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Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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2 शमूएल 22-24

यहोवा की स्तुति के लये दाऊद का गीत

22 यहोवा ने दाऊद को शाऊल तथा अन्य सभी शत्रुओं से बचाया था। दाऊद ने उस समय यह गीत गाया,

यहोवा मेरी चट्टान, मरा गढ़ मेरा शरण—स्थल है।
    मैं सहायता पाने को परमेश्वर तक दौड़ूँगा।
वह मेरी सुरक्षा—चट्टान है।
परमेश्वर मेरा ढाल है।
    उसकी शक्ति मेरी रक्षक है।
    यहोवा मेरी ऊँचा गढ़ है,
और मेरी सुरक्षा का स्थान है।
    मेरा रक्षक कष्टों से मेरी रक्षा करता है।
उन्होंने मेरा उपहास किया।
    मैंने सहायता के लिये यहोवा को पुकारा,
    यहोवा ने मुझे मेरे शत्रुओं से बचाया!

मेरे शत्रु मुझे मारना चाहते थे।
    मृत्यु—तरंगों ने मुझे लपेट लिया।
विपत्तियाँ बाढ़—सी आईं, उन्होंने मुझे भयभीत किया।
    कब्र की रस्सियाँ मेरे चारों ओर लिपटीं, मैं मृत्यु के जाल में फँसा।
मैं विपत्ति में था, किन्तु मैंने यहोवा को पुकारा।
    हाँ, मैंने अपने परमेश्वर को पुकारा वह अपने उपासना गृह में था,
उसने मेरी पुकार सुनी,
    मेरी सहायता की पुकार उसके कानों में पड़ी।
तब धरती में कम्पन हुआ, धरती डोल उठी,
    आकाश के आधार स्तम्भ काँप उठे।
    क्यों? क्योंकि यहोवा क्रोधित था।
उसकी नाक से धुआँ निकला,
    उसके मुख से जलती चिन्गारियाँ छिटकी,
    उससे दहकते अंगारे निकल पड़े।
10 यहोवा ने आकाश को फाड़ कर खोल डाला,
    और नीचे आया, वह सघन काले मेघ पर खड़ा हुआ!
11 यहोवा करूब (स्वर्गदूत) पर बैठा, और उड़ा,
    वह पवन के पंखों पर चढ़ कर उड़ गया।
12 यहोवा ने तुम्बू—से काले मेघों को अपने चारों ओर लपेट लिया,
    उसने सघन मेघों से जल इकट्ठा किया।
13 उसका तेज इतना प्रखर था,
    मानो बिजली की मचक वहीं से आई हो।
14 यहोवा गगन से गरज! परमेश्वर,
    अति उच्च, बोला।
15 यहोवा ने बाण से शत्रुओं को बिखराया,
    यहोवा ने बिजली भेजी, और लोग भय से भागे।

16 धरती की नींव का आवरण हट गया,
    तब लोग सागर की गहराई देख सकते थे।
वे हटे, क्योंकि यहोवा ने बातें कीं,
    उसकी अपनी नाक से तप्त वायु निकलने के कारण।

17 यहोवा गगन से नीचे पहुँचा, यहोवा ने मुझे पकड़ लिया,
    उसने मुझे गहरे जल (विपत्ति) से निकाल लिया।
18 उसने उन लोगों से बचाया, जो घृणा करते थे,
    मुझसे मेरे शत्रु मुझसे अधिक शक्तिशाली थे, अत: उसने मेरी रक्षा की।
19 मैं विपत्ति में था, जब मेरे शत्रुओं का मुझ पर आक्रमण हुआ,
    किन्तु मेरे यहोवा ने मेरी साहयता की।
20 यहोवा मुझे सुरक्षा में ले आया, उसने मेरी रक्षा की,
    क्योंकि वह मुझसे प्रेम करता है।
21 यहोवा मुझे पुरस्कार देता है, क्योंकि मैंने उचित किया।
    यहोवा मुझे पुरस्कार देता है, क्योंकि मेरे हाथ पाप रहित हैं।
22 क्यों? क्योंकि मैंने यहोवा के नियमों का पालन किया।
    मैंने अपने परमेश्वर के विरुद्ध पाप नहीं किया।
23 मैं सदा याद करता हूँ यहोवा का निर्णय,
    मैं उसके नियमों को मानता हूँ।
24 यहोवा जानता है—मैं अपराधी नहीं हूँ,
    मैं अपने को पापों से दूर रखता हूँ।
25 यही कारण है कि यहोवा मुझे पुरस्कार देता है, मैं न्यायोचित रहता हूँ।
    यहोवा देखता है, कि मैं स्वच्छ जीवन बिताता हूँ।

26 यदि कोई व्यक्ति तुझसे प्रेम करेगा तो तू, अपनी प्रेमपूर्ण दया उस पर करेगा।
    यदि कोई तेरे प्रति सच्चा है, तब तू भी उसके प्रति सच्चा होगा!
27 यदि कोई तेरे लिये अच्छा जीवन बिताता है, तब तू भी उसके लिये अच्छा बनेगा।
    किन्तु यदि कोई व्यक्ति तेरे विरुद्ध होता है, तब तू भी उसके विरुद्ध होगा।
28 तू विपत्ति में विन्रम लोगों को बचायेगा,
    किन्तु तू घमण्डी को नीचा करेगा।
29 यहोवा तू मेरा दीपक है,
    यहोवा मेरे चारों ओर के अंधेरे को प्रकाश में बदलता है।
30 तू सैनिकों के दल को हराने में, मेरी सहायता करता है।
    परमेश्वर की शक्ति से मैं दीवर के ऊपर चढ़ सकता हूँ।

31 परमेश्वर की शक्ति पूर्ण है।
    यहोवा के वचन की जाँच हो चुकी है।
    यहोवा रक्षा के लिये, अपने पास भागने वाले हर व्यक्ति की ढाल है।
32 यहोवा के अतिरिक्त कोई अन्य परमेश्वर नहीं,
    हमारे परमेश्वर के अतिरिक्त अन्य कोई आश्रय—शिला नहीं।
33 परमेश्वर मेरा दृढ़ गढ़ है
    वह निर्दोषों की शुद्ध आत्माओं की सहायता करता है।
34 यहोवा मेरे पैरों को हिरन के पैरों—सा तेज बनाता है,
    वह उच्च स्थानों पर मुझे दृढ़ करता है।
35 यहोवा मुझे युद्ध की शिक्षा देता है, अत:
    मेरी भुजायें पीतल के धनुष को चला सकती हैं।

36 तू ढाल की तरह, मेरी रक्षा करता है।
    तेरी सहायता ने मुझे विजेता बनाया है।
37 तूने मेरा मार्ग विस्तृत किया है,
    जिससे मेरे पैर फिसले नहीं।
38 मैंने अपने शत्रुओं का पीछा किया, मैंने उन्हें नष्ट किया,
    मैं तब तक नहीं लौटा, जब तक शत्रु नष्ट न हुए।
39 मैंने अपने शत्रुओं को नष्ट किया है,
    मैंने उन्हें पूरी तरह नष्ट किया है।
वे फिर उठ नहीं सकते,
    हाँ मेरे शत्रु मेरे पैरों के तले गिरे।

40 परमेश्वर तूने मुझे युद्ध के लिये, शक्तिशाली बनाया।
    तूने मेरे शत्रुओं को हराया है।
41 तूने मेरे शत्रुओं को भगाया है,
    अत: मैं उन लोगों को हरा सकता हूँ जो मुझसे घृणा करते हैं।
42 मेरे शत्रुओं ने सहायता चाही,
    किन्तु उनका रक्षक कोई नहीं था।
उन्होंने यहोवा से सहायता माँगी,
    लेकिन उसने उत्तर नहीं दिया।
43 मैं अपने शत्रुओं को कूटकर टुकड़े—टुकड़े करता हूँ,
    वे भूमि पर धूलि से हो जाते हैं।
मैंने उन्हें सड़क की कीचड़ की
    तरह रौंद दिया।

44 तूने तब भी मुझे बचाया है, जब मेरे लोगों ने मेरे विरुद्ध लड़ाई की।
    तूने मुझे राष्ट्रों का शासक बनाये रखा,
    वे लोग भी मेरी सेवा करेंगे, जिन्हें मैं नहीं जानता।
45 अन्य देशों के लोग मेरी आज्ञा मानते हैं,
    जैसे ही सुनते हैं, तो शीघ्र ही मेरी आज्ञा स्वीकार करते हैं।
46 अन्य देशों के लोग भयभीत होंगे,
    वे अपने छिपने के स्थानों से भय से काँपते निकलेंगे।

47 यहोवा शाश्वत है,
    मेरी आश्रय चट्टान[a] की स्तुति करो!
    परमेश्वर महान है! वह आश्रय—चट्टान है, जो मेरा रक्षक है।
48 वह परमेश्वर है, जो मेरे शत्रुओं को मेरे लिये दण्ड देता है।
    वह लोगों को मेरे अधीन करता है।
49     वह मुझे मेरे शत्रुओं से मुक्त करता है।

हाँ, तूने मुझे मेरे शत्रुओं से ऊपर उठाया।
    तू मुझे, प्रहार करने के इच्छुकों से बचाता है।
50 यहोव, इसी कारण, हे यहोवा मैंने राष्ट्रों के बीच में तुझ को धन्यवाद दिया,
    यही कारण है कि मैं तेरे नाम की महिमा गाता हूँ।

51 यहोवा अपने राजा की सहायता, युद्ध में विजय पाने में करता है,
    योहवा अपने चुने हुये राजा से प्रेम दया करता है।
    वह दाऊद और उसकी सन्तान पर सदा दयालु रहेगा।

दाऊद के अन्तिम शब्द

23 यिशै के पुत्र दाऊद के अन्तिम शब्द हैं, दाऊद ने यह गीत गाया:

“परमेश्वर द्वारा महान बना व्यक्ति कहता है,
    वह याकूब के परमेश्वर द्वारा चुना गया राजा है,
    वह इस्राएल का मधुर गायक है।
यहोवा की आत्मा मेरे माध्यम से बोला।
    उसके शब्द मेरी जीभ पर थे।
इस्राएल के परमेश्वर ने बातें कीं।
    इस्राएल की आश्रय, चट्टान ने मुझसे कहा,
‘वह व्यक्ति जो लोगों पर न्यायपूर्ण शासन करता है,
    वह व्यक्ति जो परमेश्वर को सम्मान देकर शासन करता है।
वह उषाकाल के प्रकाश—सा होगा,
    वह व्यक्ति मेघहीन प्रात: की तरह होगा,
वह व्यक्ति उस वर्षा के बाद की धूप सा होगा;
    वर्षा जो भूमि में कोमल घासें उगाती है।’

“परमेश्वर ने मेरे परिवार को शक्तिशाली बनाया था।
    परमेश्वर ने मेरे साथ सदैव के लिये एक वाचा की,
परमेश्वर ने यह वाचा पक्की की, और वह इसे नहीं तोड़ेगा,
    यह वाचा मेरी मुक्ति है, यह वाचा वह सब है,
जो मैं चाहता हूँ।
    सत्य ही, यहोवा मेरे परिवार को शक्तिशाली बनने देगा।

“किन्तु सभी बुरे व्यक्ति काँटों की तरह हैं।
    लोग काँटों को धारण नहीं करते,
    वे उन्हें दूर फेंक देते हैं।
यदि कोई व्यक्ति उन्हें छूता है,
    तो वे उस भाले के दंड की तरह चुभते हैं जो लकड़ी तथा लोहे से बना हो।
वे लोग काँटो की तरह होंगे।
    वे आग में फेंक दिये जाएंगे,
    और वे पूरी तरह भस्म हो जायेंगे।”

तीन महायोद्धा

दाऊद के सैनिकों के नाम ये हैं:

तहकमोनी का रहने वाला योशेब्यश्शेबेत। योशेब्यश्शेबेत तीन महायोद्धाओं का नायक था। उसे एस्नी अदीनी भी कहा जाता था। योशेब्यश्शेबेत ने एक बार में आठ सौ व्यक्तियों को मारा था।

दूसरा, अहोही, दोदै का पुत्र एलीआजार था। एलीआजार उन तीन वीरों में से एक था, जो दाऊद के साथ उस समय थे जब उन्होंने पलिश्तियों को चुनौती दी थी। पलिश्ती एक साथ युद्ध के लिये तब आये थे जब इस्राएली दूर चले गये थे। 10 एलीआज़ार पलिश्तियों के साथ तब तक लड़ता रहा जब तक वह बहुत थक नहीं गया। किन्तु वह अपनी तलवार को दृढ़ता से पकड़े रहा और युद्ध करता रहा। उस दिन यहोवा ने इस्राएलियों को बड़ी विजय दी। लोग तब आए जब एलीआज़ार युद्ध जीत चुका था। किन्तु वे केवल बहुमूल्य चीजें शत्रुओं से लेने आए।

11 उसके बाद हरार का रहने वाला आगे का पुत्र शम्मा था। पलिश्ती एक साथ लड़ने लेही में आये थे। उन्होंने मसूर के खेतों में युद्ध किया था। लोग पलिश्तियों के सामने भाग खड़े हुए थे। 12 किन्तु श्म्मा खेत के बीच खड़ा था। वह खेत के लिये लड़ा। उसने पलिश्तियों को मार डाला। उस समय यहोवा ने बड़ी विजय दी।

13 एक बार जब दाऊद अदुल्लाम की गुफा में था तीस योद्धोओं[b] में से तीन दाऊद के पास आए। ये तीनों व्यक्ति अदुल्लाम की गुफा तक रेंगते हुये गुफा तक दाऊद के पास आए। पलिश्ती सेना ने अपना डेरा रपाईम की घाटी में डाला था।

14 उस समय दाऊद किले में था। कुछ पलिश्ती सैनिक वहाँ बेतलेहेम में थे। 15 दाऊद की बड़ी इच्छा थी कि उसे उस के नगर का पानी मिले जहाँ उसका घर था। दाऊद ने कहा, “ओह, मैं चाहता हूँ कि कोई व्यक्ति बेतलेहेम के नगर—द्वार के पास के कुँए का पानी मुझे दे।” दाऊद सचमुच यह चाहता नहीं था, वह बातें ही बना रहा था। 16 किन्तु तीनों योद्धा[c] पलिश्ती सेना को चीरेते हुए निकल गये। इन तीनों वीरों ने बेतलेहेम के नगर—द्वार के पास के कुँए से पानी निकाला। तब तीनों वीर दाऊद के पास पानी लेकर आए। किन्तु दाऊद ने पानी पीने से इन्कार कर दिया। उसने योहवा के सामने उसे भूमि पर डाल दिया। 17 दाऊद ने कहा, “यहोवा, मैं इसे पी नहीं सकता। यह उन व्यक्तियों का खून पीने जैसा होगा जिन्होंने अपने जीवन को मेरे लिये खतरे में डाला।” यही कारण था कि दाऊद ने पानी पीना अस्वीकार किया। इन तीनों योद्धाओं ने उस प्रकार के अनेक कार्य किये।

अन्य बहादुर सैनिक

18 सरूयाह का पुत्र, योआब का भाई अबीशै तीनों योद्धाओं का प्रमुख था। अबीशै ने अपने भाले का उपयोग तीन सौ शत्रुओं पर किया और उन्हें मार डाला। वह इतना ही प्रसिद्ध हुआ जितने तीन योद्धा। 19 अबीशै ने शेष तीन योद्धाओं से अधिक सम्मान पाया। वह उनका प्रमुख हो गया। किन्तु वह तीन योद्धाओं का सदस्य नहीं बना।

20 यहोयादा का पुत्र बनायाह एक था। वह शक्तिशाली व्यक्ति का पुत्र था। वह कबसेल का निवासी था। बनायाह ने अनेक वीरता के काम किये। बनायाह ने मोआब के अरियल के दो पुत्रों को मार डाला। जब बर्फ गिर रही थी, बनायाह एक गक़े में नीचे गया और एक शेर को मार डाला। 21 बनायाह ने एक मिस्री को मारा जो शक्तिशाली योद्धा था। मिस्री के हाथ में एक भाला था। किन्तु बनायाह के हाथ में केवल एक लाठी थी। बनायाह ने मिस्री के हाथ के भाले को पकड़ लिया और उससे छीन लिया। तब बनायाह ने मिस्री के अपने भाले से ही मिस्री को मार डाला। 22 यहोयादा के पुत्र बनायाह ने उस प्रकार के अनेक काम किये। बनायाह तीन वीरों में प्रसिद्ध था। 23 बनायाह ने तीन योद्धाओं से भी अधिक सम्मान पाया, किन्तु वह तीन योद्धाओं का सदस्य नहीं हुआ। बनायाह को दाऊद ने अपने रक्षकों का प्रमुख बनाया।

तीस महायोद्धा

24 तीस योद्धाओं में से एक योआब का भाई असाहेल था। तीस योद्धाओं के समूह में अन्य व्यक्ति ये थे:

बेतलेहेम के दोदो का पुत्र एल्हानन;

25 हेरोदी शम्मा,

हेरोदी एलीका,

26 पेलेती, हेलेस;

तकोई इक्केश का पुत्र ईरा,

27 अनातोती का अबीएज़ेर;

हूशाई मबुन्ने,

28 अहोही, सल्मोन;

नतोपाही महरै;

29 नतोपाही के बाना का पुत्र हेलेब;

गिबा के बिन्यामीन परिवार

समूह रीबै का पुत्र हुत्तै;

30 पिरातोनी, बनायाह;

गाश के नालों का हिद्दै;

31 अराबा अबीअल्बोन;

बहूरीमी अजमावेत;

32 शालबोनी एल्यहबा;

याशेन के पुत्र योनातन; 33 हरारी शम्मा का पुत्र;

अरारी शारार का पुत्र अहीआम;

34 माका का अहसबै का पुत्र एलीपेलेप्त;

गीलोई अहीतोपेल का पुत्र एलीआम;

35 कर्म्मली हेस्रो;

अराबी पारै;

36 सोबाई के नातान का पुत्र यिगाल;

गादी बानी; 37 अम्मोनी सेलेक,

बेरोती का नहरै; (नहरै सरुयाह के पुत्र योआब का कवच ले जाता था);

38 येतेरी ईरा

येतेरी गारेब;

39 और हित्ती ऊरिय्याह

सब मिलाकर ये सैंतीस थे।

दाऊद अपनी सेना को गिनना चाहता है

24 यहोवा फिर इस्राएल के विरुद्ध क्रोधित हुआ। यहोवा ने दाऊद को इस्राएलियों के विरुद्ध कर दिया। दाऊद ने कहा, “जाओ, इस्राएल और यहूदा के लोगों को गिनो।”

राजा दाऊद ने सेना के सेनापति योआब से कहा, “इस्राएल के सभी परिवार समूह में दान से बर्शेबा तक जाओ, और लोगों को गिनो। तब मैं जान सकूँगा कि वहाँ कितने लोग हैं।”

किन्तु योआब ने राजा से कहा, “यहोवा परमेश्वर आपको सौ गुणा लोग दे, और आपकी आँखे यह घटित होता हुआ देख सकें। किन्तु आप यह क्यों करना चाहते हैं?”

राजा दाऊद ने दृढ़ता से योआब और सेना के नायको के लोगों की गणना करने का आदेश दिया। अत: योआब और सेना के नायक दाऊद के यहाँ से इस्राएल को लोगों को गिनने गए। उन्होंने यरदन नदी को पार किया। उन्होंने अपना डेरा अरोएर में डाला। उनका डेरा नगर की दाँयी ओर था। (नगर गाद की घाटी के बीच में है। नगर याजेर जाने के रास्ते में भी है।)

तब वे तहतीम्होदशी के प्रदेश और गिलाद को गये। वे दान्यान और सीदोन के चारों ओर गए। वे सोर के किले को गये। वे हिब्बियों और कनानियों के सभी नगरों को गये। वे दक्षिणी यहूदा में बेर्शेबा को गए। नौ महीने बीस दिन बाद वे पूरे प्रदेश का भ्रमण कर चुके थे। वे नौ महीने बीस दिन बाद यरूशलेम आए।

योआब ने लोगों की सूची राजा को दी। इस्राएल में आठ लाख व्यक्ति थे जो तलवार चला सकते थे और यहूदा में पाँच लाख व्यक्ति थे।

यहोवा दाऊद को दण्ड देता है

10 तब दाऊद गिनती करने के बाद लज्जित हुआ। दाऊद ने यहोवा से कहा, “मैंने यह कार्य कर के बहुत बड़ा पाप किया! यहोवा, मैं प्रार्थना करता हूँ कि तू मेरे पाप को क्षमा कर। मैंने बड़ी मूर्खता की है।”

11 जब दाऊद प्रात: काल उठा, यहोवा का सन्देश गाद नबी को मिला जो कि दाऊद का दृष्टा था। 12 यहोवा ने गाद से कहा, “जाओ, और दाऊद से कहो, ‘यहोवा जो कहता है वह यह है। मैं तुमको तीन विकल्प देता हूँ। उनमें से एक को चुनो जिसे मैं तुम्हारे लिये करूँ।’”

13 गाद दाऊद के पास गया और उसने बात की। गाद ने दाऊद से कहा, “तीन में से एक को चुनो: तुम्हारे लिये और तुम्हारे देश के लिये सात वर्ष की भूखमरी। तुम्हारे शत्रु तुम्हारा पीछा तीन महीने तक करें। तुम्हारे देश में तीन दिन तक बीमारी फैले। इनके बारे में सोचो और निर्णय करो कि मैं इन में से यहोवा जिसने मुझे भेजा है, को कौन सी चीज बताऊँ।”

14 दाऊद ने गाद से कहा, “मैं सचमुच विपत्ति में हूँ! किन्तु यहोवा बहुत कृपालु है। इसलिये यहोवा को हमें दण्ड देने दो! मुझे मनुष्यों से दंडित न होने दो।”

15 इसलिये यहोवा ने इस्राएल में बीमारी भेजी। यह प्रातःकाल आरम्भ हुई और रुकने के निर्धारित समय तक रही। दान से बेर्शेबा तक सत्तर हज़ार लोग मर गए।

16 स्वर्गदूत ने अपनी भुजा यरूशलेम की ओर उसे नष्ट करने के लिये उठाई। किन्तु जो बुरी बातें हुई उनके लिये यहोवा बहुत दुःखी हुआ। यहोवा ने उस स्वर्गदूत से कहा जिसने लोगों को नष्ट किया, “बहुत हो चुका! अपनी भुजा नीचे करो।” यहोवा का स्वर्गदूत यबूसी अरौना के खलिहान के किनारे था।

दाऊद अरौना के खलिहान को खरीदता है

17 दाऊद ने उस स्वर्गदूत को देखा जिसने लोगों को मारा। दाऊद ने यहोवा से बातें कीं। दाऊद ने कहा, “मैंने पाप किया है। मैंने गलती की है। किन्तु इन लोगों ने मेरा अनुसरण भेड़ की तरह किया। उन्होंने कोई गलती नहीं की। कृपया दण्ड मुझे और मेरे पिता के परिवार को दें।”

18 उस दिन गाद दाऊद के पास आया। गाद ने दाऊद से कहा, “जाओ और एक वेदी यबूसी अरौना के खलिहान में यहोवा के लिये बनाओ।” 19 तब दाऊद ने वे काम किये जो गाद ने करने को कहा। दाऊद ने यहोवा के दिये आदेशों का पालन किया। दाऊद अरौना से मिलने गया। 20 जब अरौना ने निगाह उठाई, उसने राजा (दाऊद) और उसके सेवकों को अपने पास आते देखा। अरौना बाहर निकला और अपना माथा धरती पर टेकते हुए प्रणाम किया। 21 अरौना ने कहा, “मेरे स्वामी, राजा, मेरे पास क्यों आए हैं?”

दाऊद ने उत्तर दिया, “तुमसे खलिहान खरीदने। तब मैं यहोवा के लिये वेदी बना सकता हूँ। तब बीमारी रुक जायेगी।”

22 अरौना ने दाऊद से कहा, “मेरे स्वामी राजा, आप कुछ भी बलि—भेंट के लिये ले सकते हैं। ये कुछ गायें होमबलि के लिये हैं अग्नि की लकड़ी के लिये दंवरी के औजार तथा बैलों का जूआ भी है। 23 हे राजा! मैं आपको हर एक चीज देता हूँ।” अरौना ने राजा से यह भी कहा, “यहोवा आपका परमेश्वर आप पर प्रसन्न हो।”

24 किन्तु राजा ने अरौना से कहा, “नहीं! मैं तुमसे सत्य कहता हूँ, मैं तुमसे भूमि को उसकी कीमत देकर खरीदूँगा। मैं यहोवा अपने परमेश्वर को कुछ भी ऐसी होमबलि नहीं चढ़ाऊँगा जिसका कोई मूल्य मैंने न दिया हो।”

इसलिये दाऊद ने खलिहान और गायों को चाँदी के पचास शेकेल से खरीदा। 25 तब दाऊद ने वहाँ यहोवा के लिये एक वेदी बनाई। दाऊद ने होमबलि और मेलबलि चढ़ाई।

यहोवा ने देश के लिये उसकी प्रार्थना स्वीकार की। यहोवा ने इस्राएल में बीमारी रोक दी।

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