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Read the Bible from start to finish, from Genesis to Revelation.
Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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1 राजा 1-2

इस समय दाऊद बहुत अधिक बूढ़ा हो गया था। वह अपनी गरमाई खो चुका था। उसके सेवक उसे कम्बल ओढ़ाते थे किन्तु वह फिर भी ठंडा रहता था। इसलिये उसके सेवकों ने उससे कहा, “हम आपकी देखभाल के लिये एक युवती की खोज करेंगे। वह आपके समीप लेटेगी और आपको गरम रखेगी।” इसलिये राजा के सेवकों ने इस्राएल प्रदेश में चारों ओर एक युवती की खोज आरम्भ की। वे राजा को गरम रखने के लिये एक सुन्दर लकड़ी की खोज कर रहे थे। उन्हें अबीशग नाम की एक लड़की मिली। वह शूनेमिन नगर की थी। वे युवती को राजा के पास ले आए। लड़की बहुत सुन्दर थी। उसने राजा की देख—रेख और सेवा की। किन्तु राजा दाऊद ने उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं किया।

5-6 राजा दाऊद का पुत्र अदोनिय्याह बहुत घमण्डी हो गया। उसने घोषणा की, “मैं राजा बनूँगा।” अदोनिय्याह की माँ का नाम हग्गीत था। अदोनिय्याह राजा बनने का बहुत इच्छुक था। इसलिये वह अपने लिये एक रथ, घोड़े और आगे दौड़ने वाले पाँच सौ व्यक्तियों को लाया। राजा ने अपने पुत्र अदोनिय्याह को कभी सुधारा नहीं। दाऊद ने उससे कभी यह नहीं पूछा, “तुम ये कार्य क्यों कर रहे हो” अदोनिय्याह वह पुत्र था जो अबशालोम के बाद उत्पन्न हुआ था। अदोनिय्याह एक बहुत सुन्दर व्यक्ति था।

अदोनिय्याह ने सरुयाह के पुत्र योआब और याजक एब्यातार से बातें कीं। उन्होंने उसकी सहायता की। किन्तु बहुत से लोग उन कामों को ठीक नहीं समझते थे जिन्हें अदोनिय्याह कर रहा था। वे नहीं समझते थे कि वह राजा होने के योग्य हो गया है। ये लोग याजक सादोक, यहोयादा का पुत्र बनायाह, नातान नबी, शिमी, रेई और राजा दाऊद के विशेष रक्षक थे। इसलिये ये लोग अदोनिय्याह के साथ नहीं हुए।

तब अदोनिय्याह ने कुछ जानवरों को मेलबलि के लिये मारा। उसने कुछ भेड़ों, कुछ गायों और कुछ मोटे बछड़ों को मारा। अदोनिय्याह ने एनरोगेल के पास जोहेलेत की चट्टान पर ये बलियाँ चढ़ाईं। अदोनिय्याह ने इस विशेष उपासना में अपने साथ आने के लिये उनेक व्यक्तियों को आमन्त्रित किया। अदोनिय्याह ने अपने सभी भाईयों, (राजा के अन्य पुत्रों) तथा यहूदा के समस्त राज्य कर्मचारियों को आमन्त्रित किया। 10 किन्तु अदोनिय्याह ने नातान नबी, या बनायाह या अपने पिता के विशेष रक्षक या अपने भाई सुलैमान को आमन्त्रित नहीं किया।

11 जब नातान ने इसके बारे में सुना, वह सुलैमान की माँ बतशेबा के पास गया। नातान ने उससे पूछा, “क्या तुमने सुना है कि हग्गीत का पुत्र अदोनिय्याह क्या कर रहा है उसने अपने को राजा बना लिया है और वास्तविक राजा दाऊद इसके बारे में कुछ नहीं जानता। 12 तुम्हारा जीवन और तुम्हारे पुत्र सुलैमान का जीवन खतरे में पड़ सकता है। किन्तु मैं तुम्हें बताऊँगा कि अपने को बचाने के लिये तुम्हें क्या करना चाहिए। 13 राजा दाऊद के पास जाओ और उससे कहो, ‘मेरे राजा, आपने मुझे वचन दिया था कि आपके बाद मेरा पुत्र सुलैमान अगला राजा होगा। फिर, अदोनिय्याह राजा क्यों बन गया है’ 14 तब, जब तुम उससे बात कर ही रही होगी, मैं अन्दर आऊँगा। जब तुम चली जाओगी तब मैं जो कुछ घटित हुआ है उसके बारे में राजा को बातऊँगा। इससे यह प्रदर्शित होगा कि तुमने अदोनिय्याह के बारे में जो कुछ कहा है, वह सत्य है।”

15 अत: बतशेबा राजा के सोने के कमरे में अन्दर उससे मिलने गई। राजा बहुत अधिक बूढ़ा था। शूनेमिन से आई लड़की अबीशग वहाँ उसकी देख—रेख कर रही थी। 16 बतशेबा राजा के सामने प्रणाम करने झुकी। राजा ने पूछा, “तुम क्या चाहती हो?”

17 बतशेबा ने उत्तर दिया, “मेरे राजा, आपने अपने परमेश्वर, यहोवा का नाम लेकर मुझसे प्रतिज्ञा की थी। आपने कहा था, ‘तुम्हारा पुत्र सुलैमान मेरे बाद राजा होगा। मेरे सिंहासन पर सुलैमान शासन करेगा।’ 18 किन्तु अब अदोनिय्याह राजा हो गया है और आप इसे जानते भी नहीं। 19 अदोनिय्याह ने मेलबलि के लिये कई जानवरों को मार डाला है। उसने बहुत से बैलों, मोटे बछड़ों और भेड़ों को मारा है और उसने आपके सभी पुत्रों को आमन्त्रित किया है। उसने याजक एब्यातार और आपकी सेना के सेनापति योआब को भी आमन्त्रित किया है। किन्तु उसने आपके पुत्र सुलैमान को आमन्त्रित नहीं किया, जो आपकी सेवा करता है। 20 मेरे राजा, इस्राएल के सभी लोगों की आँखें आप पर लगी हैं। वे आपके इस निर्णय की प्रतीक्षा कर रहै हैं कि आपके बाद कौन राजा होगा। 21 जब आप मेरेंगे तो आप अपने पूर्वजों के साथ दफनाये जायेंगे। उस समय लोग यही कहेंगे कि मैं और सुलैमान अपराधी हैं।”

22 जब बतशेबा राजा से बातें कर रही थी, नातान नबी उससे मिलने आया। 23 सेवकों ने राजा से कहा, “नातान नबी आये हैं।” अत: नातान ने प्रवेश किया और राजा के पास गया। नातान राजा के सामने धरती तक झुका। 24 तब नातान ने कहा, “मेरे राजा, क्या आपने यह घोषणा कर दी है कि आपके बाद अदोनिय्याह नया राजा होगा क्या आपने यह निर्णय कर लिया है कि आपके बाद अदोनिय्याह लोगों पर शासन करेगा। 25 आज उसने घाटी में विशेष मेलबलियाँ भेंट की हैं। उसने कई बैलों, मोटे बछड़ों और भेड़ों को मारा है और उसने आपके अन्य सभी पुत्रों, सेना के सेनापति और याजक एब्यातार को आमन्त्रित किया है। अब वे उनके साथ खा रहे हैं और पी रहे हैं और वे कह रहे हैं, ‘राजा अदोनिय्याह दीर्घायु हो!’ 26 किन्तु उसने मुझे या याजक सादोक, यहोयादा के पुत्र बनायाह या आपके पुत्र सुलैमान को आमन्त्रित नहीं किया। 27 क्या यह आपने किया है हम आपकी सेवा और आपकी आज्ञा का पालन करते हैं। आपने हम लोगों से पहले ही क्यों नहीं कहा कि आपने उसे अपने बाद होने वाला राजा चुना है?”

28 तब राजा दाऊद ने कहा, “बतशेबा से अन्दर आने को कहो!” अत: बतशेबा अन्दर राजा के सामने आई।

29 तब राजा ने एक प्रतिज्ञा की “यहोवा परमेश्वर ने मुझे हर एक खतरे से बचाया है और यहोवा परमेश्वर शाश्वत है। मैं तुम से प्रतिज्ञा करता हूँ। 30 मैं आज वह कार्य करूँगा जिसका वचन मैंने इसके पूर्व तुम्हें दिया था। मैंने यह प्रतिज्ञा यहोवा इस्राएल के परमेश्वर की शक्ति से की थी। मैंने प्रतिज्ञा की थी कि तुम्हारा पुत्र सुलैमान मेरे बाद राजा होगा और मेरे बाद सिंहासन पर मेरा स्थान वही लेगा। मैं अपनी प्रतिज्ञा पूरी करुँगा।”

31 तब बतशेबा राजा के सामने प्रणाम करने धरती तक झुकी। उसने कहा, “राजा दाऊद दीर्घायु हो!”

32 तब राजा दाऊद ने कहा, “याजक सादोक, नातान नबी और यहोयादा के पुत्र बनायाह से यहाँ अन्दर आने को कहो।” अत: तीनों व्यक्ति राजा के सामने आये। 33 तब राजा ने उनसे कहा, “मेरे अधिकारियों को अपने साथ लो और मेरे पुत्र सुलैमान को मेरे निजी खच्चर पर बिठाओ। उसे गीहोन सोते पर ले जाओ। 34 उस स्थान पर याजक सादोक और नातान नबी, इस्राएल के राजा के रूप में उसका अभिषेक करें। तुम लोग तुरही बजाओगे और यह घोषणा करो, ‘यह सुलैमान नया राजा है।’ 35 तब इसके बाद उसके साथ यहाँ लौट आओ। सुलैमान मेरे सिंहासन पर बैठेगा और हमारे स्थान पर नया राजा होगा। मैंने सुलैमान को इस्राएल और यहूदा का शासक होने के लिये चुना है।”

36 यहोयादा के पुत्र बनायाह ने राजा को उत्तर दिया, “आमीन! यहोवा परमेश्वर ने स्वयं यह कहा है! 37 मेरे स्वामी राजा, यहोवा ने हमेशा आपकी सहायता की है। यहोवा सुलैमान की भी सहायता करे और राजा सुलैमान आपसे भी बड़े राजा बनें।”

38 अत: सादोक, नातान, बनायाह और राजा के अधिकारियों ने राजा दाऊद की आज्ञा का पालन किया। उन्होंने सुलैमान को राजा दाऊद के खच्चर पर चढ़ाया और उसके साथ गीहोन के सोते पर गये। 39 याजक सादोक ने पवित्र तम्बू से तेल लिया। सादोक ने, यह दिखाने के लिये कि सुलैमान राजा है, उसके सिर पर तेल डाला। उन्होंने तुरही बजाई और सभी लोगों ने उद्घोष किया, “राजा सुलैमान दीर्घायु हों!” 40 सभी लोग नगर में सुलैमान के पीछे आए। वे बीन बजा रहे थे और उल्लास के नारे लगा रहे थे। वे इतना उद्घोष कर रहे थे कि धरती काँप उठी।

41 इस समय अदोनिय्याह और उसके साथ के सभी अतिथि अपना भोजन समाप्त कर रहे थे। उन्होंने तुरही की आवाज सुनी। योआब ने पूछा, “यह शोर कैसा है नगर में क्या हो रहा है?”

42 जब योआब बोल ही रहा था, याजक एब्यातार का पुत्र योनातन वहाँ आया। अदोनिय्याह ने कहा, “यहाँ आओ! तुम अच्छे व्यक्ति हो। अत: तुम मेरे लिये शुभ सूचना अवश्य लाये होगे।”

43 किन्तु योनातन ने उत्तर दिया, “नहीं! यह तुम्हारे लिये शुभ सूचना नहीं है! हमारे राजा दाऊद ने सुलैमान को नया राजा बनाया है 44 और राजा दाऊद ने याजक सादोक, नातान नबी, यहोयादा के पुत्र बनायाह और राजा के सभी अधिकारियों को उसके साथ भेजा है। उन्होंने सुलैमान को राजा के निजी खच्चर पर बिठाया। 45 तब याजक सादोक और नातान नबी ने गीहोन सोते पर सुलैमान का अभिषेक किया और तब वे नगर में गये। लोगों ने उनका अनुसरण किया और अब नगर में लोग बहुत प्रसन्न हैं। यह शोर जो तुम सुनते हो, उसी का है। 46-47 सुलैमान अब राजा के सिंहासन पर बैठा है। राजा के सभी सेवक राजा दाऊद से यह कहने आये हैं कि आपने यह अच्छा कार्य किया है। वे कह रहे हैं, ‘राजा दाऊद, आप एक महान राजा हैं और अब हम प्रार्थना करते हैं कि आपका परमेश्वर, सुलैमान को भी महान राजा बनाएगा। आपका परमेश्वर सुलैमान को आपसे भी अधिक प्रसिद्ध राजा बनाए और उसे आप जितने महान राजा थे उससे भी अधिक महान राजा होने दे।’ यहाँ तक कि राजा दाऊद भी वहाँ थे, और राजा दाऊद अपने बिस्तर पर लेटे हुए थे। 48 राजा दाऊद ने कहा, ‘इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की स्तुति करो। यहोवा ने मेरे पुत्रों से एक को मेरे सिंहासन पर बिठाया है और इसे मुझे देखने दिया है।’”

49 तब अदोनिय्याह के सभी अतिथि डर गए और शीघ्रता से चले गए। 50 अदोनिय्याह भी सुलैमान से डर गया था। इसलिये वह वेदी तक गया और वेदी के सींगों को उसने पकड़ लिया।[a] 51 तब किसी ने सुलैमान से कहा, “अदोनिय्याह तुमसे बहुत भयभीत है। अदोनिय्याह वेदी के पास है। उसने वेदी के सीगों को पकड़ रखा है और छोड़ने से इन्कार करता है। अदोनिय्याह कहता है, ‘राजा सुलैमान से यह प्रतिज्ञा करने को कहो कि वह मुझे मारेगा नहीं।’”

52 इसलिये सुलैमान ने उत्तर दिया, “यदि अदोनिय्याह यह प्रमाणित करता है कि वह एक अच्छा आदमी है तो मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि उसके सिर का एक बाल भी बाँका नहीं होगा। किन्तु यदि वह कुछ बुरा करेगा तो मार दिया जायेगा।” 53 तब रजा सुलैमान ने कुछ व्यक्तियों को अदोनिय्याह को लाने के लिये भेजा। वे व्यक्ति अदोनिय्याह को सुलैमान के सामने ले आए। अदोनिय्याह राजा सुलैमान के सामने आया और झुककर प्रणाम किया। तब सुलैमान ने कहा, “घर जाओ।”

दाऊद के मरने का समय लगभग आ पहुँचा। इसलिये दाऊद ने सुलैमान से बातें कीं और उससे कहा, “मेरे मरने का समय निकट आ गया है। जैसे हर एक व्यक्ति का आता है। लेकिन तुम एक शक्तिशाली पुरुष बन रहे हो। उन सभी आदेशों का सावधानी पूर्वक पालन करो जिन्हें यहोवा परमेश्वर ने हमें दिया है। सावधानीपूर्वक उसके सभी नियमों का पालन करो, और वे कार्य करो जो उसने हमें कहा है। सावधानी से उन नियमों का पालन करो जो मूसा की व्यवस्था की किताब में लिखे हैं। यदि तुम इन सभी का पालन करोगे तो तुम जो कुछ करोगे और जहाँ कहीं जाओगे, सफल होगे और यदि तुम यहोवा की आज्ञा का पालन करते रहोगे तो यहोवा मेरे लिये की गई प्रतिज्ञाओं का पालन करेगा। मेरे लिये यहोवा ने जो प्रतिज्ञा की, वह यह है, ‘तुम्हारे पुत्रों को मेरी आज्ञा का पालन करना चाहिये और उन्हें वैसे रहना चाहिये जैसा रहने के लिये मैं कहूँ। तुम्हारे पुत्रों को पूरे हृदय और आत्मा से मुझमें विश्वास रखना चाहिये। यदि तुम्हारे पुत्र यह करेंगे तो तुम्हारे परिवार का एक व्यक्ति सदा इस्राएल के लोगों का शासक होगा।’”

दाऊद ने यह भी कहा, “तुम यह भी याद रखो कि सरुयाह के पुत्र योआब ने मेरे लिये क्या किया। उसने इस्राएल की सेना के दो सेनापतियों को मार डाला। उसने नेर के पुत्र अब्नेर और येतेर के पुत्र अमासा को मारा। तुम्हें याद होगा कि उसने उन्हें बदले की भावना से प्रेरित होकर शान्ति के समय इसलिये मारा क्योंकि उन्होंने दूसरों को युद्ध में मारा था। इन व्यक्तियों के रक्त का दाग उसकी तलवार की मूठ और उसके पहने हुए सैनिकों के जूतों पर लगा हुआ था। इसलिये मैं उसे अवश्य दण्ड दूँगा। किन्तु अब राजा तुम हो। अत: तुम्हें उसे इस प्रकार दण्ड देना चाहिये जिसे तुम सबसे अधिक बुद्धिमत्तापूर्ण समझो। किन्तु तुम्हें यह निश्चय कर लेना चाहिये कि वह मार डाला जाये। उसे बुढ़ापे की शान्तिपूर्ण मृत्यु न पाने दो!

“गिलाद के, बर्जिल्लै के बच्चों पर दयालु रहो। उन्हें अपना मित्र होने दो और अपनी मेज पर भोजन करने दो। उन्होंने मेरी तब सहायता की, जब मैं तुम्हारे भाई अबशालोम से भाग खड़ा हुआ था।

“और याद रखो गेरा का पुत्र शिमी तुम्हारे साथ यहाँ है। वह बहूरीम के बिन्यामीन परिवार समूह का है। याद रखो कि उसने, उस दिन मेरे विरुद्ध बहुत बुरी बातें कीं, जिस दिन मैं महनैम को भाग गया था। तब वह मुझसे मिलने यरदन नदी पर आया था। किन्तु मैंने यहोवा के समाने प्रतिज्ञा की थी, ‘शिमी मैं तुम्हें नहीं मारूँगा।’ परन्तु शिमी को दण्ड दिये बिना न रहने दो। तुम बुद्धिमान व्यक्ति हो, तुम समझ जाओगे कि उसके साथ क्या करना चाहिये। किन्तु उसे बुढ़ापे की शान्तिपूर्ण मृत्यु न पाने दो।”

10 तब दाऊद मर गया। वह दाऊद नगर में दफनाया गया। 11 दाऊद ने इस्राएल पर चालीस वर्ष तक शासन किया। उसने हब्रोन में सात वर्ष और यरूशलेम में तैंतीस वर्ष तक शासन किया।

12 अब सुलैमान अपने पिता दाऊद के सिंहासन पर शासन करने लगा और इसमें कोई सन्देह नहीं था कि वह राजा है।

13 इस समय हग्गीत का पुत्र अदोनिय्याह सुलैमान की माँ बतशेबा के पास गया। बतशेबा ने उससे पूछा, “क्या तुम शान्ति के भाव से आए हो?”

अदोनिय्याह ने उत्तर दिया, “हाँ! यह शान्तिपूर्ण आगमन है। 14 मुझे आपसे कुछ कहना है।”

बतशेबा ने कहा, “तो कहो।”

15 अदोनिय्याह ने कहा, “तुम्हें याद है कि एक समय राज्य मेरा था। इस्राएल के सभी लोग समझते थे कि मैं उनका राजा हूँ। किन्तु स्थिति बदल गई। अब मेरा भाई राजा है। यहोवा ने उसे राजा होने के लिये चुना। 16 इसलिये मैं तुमसे एक चीज़ माँगता हूँ। कृपया इन्कार न करें।”

बतशेबा ने पूछा, “तुम क्या चाहते हो?”

17 अदोनिय्याह ने उत्तर दिया, “मैं जानता हूँ कि राजा सुलैमान वह सब कुछ करेंगे जो तुम कहोगी। अत: कृपया उनसे शूनेमिन स्त्री अबीशग को मुझे देने को कहो। मैं उससे विवाह करना चाहता हूँ।”

18 तब बतशेबा ने कहा, “ठीक है, मैं तुम्हारे लिये राजा से बात करूँगी।”

19 अत: बतशेबा राजा सुलैमान के पास उससे बात करने गई। राजा सुलैमान ने उसे देखा और वह उससे मिलने के लिये खड़ा हुआ। तब वह उसके सामने प्रणाम करने झुका और सिंहासन पर बैठ गया। उसने सेवकों से, अपनी माँ के लिये दूसरा सिंहासन लाने को कहा। तब वह उसकी दायीं ओर बैठ गई।

20 बतशेबा ने उससे कहा, “मैं तुमसे एक छोटी चीज माँगती हूँ। कृपया इन्कार न करना।”

राजा ने उत्तर दिया, “माँ तुम जो चाहो, माँग सकती हो। मैं तुम्हें मना नहीं करूँगा।”

21 अत: बतशेबा ने कहा, “शूनेमिन स्त्री अबीशग को, अपने भाई अदोनिय्याह के साथ विवाह करने दो।”

22 राजा सुलैमान ने अपनी माँ से कहा, “तुम अबीशग को उसे देने के लिये मुझसे क्यों कहती हो तुम मुझसे यह क्यों नहीं कहती कि मैं उसे राजा भी बना दूँ क्योंकि वह मेरा बड़ा भाई है याजक एब्यातार और योआब उसका समर्थन करेंगे।”

23 तब सुलैमान ने यहोवा से एक प्रतिज्ञा की। उसने कहा, “मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि मुझसे यह माँग करने के लिये मैं अदोनिय्याह से भुगतान कराऊँगा। मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि उसे इसका मूल्य अपने जीवन से चुकाना पड़ेगा। 24 यहोवा ने मुझे इस्राएल का राजा होने दिया है। उसने वह सिंहासन मुझे दिया है जो मेरे पिता दाऊद का है। यहोवा ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की है और राज्य मुझे और मेरे परिवार को दिया है। मैं शाश्वत परमेश्वर के सामने, प्रतिज्ञा करता हूँ कि अदोनिय्याह आज मरेगा!”

25 राजा सुलैमान ने बनायाह को आदेश दिया। बनायाह बाहर गया और उसने अदोनिय्याह को मार डाला।

26 तब राजा सुलैमान ने याजक एब्यातार से कहा, “मुझे तुमको मार डालना चाहिये, किन्तु मैं तुम्हें अपने घर अनातोत में लौट जाने देता हूँ। मैं तुम्हें अभी मारूँगा नहीं क्योंकि मेरे पिता दाऊद के साथ चलते समय तुमने पवित्र सन्दूक को ले चलने में सहायता की थी जब तुम मेरे पिता दाऊद के साथ थे और मैं जानता हूँ कि उन सभी विपत्तियों के समय में मेरे पिता के समान तुमने भी हाथ बटाया।” 27 सुलैमान ने एब्यातार से कहा कि तुम याजक के रूप में यहोवा की सेवा करते नहीं रह सकते। यह सब वैसे ही हुआ, जैसा यहोवा ने होने के लिये कहा था। परमेश्वर ने याजक एली और उसके परिवार के बारे में शीलो में यह कहा था और एब्यातार एली के परिवार से था।

28 योआब ने इस बारे में सुना और वह डर गया। उसने अदोनिय्याह का समर्थन किया था, किन्तु अबशालोम का नहीं। योआब यहोवा के तम्बू की ओर दौड़ा और वेदी के सींगो को पकड़ लिया। 29 किसी ने राजा सुलैमान से कहा कि योआब यहोवा के तम्बू में वेदी के पास है। इसलिये सुलैमान ने बनायाह को जाने और उसे मार डालने का आदेश दिया।

30 बनायाह यहोवा के तम्बू में गया और योआब से कहा, “राजा कहते हैं, ‘बाहर आओ!’”

किन्तु योआब ने उत्तर दिया, “नहीं मैं यहीं मरूँगा।”

अत: बनायाह राजा के पास वापस गया और उससे वही कहा जो योआब ने कहा था। 31 तब राजा ने बनायाह को आदेश दिया, “वैसा ही करो जैसा वह कहता है। उसे वहीं मार डालो। तब उसे दफना दो। तब हमारा परिवार और हम योआब के दोष से मुक्त होंगे। यह अपराध इसलिये हुआ कि योआब ने निरपराध लोगों को मारा था। 32 योआब ने दो व्यक्तियों को मार डाला था जो उससे बहुत अधिक अच्छे थे। ये नेर का पुत्र अब्नेर और येतेर का पुत्र अमासा थे। अब्नेर इस्राएल की सेना का सेनापति था और उस समय मेरे पिता दाऊद यह नहीं जानते थे कि योआब ने उन्हें मार डाला था। इसलिये यहोवा योआब को उन व्यक्तियों के लिये दण्ड देगा जिन्हें उसने मार डाला था। 33 वह उनकी मृत्यु के लिये अपराधी होगा और उसका परिवार भी सदा के लिये दोषी होगा। किन्तु परमेश्वर की ओर से दाऊद को, उसके वंशजों, उसके राज परिवार और सिंहासन को सदा के लिये शान्ति मिलेगी।”

34 इसलिये यहोयादा के पुत्र बनायाह ने योआब को मार डाला। योआब मरुभूमि में अपने घर के पास दफनाया गया। 35 सुलैमान ने तब यहोयादा के पुत्र बनायाह को योआब के स्थान पर सेनापति बनाया। सुलैमान ने एब्यातार के स्थान पर सादोक को महायाजक बनाया। 36 इसके बाद रजा ने शिमी को बुलवाया। राजा ने उससे कहा, “यहाँ यरूशलेम में तुम अपने लिये एक घर बनाओ, उसी घर में रहो और नगर को मत छोड़ो। 37 यदि तुम नगर को छोड़ोगे और किद्रोन के नाले के पार जाओगे तो तुम मार डाले जाओगे और यह तुम्हारा दोष होगा।”

38 अत: शिमी ने उत्तर दिया, “मेरे राजा, आपने जो कहा, है ठीक है। मैं आपके आदेश का पालन करूँगा।” अत: शिमी यरूशलेम में बहुत समय तक रहा। 39 किन्तु तीन वर्ष बाद शिमी के दो सेवक भाग गए। वे गत के राजा के पास पहुँचे। उसका नाम आकीश था जो माका का पुत्र था। शिमी ने सुना कि उसके सेवक गत में हैं। 40 इसलिये शिमी ने अपनी काठी अपने खच्चर पर रखी और गत में राजा आकीश के पास गया। वह अपने सेवकों को प्राप्त करने गया। उसने उन्हें ढूँढ लिया और अपने घर वापस लाया।

41 किन्तु किसी ने सुलैमान से कहा, कि शिमी यरूशलेम से गत गया था और लौट आया है। 42 इसलिये सुलैमान ने उसे बुलवाया। सुलैमान ने कहा, “मैंने यहोवा के नाम पर तुमसे यह प्रतिज्ञा की थी कि यदि तुम यरूशलेम छोड़ोगे, तो मारे जाओगे। मैंने चेतावनी दी थी कि यदि तुम अन्य कहीं जाओगे तो तुम्हारे मारे जाने का दोष तुम्हारा होगा और मैंने जो कुछ कहा था तुमने उसे स्वीकार किया था। तुमने कहा कि तुम मेरी आज्ञा का पालन करोगे। 43 तुमने अपनी प्रतिज्ञा भंग क्यों की तुमने मेरे आदेश का पालन क्यों नहीं किया 44 तुम जानते हो कि तुमने मेरे पिता दाऊद के विरूद्ध बहुत से गलत काम किये, अब यहोवा उन गलत कामों के लिये तुम्हें दण्ड देगा। 45 किन्तु यहोवा मुझे आशीर्वाद देगा। वह दाऊद के सिंहासन की सदैव सुरक्षा करेगा।”

46 तब राजा ने बनायाह को शिमी को मार डालने का आदेश दिया और उसने इसे पूरा किया। अब सुलैमान अपने राज्य पर पूर्ण नियन्त्रण कर चुका था।

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