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Read the Bible from start to finish, from Genesis to Revelation.
Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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न्यायियों 3-5

1-2 यहाँ उन राष्ट्रों के नाम हैं जिन्हें यहोवा ने बलपूर्वक अपना देश नहीं छुड़वाया। यहोवा इस्राएल के उन लोगों की परीक्षा लेना चाहता था, जो कनान प्रदेश को लेने के लिये होने वाले युद्धों में लड़े नहीं थे। यही कारण था कि उसने उन राष्ट्रों को उस प्रदेश में रहने दिया। (उस प्रदेश में यहोवा द्वारा उन राष्ट्रों को रहने देने का कारण केवल यह था कि इस्राएल के लोगों के उन वंशजों को शिक्षा दी जाय जो उन युद्धों में नहीं लड़े थे।) पलिशती लोगों के पाँच शासक, सभी कनानी लोग, सीदोन के लोग और हिव्वी लोग जो लबानोन के पहाड़ों में बालहेर्मोन पर्वत से लेकर हमात तक रहते थे। यहोवा ने उन राष्ट्रों को इस्राएल के लोगों की परीक्षा के लिये उस प्रदेश में रहने दिया। वह यह देखना चाहता था कि इस्राएल के लोग यहोवा के उन आदेशों का पालन करेंगे अथवा नहीं, जिन्हें उसने मूसा द्वारा उनके पूर्वजों को दिया था।

इस्राएल के लोग कनानी, हित्ती, एमोरी, परिज्जी, हिव्वी और यबूसी लोगों के साथ रहते थे। इस्राएल के लोगों ने उन लोगों की पुत्रियों के साथ विवाह करना आरम्भ कर दिया। इस्राएल के लोगों ने अपनी पुत्रियों को उन लोगों के पुत्रों के साथ विवाह करने दिया और इस्राएल के लोगों ने उन लोगों के देवताओं की सेवा की।

पहला न्यायाधीश ओत्नीएल

यहोवा ने देखा कि इस्राएल के लोग पाप कर रहे हैं। इस्राएल के लोग यहोवा अपने परमेश्वर को भूल गए और बाल की मूर्तियों एवं अशेरा की मूर्तियों की सेवा करने लगे। यहोवा इस्राएल के लोगों पर क्रोधित हुआ। यहोवा ने कुशन रिश्आतइम को जो मेसोपोटामिया का राजा था, इस्राएल के लोगों को हराने और उन पर शासन करने दिया। इस्राएल के लोग उस राजा के शासन में आठ वर्ष तक रहे। किन्तु इस्राएल के लोगों ने यहोवा को रोकर पुकारा। यहोवा ने एक व्यक्ति को उनकी रक्षा के लिए भेजा। उस व्यक्ति का नाम ओत्नीएल था। वह कनजी का पुत्र था। कनजी कालेब का छोटा भाई था। ओत्नीएल ने इस्राएल के लोगों को बचाया। 10 यहोवा की आत्मा ओत्नीएल पर उतरी और वह इस्राएल के लोगों का न्यायाधीश हो गया। ओत्नीएल ने इस्राएल के लोगों का युद्ध में संचालन किया। यहोवा ने मेसोपोटामिया के राजा कूशत्रिशातैम को हराने में ओत्नीएल की सहायता की। 11 इस प्रकार वह प्रदेश चालीस वर्ष तक शान्त रहा, जब तक कनजी नामक व्यक्ति का पुत्र ओत्नीएल नहीं मरा।

न्यायाधीश एहूद

12 यहोवा ने फिर इस्राएल के लोगों को पाप करते देखा। इसलिए यहोवा ने मोआब के राजा एग्लोन को इस्राएल के लोगों को हराने की शक्ति दी। 13 एग्लोन ने इस्राएल के लोगों पर आक्रमण करते समय अम्मोनियों और अमालेकियों को अपने साथ लिया। एग्लोन और उसकी सेना ने इस्राएल के लोगों को हराया और ताड़ के पेड़ो वाले नगर (यरीहो) से उन्हें निकाल बाहर किया। 14 इस्राएल के लोग अट्ठारह वर्ष तक मोआब के राजा एग्लोन के शासन में रहे।

15 तब लोगों ने यहोवा से प्रार्थना की और रोकर उसे पुकारा। यहोवा ने इस्राएल के लोगों की रक्षा के लिए एक व्यक्ति को भेजा। उस व्यक्ति का नाम एहूद था। एहूद वामहस्त व्यक्ति था। एहूद बिन्यामीन के परिवार समूह के गेरा नामक व्यक्ति का पुत्र था। इस्राएल के लोगों ने एहूद को मोआब के राजा एग्लोन के लिये कर के रूप में कुछ धन देने को भेजा। 16 एहूद ने अपने लिये एक तलवार बनाई। वह तलवार दोधारी थी और लगभग अट्ठारह इंच लम्बी थी। एहूद ने तलवार को अपनी दायीं जांघ से बांधा और अपने वस्त्रों में छिपा लिया।

17 इस प्रकार एहूद मोआब के राजा एग्लोन के पास आया और उसे भेंट के रूप में धन दिया। (एग्लोन बहुत मोटा आदमी था।) 18 एग्लोन को धन देने के बाद एहूद ने उन व्यक्तियों को घर भेज दिया, जो धन लाए थे। 19 जब एग्लोन गिलगाल नगर की मूर्तियों के पास से वापस मुड़ा, तब एहूद ने एग्लोन से कहा, “राजा, मैं आपके लिए एक गुप्त सन्देश लाया हूँ।”

राजा ने कहा, “चुप रहो।” तब उसने सभी नौकरों को कमरे से बाहर भेज दिया। 20 एहूद राजा एग्लोन के पास गया। एग्लोन एकदम अकेला अपने ग्रीष्म महल के ऊपरी कमरे में बैठा था।

तब एहूद ने कहा, “मैं परमेश्वर के यहाँ से आपके लिये सन्देश लाया हूँ।” राजा अपने सिंहासन से उठा, वह एहूद के बहुत पास था। 21 ज्योंही राजा अपने सिंहासन से उठा,[a] एहूद ने अपने बांये हाथ को बढ़ाया और उस तलवार को निकाला जो उसकी दायीं जांघ में बंधी थी। तब एहूद ने तलवार को राजा के पेट में घुसेड़ दिया। 22 तलवार एग्लोन के पेट में इतनी भीतर गई कि उसकी मूठ भी उसमें समा गई। राजा की चर्बी ने पूरी तलवार को छिपा लिया। इसलिए एहूद ने तलवार को एग्लोन के अन्दर छोड़ दिया।

23 एहूद कमरे से बाहर गया और उसने अपने पीछे दरवाजों को ताला लगाकर बन्द कर दिया। 24 एहूद के चले जाने के ठीक बाद नौकर आए। नौकरों ने कमरे के दरवाजों में ताला लगा पाया। इसलिए नौकरों ने कहा, “राजा आराम कक्ष में आराम कर रहे होंगे।” 25 इसलिए नौकरों ने लम्बे समय तक प्रतीक्षा की। अन्त में वे चिन्तित हुए। उन्होंने चाभी ली और दरवाज़े खोले। जब नौकर घुसे तो उन्होंने राजा को फर्श पर मरा पड़ा देखा।

26 जब तक नौकर राजा की प्रतीक्षा करते रहे तब तक एहूद को भाग निकलने का समय मिल गया। एहूद मूर्तियों के पास से होकर सेइरे नामक स्थान की ओर गया। 27 एहूद सेइरे नामक स्थान पर पहुँचा। तब उसने एप्रैम के पहाड़ी क्षेत्र में तुरही बजाई। इस्राएल के लोगों ने तुरही की आवाज़ सुनी और वे पहाड़ियों से उतरे। एहूद उनका संचालक था। 28 एहूद ने इस्राएल के लोगों से कहा, “मेरे पीछे चलो। यहोवा ने मोआब के लोगों अर्थात् हमारे शत्रुओं को हराने में हमारी सहायता की है।”

इसलिए इस्राएल के लोगों ने एहूद का अनुसरण किया। वे एहूद का अनुसरण उन स्थानों पर अधिकार करने के लिए करते रहे जहाँ से यरदन नदी सरलता से पार की जा सकती थी। वे स्थान मोआब के प्रदेश तक पहुँचाते थे। इस्राएल के लोगों ने किसी को यरदन नदी के पार नहीं जाने दिया। 29 इस्राएल के लोगों ने मोआब के लगभग दस हजार बलवान और साहसी व्यक्तियों को मार डाला। एक भी मोआबी भागकर बच न सका। 30 इसलिए उस दिन मोआब के लोग बलपूर्वक इस्राएल के लोगों के शासन में रहने को विवश किये गए और वहाँ उस प्रदेश में अस्सी वर्ष तक शान्ति रही!

न्यायाधीश शमगर

31 एहूद द्वारा इस्राएल के लोगों की रक्षा हो जाने के बाद एक अन्य व्यक्ति ने इस्राएल को बचाया। उस व्यक्ति का नाम शमगर था और वह अनात नामक व्यक्ति का पुत्र था। शमगर ने चाबुक का उपयोग छ: सौ पलिश्ती व्यक्तियों को मार डालने के लिये किया।

स्त्री न्यायाधीश दबोरा

एहूद के मरने के बाद यहोवा ने इस्राएली लोगों को फिर पार करते देखा। इसलिए यहोवा ने कनान प्रदेश के राजा याबीन को इस्राएली लोगों को पराजित करने दिया। याबीन हासोर नामक नगर में शासन करता था। राजा याबीन की सेना का सेनापति सीसरा नामक व्यक्ति था। सीसरा हरोशेत हाग्गोयीम नामक नगर में रहता था। सीसरा के पास नौ सौ लोहे के रथ थे और वह बीस वर्ष तक इस्राएल के लोगों के प्रति बहुत क्रूर रहा। इस्राएल के लोगों के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया गया। इसलिए उन्होंने यहोवा की प्रार्थना की और सहायता के लिए रोकर पुकार की।

एक स्त्री नबी दबोरा नाम की थी। वह लप्पीदोत नामक व्यक्ति की पत्नी थी। वह उस समय इस्राएल की न्यायाधीश थी। एक दिन दबोरा, ताड़ के पेड़ के नीचे बैठी थी जिसे “दबोरा का ताड़ वृक्ष” कहा जाता था। इस्राएल के लोग उसके पास यह पूछने के लिये आए कि सीसरा के विषय में क्या किया जाये। (दबोरा का ताड़ वृक्ष एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश मे रामा और बेतेल नगरों के बीच था।) दबोरा ने बाराक नामक व्यक्ति के पास संदेश भेजा। उसने उसे उस से मिलने को कहा। बाराक अबीनोअम नामक व्यक्ति का पुत्र था। बाराक नप्ताली के क्षेत्र में केदेश नामक नगर में रहता था। दबोरा ने बाराक से कहा, “यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर तुम्हें आदेश देता है, ‘जाओ और नप्ताली एवं जबूलून के परिवार समूहों से दस हजार व्यक्तियों को इकट्ठा करो। मैं याबीन की सेना के सेनापति सीसरा को तुम्हारे पास भेजूँगा। मैं सीसरा, उसके रथों और उसकी सेना को कीशोन नदी पर पहुँचाऊँगा। मैं वहाँ सीसरा को हराने में तुम्हारी सहायता करूँगा।’”

तब बाराक ने दबोरा से कहा, “यदि तुम मेरे साथ चलोगी तो मैं जाऊँगा और यह करूँगा। किन्तु यदि तुम नहीं चलोगी तो मैं नहीं जाऊँगा।”

दबोरा ने उत्तर दिया, “निश्चय ही, मैं तुम्हारे साथ चलूँगी। किन्तु तुम्हारी भावना के कारण जब सीसरा हराया जाएगा, तुम्हें सम्मान नहीं मिलेगा। यहोवा एक स्त्री द्वारा सीसरा को हराने देगा।”

इसलिए दबोरा बाराक के साथ केदेश नगर को गई। 10 केदेश नगर में बाराक ने जबूलून और नप्ताली के परिवार समूहों को एक साथ बुलाया। बाराक ने उन परिवार समूहों को एक साथ बुलाया। बाराक ने उन परिवार समूहों से, अपने साथ चलने के लिये दस हजार व्यक्तियों को इकट्ठा किया। दबोरा भी बाराक के साथ गई।

11 वहाँ हेबेर नामक एक ऐसा व्यक्ति था जो केनी लोगों में से था। हेबेर अन्य केनी लोगों को छोड़ चुका था। (केनी लोग होबाब के वंशज थे। होबाब मूसा का ससुर था।) हेबेर ने अपना घर सानन्नीम स्थान पर बांज के पेड़ के समीप बनाया था। सानन्नीम केदेश नगर के पास है।

12 तब सीसरा से यह कहा गया कि बाराक जो कि अबीनोअम का पुत्र है, ताबोर पर्वत तक पहुँच गया है। 13 इसलिए सीसरा ने अपने नौ सौ लोहे के रथों को इकट्ठा किया। सीसरा ने अपने सभी सैनिकों को भी साथ लिया। हरोशेत हाग्गोयीम नगर से उन्होंने कीशोन नदी तक यात्रा की।

14 तब दबोरा ने बाराक से कहा, “आज के दिन ही यहोवा तुम्हें सीसरा को हराने में सहायता देगा। निश्चय ही, तुम जानते हो कि यहोवा ने पहले से ही तुम्हारे लिये रास्ता साफ कर रखा है।” इसलिए बाराक ने दस हजार सैनिकों को ताबोर पर्वत से उतारा। 15 बाराक और उसके सैनिकों ने सीसरा पर आक्रमण कर दिया। युद्ध के दौरान यहोवा ने सीसरा, उसकी सेना और रथों को अस्तव्यस्त कर दिया। उनकी व्यवस्था भंग हो गई। इसलिए बाराक और उसकी सेना ने सीसरा की सेना को हरा दिया। किन्तु सीसरा ने अपने रथ को छोड़ दिया तथा पैदल भाग खड़ा हुआ। 16 बाराक ने सीसरा की सेना से युद्ध जारी रखा। बाराक और उसके सैनिकों ने सीसरा के रथों और सेना का पीछा हरोशेत हाग्गोयीम तक लगातार किया। बाराक के सैनिकों ने सीसरा के सैनिकों को मारने के लिये अपनी तलवारों का उपयोग किया। सीसरा का कोई सैनिक जीवित न बचा।

17 किन्तु सीसरा भाग गया। वह उस तम्बू के पास आया, जहाँ याएल नामक एक स्त्री रहती थी। याएल, हासोर नामक व्यक्ति की पत्नी थी। वह केनी लोगों में से एक था। हेबेर का परिवार हासोर के राजा याबीन से शान्ति—सन्धि किये हुये था। इसलिये सीसरा, याएल के तम्बू में भाग कर गया। 18 याएल ने सीसरा को आते देखा, अत: वह उससे मिलने बाहर गई। याएल ने सीसरा से कहा, “मेरे तम्बू में आओ, मेरे स्वामी, आओ। डरो नहीं।” इसलिए सीसरा याएल के तम्बू में गया और उसने उसे एक कालीन से ढक दिया।

19 सीसरा ने याएल से कहा, “मैं प्यासा हूँ। कृपया मुझे पीने को थोड़ा पानी दो।” इसलिए याएल ने एक मशक खोला, जिसमें उसने दूध रखा था और उसने पीने को दिया। तब उसने सीसरा को ढक दिया।

20 तब सीसरा ने याएल से कहा, “तम्बू के द्वार पर जाओ। यदि कोई यहाँ से गुज़रता है और पूछता है, ‘क्या यहाँ कोई है?’ तो तुम कहना, ‘नहीं।’”

21 किन्तु हेबेर की पत्नी याएल ने एक तम्बू की खूँटी और हथौड़ा लिया। याएल चुपचाप सीसरा के पास गई। सीसरा बहुत थका था अतः वह सो रहा था। याएल ने तम्बू की खूँटी को सीसरा के सिर की एक ओर रखा और उस पर हथौड़े से चोट की। तम्बू की खूँटी सीसरा के सिर की एक ओर से होकर जमीन में धँस गई और इस तरह सीसरा मर गया।

22 ठीक तुरन्त बाद बाराक सीसरा को खोजता हुआ याएल के तम्बू के पास आया। याएल बाराक से मिलने बाहर निकली और बोली, “अन्दर आओ और मैं उस व्यक्ति को दिखाऊँगी जिसे तुम ढूँढ रहे हो।” इसलिए बाराक याएल के साथ तम्बू में घुसा। बाराक ने वहाँ सीसरा को जमीन पर मरा पड़ा पाया, तम्बू की खूँटी उसके सिर की एक ओर से दूसरी ओर निकली हुई थी।

23 उस दिन यहोवा ने कनान के राजा याबीन को इस्राएल के लोगों की सहायता से हराया। 24 इस प्रकार इस्राएल के लोग क्रमश: अधिक शक्तिशाली होते गए और उन्होंने कनान के राजा याबीन को हरा दिया। इस्राएल के लोगों ने कनान के राजा याबीन को अन्तिम रूप से हराया।

दबोरा का गीत

जिस दिन इस्राएल के लोगों ने सीसरा को हराया उस दिन दबोरा और अबीनोअम के पुत्र बाराक ने इस गीत को गाया:[b]

इस्राएल के लोगों ने अपने को युद्ध के लिये तैयार किया।[c]
    लोग युद्ध में जाने के लिये स्वयं आए!
यहोवा को धन्य कहो!

“राजाओं, सुनो।
    शासकों, ध्यान दो।
मैं गाऊँगी।
    मैं स्वयं यहोवा के प्रति गाऊँगी।
मैं यहोवा, इस्राएल के लोगों के
    परमेश्वर की स्तुति करूँगी।

“हे यहोवा, अतीत में तू सेईर देश से आया।
    तू एदोम प्रदेश से चलकर आया,
और धरती काँप उठी।
    गगन ने वर्षा की।
    मेघों ने जल गिराया।
पर्वत काँप उठे यहोवा, सीनै पर्वत के परमेश्वर के सामने, यहोवा,
    इस्राएल के लोगों के परमेश्वर के सामने!

“अनात का पुत्र शमगर के समय में याएल के समय में,
    मुख्य पथ सूने थे।
    काफिले[d] और यात्री गौण पथों से चलते थे।

“कोई योद्धा नहीं था। इस्राएल में कोई योद्धा नहीं था, हे दबोरा,
    जब तक तुम न खड़ी हुई,
    जब तक तुम इस्राएल की माँ बन कर न खड़ी हुई।

“परमेश्वर ने नये प्रमुखों को चुना कि
    वे नगर—द्वार पर युद्ध करें।[e]
इस्राएल के चालीस हजार सैनिकों में
    कोई ढाल और भाला नहीं पा सका।

“मेरा हृदय इस्राएल के सेनापतियों के साथ है।
    ये सेनापति इस्राएल के लोगों में से स्वयं आए!
यहोवा को धन्य कहो!

10 “श्वेत गधों पर सवार होने वाले लोगो तुम,
    जो कम्बल की काठी पर बैठते हो
    और तुम जो राजपथ पर चलते हो,
    ध्यान दो!
11 घुंघरूओं की छमछम पर,
    पशुओं को लिए पानी वाले कूपों पर,
वे यहोवा की विजय की कथाओं को कहते हैं,
    इस्राएल में यहोवा और उसके वीरों की विजय—कथा कहते हैं।
    उस समय यहोवा के लोग नगर—द्वारों पर लड़े और विजयी हुये!

12 “दबोरा जागो, जागो!
    जागो, जागो गीत गाओ!
जागो, बाराक!
    जाओ, हे अबीनोअम के पुत्र अपने शत्रुओं को पकड़ो!

13 “उस समय, बचे लोग, सम्मानितों के पास आए।
    यहोवा के लोग, मेरे पास योद्धाओं के साथ आए।[f]

14 “एप्रैम के कुछ लोग
    अमालेक के पहाड़ी प्रदेश[g] में बसे।
ऐ बिन्यामीन, तुम्हारे बाद वे लोग
    और तुम्हारे लोग आए।
माकीर के परिवार समूह से
    सेनापति आगे आए।
काँसे के दण्ड सहित नायक आए
    जबूलून परिवार समूह से।
15 इस्साकार के नेता दबोरा के साथ थे।
    इस्साकर का परिवार समूह बाराक के प्रति सच्चा था।
    वे वयक्ति पैदल ही घाटी में भेजे गए।

“रूबेन के सैनिक बड़बड़ाए, वे क्या करें।
16     भेड़शाले के दीवार[h] से लगे क्यों तुम सभी बैठे हो?
रूबेन के वीर सैनिकों ने युद्ध का दृढ़ निश्चय किया।
    किन्तु वे अपनी भेड़ों के लिए संगीत को सुनते रहे घर बैठे।[i]
17 गिलाद के लोग[j] यरदन नदी के पार अपने डेरों मे पड़े रहे।
ऐ, दान के लोगो, जहाँ तक बात तुम्हारी है—तुम जहाजों के साथ क्यों चिपके रहे?
    आशेर के लोग सागर तट पर पड़े रहे।
    उन्होंने अपने सुरक्षित बन्दरगाहों में डेरा डाला।
18 किन्तु जबूलून के लोगों ने और नप्ताली के लोगों ने,
मैदान के ऊँचे क्षेत्रों में युद्ध के खतरे में जीवन को डाला।
19 राजा आए, वे लड़े, उस समय कनान का राजा,
    तानक शहर मे मगिद्दो के जलाशय पर लड़ा
किन्तु वे इस्राएल के लोगों की कोई सम्पत्ति न ले जा सके!
20 गगन से नक्षत्रों ने युद्ध किया।
नक्षत्रों ने अपने पथ से, सीसरा से युद्ध किया।
21 कीशोन नदी, सीसरा के सैनिकों को बहा ले गई,
    वह प्राचीन नदी—कीशोन नदी।
मेरी आत्मा, शक्ति से धावा बोलो!
22 उस समय अश्वों की टापों ने भूमि पर हथौड़ा चलाया।
    सीसरा के अश्व भागते गए, भागते गए।

23 “यहोवा के दूत ने कहा,
‘मेरोज नगर को अभिशाप दो।
    इसके लोगों को भीषण अभिशाप दो!
योद्धाओं के साथ वे यहोवा की सहायता करने नहीं आए।’
24 केनी हेबेर की पत्नी याएल
    सभी स्त्रियों में से सबसे अधिक धन्य होगी।
25 सीसरा ने मांगा जल,
    किन्तु याएल ने दिया दूध,
शासक के लिये उपयुक्त कटोरे में,
    वह उसे मलाई लाई।
26 याएल बाहर गई, लाई खूँटी तम्बू की।
    उसके दायें कर में हथौड़ा आया श्रमिक काम लाते जिसे और उसने सीसरा पर चलाया हथौड़ा।
उसने किया चूर सिर उसका,
    उसने उसके सिर को बेधा एक ओर से।
27 डूबा वह याएल के पैरों बीच।
    वह मर गया।
वह पड़ गया वहीं।
    डूबा वह उसके पैरों बीच।
वह मर गया जहाँ सीसरा डूबा।
    वहीं वह गिरा, मर गया!

28 “सीसरा की माँ, देखती खिड़की से और पर्दो से
    झाँकती हुई चीख उठी।
‘सीसरा के रथ को विलम्ब क्यों आने में?
    सीसरा के रथ के अश्वों के हिनहिनाने में देर क्यों?’

29 “सबसे चतुर उसकी सेविकायें उत्तर उसे देती,
    हाँ सेविका उसे उत्तर देती:
30 ‘निश्चय ही उन्होंने विजय पाई है
    निश्चय ही पराजितों की वस्तुएँ वे ले रहे हैं!
निश्चय ही वे बाँटते हैं आपस में वस्तुओं को!
    एक लड़की या दो, दी जा रही हर सैनिक को।
संभवत: सीसरा ले रहा है, कोई रंगा वस्त्र।
    संभवत: एक कढ़े वस्त्र का टुकड़ा हो, या विजेता सीसरा पहनने के लिए, दे कढ़े किनारी युक्त वस्त्र।’

31 “हे यहोवा! इस तरह तेरे, सब शत्रु मर—मिट जायें।
    किन्तु वे लोग सब जो प्यार करते हैं तुझको ज्वलित दीप्त सूर्य सम शक्तिशाली बने!”

इस प्रकार उस प्रदेश में चालीस वर्ष तक शान्ति रही।

Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)

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