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Read the Bible from start to finish, from Genesis to Revelation.
Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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1 शमूएल 25-27

दाऊद और नाबाल

25 शमूएल मर गया। इस्राएल के सभी लोग इकट्ठे हुए और उन्होंने शमूएल की मृत्यु पर शोक प्रकट किया। उन्होंने शमूएल को उसके घर रामा में दफनाया।

तब दाऊद पारान की मरुभूमि में चला गया। एक व्यक्ति था जो माओन में रहता था। वह व्यक्ति बहुत सम्पन्न था। उसके पास तीन हजार भेड़ें और एक हजार बकरियाँ थीं। वह कर्मेल में अपने धंधे की देखभाल करता था। वह कर्मेल में अपनी भेड़ों की ऊन काटता था। उस व्यक्ति का नाम नाबाल था। उसकी पत्नी का नाम अबीगैल था। अबीगैल बुद्धिमती और सुन्दर स्त्री थी। किन्तु नाबल क्रूर और नीच था। नाबाल कालेब के परिवार से था।

दाऊद मरुभूमि में था और उसने सुना कि नाबाल अपनी भेड़ों की ऊन काट रहा है। इसलिये दाऊद ने दस युवकों को नाबाल से बातें करने के लिये भेजा। दाऊद ने कहा, “कर्मेल जाओ। नाबाल से मिलो और उसको मेरी ओर से ‘नमस्ते’ कहो।” दाऊद ने उन्हें नाबाल के लिये यह सन्देश दिया, “मुझे आशा है कि तुम और तुम्हारा परिवार सुखी है। मैं आशा करता हूँ कि जो कुछ तुम्हारा है, ठीक—ठाक है। मैंने सुना है कि तुम अपनी भेड़ों से ऊन काट रहे हो। तुम्हारे गड़रिये कुछ समय तक हम लोगों के साथ रहे थे और हम लोगों ने उन्हें कोई कष्ट नहीं दिया। जब तक तुम्हारे गड़रिये कर्मेल में रहे हमने उनसे कुछ भी नहीं लिया। अपने सेवकों से पूछो और वे बता देंगे कि यह सब सच है। कृपया मेरे युवकों पर दया करो। इस प्रसन्नता के अवसर पर हम तुम्हारे पास पहुँच रहे हैं। कृपया इन युवकों को तुम जो कुछ चाहो, दो। कृपया यह मेरे लिये, अपने मित्र[a] दाऊद के लिये करो।”

दाऊद के व्यक्ति नाबाल के पास गए। उन्होंने दाऊद का सन्देश नाबाल को दिया। 10 किन्तु नाबाल उनके प्रति नीचता से पेश आया। नाबाल ने कहा, “दाऊद है कौन? यह यिशै का पुत्र कौन होता है? इन दिनों बहुत से दास हैं जो अपने स्वामियों के यहाँ से भाग गये हैं! 11 मेरे पास रोटी और पानी है और मेरे पास वह माँस भी है जिसे मैंने भेड़ों से ऊन काटने वाले सेवकों के लिये मारा है। किन्तु मैं उसे उन व्यक्तियों को नहीं दे सकता जिन्हें मैं जानता भी नहीं!”

12 दाऊद के व्यक्ति लौट गये और नाबाल ने जो कुछ कहा था दाऊद को बता दिया। 13 तब दाऊद ने अपने लोगों से कहा, “अपनी तलवार उठाओ!” अत: दाऊद और उसके लोगों ने तलवारें कस लीं। लगभग चार सौ व्यक्ति दाऊद के साथ गये और दो सौ व्यक्ति साज़ो सामान के साथ रुके रहे।

अबीगैल आपत्ति को टालती है

14 नाबाल के सेवकों में से एक ने नाबाल की पत्नी अबीगैल से बातें कीं। सेवक ने कहा, “दाऊद ने मरुभूमि से अपने दूतों को हमारे स्वामी (नाबाल) के पास भेजा। किन्तु नाबाल दाऊद के दूतों के साथ नीचता से पेश आया। 15 ये लोग हम लोगों के प्रति बहुत अच्छे थे। हम लोग भेड़ों के साथ मैदानों में जाते थे। दाऊद के लोग हमारे साथ लगातार रहे और उन्होंने हमारे साथ कुछ भी बुरा नहीं किया। उन्होंने पूरे समय हमारा कुछ भी नहीं चुराया। 16 दाऊद के लोगों ने दिन रात हमारी रक्षा की। वे हम लोगों के लिये रक्षक चहारदीवारी की तरह थे, उन्होंने हमारी रक्षा तब की जब हम भेड़ों की रखवाली करते हुए उनके साथ थे। 17 अब इस विषय में सोचो और निर्णय करो कि तुम क्या कर सकती हो। नाबाल ने जो कुछ कहा वह मूर्खतापूर्ण था। हमारे स्वामी (नाबाल) और उनके सारे परिवार के लिये भयंकर आपत्ति आ रही है।”

18 अबीगैल ने शीघ्रता की और दो सौ रोटियाँ, दाखमधु की दो भरी मशकें, पाँच पकी भेड़ें, लगभग एक बुशल पका अन्न, दो र्क्वाट मुनक्‌के और दो सौ सूखे अंजीर की टिकियाँ लीं। उसने उन्हें गधों पर लादा। 19 तब अबीगैल ने अपने सेवकों से कहा, “आगे चलते रहो मैं तुम्हारे पीछे आ रही हूँ।” किन्तु उसने अपने पति से कुछ न कहा।

20 अबीगैल अपने गधे पर बैठी और पर्वत की दूसरी ओर पहुँची। वह दूसरी ओर से आते हुए दाऊद और उसके आदमियों से मिली।

21 अबीगैल से मिलने के पहले दाऊद कह रहा था, “मैंने नाबाल की सम्पत्ति की रक्षा मरुभूमि में की। मैंने यह व्यवस्था की कि उसकी कोई भेड़ खोए नहीं। मैंने यह सब कुछ बिना लिये किया। मैंने उसके लिये अच्छा किया। किन्तु मेरे प्रति वह बुरा रहा। 22 परमेश्वर मुझे दण्डित करे यदि मैं नाबाल के परिवार के किसी व्यक्ति को कल सवेरे तक जीवित रहने दूँ।”

23 किन्तु जब अबीगैल ने दाऊद को देखा वह शीघ्रता से अपने गधे पर से उतर पड़ी। वह दाऊद के सामने प्रणाम करने को झुकी। उसने अपना माथा धरती पर टिकाया। 24 अबीगैल दाऊद के चरणों पर पड़ गई। उसने कहा, “मान्यवर, कृपा कर मुझे कुछ कहने दें। जो मैं कहूँ उसे सुनें। जो कुछ हुआ उसके लिये मुझे दोष दें। 25 मैंने उन व्यक्तियों को नहीं देखा जिन्हें आपने भेजा। मान्यवर, उस नालायक आदमी (नाबाल) पर ध्यान न दें। वह ठीक वही है जैसा उसका नाम है। उसके नाम का अर्थ ‘मूर्ख’ है और वह सचमुच मूर्ख ही है। 26 यहोवा ने आपको निरपराध व्यक्तियों को मारने से रोका है। यहोवा शाश्वत है और आप जीवित हैं, इसकी शपथ खाकर मैं आशा करती हूँ कि आपके शत्रु और जो आपको हानि पहुँचाना चाहते हैं, वे नाबाल की स्थिति में होंगे। 27 अब, मैं आपको यह भेंट लाई हूँ। कृपया इन चीज़ों को उन लोगों को दें जो आपका अनुसरण करते हैं। 28 अपराध करने के लिये मुझे क्षमा करें। मैं जानती हूँ कि यहोवा आपके परिवार को शक्तिशाली बनायेगा, आपके परिवार से अनेक राजा होंगे। यहोवा यह करेगा क्योंकि आप उसके लिये युद्ध लड़ते हैं। लोग तब आप में कभी बुराई नहीं पाएंगे जब तक आप जीवित रहेंगे। 29 यदि कोई व्यक्ति आपको मार डालने के लिये आपका पीछा करता है तो यहोवा आपका परमेश्वर आपके जीवन की रक्षा करेगा। किन्तु यहोवा आपके शत्रुओं के जीवन को ऐसे दूर फेंकेगा जैसे गुलेल से पत्थर फेंका जाता है। 30 यहोवा ने आपके लिये बहुत सी अच्छी चीजों को करने का वचन दिया है और यहोवा अपने सभी वचनों को पूरा करेगा। परमेश्वर आपको इस्राएल का शासक बनाएगा। 31 और आप इस जाल में नहीं फँसेंगे। आप बुरा काम करने के अपराधी नहीं होंगे। आप निरपराध लोगों को मारने का अपराध नहीं करेंगे। कृपया मुझे उस समय याद रखें जब यहोवा आपको सफलता प्रदान करे।”

32 दाऊद ने अबीगैल को उत्तर दिया, “इस्राएल के परमेश्वर, यहोवा की स्तुति करो। परमेश्वर ने तुम्हें मुझसे मिलने भेजा है। 33 तुम्हारे अच्छे निर्णय के लिये परमेश्वर तुम्हें आशीर्वाद दे। तुमने आज मुझे निरपराध लोगों को मारने से बचाया। 34 निश्चय ही, जैसे ईस्राएल का परमेश्वर, यहोवा शाश्वत है, यदि तुम शीघ्रता से मुझसे मिलने न आई होती तो कल सवेरे तक नाबाल के परिवार का कोई भी पुरूष जीवित नहीं बच पाता।”

35 तब दाऊद ने अबीगैल की भेंट को स्वीकार किया। दाऊद ने उससे कहा, “शान्ति से घर जाओ। मैंने तुम्हारी बातें सुनी हैं और मैं वही करूँगा जो तुमने करने को कहा है।”

नाबाल की मृत्यु

36 अबीगैल नाबाल के पास लौटी। नाबाल घर में था। नाबाल एक राजा की तरह खा रहा था। नाबाल ने छक कर दाखमधु पी रखी थी और वह प्रसन्न था। इसलिये अबीगैल ने नाबाल को अगले सवेरे तक कुछ भी नहीं बताया। 37 अगली सुबह नाबाल का नशा उतरा। अतः उसकी पत्नी ने हर बात बता दी और नाबाल को दिल का दौरा पड़ गया। वह चट्टान की तरह कड़ा हो गया। 38 करीब दस दिन बाद यहोवा ने नाबाल को मर जाने दिया।

39 दाऊद ने सुना कि नाबाल मर गया है। दाऊद ने कहा, “यहोवा की स्तुति करो! नाबाल ने मेरे विरुद्ध बुरी बातें कीं, किन्तु यहोवा ने मेरा समर्थन किया। यहोवा ने मुझे पाप करने से बचाया और यहोवा ने नाबाल को मर जाने दिया क्योंकि उसने अपराध किया था।”

तब दाऊद ने अबीगैल को एक सन्देश भेजा। दाऊद ने उसे अपनी पत्नी होने के लिये कहा। 40 दाऊद के सेवक कर्मेल गए और अबीगैल से कहा, “दाऊद ने हम लोगों को तुम्हें लाने के लिये भेजा है। दाऊद चाहता है कि तुम उसकी पत्नी बनो।”

41 अबीगैल ने धरती तक अपना माथा झुकाया। उसने कहा, “मैं आपकी दासी हूँ। मैं आपकी सेवा करने के लिये तैयार हूँ। मैं अपने स्वामी (दाऊद) के सेवकों के पैरों को धोने को तैयार हूँ।”[b]

42 अबीगेल शीघ्रता से गधे पर बैठी और दाऊद के दूतों के साथ चल दी। अबीगैल अपने साथ पाँच दासियाँ ले गई। वह दाऊद की पत्नी बनी। 43 दाऊद ने यिज्रेल की अहिनोअम से भी विवाह किया था। अहिनोअम और अबीगैल दोनों दाऊद की पत्नियाँ थीं। 44 शाऊल की पुत्री मीकल भी दाऊद की पत्नी थी। किन्तु शाऊल ने उसे गल्लीम के निवासी लैश के पुत्र पलती को दे दिया था।

दाऊद और अबीशै शाऊल के डेरे में प्रवेश करते हैं

26 जीप के लोग शाऊल से मिलने गिबा गये। उन्होंने शाऊल से कहा, “दाऊद हकीला की पहाड़ी में छिपा है। यह पहाड़ी यशीमोन के उस पार है।”

शाऊल जीप की मरुभूमि में गया। शाऊल ने पूरे इस्राएल से अपने द्वारा चुने गए तीन हजार सैनिकों को लिया। शाऊल और ये लोग जीप की मरुभूमि में दाऊद को खोज रहे थे। शाऊल ने अपना डेरा हकीला की पहाड़ी पर डाला। डेरा सड़क के किनारे यशीमोन के पार था।

दाऊद मरुभूमि में रह रहा था। दाऊद को पता लगा कि शाऊल ने उसका वहाँ पीछा किया है। तब दाऊद ने अपने जासूसों को भेजा और दाऊद को पता लगा कि शाऊल हकीला आ गया है। तब दाऊद उस स्थान पर गया जहाँ शाऊल ने अपना डेरा डाला था। दाऊद ने देखा कि शाऊल और अब्नेर वहाँ सो रहे थे। (नेर का पुत्र अब्नेर शाऊल की सेना का सेनापति था।) शाऊल डेरे के बीच सो रहा था। सारी सेना शाऊल के चारों ओर थी।

दाऊद ने हित्ती अहीमेलेक और यरूयाह के पुत्र अबीशै से बातें कीं। (अबीशै योआब का भाई था।) उसने उनसे कहा, “मेरे साथ शाऊल के पास उसके डेरे में कौन चलेगा?”

अबीशै ने उत्तर दिया, “मैं तुम्हारे साथ चलूँगा।”

रात हुई। दाऊद और अबीशे शाऊल के डेरे में गए। शाऊल डेरे के बीच में सोया हुआ था। उसका भाला उसके सिर के पास जमीन में गड़ा था। अब्नेर और दूसरे सैनिक शाऊल के चारों ओर सोए थे। अबीशै ने दाऊद से कहा, “आज परमेश्वर ने तुम्हारे शत्रु को पराजित करने दिया है। मुझे शाऊल को उसके भाले से ही जमीन में टाँक देने दो। मैं इसे एक ही बार में कर दूँगा!”

किन्तु दाऊद ने अबीशै से कहा, “शाऊल को न मारो! जो कोई यहोवा के चुने राजा को मारता है वह अवश्य दण्डित होता है! 10 यहोवा शाश्वत है, अत: वह शाऊल को स्वयं दण्ड देगा। संभव है शाऊल स्वाभाविक मृत्यु प्राप्त करे या संभव है शाऊल युद्ध में मारा जाये। 11 किन्तु मैं प्रार्थना करता हूँ कि यहोवा मुझे अपने चुने हुए राजा को मुझसे चोट न पहुँचवाये। अब पानी के घड़े और भाले को उठाओ जो शाऊल के सिर के पास है। तब हम लोग चलें।”

12 इसलिए दाऊद ने भाले और पानी के घड़े को लिया जो शाऊल के सिर के पास थे। तब दाऊद और अबीशै ने शाऊल के डेरे को छोड़ दिया। किसी ने यह होते नहीं देखा। कोई व्यक्ति इसके बारे में न जान सका। कोई भी व्यक्ति जागा भी नहीं। शाऊल और उसके सैनिक सोते रहे क्योंकि यहोवा ने उन्हें गहरी नींद में डाल दिया था।

दाऊद शाऊल को फिर लज्जित करता है

13 दाऊद दूसरी ओर पार निकल गया। शाऊल के डेरे से घाटी के पार दाऊद पर्वत की चोटी पर खड़ा था। दाऊद और शाऊल के डेरे बहुत दूरी पर थे। 14 दाऊद ने सेना को और नेर के पुत्र अब्नेर को जोर से पुकारा, “अब्नेर मुझे उत्तर दो!”

अब्नेर ने पूछा, “तुम कौन हो? तुम राजा को क्यों बुला रहे हो?”

15 दाऊद ने उत्तर दिया, “तुम पुरुष हो। क्यों क्या तुम नहीं हो? और तुम इस्राएल में किसी भी अन्य व्यक्ति से बेहतर हो। क्यों यह ठीक है? तब तुमने अपने स्वामी राजा की रक्षा क्यों नहीं की? एक साधारण व्यक्ति तुम्हारे डेरे में तुम्हारे स्वामी राजा को मारने आया। 16 तुमने भयंकर भूल की। यहोवा शाश्वत है! अत: तुम्हें और तुम्हारे सैनिकों को मर जाना चाहिये। क्यों? क्योंकि तुमने अपने स्वामी यहोवा के चुने राजा की रक्षा नहीं की। शाऊल के सिर के पास भाले और पानी के घड़े की खोज करो। वे कहाँ हैं?”

17 शाऊल दाऊद की आवाज पहचानता था। शाऊल ने कहा, “मेरे पुत्र दाऊद, क्या यह तुम्हारी आवाज है?”

दाऊद ने उत्तर दिया, “मेरे स्वामी और राजा, हाँ, यह मेरी आवाज है?” 18 दाऊद ने यह भी पूछा, “महाराज, आप मेरा पीछा क्यों कर रहे हैं? मैंने कौन सी गलती की है? मैं क्या करने का अपराधी हूँ? 19 मेरे स्वामी और राजा, मेरी बात सुनें! यदि यहोवा ने आपको मेरे विरुद्ध क्रोधित किया है तो उसे एक भेंट स्वीकार करने दें। किन्तु यदि लोगों ने मेरे विरुद्ध आपको क्रोधित किया है तो यहोवा द्वारा उनके लिये कुछ बुरी आपत्ति आने दें। लोगों ने मुझे इस देश को छोड़ने पर विवश किया, जिसे यहोवा ने मुझे दिया है। लोगों ने मुझसे कहा, ‘जाओ विदेशियों के साथ रहो। जाओ अन्य देवताओं की पूजा करो।’ 20 मुझे अब यहोवा की उपस्थिति से दुर न मरने दो। इस्राएल का राजा एक मच्छर की खोज में निकला है। आप उस व्यक्ति की तरह हैं जो पहाड़ों में तीतर का शिकार करने निकला हो।”[c]

21 तब शाऊल ने कहा, “मैंने पाप किया है। मेरे पुत्र दाऊद लौट आओ। आज तुमने दिखा दिया कि मेरा जीवन तुम्हारे लिये महत्व रखता है। इसलिये मैै तुम्हें चोट पहुँचाने का प्रयत्न नहीं करूँगा। मैंने मूर्खतापूर्ण काम किया है। मैंने एक भंयकर भूल की है।”

22 दाऊद ने उत्तर दिया, “राजा का भाला यह है। अपने किसी युवक को यहाँ आने दो और वह ले जाए। 23 यहोवा मनुष्यों के कर्म का फल देता है, यदि वह अच्छा करता है तो उसे पुरस्कार देता है, और वह उसे दण्ड देता है जो बुरा करता है। यहोवा ने आज मुझे आपको पराजित करने दिया, किन्तु मैं यहोवा के चुने हुए राजा पर चोट नहीं करूँगा। 24 आज मैंने आपको दिखा दिया कि आपका जीवन मेरे लिये महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार यहोवा दिखायेगा कि मेरा जीवन उसके लिये महत्वपूर्ण है। यहोवा मेरी रक्षा हर एक आपत्ति से करेगा।”

25 शाऊल ने दाऊद से कहा, “मेरे पुत्र दाऊद, परमेश्वर तुम्हें आशीर्वाद दे। तुम महान कार्य करोगे और सफल होओगे।”

दाऊद अपनी राह गया, और शाऊल घर लौट गया।

दाऊद पलिश्तियों के साथ रहता है:

27 किन्तु दाऊद ने अपने मन में सोचा, “शाऊल मुझे किसी दिन पकड़ लेगा। सर्वोत्तम बात मैं यही कर सकता हूँ कि पलिश्तियों के देश में बच निकलूँ। तब शाऊल मेरी खोज इस्राएल में बन्द कर देगा। इस प्रकार मैं शाऊल से बच निकलूँगा।”

इसलिए दाऊद और उसके छ: सौ लोगों ने इस्राएल छोड़ दिया। वे माओक के पुत्र आकीश के पास गए। आकीश गत का राजा था। दाऊद, उसके लोग और उनके परिवार आकीश के साथ गत में रहने लगे। दाऊद के साथ उसकी दो पत्नियाँ थीं। वे यिज्रेली की अहीनोअम और कर्मेल की अबीगैल थी। अबीगैल नाबाल की विधवा थी। लोगों ने शाऊल से कहा कि दाऊद गत को भाग गया है और शाऊल ने उसकी खोज बन्द कर दी।

दाऊद ने आकीश से कहा, “यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे अपने देश के नगरों में से एक में स्थान दे दें। मैं आपका केवल सेवक मात्र हूँ। मुझे वहाँ रहना चाहिये, आपके साथ यहाँ राजधानी नगर में नहीं।”

उस दिन आकीश ने दाऊद को सिकलग नगर दिया और तब से सिकलग सदा यहूदा के राजाओं का रहा है। दाऊद पलिश्तियों के साथ एक वर्ष और चार महीने रहा।

दाऊद का आकीश राजा को बहकाना

दाऊद और उसके लोग अमालेकी तथा गशूर में रहने वाले लोगों के साथ युद्ध करने गये। दाऊद के लोगों ने उनको हराया और उनकी सम्पत्ति ले ली। लोग उस क्षेत्र में शूर के निकट तेलम से लेकर लगातार मिस्र तक रहते थे। दाऊद उस क्षेत्र में लोगों से लड़ा। दाऊद ने किसी व्यक्ति को जीवित नहीं छोड़ा। दाऊद ने उनकी सभी भेड़ें, पशु, गधे, ऊँट और कपड़े लिये। तब वह इसे वापस आकीश के पास लाया।

10 दाऊद ने यह कई बार किया। हर बार आकीश पूछता कि वह कहाँ लड़ा और उन चीज़ों को कहाँ से लाया। दाऊद ने कहा, “मैं यहूदा के दक्षिणी भाग में लड़ा।” या “मैं यरहमेलियों के दक्षिणी भाग में लड़ा या मैं केनियों के दक्षिणी भाग में लड़ा।”[d]

11 दाऊद गत में कभी जीवित स्त्री या पुरुष नहीं लाया। दाऊद ने सोचा, “यदि हम किसी व्यक्ति को जीवित रहने देते हैं तो वह आकीश से कह सकता है कि वस्तुतः मैंने क्या किया है।”

दाऊद ने पूरे समय, जब तक पलिश्तियों के देश में रहा, यही किया। 12 आकीश ने दाऊद पर विश्वास करना आरम्भ कर दिया। आकीश ने अपने आप सोचा, “अब दाऊद के अपने लोग ही उससे घृणा करते हैं। इस्राएली दाऊद से बहुत अधिक घृणा करते हैं। अब दाऊद मेरी सेवा करता रहेगा।”

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