से बच निकले। बाबेल की सेना नगर के चारों ओर थी। किन्तु सिदकिय्याह और उसकी सेना मरूभूमि की ओर की सड़क पर भाग निकले। बाबेल की सेना ने सिदकिय्याह का पीछा किया और उसे यरीहो के पास पकड़ लिया। सदिकिय्याह की सारी सेना भाग गई और उसे अकेला छोड़ दिया।

बाबेल सिदकिय्याह को रिबला में बाबेल के राजा के पास ले गये। बाबेल के राजा ने सिदकिय्याह को दण्ड देने का निर्णय किया। उन्होंने सिदकिय्याह के सामने उसके पुत्रों को मार डाला। तब उन्होंने सिदकिय्याह की आँखें निकाल लीं। उन्होंने उसे जंजीर में जकड़ा और उसे बाबेल ले गए।

यरूशलेम नष्ट कर दिया गया

नबूकदनेस्सर के बाबेल के शाशनकाल के उन्नीसवें वर्ष के पाँचवें महीने के सातवें दिन नबूजरदान यरूशलेम आया। नबूकदनेसर के अंगरक्षकों का नायक नबूजरदान था। नबूजरदान ने यहोवा का मन्दिर और राजमहल जला डाला। नबूजरदान ने यरूशलेम के सभी घरों को भी जला डाला। उसने बड़ी से बड़ी इमारतों को भी नष्ट किया।

10 तब नबूजरदान के साथ जो बाबेल की सेना थी उसने यरूशलेम के चारों ओर की दीवारों को गिरा दिया 11 और नबूजरदान ने उन सभी लोगों को पकड़ा जो तब तक नगर में बचे रह गए थे। नबूजरदान ने सभी लोगों को बन्दी बना लिया और उन्हें भी जिन्होंने आत्मसमपर्ण करने की कोशिश की। 12 नबूजरदान ने केवल साधारण व्यक्तियों में सबसे गरीब लोगों को वहाँ रहने दिया। उसने उन गरीब लोगों को वहाँ अंगूर और अन्य फसलों की देखभाल के लिये रहने दिया।

13 बाबल के सैनिकों ने यहोवा के मन्दिर के काँसे की वस्तुओं के टुकड़े कर डाले। उन्होंने काँसे के स्तम्भों, काँसे की गाड़ी को और काँसे के विशाल सरोवर के भी टुकड़े कर डाले, तब बाबेल के सैनिक उन काँसे के टुकड़ों को बाबेल ले गए। 14 कसदियों ने बर्तन, बेलचे, दीप—झारु चम्मच और काँसे के बर्तन जो यहोवा के मन्दिर में काम आती थी, को भी ले लिया। 15 नबूजरदान ने सभी कढ़ाहियों और प्यालों को ले लिया। उसने जो सोने के बने थे उन्हें सोने के लिये और चाँदी के बने थे उन्हें चाँदी के लिये लिया। 16-17 जो चीज़ें उसने लीं उनकी सूची यह है: दो काँसे के स्तम्भ, एक हौज और वह गाड़ी जिसे सुलैमान ने यहोवा के मन्दिर के लिये बनाया था। इन चीज़ों में लगा काँसा इतना भारी था कि उसे तोला नहीं जा सकता था। (हर एक स्तम्भ लगभग सत्ताईस फुट ऊँचा था। स्तम्भों के शीर्ष काँसे के बने थे। हर एक शीर्ष साढ़े चार फुट ऊँचा था। हर एक शीर्ष पर जाल और अनार का नमूना बना था। इसका सब कुछ काँसे का बना था। दोनों स्तम्भों पर एक ही प्रकार की आकृतियाँ थीं।)

बन्दी बनाए गए यहूदा के लोग

18 तब नबूजरदान ने मन्दिर से महायाजक सरायाह, द्वितीय याजक सपन्याह और तीन द्वार रक्षकों को लिया।

19 नगर में नबूजरदान ने एक अधिकारी को लिया। वह सेना का सेनापति था। नबूजरदान ने राजा के पाँच सलाहकारों को भी लिया जो नगर में पाए गए और उसने सेनापति के सचिव को लिया। सेनापति का सचिव वह व्यक्ति था जो साधारण लोगों की गणना करता था और उनमें से कुछ को सैनिक के रूप में चुनता था। नबूजरदान ने साठ अन्य लोगों को भी लिया जो नगर में पाए गए।

20-21 तब नबूजरदान इन सभी लोगों को रिबला में बाबेल के राजा के पास ले गया। बाबेल के राजा ने हमात देश के रिबला में इन्हें मार डाला। इस प्रकार यहूदा के लोगों को कैदी बनाकर उन्हें, उनके देश से निर्वासित किया गया।

नबूकदनेस्सर गदल्याह को यहूदा का शासक बनाता है

22 बाबेल के राजा नबूकदनेस्सर ने यहूदा देश में कुछ लोगों को छोड़ा। उसने अहीकाम के पुत्र गदल्याह को यहूदा के उन लोगों का शासक बनाया। अहीकाम शापान का पुत्र था।

23 जब सेना के सभी सेनापतियों और आदमियों ने सुना की बाबेल के राजा ने गदल्याह को शासक बनाया है तो वे गदल्याह के पास मिस्पा में आए। ये सेना के सेनापति नतन्याह का पुत्र इश्माएल, कारेहू का पुत्र योहानान, नतोपाई तन्हू मेत का पुत्र सरायाह तथा माकाई का पुत्र याजन्याह थे। 24 तब गदल्याह ने इन सेना के सेनापतियों और उनके आदमियों को वचन दिया। गदल्याह ने उनसे कहा, “बाबेल के अधिकारियों से डरो नहीं। इस देश में रहो और बाबेल के राजा की सेवा करो। तब तुम्हारे साथ सब कुछ ठीक रहेगा।”

25 किन्तु सातवें महीने राजा के परिवार का एलीशामा का पौत्र व नतन्याह का पुत्र इश्माएल दस पुरुषों के साथ आया और गदल्याह को मार डाला। इश्माएल और उसके दस आदमियों ने मिस्पा में गदल्याह के साथ जो यहूदी और कसदी थे, उन्हें भी मार डाला। 26 तब सभी लोग सबसे कम महत्वपूर्ण और सबसे अधिक महत्वपूर्ण तथा सेना के नायक मिस्र को भाग गए। वे इसलिये भागे कि वे कसदियों से भयभीत थे।

27 बाद में राजा एवील्मरोदक यहूदा का राजा बना। उसने यहोयाकीन को बन्दीगृह से निकलने दिया। यह यहूदा के राजा यहोयाकीन के बन्दी बनाये जाने के सैंतीसवे वर्ष में हुआ। यह एवील्मरोदक के शासन आरम्भ करने के बारहवें महीने के सत्ताईसवें दिन हुआ। 28 एवील्मरोदक ने यहोयाकीन से दयापूर्वक बातें कीं। एवील्मरोदक ने यहोयाकीन को बाबेल में रहने वाले उसके सभी साथी राजाओं से अधिक उच्च स्थान प्रदान किया। 29 एवील्मरोदक ने यहोयाकीन के बन्दीगृह के वस्त्रों को पहनना बन्द करवाया। यहोयाकीन ने एवील्मरोदक के साथ एक ही मेज पर खाना खाया। उसने अपने शेष जीवन में हर एक दिन ऐसा ही किया। 30 इस प्रकार राजा एवील्मरोदक ने यहोयाकीन को जीवन पर्यन्त नियमित रूप से प्रतिदिन का भोजन प्रदान किया।

Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)

© 1995, 2010 Bible League International