Beginning
योआब दाऊद को फटकारता है
19 लोगों ने योआब को सूचना दी। उन्होंने योआब से कहा, “देखो, राजा अबशालोम के लिये रो रहा है और बहुत दुःखी है।” 2 दाऊद की सेना ने उस दिन विजय पाई थी। किन्तु वह दिन सभी लोगों के लिये बहुत शोक का दिन हो गया। यह शोक का दिन था, क्योंकि लोगों ने सुना, “राजा अपने पुत्र के लिये बहुत दुःखी है।”
3 लोग नगर में चुपचाप आए। वे उन लोगों की तरह थे जो युद्ध में पराजित हो गए और भाग आएं हों। 4 राजा ने अपना मुँह ढक लिया था। वह फूट—फूट कर रो रहा था, “मेरे पुत्र अबशालोम, ऐ अबशलोम। मेरे पुत्र, मेरे बेटे!”
5 योआब राजा के महल में आया। योआब ने राजा से कहा, “आज तुम अपने सभी सेवकों के मुँह को भी लज्जा से ढके हो! आज तुम्हारे सेवकों ने तुम्हारा जीवन बचाया। उन्होंने तुम्हारे पुत्रों, पुत्रियों, पत्नियों, और दासियों के जीवन को बचाया। 6 तुम्हारे सेवक इसलिये लज्जित हैं कि तुम उनसे प्रेम करते हो जो तुमसे घृणा करते हैं और तुम उनसे घृणा करते हो जो तुमसे प्रेम करते हैं। आज तुमने यह स्पष्ट कर दिया है कि तुम्हारे अधिकारी और तुम्हारे लोग तुम्हारे लिये कुछ नहीं हैं। आज में समझता हूँ कि यदि अबशालोम जीवित रहता और हम सभी मार दिये गए होते तो तुम्हें बड़ी प्रसन्नता होती। 7 अब खड़े होओ तथा अपने सेवकों से बात करो और उनको प्रोत्साहित करो। मैं यहोवा की शपथ खाकर कहता हूँ कि यदि तुम यह करने बाहर नहीं निकलते तो आज की रात तुम्हारे साथ कोई व्यक्ति नहीं रह जायेगा। बचपन से आज तक तुम पर जितनी विपत्तियाँ आई हैं, उन सबसे यह विपत्ति और बदतर होगी।”
8 तब राजा नगर द्वार पर गया। सूचना फैली कि राज नगर द्वार पर है। इसलिये सभी लोग राजा को देखने आये। सभी अबशालोम के समर्थक इस्राएली अपने घरो को भाग गए थे।
दाऊद फिर राजा बनता है
9 इस्राएली के सभी परिवार समूहों के लोग आपस में तर्क—विर्तक करने लगे। उन्होंने कहा, “राजा दाऊद ने हमें पलिश्तियों और हमारे अन्य शत्रुओं से बचाया। दाऊद अबशालोम के सामने भाग खड़ा हुआ। 10 हम लोगों ने अबशालोम को अपने ऊपर शासन करने के लिये चुना था। किन्तु अब वह युद्ध में मर चुका है। हम लोगों को दाऊद को फिर राजा बनाना चाहिये।”
11 राजा दाऊद ने याजक सादोक और एब्यातार को सन्देश भेजा। दाऊद ने कहा, “यहूदा के प्रमुखों से बात करो। कहो, ‘तुम लोग अन्तिम परिवार समूह क्यों हो जो राजा दाऊद को अपने राजमहल में वापस लाना चाहते हो? देखो, सभी इस्राएली राजा को महल में लाने के बारे में बातें कर रहे हैं। 12 तुम मेरे भाई हो, तुम मेरे परिवार हो। फिर भी तुम्हारा परिवार समूह राजा को वापस लाने में अन्तिम क्यों रहा?’ 13 और अमासा से कहो, ‘तुम मेरे परिवार के अंग हो। परमेश्वर मुझे दण्ड दे यदि मैं तुमको योआब के स्थान पर सेना का नायक बनाऊँ।’”
14 दाऊद ने यहूदा के लोगों के दिल को प्रभावित किया, अत: वे एक व्यक्ति की तरह एकमत हो गए। यहूदा के लोगों ने राजा को सन्देश भेजा। उन्होंने कहा, “अपने सभी सेवकों के साथ वापस आओ!”
15 तब राजा दाऊद यरदन नदी तक आया। यहूदा के लोग राजा से मिलने गिलगाल आए। वे इसलिये आए कि वे राजा को यरदन नदी के पार ले जाएं।
शिमी दाऊद से क्षमा याचना करता है
16 गेरा का पुत्र शिमी बिन्यामीन परिवार समूह का था। वह बहूरीम में रहता था। शिमी ने राजा दाऊद से मिलने की शीघ्रता की। शिमी यहूदा के लोगों के साथ आया। 17 शिमी के साथ बिन्यामीन परिवार के एक हजार लोग भी आए। शाऊल के परिवार का सेवक सीबा भी आया। सीबा अपने साथ अपने पन्द्रह पुत्रों और बीस सेवकों को लाया। ये सभी लोग राजा दाऊद से मिलने के लिये यरदन नदी पर शीघ्रता से पहुँचे।
18 लोग यरदन नदी पार करके राजा के परिवार को यहूदा में वापस लाने के लिये गये। राजा ने जो चाहा, लोगों ने किया। जब राजा नदी पार कर रहा था, गेरा का पुत्र शिमी उससे मिलने आया। शिमी राजा के सामने भूमि तक प्रणाम करने झुका। 19 शिमी ने राजा से कहा, “मेरे स्वामी, जो मैंने अपराध किये उन पर ध्यान न दे। मेरे स्वामी राजा, उन बुरे कामों को याद न करे जिन्हें मैंने तब किये जब आपने यरूशलेम को छोड़ा। 20 मैं जानता हूँ कि मैंने पाप किये हैं। मेरे स्वामी राजा, यही कारण है कि मैं यूसुफ के परिवार[a] का पहला व्यक्ति हूँ जो आज आपसे मिलने आया हूँ।”
21 किन्तु सरूयाह के पुत्र अबीशै ने कहा, “हमें शिमी को अवश्य मार डालना चाहिये क्योंकि इसने यहोवा के चुने राजा के विरुद्ध बुरा होने की याचना की।”
22 दाऊद ने कहा, “सरूयाह के पुत्रो, मैं तुम्हारे साथ क्या करूँ? आज तुम मेरे विरुद्ध हो। कोई व्यक्ति इस्राएल में मारा नहीं जाएगा। आज मैं जानता हूँ कि मैं इस्राएल का राजा हूँ।”
23 तब राजा ने शिमी से कहा, “तुम मरोगे नहीं।” राजा ने शिमी को वचन दिया कि वह शिमी को स्वयं नहीं मारेगा।[b]
मपीबोशेत दाऊद से मिलने जाता है
24 शाऊल का पौत्र मपीबोशेत राजा दाऊद से मिलने आया। मपीबोशेत ने उस सारे समय तक अपने पैरों की चिन्ता नहीं की, अपनी मूँछों को कतरा नहीं या अपने वस्त्र नहीं धोए जब तक राजा यरूशलेम छोड़ने के बाद पुन: शान्ति के साथ वापिस नहीं आ गया। 25 मपीबोशेत यरूशलेम से राजा के पास मिलने आया। राजा ने मपीबोशेत से पूछा, “तुम मेरे साथ उस समय क्यों नहीं गए जब मैं यरूशलेम से भाग गया था?”
26 मपीबोशेत ने उत्तर दिया, “हे राजा, मेरे स्वामी! मेरे सेवक (सीबा) ने मुझे मूर्ख बनाया। मैंने सीबा से कहा, ‘मैं विकलांग हूँ। अत: गधे पर काठी लगाओ। तब मैं गधे पर बैठूंगा, और राजा के साथ जाऊँगा।[c] किन्तु मेरे सेवक ने मुझे धोखा दिया।’ 27 उसने मेरे बारे में आपसे बुरी बातें कहीं। किन्तु मेरे स्वामी, राजा परमेश्वर के यहाँ देवदूत के समान हैं। आप वही करें जो आप उचित समझते हैं। 28 आपने मेरे पितामह के सारे परिवार को मार दिया होता। किन्तु आपने यह नहीं किया। आपने मुझे उन लोगों के साथ रखा जो आपकी मेज पर खाते हैं। इसलिये मैं राजा से किसी बात के लिये शिकायत करने का अधिकार नहीं रखता।”
29 राजा ने मपीबोशेत से कहा, “अपनी समस्याओं के बारे में अधिक कुछ न कहो। मैं यह निर्णय करता हूँ! तुम और सीबा भूमि का बंटवार कर सकते हो।”
30 मपीबोशेत ने राजा से कहा, “सीबा को सारी भूमि ले लेने दें! क्यों? क्योंकि मेरे स्वामी राजा अपने महल में शान्तिपूर्वक लौट आये हैं।”
दाऊद बर्जिल्लै से अपने साथ यरूशलेम चलने को कहता है
31 गिलाद का बर्जिल्लै रोगलीम से आया। वह राजा दाऊद के साथ यरदन नदी तक आया। वह राजा के साथ, यरदन नदी को उसे पार कराने के लिये गया। 32 बर्जिल्लै बहुत बूढ़ा आदमी था। वह अस्सी वर्ष का था। जब दाऊद महनैम में ठहरा था तब उसने उसको भोजन तथा अन्य चीजें दी थीं। बर्जिल्लै यह सब कर सकता था क्योंकि वह बहुत धनी व्यक्ति था। 33 दाऊद ने बर्जिल्लै से कहा, “नदी के पार मेरे साथ चलो। यदि तुम मेरे साथ यरूशलेम में रहोगे तो वहाँ मैं तुम्हारी देखभाल करूँगा।”
34 किन्तु बर्जिल्लै ने राजा से कहा, “क्या आप जानते हैं कि मैं कितना बूढ़ा हूँ? क्या आप समझते हैं कि मैं आपके साथ यरूशलेम को जा सकता हूँ? 35 मैं अस्सी वर्ष का हूँ। मैं इतना अधिक बूढ़ा हूँ कि मैं यह नहीं बता सकता कि अच्छा क्या है और बुरा क्या है। मैं इतना अधिक बूढ़ा हूँ कि मैं जो खाता पीता हूँ उसका स्वाद नहीं ले सकता। मैं इतना बूढ़ा हूँ कि आदमियों और स्त्रियों के गाने की आवाज भी नहीं सुन सकता। आप मेरे साथ परेशान होना क्यों चाहते हैं? 36 मैं आपकी ओर से पुरस्कार नहीं चाहता। मैं आपके साथ नजदीक के रास्ते से यरदन नदी को पार करुँगा। 37 किन्तु, कृपया मुझे वापस लौट जाने दें। तब मैं अपने नगर में मरुँगा और अपने माता—पिता की कब्र में दफनाया जाऊँगा किन्तु यह किम्हाम आपका सेवक हो सकता है। मेरे प्रभु राजा उसे अपने साथ लौटने दें। जो आप चाहें, उसके साथ करें।”
38 राजा ने उत्तर दिया, “किम्हाम मेरे साथ लौटेगा। मैं तुम्हारे कारण उस पर दयालु रहूँगा। मैं तुम्हारे लिये कुछ भी कर सकता हूँ।”
दाऊद घर लौटता है
39 राजा ने बर्जिल्लै का चुम्बन किया और उसे आशीर्वाद दिया। बर्जिल्लै घर लौट गया। और राजा तथा सभी लोग नदी के पार वापस गये।
40 राजा यरदन नदी को पार करके गिलगाल गया। किम्हाम उसके साथ गया, यहूदा के सभी लोगों तथा आधे इस्राएल के लोगों ने दाऊद को नदी के पार पहुँचाया।
इस्राएली यहूदा के लोगों से तर्क वितर्क करते हैं
41 सभी इस्राएली राजा के पास आए। उन्होंने राजा से कहा, “हमारे भाई यहूदा के लोग, आपको चुरा ले गये और आपको और आपके परिवार को, आपके लोगों के सात यरदन नदी के पार ले आए। क्यों?”
42 यहूदा के सभी लोगों ने इस्रालियों को उत्तर दिया, “क्योंकि राजा हमारा समीपी सम्बन्धी है। इस बात के लिये आप लोग हमसे क्रोधित क्यों हैं? हम लोगों ने राजा की कीमत पर भोजन नहीं किया है। राजा ने हम लोगों को कोई भेंट नहीं दी।”
43 इस्राएलियों ने उत्तर दिया, “हम लोग दाऊद के राज्य के दस भाग हैं।[d] इसलिये हम लोगों का अधिकार दाऊद पर तुमसे अधिक है। किन्तु तुम लोगों ने हमारी उपेक्षा की। क्यों? वे हम लोग थे जिन्होंने सर्वप्रथम अपने राजा को वापस लाने की बात की।”
किन्तु यहूदा के लोगों ने इस्राएलियों को बड़ा गन्दा उत्तर दिया। यहूदा के लोगों के शब्द इस्राएलियों के शब्दों से अधिक शत्रुतापूर्ण थे।
शेबा इस्राएलियों को दाऊद से अलग संचालित करता है
20 ऐसा हुआ कि बिक्री का पुत्र शेबा नाम का एक बुरा आदमी था। शेबा बिन्यामीन परिवार समूह का था। उसने तुरही बजाई और कहा,
“हम लोगों का कोई हिस्सा दाऊद में नहीं है।
यिशै के पुत्र का कोई अंश हममें नहीं है।
पूरे इस्राएली, हम लोग अपने डेरों में घर चले।”
2 तब सभी इस्राएलियों ने दाऊद को छोड़ दिया, और बिक्री के पुत्र शेबा का अनुसरण किया। किन्तु यहूदा के लोग अपने राजा के साथ लगातार यरदन नदी से यरूशलेम तक बने रहे।
3 दाऊद अपने घर यरूशलेम को आया। दाऊद ने अपनी पत्नियों में से दस को घर की देखभाल के लिये छोड़ा था। दाऊद ने इन स्त्रियों को एक विशेष घर में रखा।[e] लोगों ने इस घर की रक्षा की। स्त्रियाँ उस घर में तब तक रहीं जब तक वे मरी नहीं। दाऊद ने उन्हें भोजन दिया, किन्तु उनके साथ शारीरिक सम्बन्ध नहीं किया। वे मरने के समय तक विधवा की तरह रहीं।
4 राजा ने अमासा से कहा, “यहूदा के लोगों से कहो कि वे मुझसे तीन दिन के भीतर मिलें, और तुम्हें भी यहाँ आना होगा और मेरे सामने खड़ा होना होगा।”
5 तब अमासा यहूदा के लोगों को एक साथ बुलाने गया। किन्तु उसने, जितना समय राजा ने दिया था, उससे अधिक समय लिया।
दाऊद अबीशै से शेबा को मारने को कहता है
6 दाऊद ने अबीशै से कहा, “बिक्री का पुत्र शेबा हम लोगों के लिये उससे भी अधिक खतरनाक है जितना अबशालोम था। इसलिये मेरे सेवकों को लो और शेबा का पीछा करो। शेबा को प्राचीर वाले नगरों में पहुँचने से पहले इसे शीघ्रता से मारो। यदि शेबा प्राचीर वाले नगरों में पहुँच जायेगा तो वह हम लोगों से बच निकलेगा।”
7 योआब के व्यक्ति करेती, पलेती और सैनिक यरूशलेम से बाहर गये। उन्होंने बिक्री के पुत्र शेबा का पीछा किया।
योआब अमासा को मार डालता है
8 जब योआब और सेना गिबोन की विशाल चट्टान तक आई, अमासा उनसे मिलने आया। योआब अपने सैनिक पोशाक में था। योआब ने पेटी बाँध रखी थी। उसकी तलवार उसकी म्यान में थी। योआब अमासा से मिलने आगे बढ़ा और उसकी तलवार म्यान से गिर पड़ी। योआब ने तलवार को उठा लिया और उसे अपने हाथ में रखा। 9 योआब ने अमासा से पूछा, “भाई, तुम हर तरह से कुशल तो हो?” योआब ने चुम्बन करने के लिये अपने दायें हाथ से, अमासा को उसकी दाढ़ी के सहारे पकड़ा। 10 अमासा ने उस तलवार पर ध्यान नहीं दिया जो उसके हाथ में थी। योआब ने अमासा के पेट में तलवार घुसेड़ दी और उसकी आँते भूमि पर आ पड़ीं। योआब को अमासा पर दुबारा चोट नहीं करनी पड़ी, वह पहले ही मर चुका था।
दाऊद के लोग शेबा की खोज में लगे रहे
तब योआब और उसका भाई अबीशै दोनों ने बिक्री के पुत्र शेबा की खोज जारी रखी। 11 योआब के युवकों में से एक व्यक्ति अमासा के शव के पास खड़ा रहा। इस युवक ने कहा, “हर एक व्यक्ति जो योआब और दाऊद का समर्थन करता है, उसे योआब का अनुसरण करना चाहिये। शेबा का पीछा करने में उसकी सहायता करो।”
12 अमासा अपने ही खून में सड़क के बीच पड़ा रहा। सभी लोग शव को देखने रुकते थे। इसलिये युवक अमासा के शव को सड़क से ले गया और उसे मैदान में रख दिया। तब उस ने अमासा के शव पर एक कपड़ा डाल दिया। 13 जब अमासा का शव सड़क से हटा लिया गया, सभी लोगों ने योआब का अनुसरण किया। वे बिक्री के पुत्र शेबा का पीछा करने योआब के साथ गए।
शेबा आबेल बेतमाका को बच निकलता है
14 बिक्री का पुत्र शेबा सभी इस्राएल के परिवार समूहों से होता हुआ आबेल बेतमाका पहुँचा। सभी बेरी लोग भी एक साथ आए और उन्होंने शेबा का अनुसरण किया।
15 योआब और उसके लोग आबेल और बेतमाका आए। योआब की सेना ने नगर को घेर लिया। उन्होंने नगर दीवार के सहारे मिट्टी के ढेर लगाए। ऐसा करने के बाद वे दीवार के ऊपर चढ़ सकते थे। तब योआब के सैनिकों ने दीवार से पत्थरों को तोड़ना प्रारम्भ किया। वे दीवार को गिरा देना चाहते थे।
16 एक बुद्धिमती स्त्री नगर की ओर से चिल्लाई। उसने कहा, “मेरी सुनो! योआब को यहाँ बुलाओ। मैं उससे बात करना चाहती हूँ।”
17 योआब उस स्त्री के पास बात करने गया। उस स्त्री ने पूछा, “क्या तुम योआब हो?”
योआब ने उत्तर दिया, “हाँ, मैं हूँ।”
तब उस स्त्री ने योआब से कहा, “मैं जो कहूँ सुनो।”
योआब ने कहा, “मैं सुन रहा हूँ।”
18 तब उस स्त्री ने कहा, “अतीत में लोग कहते थे, ‘आबेल में सलाह माँगो तब समस्या सुलझ जाएगी।’ 19 मैं इस्राएल के राजभक्त तथा शान्तिप्रिय लोगों में से एक हूँ। तुम इस्राएल के एक महत्वपूर्ण नगर को नष्ट कर रहे हो। तुम्हें, वह कोई भी चीज, जो यहोवा की है, नष्ट नहीं करनी चाहिये।”
20 योआब ने कहा, “नहीं, मैं कुछ भी नष्ट नहीं करना चाहता! 21 किन्तु एक व्यक्ति एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश का है वह बिक्री का पुत्र शेबा है। वह राजा दाऊद के विरुद्ध हो गया है। यदि तुम उसे मेरे पास लाओ तो मैं नगर को शान्त छोड़ दूँगा।”
उस स्त्री ने कहा, “बहुत ठीक, उसका सिर दीवार के ऊपर से तुम्हारे लिये फेंक दिया जायेगा।”
22 तब उस स्त्री ने बड़ी बुद्धिमानी से नगर के सभी लोगों से बातें कीं। लोगों ने बिक्री के पुत्र शेबा का सिर काट डाला। तब लोगों ने योआब के लिये शेबा का सिर नगर की दीवार पर से फेंक दिया।
इसलिये योआब ने तुरही बजाई और सेना ने नगर को छोड़ दिया। हर एक व्यक्ति अपने घर में गया, और योआब राजा के पास यरूशलेम लौटा।
दाऊद के सेवक लोग
23 योआब इस्राएल की सारी सेना का नायक था। यहोयादा का पुत्र बनायाह, करेतियों और पलेतियों का संचालन करता था। 24 अदोराम उन लोगों का संचालन करता था जो कठिन श्रम करने के लिये विवश थे। अहिलूद का पुत्र यहोशापात इतिहासकार था। 25 शेवा सचिव था। सादोक और एब्यातार याजक थे। 26 और याईरी दाऊद का प्रमुख याजक था।
शाऊल का परिवार दण्डित हुआ
21 दाऊद के समय में भूखमरी का काल आया। इस बार भूखमरी तीन वर्ष तक रही। दाऊद ने यहोवा से प्रार्थना की। यहोवा ने उत्तर दिया, “इस भूखमरी का कारण शाऊल और उसका हत्यारा परिवार है। इस समय भूखमरी आई क्योंकि शाऊल ने गिबोनियों को मार डाला।” 2 (गिबोनी इस्राएली नहीं थे। वे ऐसे एमोरियों के समूह थे जो अभी तक जीवित छोड़ दिये गये थे। इस्राएलियों ने प्रतिज्ञा की थी कि वे गिबोनी पर चोट नहीं करेंगे।[f] किन्तु शाऊल को इस्राएल और यहूदा के प्रति गहरा लगाव था। इसलिये उसने गिबोनियों को मारना चाहा।)
राजा दाऊद ने गिबोनी को एक साथ इकट्ठा किया। उसने उनसे बातें कीं। 3 दाऊद ने गिबोनी से कहा, “मैं आप लोगों के लिये क्या कर सकता हूँ? इस्राएल के पापों को धोने के लिये मैं क्या कर सकता हूँ जिससे आप लोग यहोवा के लोगों को आशीर्वाद दे सकें?”
4 गिबोनी ने दाऊद से कहा, “शाऊल और उसके परिवार के पास इतना सोना—चाँदी नहीं है कि वे उसके बदले उसे दे सकें जो उन्होंने काम किये। किन्तु हम लोगों के पास इस्राएल के किसी व्यक्ति को भी मारने का अधिकार नहीं है।”
दाऊद ने पूछा, “किन्तु मैं तुम्हारे लिये क्या कर सकता हूँ?”
5 गिबोनी ने दाऊद से कहा, “शाऊल ने हमारे विरूद्ध योजनायें बनाईं। उसने हमारे सभी लोगों को, जो इस्राएल में बचे हुए हैं, नष्ट करने का प्रयत्न किया। 6 शाऊल यहोवा का चुना हुआ राजा था। इसलिये उसके सात पुत्रों को हम लोगों के सामने लाया जाये। तब हम लोग उन्हें शाऊल के गिबा पर्वत पर यहोवा के सामने फाँसी चढ़ा देंगे।”
राजा दाऊद ने कहा, “मैं उन पुत्रों को तुम्हें दे दूँगा।” 7 किन्तु राजा ने योनातन के पुत्र मपीबोशेत की रक्षा की। योनातन शाऊल का पुत्र था। दाऊद ने यहोवा के नाम पर योनातन से प्रतिज्ञा की थी। इसलिये राजा ने मपीबोशेत को उन्हें चोट नहीं पहुँचाने दिया। 8 किन्तु राजा ने अर्मोनी, और मपीबोशेत,[g] रिस्पा और शाऊल के पुत्रों को लिया (रिस्पा अय्या की पुत्री थी)। राजा ने रिस्पा के इन दो पुत्रों और शाऊल की पुत्री मीकल के पाँचों पुत्रों को लिया। महोल नगर का निवासी बर्जिल्लै का पुत्र अद्रीएल मेराब के सभी पाँच पुत्रों का पिता था। 9 दाऊद ने इन सात पुत्रों को गिबोनी को दे दिया। तब गिबोनी ने इन सातों पुत्रों को यहोवा के सामने गिबा पर्वत पर फाँसी दे दी। ये सातों पुत्र एक साथ मरे। वे फसल की कटाई के पहले दिन मार डाले गए। (जौ की कटाई आरम्भ होने जा रही थी।)
दाऊद और रिस्पा
10 अय्या की पुत्री रिस्पा ने शोक के वस्त्र लिये और उसे चट्टान पर रख दिया। वह वस्त्र फसल की कटाई आरम्भ होने से लेकर जब तक वर्षा हुई चट्टान पर पड़ा रहा। दिन में रिस्पा अपने पुत्रों के शव को आकाश के पक्षियों द्वारा स्पर्श नहीं होने देती थी। रात को रिस्पा खेतों के जानवरों को अपने पुत्रों के शवों को छूने नहीं देती थी।
11 लोगों ने दाऊद को बताया, जो कुछ शाऊल की दासी अय्या की पुत्री रिस्पा कर रही थी। 12 तब दाऊद ने शाऊल और योनातन की अस्थियाँ याबेश गिलाद के लोगों से लीं। (याबेश के लोगों ने इन अस्थियों को बेतशान के सार्वजनिक रास्ते से चुरा ली थी। यह सार्वजनिक रास्ता बेतशान में वहाँ है जहाँ पलिश्तियों ने शाऊल और योनातन के शवों को लटकाया था। पलिश्तियों ने इन शवों को शाऊल को गिलबो में मारने के बाद लटकाया था) 13 दाऊद, शाऊल और उसके पुत्र योनातन की अस्थियों को, गिलाद से लाया। तब लोगों ने शाऊल के सात पुत्रों के शवों को इकट्ठा किया जो फाँसी चढ़ा दिये गये थे। 14 उन्होंने शाऊल और उसके पुत्र योनातन की अस्थियों को बिन्यामीन के जेला स्थान में दफनाया। लोगों ने शवों को शाऊल के पिता कीश की कब्र में दफनाया। लोगों ने वह सब किया जो राजा ने आदेश दिया। तब परमेश्वर ने देश के लिये की गई उनकी प्रार्थना सुनी।
पलिश्तियों के साथ युद्ध
15 पलिश्तियों ने इस्राएलियों के विरुद्ध फिर युद्ध छेडा। दाऊद और उसके लोग पलिश्तियों से लड़ने गए। किन्तु दाऊद थक गया और कमजोर हो गया। 16 रपाई के वंश में से यिशबोबनोब एक था। यिशबोबनोब के भाले का वजन साढ़े सात पौंड था। यिशबोबनोब के पास एक नयी तलवार थी। उसने दाऊद को मार डालने की योजना बनाई। 17 किन्तु सरूयाह के पुत्र अबीशै ने उस पलिश्ती को मार डाला और दाऊद के जीवन को बचाया।
तब दाऊद के लोगों ने दाऊद से प्रतिज्ञा की। उन्होंने उससे कहा, “तुम हम लोगों के साथ भविष्य में युद्ध करने नहीं जा सकते। यदि तुम फिर युद्ध में जाते हो और मार दिये जाते हो तो इस्राएल अपने सबसे बड़े मार्ग दर्शक को खो देगा।”
18 तत्पश्चात, गोब में पलिश्तियों के साथ दूसरा युद्ध हुआ। हूशाई सिब्बकै ने सप एक अन्य रपाईवंशी पुरुष को मार डाला।
19 तब गोब में फिर पलिश्तियों से एक अन्य युद्ध छिड़ा। यारयोरगीम के पुत्र एलहनान ने, जो बेतलेहेम का था, गती गोल्यत[h] को मार डाला। गोल्यत का भाला जुलाहे की छड़ के बराबर लम्बा था।
20 गत में फिर युद्ध आरम्भ हुआ। वहाँ एक विशाल व्यक्ति था। उस व्यक्ति के हर एक हाथ में छः छः उँगलियाँ और हर एक पैर में छः–छः अंगूठे थे। सब मिलाकर उसकी चौबीस उंगलियाँ और अंगूठे थे। यह व्यक्ति भी एक रपाईवंशी था। 21 इस व्यक्ति ने इस्राएल को ललकारा। किन्तु योनातन ने इस व्यक्ति को मार डाला। (योनातन दाऊद के भाई शिमी का पुत्र था।)
22 ये चारों व्यक्ति गत के रपाईवंशी थे। वे सभी दाऊद और उसके लोगों द्वारा मारे गए।
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