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Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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2 राजा 9-11

एलीशा एक युवा नबी को येहू का अभिषेक करने को कहता है

एलीशा नबी ने नबियों के समूह में से एक को बुलाया। एलीशा ने इस व्यक्ति से कहा, “तैयार हो जाओ और अपने हाथ में तेल की इस छोटी बोतल को ले लो। गिलाद के रामोत को जाओ। जब तुम वहाँ पहुँचो तो निमशी के पौत्र अर्थात् यहोशापात के पुत्र येहू से मिलो। तब अन्दर जाओ और उसके भाईयों में से उसे उठाओ। उसे किसी भीतरी कमरे में ले जाओ। तेल की छोटी बोतल ले जाओ और येहू के सिर पर उस तेल को डालो। यह कहो, ‘यहोवा कहता हैः मैंने तुम्हारा अभिषेक इस्राएल का नया राजा होने के लिये किया है।’ तब दरवाजा खोलो और भाग चलो। वहाँ प्रतीक्षा न करो!”

अतः यह युवा नबी गिलाद के रामोत गया। जब युवक पहुँचा, उसने सेना के सेनापतियों को बैठे देखा। युवक ने कहा, “सेनापति, मैं आपके लिये एक सन्देश लाया हूँ।”

येहु ने कहा, “हम सभी यहाँ है। हम लोगों में से किसके लिये सन्देश है”

युवक ने कहा, “सेनापति, सन्देश आपके लिये है।”

येहू उठा और घर में गया। तब युवा नबी ने उस तेल को येहू के सिर पर डाल दिया। युवा नबी ने येहू से कहा, “इस्राएल का परमेश्वर, यहोवा कहता है, ‘मैं यहोवा के लोगों, इस्राएलियों पर नया राजा होने के लिये तुम्हारा अभिषेक करता हूँ। तुम्हें अपने राजा अहाब के परिवार को नष्ट कर देना चाहिये। इस प्रकार मैं ईज़ेबेल को, अपने सेवकों, नबियों तथा यहोवा के उन सभी सेवकों की मृत्यु के लिये जिनकी हत्या कर दी गई है, दण्डित करूँगा। इस प्रकार अहाब का सारा परिवार मर जाएगा। मैं अहाब के परिवार के किसी लड़के को जीवित नहीं रहने दूँगा। इसका कोई महत्व नहीं होगा कि वह लड़का दास है या इस्राएल का स्वतन्त्र व्यक्ति है। मैं अहाब के परिवार को, नबात के पुत्र यारोबाम या अहिय्याह के पुत्र बाशा के परिवार जैसा कर दूँगा। 10 यिज्रेल के क्षेत्र में ईज़ेंबेल को कुत्ते खायेंगे। ईज़ेंबेल को दफनाया नहीं जाएगा।’”

तब युवक नबी ने दरवाजा खोला और भाग गया।

सेवक येहू को राजा घोषित करते हैं

11 येहू अपने राजा के अधिकारियों के पास लौटा। अधिकारियों में से एक ने येहू से कहा, “क्या सब कुशल तो है यह पागल आदमी तुम्हारे पास क्यों आया था”

येहू ने सेवकों को उत्तर दिया, “तुम उस व्यक्ति को और जो पागलपन की बातें वह करता है, जानते हो।”

12 अधिकारियों ने कहा, “नहीं! हमें सच्ची बात बताओ। वह क्या कहता है” येहू ने अधिकारियों को वह बताया जो युवक नबी ने कहा था। येहू ने कहा, “उसने कहा ‘यहोवा यह कहता हैः मैंने इस्राएल का नया राजा होने के लिये तुम्हारा अभिषेक किया है।’”

13 तब हर एक अधिकारी ने शीघ्रता से अपने लबादे उतारे और येहू के सामने पैड़ियों पर उन्हें रखा। तब उन्होंने तुरही बजाई और यह घोषणा की, “येहू राजा है!”

येहू यिज्रैल जाता है

14 इसलिये येहू ने, जो निमशी का पौत्र और यहोशापात का पुत्र था योराम के विरुद्ध योजनायें बनाईं।

उस समय योराम और इस्राएली, अराम के राजा हजाएल से, गिलाद के रामोत की रक्षा का प्रयत्न कर रहे थे। 15 किन्तु राजा योराम को अरामियों द्वारा किये गये घाव से स्वस्थ होने के लिये इस्राएल आना पड़ा था। अरामियों ने योराम को तब घायल किया था जब उसने अराम के राजा हजाएल के विरुद्ध युद्ध किया था।

अतः येहू ने अधिकारियों से कहा, “यदि तुम लोग स्वीकार करते हो कि मैं नया राजा हूँ तो नगर से किसी व्यक्ति को यिज्रैल में सूचना देने के लिये बचकर निकलने न दो।”

16 योराम यिज्रैल में आराम कर रहा था। अत: येहू रथ में सवार हुआ और यिज्रैल गया। यहूदा का राजा अहज्याह भी योराम को देखने यिज्रैल आया था।

17 एक रक्षक यिज्रैल में रक्षक स्तम्भ पर खड़ा था। उसने येहू के विशाल दल को आते देखा। उसने कहा, “मैं लोगों के एक विशाल दल को देख रहा हूँ!”

योराम ने कहा, “किसी को उनसे मिलने घोड़े पर भेजो। इस व्यक्ति से यह कहने के लिये कहो, ‘क्या आप शान्ति की इच्छा से आए हैं?’”

18 अतः एक व्यक्ति येहू से मिलने के लिये घोड़े पर सवार होकर गया। घुड़सवार ने कहा, “राजा योराम पूछते हैं, ‘क्या आप शान्ति की इच्छा से आए हैं?’”

येहू ने कहा, “तुम्हें शान्ति से कुछ लेना—देना नहीं। आओ और मेरो पीछे चलो।”

रक्षक ने योराम से कहा, “उस दल के पास सन्देशवाहक गया, किन्तु वह लौटकर अब तक नहीं आया।”

19 तब योराम ने एक दूसरे व्यक्ति को घोड़े पर भेजा। वह व्यक्ति येहू के दल के पास आया और उसने कहा, “राजा योराम कहते हैं, ‘शान्ति।’”

येहू ने उत्तर दिया, “तुम्हें शान्ति से कुछ भी लेना देना नहीं! आओ और मेरे पीछे चलो।”

20 रक्षक ने योराम से कहा, “दूसरा व्यक्ति उस दल के पास गया, किन्तु वह अभी तक लौटकर नहीं आया। रथचालक रथ को निमशी के पौत्र येहू की तरह चला रहा है। वह पागलों जैसा चला रहा है।”

21 योराम ने कहा, “मेरे रथ को तैयार करो!”

इसलिये सेवक ने योराम के रथ को तैयार किया। इस्राएल का राजा योराम तथा यहूदा का राजा अहज्याह निकल गए। हर एक राजा अपने—अपने रथ से येहू से मिलने गए। वे येहू से यिज्रैली नाबोत की भूमि के पास मिले।

22 योराम ने येहू को देखा और उससे पूछा, “येहू क्या तुम शान्ति के इरादे से आए हो”

येहू ने उत्तर दिया, “जब तक तुम्हारी माँ ईज़ेबेल वेश्यावृत्ति और जादू टोना करती रहेगी तब तक शान्ति नहीं हो सकेगी।”

23 योराम ने भाग निकलने के लिये अपने घोड़ों की बाग मोड़ी। योराम ने अहज्याह से कहा, “अहज्याह! यह एक चाल है।”

24 किन्तु येहू ने अपनी पूरी शक्ति से अपने धनुष को खींचा और योराम की पीठ में[a] बाण चला दिया। बाण योराम के हृदय को बेधता हुआ पार हो गया। योराम अपने रथ में मर गया।

25 येहू ने अपने सारथी बिदकर से कहा, “योराम के शव को उठाओ और यिज्रेली नाबोत के खेत में फेंक दो। याद करो, जब हम और तुम योराम के पिता अहाब के साथ चले थे। तब यहोवा ने कहा था कि इसके साथ ऐसा ही होगा। 26 यहोवा ने कहा था, ‘कल मैंने नाबोत और उसके पुत्रों का खून देखा था। अतः मैं अहाब को इसी खेत में दण्ड दूँगा।’ यहोवा ने ऐसा कहा था। अतः जैसा यहोवा ने आदेश दिया है—योराम के शव को खेत में फेंक दो!”

27 यहूदा के राजा अहज्याह ने यह देखा, अतः वह भाग निकला। वह बारी के भवन के रास्ते से होकर भागा। येहू ने उसका पीछा किया। येहू ने कहा, “अहज्याह को भी उसके रथ में मार डालो।”

अतः येहू के लोगों ने यिबलाम के पास गूर को जाने वाली सड़क पर अहज्याह पर प्रहार किया। अहज्याह मगिद्दो तक भागा, किन्तु वहाँ वह मर गया। 28 अहज्याह के सेवक अहज्याह के शव को रथ में यरूशलेम ले गए। उन्होंने अहज्याह को, उसकी कब्र में, उसके पूर्वजों के साथ दाऊद नगर में दफनाया।

29 अहज्याह, इस्राएल पर योराम के राज्यकाल के ग्यारहवें वर्ष में यहूदा का राजा बना था।

ईज़ेबेल की भयंकर मृत्यु

30 येहू यिज्रैल गया और ईज़ेबेल को यह सूचना मिली। उसने अपनी सज्जा की और अपने केशों को बाँधा। तब वह खिड़की के सहारे खड़ी हुई और बाहर को देखने लगी। 31 येहू ने नगर में प्रवेश किया। ईज़ेबेल ने कहा, “नमस्कार ओ जिम्री! तुमने ठीक उसकी ही तरह स्वामी को मार डाला!”

32 येहू ने ऊपर खिड़की की ओर देखा। उसने कहा, “मेरी तरफ कौन है कौन?”

दो या तीन खोजों ने खिड़की से येहू को देखा। 33 येहू ने उनसे कहा, “ईज़ेबेल को नीचे फेंको!”

तब खोजों ने ईज़ेबेल को नीचे फेंक दिया। ईज़ेबेल का कुछ रक्त दीवार और घोड़ों पर छिटक गया। घोड़ों ने ईज़ेबेल के शरीर को कुचल डाला। 34 येहू महल में घुसा और उसने खाया और दाखमधु पिया। तब उसने कहा, “अब इस अभिशापित स्त्री के बारे में यह करो। उसे दफना दो क्योंकि वह एक राजा की पुत्री है।”

35 कुछ लोग ईज़ेबेल को दफनाने गए। किन्तु वे उसके शव को न पा सके। वे केवल उसकी खोपड़ी, उसके पैर और उसके हाथों की हथेलियाँ पा सके। 36 इसलिये वे लोग लौटे और उन्होंने येहू से कहा। तब येहू ने कहा, “यहोवा ने अपने सेवक तिशबी एलिय्याह से यह सन्देश देने को कहा था। एलिय्याह ने कहा थाः ‘यिज्रैल के क्षेत्र में ईज़ेबेल के शव को कुत्ते खायेंगे। 37 ईज़ेबेल का शव यिज्रैल के क्षेत्र में खेत के गोबर की तरह होगा। लोग ईज़ेबेल के शव को पहचान नहीं पाएंगे।’”

येहू शोमरोन के प्रमुखों को लिखता है

10 अहाब के सत्तर पुत्र शोमरोन में थे। येहू ने पत्र लिखे और उन्हें शोमरोन में यिज्रैल के शासकों और प्रमुखों को भेजा। उसने उन लोगों को भी पत्र भेजे जो अहाब के पुत्रों के अभिभावक थे। पत्र में येहू ने लिखा, 2-3 “ज्योंही तुम इस पत्र को पाओ तुम अपने स्वामी के पुत्रों में से सर्वाधिक योग्य और उत्तम व्यक्ति को चुनो। तुम्हारे पास रथ और घोड़े हैं और तुम एक दृढ़ नगर में रह रहे हो। तुम्हारे पास अस्त्र—शस्त्र भी है। जिस पुत्र को चुनो उसे उसके पिता के सिंहासन पर बिठाओ। तब अपने स्वामी के परिवार के लिये युद्ध करो।”

किन्तु यिज्रैल के शासक और प्रमुख बहुत भयभीत थे। उन्होंने कहा, “दोनो राजा (योराम और अहज्याह) येहू को रोक नहीं सके। अतः हम भी उसे रोक नहीं सकते!”

अहाब के महल का प्रबन्धक, नगर प्रशासक, प्रमुख वरिष्ठ—जन और अहाब के बच्चों के अभिभावकों ने येहू के पास एक सन्देश भेजा! “हम आपके सेवक हैं। हम वह सब करेंगे जो आप कहेंगे। हम किसी व्यक्ति को राजा नहीं बनाएंगे। वही करें जो आप ठीक समझते हैं।”

शोमरोन के प्रमुख अहाब के बच्चों को मार डालते हैं

तब येहू ने एक दूसरा पत्र इन प्रमुखों को लिखा। येहू ने कहा, “यदि तुम मेरा समर्थन करते हो और मेरा आदेश मानते हो तो अहाब के पुत्रों का सिर काट डालो और लगभग इसी समय कल यिज्रैल में मेरे पास उन्हें ले आओ।”

अहाब के सत्तर पुत्र थे। वे नगर के उन प्रमुखों के पास थे जो उनकी सहायता करते थे। जब नगर के प्रमुखों ने पत्र प्राप्त किया तब उन्होंने राजा के पुत्रों को लिया और सभी सत्तर पुत्रों को मार डाला। तब प्रमुखों ने राजपुत्रों के सिर टोकरियों में रखे। उन्होंने टोकरियों को यिज्रैल में येहू के पास भेज दिया। सन्देशवाहक येहू के पास आए और उससे कहा, “वे राजपुत्रों का सिर लेकर आए हैं।”

तब येहू ने कहा, “नगर—द्वार पर, प्रातःकाल तक उन सिरों की दो ढेरें बना कर रखो।”

सुबह को येहू बाहर निकला और लोगों के सामने खड़ा हुआ। उसने लोगों से कहा, “तुम लोग निरपराध लोग हो। देखो, मैंने अपने स्वामी के विरुद्ध योजनाएं बनाई। मैंने उसे मार डाला। किन्तु अहाब के इन सब पुत्रों को किसने मारा तुमने उन्हें मारा! 10 तुम्हें समझना चाहिये कि यहोवा जो कुछ कहता है वह घटित होगा और यहोवा ने एलिय्याह का उपयोग अहाब के परिवार के लिये इन बातों को कहने के लिये किया था। अब यहोवा ने वह कर दिया जिसके लिये उसने कहा था कि मैं करूँगा।”

11 इस प्रकार येहू ने यिज्रैल में रहने वाले अहाब के पूरे परिवार को मरा डाला। येहू ने सभी महत्वपूर्ण व्यक्तियों, जिगरी दोस्तों और याजकों को मार डाला। उसने अहाब के एक भी व्यक्ति को जीवित नहीं छोड़ा।

येहू अहज्याह के सम्बन्धियों को मार डालता है

12 येहू यिज्रैल से चला और शोमरोन पहुँचा। रास्ते में येहू “गड़रियों का डेरा” नामक स्थान पर रुका। जहाँ गड़रिये अपनी भेड़ों का ऊन कतरते थे। 13 येहू यहूदा के राजा अहज्याह के सन्बन्धियों से मिला। येहू ने उनसे पूछा, “तुम कौन हो”

उन्होंने उत्तर दिया, “हम लोग यहूदा के राजा अहज्याह के सम्बन्धि हैं। हम लोग यहाँ राजा के बच्चों और राजमाता के बच्चों से मिलने आए हैं।”

14 तब येहू ने अपने लोगों से कहा, “इन्हें जीवित पकड़ लो।”

येहू के लोगों ने अहज्याह के सम्बन्धियों को जीवित पकड़ लिया। वे बयालीस लोग थे। येहू ने उन्हें बेथ—एकद के पास कुँए पर मार डाला। येहू ने किसी व्यक्ति को जीवित नहीं छोड़ा।

येहू यहोनादाब से मिलता है

15 येहू जब उस स्थान से चला तो रेकाब के पुत्र यहोनादाब से मिला। येहोनादाब येहू से मिलने आ रहा था। येहू ने यहोनादाब का स्वागत किया और उससे पूछा, “क्या तुम मेरे उतने ही विश्वसनीय मित्र हो जितना मैं तुम्हारा हूँ।”

यहोनादाब ने उत्तर दिया, “हाँ, मैं तुम्हारा विश्वासपात्र मित्र हूँ।”

येहू ने कहा, “यदि तुम हो तो, तुम अपना हाथ मुझेदो।”

तब येहू बाहर झुका और उसने यहोनादाब को अपने रथ में खींच लिया।

16 येहू ने कहा, “मेरे साथ आओ। तुम देखोगे कि यहोवा के लिये मेरी भावनायें कितनी प्रबल हैं।”

इस प्रकार यहोनादाब येहू के रथ में बैठा। 17 येहू शोमरोन में आया और अहाब के उस सारे परिवार को मार डाला जो अभी तक शोमरोन में जीवित था। येहू ने उन सभी को मार डाला। येहू ने वही काम किये जिन्हें यहोवा ने एलिय्याह से कहा था।

येहू बाल के उपासकों को बुलाता है

18 तब येहू ने सभी लोगों को एक साथ इकट्ठा किया। येहू ने उनसे कहा, “अहाब ने बाल की सेवा नहीं के बराबर की। किन्तु येहू बाल की बहुत अधिक सेवा करेगा। 19 अब बाल के सभी याजकों और नबियों को एक साथ बुलाओ और उन सभी लोगों को एक साथ बुलाओ जो बाल की उपासना करते हैं। किसी व्यक्ति को इस सभा में अनुपस्थित न रहने दो। मैं बाल को बहुत बड़ी बलि चढ़ाने जा रहा हूँ। मैं उस किसी भी व्यक्ति को मार डालूँगा जो इसमें उपस्थित नहीं होगा!”

किन्तु येहू उनके साथ चाल चल रहा था। येहू बाल के पूजकों को नष्ट कर देना चाहता था। 20 येहू ने कहा, “बाल के लिये एक धर्मसभा करो” और याजकों ने धर्मसभा की घोषणा कर दी। 21 तब येहू ने पूरे इस्राएल देश में सन्देश भेजा। बाल के सभी उपासक आए। कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो घर पर रह गया हो। बाल के उपासक बाल के मन्दिर[b] में आए। मन्दिर लोगों से भर गया।

22 येहू ने लबादे रखने वाले व्यक्ति से कहा, “बाल के सभी उपासकों के लिये लबादे लाओ।” अतः वह व्यक्ति बाल पूजकों के लिये लबादे लाया।

23 तब येहू और रेकाब का पुत्र यहोनादाब बाल के मन्दिर के अन्दर गये। येहू ने बाल के उपासकों से कहा, “अपने चारों ओर देख लो और यह निश्चय कर लो कि तुम्हारे साथ कोई यहोवा का सेवक तो नहीं है। यह निश्चय कर लो कि केवल बालपूजक लोग ही हैं।” 24 बाज—पूजक बाल के मन्दिर में बलि और होमबिल चढ़ाने गए।

किन्तु बाहर येहू ने अस्सी व्यक्तियों को प्रतीक्षा में तैयार रखा था। येहू ने कहा, “किसी व्यक्ति को बचकर निकलने न दो। यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति को बच निकलने देगा तो उसका भुगतान उसे अपने जीवन से करना होगा।”

25 येहू ने ज्योंही बलि और होमबलि चढ़ाना पूरा किया त्योंही उसने रक्षकों और सेनापतियों से कहा, “अन्दर जाओ और बाल—पूजकों को मार डालो! पूजागृह से किसी जीवित व्यक्ति को बाहर न आने दो!”

अतः सेनापतियों ने पतली तलवारों का उपयोग किया और बाल पूजकों को मार डाला। रक्षकों और सेनापतियों ने बाल पूजकों के शवों को बाहर फेंक दिया। तब रक्षक और सेनापति बाल के पूजागृह के के भीतरी कमरे[c] में गए। 26 वे बाल के पूजागृह के स्मृति—पाषाणों को बाहर ले आए और पूजागृह को जला दिया। 27 तब उन्होंने बाल के स्मृति—पाषाण को नष्ट—भ्रष्ट कर दिया। उन्होंने बाल के पूजागृह को भी ध्वस्त कर दिया। उन्होंने बाल के पूजागृह को एक शौचालय में बदल दिया। आज भी उसका उपयोग शौचालय के लिये होता है।

28 इस प्रकार येहू ने इस्राएल में बाल—पूजा को समाप्त कर दिया। 29 किन्तु येहू, नबात के पुत्र यारोबाम के उन पापों से पूरी तरह अपने को दूर न रख सका, जिन्होंने इस्राएल से पाप कराया था। येहू ने दान और बेतेल में सोने के बछड़ों को नष्ट नहीं किया।

इस्राएल पर येहू का शासन

30 यहोवा ने येहू से कहा, “तुमने बहुत अच्छा किया है। तुमने वह काम किया है जिसे मैंने अच्छा बाताया है। तुमने अहाब के परिवार को उस तरह नष्ट किया है जैसा तुमसे मैं उसको नष्ट कराना चाहता था। इसलिये तुम्हारे वंशज इस्राएल पर चार पीढ़ी तक शासन करेंगे।”

31 किन्तु येहू पूरे हृदय से यहोवा के नियमों का पालन करने में सावधान नहीं था। येहू ने यारोबाम के उन पापों को करना बन्द नहीं किया जिन्होंने इस्राएल से पाप कराए थे।

हजाएल इस्राएल को पराजित करता है

32 उस समय यहोवा ने इस्राएल के हिस्सों को अलग करना आरम्भ किया। अराम के राजा हजाएल ने इस्राएलियों को इस्राएल की हर एक सीमा पर हराया। 33 हजाएल ने यरदन नदी के पूर्व के गिलाद प्रदेश को, गाद, रूबेन और मनश्शे के परिवार समूह के प्रदेशों सहित जीत लिया। हजाएल ने अरोएर से लेकर अर्नोन घाटी के सहारे गिलाद और बाशान तक की सारी भूमि जीत ली।

येहू की मृत्यु

34 वे सभी बड़े कार्य, जो येहू ने किये, इस्राएल के राजाओं के इतिहास की पुस्तक में लिखे गए हैं। 35 येहू मरा और उसे उसके पूर्वजों के साथ दफना दिया गया। लोगों ने येहू को शोमरोन में दफनाया। उसके बाद येहू का पुत्र यहोआहाज इस्राएल का नया राजा हुआ। 36 येहू ने शोमरोन में इस्राएल पर अट्ठाईस वर्ष तक शासन किया।

अतल्याह यहूदा के सभी राजपुत्रों को नष्ट कर देती है

11 अहज्याह की माँ अतल्याह ने देखा कि उसका पुत्र मर गया। तब वह उठी और उसने राजा के पूरे परिवार को मार डाला।

यहोशेबा राजा योराम की पुत्री और अहज्याह की बहन थी। योआश राजा के पुत्रों में से एक था। यहोशेबा ने योआश को तब छिपा लिया जब अन्य बच्चे मारे जा रहे थे। यहोशेबा ने योआश को छिपा दिया। उसने योआश और उसकी धायी को अपने सोने के कमरे में छिपा दिया। इस प्रकार यहोशेबा और धायी ने योआश को अतल्याह से छिपा लिया। इस प्रकार योआश मारा नहीं गया।

तब योआश और यहोशेबा यहोवा के मन्दिर में जा छिपे। योआश वहाँ छः वर्ष तक छिपा रहा और अतल्याह ने यहूदा प्रदेश पर शासन किया।

सातवें वर्ष प्रमुख याजक यहोयादा ने करीतों के सेनापतियों और रक्षकों[d] को बुलाया और वे आए। यहोयादा ने यहोवा के मन्दिर में उन्हें एक साथ बिठाया। तब यहोयादा ने उनके साथ एक वाचा की। मन्दिर में यहोयादा ने उन्हें प्रतिज्ञा करने को विवश किया। तब उसने राजा के पुत्र (योआश) को उन्हें दिखाया।

तब यहोयादा ने उनको आदेश दिया। उसने कहा, “तुम्हें यह करना होगा। प्रत्येक सब्त—दिवस के आरम्भ होने पर तुम लोगों के एक तिहाई को यहाँ आना चाहिए। तुम लोगों को राजा की रक्षा उसके घर में करनी होगी। दूसरे एक तिहाई को सूर—द्वार पर रहना होगा और बचे एक तिहाई को रक्षकों के पीछे, द्वार पर रहना होगा। इस प्रकार तुम लोग योआश की रक्षा में दीवार की तरह रहोगे। प्रत्येक सब्त—दिवस के अन्त में तुम लोगों के दो तिहाई यहोवा के मन्दिर की रक्षा करते हुए राजा योआश की रक्षा करेंगे। जब कभी वह कहीं जाये तुम्हें राजा योआश के साथ ही रहना चाहिये। पूरे दल को उसे घेरे रखना चाहिये। प्रत्येक रक्षक को अपने अस्त्र—शस्त्र अपने हाथ में रखना चाहिये और तुम लोगों को उस किसी भी व्यक्ति को मार डालना चाहिये जो तुम्हारे अत्याधिक करीब पहुंचे।”

सेनापतियों ने याजक यहोयादा के दिये गए सभी आदेशों का पालन किया। हर एक सेनापति ने अपने सैनिकों को लिया। एक दल को राजा की रक्षा शनिवार को करनी थी और अन्य दलों को सप्ताह के अन्य दिनों में राजा की रक्षा करनी थी। वे सभी पुरुष याजक यहोयादा के पास गए 10 और याजक ने सेनापतियों को भाले और ढाले दीं। ये वे भाले और ढालें थीं जिन्हें दाऊद ने यहोवा के मन्दिर में रखा था। 11 ये रक्षक अपने हाथों में अपने शस्त्र लिये मन्दिर के दायें कोने से लेकर बायें कोने तक खड़े थे। वे वेदी और मन्दिर के चारों ओर और जब राजा मन्दिर में जाता तो उसके चारों ओर खड़े होते थे। 12 ये व्यक्ति योआश को बाहर ले आए। उन्होंने योआश के सिर पर मुकुट पहनाया और परमेश्वर तथा राजा के बीच की वाचा को उसे दिया।[e] तब उन्होंने उसका अभिषेक किया और उसे नया राजा बनाया। उन्होंने तालियाँ बजाईं और उद्घोष किया, “राजा दीर्घायु हो!”

13 रानी अतल्याह ने रक्षकों और लोगों का यह उद्घोष सुना। इसलिये वह यहोवा के मन्दिर में लोगों के पास गई। 14 अतल्याह ने उस स्तम्भ के सहारे राजा को देखा जहाँ राजा प्रायः खड़े होते थे। उसने प्रमुखों और लोगों को राजा के लिये तुरही बजाते हुये भी देखा। उसने देखा कि सभी लोग बहुत प्रसन्न थे। उसने तुरही को बजते हुए सुना और उसने अपने वस्त्र यह प्रकट करने के लिये फाड़ डाले कि उसे बड़ी घबराहट है। तब अतल्याह चिल्ला उठी, “षडयन्त्र! षडयन्त्र!”

15 याजक यहोयादा ने सैनिकों की व्यवस्था के अधिकारी सेनापतियों को आदेश दिया। यहोयादा ने उनसे कहा, “अतल्याह को मन्दिर के क्षेत्र से बाहर ले जाओ। उसके किसी भी साथ देने वाले को मार डालो। किन्तु उन्हें यहोवा के मन्दिर में मत मारो।”

16 जैसे ही वह महल के अश्व—द्वार से गई सैनिकों ने उसे पकड़ लिया और मार डाला। सैनिकों ने अतल्याह को वहीं मार डाला।

17 तब यहोयादा ने यहोवा, राजा और लोगों के बीच एक सन्धि कराई। इस वाचा से यह पता चलता था कि राजा और लोग यहोवा के अपने ही हैं। यहोयादा ने राजा और लोगों के बीच भी एक वाचा कराई। इस वाचा से यह पता चलता था कि राजा लोगों कि लिये कार्य करेगा और इससे यह पता चलता था कि लोग राजा का आदेश मानेंगे और उसका अनुसरण करेंगे।

18 तब सभी लोग असत्य देवता बाल के पूजागृह को गए। लोगों ने बाल की मूर्ति और उसकी वेदियों को नष्ट कर दिया। उन्होंने उनके बहुत से टुकड़े कर डाले। लोगों ने बाल के याजक मत्तन को भी वेदी के सामने मार डाला।

तब याजक यहोयादा ने कुछ लोगों को यहोवा के मन्दिर की व्यवस्था के लिये रखा। 19 याजकों, विशेष रक्षकों और सेनापतियों के अनुरक्षण में राजा यहोवा के मन्दिर से राजमहल तक गया और अन्य सभी लोग उनके पीछे—पीछे गए। वे राजा के महल के द्वार तक गए। तब राजा योआश राजसिंहासन पर बैठा। 20 सभी लोग प्रसन्न थे। नगर शान्त था। रानी अतल्याह, राजा के महल के पास तलवार के घाट उतार दी गई थी।

21 जब योआश राजा हुआ, वह सात वर्ष का था।

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