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Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
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यहोशू 22-24

तीन परिवार समूह घर लौटते हैं

22 तब यहोशू ने रूबेन, गाद और मनश्शे के परिवार समूह के सभी लोगों की एक सभा की। यहोशू ने उनसे कहा, “तुमने मूसा के दिये सभी आदेशों का पालन किया है। मूसा यहोवा का सेवक था। और तुमने मेरे भी सभी आदेशों का पालन किया। और इस पूरे समय में तुम लोगों ने इस्राएल के अन्य लोगों की सहायता की है। तुम लोग यहोवा के उन सभी आदेशों का पालन करने में सावधान रहे, जिन्हें तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हें दिया था। तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने इस्राएल के लोगों को शान्ति देने का वचन दिया था। अत: अब यहोवा ने अपना वचन पूरा कर दिया है। इस समय तुम लोग अपने घर लौट सकते हो। तुम लोग, अपने उस प्रदेश में जा सकते हो जो तुम्हें दिया गया है। यह प्रदेश यरदन नदी के पूर्व में है। यह वही प्रदेश है जिसे यहोवा के सेवक मूसा ने तुम्हें दिया। किन्तु याद रखो कि जो व्यवस्था मूसा ने तुम्हें दिया है, उसका पालन होता रहे। तुम्हें अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करना और उसके आदेशों का पालन करना है। तुम्हें उसका अनुसरण करते रहना चाहिए, और पूरी आस्था के साथ उसकी सेवा करो।”

तब यहोशू ने उनको आशीर्वाद दिया और वे विदा हुए। वे अपने घर लौट गए। मूसा ने आधे मनश्शे परिवार समूह को बाशान प्रदेश दिया था। यहोशू ने दूसरे आधे मनश्शे परिवार समूह को यरदन नदी के पश्चिम में प्रदेश दिया। यहोशू ने उनको वहाँ अपने घर भेजा। यहोशू ने उन्हें आशीर्वाद दिया। उसने कहा, “तुम बहुत सम्पन्न हो। तुम्हारे पास चाँदी, सोने और अन्य बहुमूल्य आभूषणों के साथ बहुत से जानवर हैं। तुम लोगों के पास अनेक सुन्दर वस्त्र हैं। तुमने अपने शत्रुओं से भी बहुत सी चीज़ें ली हैं। इन चीज़ों को तुम्हें आपस में बाँट लेना चाहिए। अब अपने अपने घर जाओ।”

अत: रूबेन, गाद और मनश्शे के परिवार समूह के आधे लोगों ने इस्राएल के अन्य लोगों से विदा ली। वे कनान में शीलो में थे। उन्होंने उस स्थान को छोड़ा और वे गिलाद को लौटे। यह उनका अपना प्रदेश था। मूसा ने उनको यह प्रदेश दिया था, क्योंकि यहोवा ने उसे ऐसा करने का आदेश दिया था।

10 रूबेन, गाद और मनश्शे के लोगों ने गोत्र नामक स्थान की यात्रा की। यह यरदन नदी के किनारे कनान प्रदेश में था। उस स्थान पर लोगों ने एक सुन्दर वेदी बनाई। 11 किन्तु इस्राएल के लोगों के अन्य समूहों ने, जो तब तक शीलो में थे, उस वेदी के विषय में सुना जो इन तीनों परिवार समूहों ने बनायी थी। उन्होंने यह सुना कि यह वेदी कनान की सीमा पर गोत्र नामक स्थान पर थी। यह यरदन नदी के किनारे इस्राएल की ओर थी। 12 इस्राएल के सभी परिवार समूह इन तीनों परिवार समूहों पर बहुत क्रोधित हुए। वे एकत्र हुए और उन्होंने उनके विरुद्ध युद्ध करने का निश्चय किया।

13 अत: इस्राएल के लोगों ने कुछ व्यक्तियों को रूबेन, गाद और मनश्शे के लोगों से बातें करने के लिये भेजा। इनका प्रमुख याजक एलीआज़र का पुत्र पीनहास था। 14 उन्होंने वहाँ के परिवार समूहों के दस प्रमुखों को भी भेजा। शीलो में ठहरे इस्राएल के परिवार समूहों में हर एक परिवार से एक व्यक्ति था।

15 इस प्रकार ये ग्यारह व्यक्ति गिलाद गये। वे रूबेन, गाद और मनश्शे के लोगों से बातें करने गये। ग्यारह व्यक्तियों ने उनसे कहा 16 “इस्राएल के सभी लोग तुमसे पूछते हैं: तूने इस्राएल के परमेश्वर के विरूद्ध यह क्यों किया? तुम यहोवा के विपरीत कैसे हो गये? तुम लोगों ने अपने लिये वेदी क्यों बनाई? तुम जानते हो कि यह परमेश्वर की शिक्षा के विरूद्ध है! 17 पोर नामक स्थान को याद करो।[a] हम लोग उस पाप के कारण अब भी कष्ट सहते हैं। इस बड़े पाप के लिये परमेश्वर ने इस्राएल के बहुत से लोगों को बुरी तरह बीमार कर दिया था और हम लोग अब भी उस बीमारी के कारण कष्ट सह रहे हैं। 18 और अब तुम वही कर रहे हो! तुम यहोवा के विरुद्ध जा रहे हो! क्या तुम यहोवा का अनुसरण करने से मना करोगे? यदि तुम जो कर रहे हो, बन्द नहीं करते तो यहोवा इस्राएल के हर एक व्यक्ति पर क्रोधित होगा।

19 “‘यदि तुम्हारा प्रदेश उपासना के लिये उपयुक्त नहीं है तो हमारे प्रदेश में आओ। यहोवा का तम्बू हमारे प्रदेश में है। तुम हमारे कुछ प्रदेश ले सकते हो और उनमें रह सकते हो। किन्तु यहोवा के विरुद्ध मत होओ। अन्य वेदी मत बनाओ। हम लोगों के पास पहले से ही अपने परमेश्वर यहोवा की वेदी मिलापवाले तम्बू में है।

20 “‘जेरह के पुत्र आकान को याद करो। आकान अपने पाप के कारण मरा। उसने उन चीज़ों के सम्बन्ध में आदेश का पालन करने से इन्कार किया, जिन्हें नष्ट किया जाना था। उस एक व्यक्ति ने परमेश्वर के नियम को तोड़ा, किन्तु इस्राएल के सभी लोगों को दण्ड मिला। आकान अपने पाप के कारण मरा। किन्तु बहुत से अन्य लोग भी मरे।’”

21 रूबेन, गाद और मनश्शे के परिवार समूह के लोगों ने ग्यारह व्यक्तियों को उत्तर दिया। उन्होंने यह कहा, 22 “हमारा परमेश्वर यहोवा है! हम लोग फिर दुहराते हैं कि हमारा परमेश्वर यहोवा है[b] और परमेश्वर जानता है कि हम लोगों ने यह क्यों किया। हम लोग चाहते हैं कि तुम लोग भी यह जानो। तुम लोग उसका निर्णय कर सकते हो जो हम लोगों ने किया है। यदि तुम लोगों को यह विश्वास है कि हम लोगों ने पाप किया है तो तुम लोग हमे अभी मार सकते हो। 23 यदि हम ने परमेश्वर के नियम को तोड़ा है तो हम कहेंगे कि यहोवा स्वयं हमें सजा दे। क्या तुम लोग यह सोचते हो कि हम लोगों ने इस वेदी को होमबलि चढ़ाने और अन्नबलि तथा मेलबलि चढ़ाने के लिये बनाया है? 24 नहीं! हम लोगों ने इसे इस उद्देश्य से नहीं बनाया है। हम लोगों ने ये वेदी क्यों बनाई है? हम लोगों को भय था कि भविष्य में तुम्हारे लोग हम लोगों को अपने राष्ट्र का एक भाग नहीं समझेंगे। तब तुम्हारे लोग यह कहेंगे, तुम लोग इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की उपासना नहीं कर सकते। 25 परमेश्वर ने हम लोगों को यरदन नदी की दूसरी ओर का प्रदेश दिया है। इसका अर्थ यह हुआ कि यरदन नदी को सीमा बनाया है। हमें डर है कि जब तुम्हारे बच्चे बड़े होकर इस प्रदेश पर शासन करेंगे तब वे हमें भूल जाएंगे, कि हम भी तुम्हारे लोग हैं। वे हम से कहेंगे, ‘हे रूबेन और गाद के लोगो तुन इस्राएल के भाग नहीं हो!’ तब तुम्हारे बच्चे हमारे बच्चों को यहोवा की उपासना करने से रोकेंगे। इसलिये तुम्हारे बच्चे हम लोगों के बच्चों को यहोवा की उपासना करने से रोक देंगे।

26 “इसलिए हम लोगों ने इस वेदी को बनाया। किन्तु हम लोग यह योजना नहीं बना रहे हैं कि इस पर होमबलि चढ़ाएंगे और बलियाँ देंगे। 27 हम लोगों ने जिस सच्चे उद्देश्य के लिये वेदी बनाई थी, वह अपने लोगों को यह दिखाना मात्र था कि हम उस परमेश्वर की उपासना करते हैं जिसकी तुम लोग उपासना करते हो। यह वेदी तुम्हारे लिये, हम लोगों के लिये और भविष्य में हम लोगों के बच्चों के लिये इस बात का प्रमाण होगा कि हम लोग परमेश्वर की उपासना करते हैं। हम लोग यहोवा को अपनी बलियाँ, अन्नबलि और मेलबलि चढ़ाते हैं। हम चाहते थे कि तुम्हारे बच्चे बढ़ें और जानें कि हम लोग भी तुम्हारी तरह इस्राएल के लोग हैं। 28 भविष्य में यदि ऐसा होता है कि तुम्हारे बच्चे कहें कि हम लोग इस्राएल से सम्बन्ध नहीं रखते तो हमारे बच्चे तब कह सकेंगे कि ध्यान दें! ‘हमारे पूर्वजों ने, जो हम लोगों से पहले थे, एक वेदी बनाई थी। यह वेदी ठीक वैसी ही है जैसी पवित्र तम्बू के सामने यहोवा की वेदी है। हम लोग इस वेदी का उपयोग बलि देने के लिये नहीं करते—यह इस बात का संकेत करता है कि हम लोग इस्राएल के एक भाग हैं।’

29 “सत्य तो यह है, कि हम लोग यहोवा के विरुद्ध नहीं होना चाहते। हम लोग अब उसका अनुसरण करना छोड़ना नहीं चाहते। हम लोग जानते हैं कि एक मात्र सच्ची वेदी वही है जो पवित्र तम्बू के सामने है। वह वेदी, हमारे परमेश्वर यहोवा की है।”

30 याजक पीनहास और दस प्रमुखों ने रूबेन, गाद और मनश्शे के लोगों द्वारा कही गई यह बात सुनी। वे इस बात से सन्तुष्ट थे कि लोग सच बोल रहे थे। 31 इसलिए याजक एलीआज़र के बारे में पीनहास ने कहा, “अब हम लोग समझते हैं कि योहवा हमारे साथ है और हम लोग जानते हैं कि तुम में से कोई भी उसके विपरीत नहीं गए हो। हम लोग प्रसन्न हैं कि इस्राएल के लोगों को यहोवा से दण्ड नहीं मिलेगा।”

32 तब पीनहास और प्रमुखों ने उस स्थान को छोड़ा और वे अपने घर चले गए। उन्होंने रूबेन और गाद के लोगों को गिलाद प्रदेश में छोड़ा और कनान को लौट गये। वे लौटकर इस्राएल के लोगों के पास गये और जो कुछ हुआ था, उनसे कहा। 33 इस्राएल के लोग भी सन्तुष्ट हो गए। वे प्रसन्न थे और उन्होंने परमेश्वर को धन्यवाद दिया। उन्होंने निर्णय लिया कि वे रूबेन, गाद और मनश्शे के लोगों के विरुद्ध जाकर नहीं लड़ेंगे। उन्होंने उन प्रदेशों को नष्ट न करने का निर्णय किया।

34 और रुबेन और गाद के लोगों ने कहा, “यह वेदी सभी लोगों को यह बताती है कि हमें यह विश्वास है कि यहोवा परमेश्वर है और इसलिए उन्होंने वेदी का नाम ‘प्रमाण’ रखा।”

यहोशू लोगों को उत्साहित करता है

23 यहोवा ने इस्राएल को उसके चारों ओर के उनके शत्रुओं से शान्ति प्रदान की। योहवा ने इस्रएल को सुरक्षित बनाया। वर्ष बीते और यहोशू बहुत बूढ़ा हो गया। इस समय यहोशू ने इस्राएल के सभी प्रमुखों, शासको और न्यायाधीशों की बैठक बुलाई। यहोशू ने कहा, “मैं बहुत बूढ़ा हो गया हूँ। तुमने वह देखा जो यहोवा ने हमारे शत्रुओं के साथ किया। उसने यह हमारी सहायता के लिये किया। तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हारे लिये युद्ध किया। याद रखो मैंने तुम्हें यह कहा था कि तुम्हारे लोग उस प्रदेश को पा सकते हैं, जो यरदन नदी और पश्चिम के बड़े सागर के मध्य है। यह वही प्रदेश है जिसे देने का वचन मैंने दिया था, किन्तु अब तक तुम उस प्रदेश का थोड़ा सा भाग ही ले पाए हो। तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वहाँ के निवासियों को उस स्थान को छोड़ने के लिये विवश करेगा। तुम उस प्रदेश में प्रवेश करोगे और यहोवा वहाँ के निवासियों को उस प्रदेश को छोड़ने के लिये विवश करेगा। तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुमको यह वचन दिया है।

“तुम्हें उन सब बातों का पालन करने में सावधान रहना चाहिए जो यहोवा ने हमे आदेश दिया है। उस हर बात, का पालन करो जो मूसा के व्यवस्था की किताब में लिखा है। उस व्यवस्था के विपरीत न जाओ। हम लोगों के बीच कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इस्राएल के लोग नहीं हैं। वे लोग अपने देवताओं की पूजा करते हैं। उन लोगों के मित्र मत बनो। उन देवताओं की सेवा, पूजा न करो तुम्हें सदैव अपने परमेश्वर यहोवा का अनुसरण करना चाहिये। तुमने यह भूतकाल में किया है और तुम्हें यह करते रहना चाहिये।

“यहोवा ने अनेक शक्तिशाली राष्ट्रों को हराने में तुम्हारी सहायता की है। यहोवा ने उन लोगों को अपना देश छोड़ने को विवश किया है। कोई भी राष्ट्र तुमको हराने में समर्थ न हो सका। 10 यहोवा की सहायता से इस्राएल का एक व्यक्ति एक हजार व्यक्तियों को हरा सकता है। इसका कारण यह है कि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे लिये युद्ध करता है। यहोवा ने यह करने का वचन दिया है। 11 इसलिए तुम्हें अपने परमेश्वर यहोवा की भक्ति करते रहना चाहिए। अपनी पूरी आत्मा से उससे प्रेम करो।

12 “यहोवा के मार्ग से कभी दूर न जाओ। उन अन्य लोगों से मित्रता न करो जो अभी तक तुम्हारे बीच तो हैं किन्तु जो इस्राएल के अंग नहीं हैं। उनमें से किसी के साथ विवाह न करो। किन्तु यदि तुम इन लोगों के मित्र बनोगे, 13 तब तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे शत्रुओं को हराने में तुम्हारी सहायता नहीं करेगा। इस प्रकार ये लोग तुम्हारे लिये एक जाल बन जायेंगे। परन्तु वे तुम्हारी पीठ के लिए कोड़े और तुम्हारी आँख के लिए काँटा बन जायेंगे। और तुम इस अच्छे देश से विदा हो जाओगे। यह वही प्रदेश है जिसे तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हें दिया है, किन्तु यदि तुम इस आदेश को नहीं मानोगे तो तुम अच्छे देश को खो दोगे।

14 “यह करीब—करीब मेरे मरने का समय है। तुम जानते हो और सचमुच विश्वास करते हो कि यहोवा ने तुम्हारे लिये बहुत बड़े काम किये हैं। तुम जानते हो कि वह अपने दिये वचनों में से किसी को पूरा करने में असफल नहीं रहा है। यहोवा ने उन सभी वचनों को पूरा किया है, जो उसने हमें दिये हैं। 15 वे सभी अच्छे वचन जो तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने हमको दिये हैं, पूरी तरह सच हुए हैं। किन्तु यहोवा, उसी तरह अन्य वचनों को भी सत्य बनाएगा। उसने चेतावनी दी है कि यदि तुम पाप करोगे तब तुम्हारे ऊपर विपत्तियाँ आएंगी। उसने चेतावनी दी है कि वह तुम्हें उस देश को छोड़ने के लिये विवश करेगा जिसे उसने तुमको दिया है। 16 यह घटित होगा, यदि तुम अपने परमेश्वर यहोवा के साथ की गई वाचा का पालन करने से इन्कार करोगे। यदि तुम अन्य देवताओं के पास जाओगे और उनकी सेवा करोगे तो तुम इस देश को खो दोगे। यदि तुम ऐसा करोगे तो यहोवा तुम पर बहुत क्रोधित होगा। तब तुम इस अच्छे देश से शीघ्रता से चले जाओगे जिसे उसने तुमको दिया है।”

यहोशू अलविदा कहता है

24 तब इस्राएल के सभी परिवार समूह शकेम में इकट्ठे हुए। यहोशू ने उन सभी को वहाँ एक साथ बुलाया। तब यहोशू ने इस्राएल के प्रमुखों, शासकों और न्यायाधीशों को बुलाया। ये ब्यक्ति परमेश्वर के सामने खड़े हुए।

तब यहोशू ने सभी लोगों से बातें कीं। उसने कहा, “मैं वह कह रहा हूँ जो यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर तुमसे कह रहा है: ‘वहुत समय पहले तुम्हारे पूर्वज परात नदी की दूसरी ओर रहते थे। मैं उन व्यक्तियों के विष्य में बात कर रहा हूँ, जो इब्राहीम और नाहोर के पिता तेरह की तरह थे। उन दिनों तुम्हारे पूर्वज अन्य देवताओं की पूजा करते थे। किन्तु मैं अर्थात् यहोवा, तुम्हारे पूर्वज इब्राहीम को नदी की दूसरी ओर के प्रदेश से बाहर लाया। मैं उसे कनान प्रदेश से होकर ले गया और उसे अनेक सन्तानें दीं। मैंने इब्राहीम को इसहाक नामक पुत्र दिया और मैंने इसहाक को याकूब और एसाव नामक दो पुत्र दिये। मैंने सेईर पर्वत के चारों ओर के प्रदेश को एसाव को दिया। किन्तु याकूब और उसकी सन्तानें वहाँ नहीं रहीं। वे मिस्र देश में रहने के लिए चले गए।

“‘तब मैंने मूसा और हारून को मिस्र भेजा। मैं उनसे यह चाहता था कि मेरे लोगों को मिस्र से बाहर लाएँ। मैंने मिस्र के लोगों पर भयंकर विपत्तियाँ पड़ने दीं। तब मैं तुम्हारे लोगों को मिस्र से बाहर लाया। इस प्रकार मैं तुम्हारे पूर्वजों को मिस्र के बाहर लाया। वे लाल सागर तक आए और मिस्र के लोग उनका पीछा कर रहे थे। उनके साथ रथ और घुड़सवार थे। इसलिये लोगों ने मुझसे अर्थात् यहोवा से सहायता माँगी और मैंने मिस्र के लोगों पर बहुत बड़ी विपत्ति आने दी। मैंने अर्थात् यहोवा ने समुद्र में उन्हें डुबा दिया। तुम लोगों ने स्वयं देखा कि मैंने मिस्र की सेना के साथ क्या किया।

“‘उसके बाद तुम मरूभूमि में लम्बे समय तक रहे। तब मैं तुम्हें एमोरी लोगों के प्रदेश में लाया। यह यरदन नदी के पूर्व में था। वे लोग तुम्हारे विरूद्ध लड़े, किन्तु मैंने तुम्हें उनको पराजित करने दिया। मैंने तुम्हें उन लोगों को नष्ट करने के लिए शक्ति दी। तब तुमने उस देश पर अधिकार किया।

“‘तब सिप्पोर के पुत्र मोआब के राजा बालाक ने इस्राएल के लोगों के विरुद्ध लड़ने की तैयारी की। राजा ने बोर के पुत्र बिलाम को बुलाया। उसने बिलाम से तुमको अभिशाप देने को कहा। 10 किन्तु मैंने अर्थात् तुम्हारे यहोवा ने बिलाम की एक न सुनी। इसलिए बिलाम ने तुम लोगों के लिये अच्छी चीज़ें होने की याचना की! उसने तुम्हें मुक्त भाव से आशीर्वाद दिये। इस प्रकार मैंने तुम्हें बालाक से बचाया।

11 “‘तब तुमने यरदन नदी के पार तक यात्रा की। तुम लोग यरीहो प्रदेश में आए। यरीहो नगर में रहने वाले लोग तुम्हारे विरूद्ध लड़े। एमोरी, परिज्जी, कनानी, हित्ती, गिर्गाशी, हिव्वी और यबूसी लोग भी तुम्हारे विरुद्ध लड़े। किन्तु मैंने तुम्हें उन सबको हराने दिया। 12 जब तुम्हारी सेना आगे बढ़ी तो मैंने उनके आगे बर्रो भेजीं। इन बर्रों के समूह ने लोगों को भागने के लिये विवश किया। इसलिये तुम लोगों ने अपनी तलवारों और धनुष का उपयोग किये बिना ही उन पर अधिकार कर लिया।

13 “‘यह मैं, ही था, जिसने तुम्हें वह प्रदेश दिया! मैंने तुम्हें वह प्रदेश दिया जहाँ तुम्हें कोई काम नहीं करना पड़ा। मैंने तुम्हें नगर दिये जिन्हें तुम्हें बनाना नहीं पड़ा। अब तुम उस प्रदेश और उन नगरों में रहते हो। तुम्हारे पास अंगूर की बेलें और जैतून के बाग हैं, किन्तु उन बागों को तुम ने नहीं लगाया था।’”

14 तब यहोशू ने लोगों से कहा, “अब तुम लोगों ने यहोवा का कथन सुन लिया है। इसलिये तुम्हें यहोवा का सम्मान करना चाहिए और उसकी सच्ची सेवा करनी चाहिए। उन असत्य देवताओं को फेंक दो जिन्हें तुम्हारे पूर्वज पूजते थे। यह सब कुछ बहुत समय पहले फरात नदी की दूसरी ओर, मिस्र में भी हुआ था। अब तुम्हें यहोवा की सेवा करनी चाहिये।

15 “किन्तु संभव है कि तुम यहोवा की सेवा करना नहीं चाहते। तुम्हें स्वयं ही आज यह चुन लेना चाहिए। तुम्हें आज निश्चय कर लेना चाहिए कि तुम किसकी सेवा करोगे। तुम उन देवताओं की सेवा करोगे जिनकी सेवा तुम्हारे पूर्वज उस समय करते थे जब वे नदी की दूसरी ओर रहते थे? या तुम उन एमोरी लोगों के देवताओं की सेवा करना चाहते हो जो यहाँ रहते थे? किन्तु मैं तुम्हें बताता हूँ कि मैं क्या करूँगा। जहाँ तक मेरी और मेरे परिवार की बात है, हम यहोवा की सेवा करेंगे!”

16 तब लोगों ने उत्तर दिया, “नहीं, हम यहोवा का अनुसरण करना कभी नहीं छोड़ेंगे। नहीं, हम लोग कभी अन्य देवताओं की सेवा नहीं करेंगे! 17 हम जानते हैं कि वह परमेश्वर यहोवा था जो हमारे लोगों को मिस्र से लाया। हम लोग उस देश में दास थे। किन्तु यहोवा ने हम लोगों के लिये वहाँ बड़े—बड़े काम किये। वह उस देश से हम लोगों को बाहर लाया और उस समय तक हमारी रक्षा करता रहा जब तक हम लोगों ने अन्य देशों से होकर यात्रा की। 18 तब यहोवा ने उन एमोरी लोगों को हराने में हमारी सहायता की जो उस प्रदेश में रहते थे जिसमें आज हम रहते हैं। इसलिए हम लोग यहोवा की सेवा करते रहेंगे। क्यों? क्योंकि वह हमारा परमेश्वर है।”

19 तब यहोवा ने कहा, “तुम यहोवा की पर्याप्त सेवा अच्छी तरह नहीं कर सकोगे। यहोवा, पवित्र परमेश्वर है और परमेश्वर अपने लोगों द्वारा अन्य देवताओं की पूजा से घृणा करता है। यदि तुम उस तरह परमेश्वर के विरुद्ध जाओगे तो परमेश्वर तुमको क्षमा नहीं करेगा। 20 तुम यहोवा को छोड़ोगे और अन्य देवताओं की सेवा करोगे तब यहोवा तुम पर भंयकर विपत्तियाँ लायेगा। यहोवा तुमको नष्ट करेगा। यहोवा तुम्हारे लिये अच्छा रहा है, किन्तु यदि तुम उसके विरूद्ध चलते हो तो वह तुम्हें नष्ट कर देगा।”

21 किन्तु लोगों ने यहोशू से कहा, “नहीं! हम यहोवा की सेवा करेंगे।”

22 तब यहोशू ने कहा, “स्वयं अपने और अपने साथ के लोगों के चारों ओर देखो। क्या तुम जानते हो और स्वीकार करते हो कि तुमने यहोवा की सेवा करना चुना है? क्या तुम सब इसके गवाह हो?”

लोगों ने उत्तर दिया, “हाँ, यह सत्य है! हम लोग ध्यान रखेंगे कि हम लोगों ने यहोवा की सेवा करना चुना है।”

23 तब यहोशू ने कहा, “इसलिए अपने बीच जो असत्य देवता रखते हो उन्हें फेंक दो। अपने पूरे हृदय से इस्राएल के परमेश्वर यहोवा से प्रेम करो।”

24 तब लगों ने यहोशू से कहा, “हम लोग यहोवा, अपने परमेश्वर की सेवा करेंगे। हम लोग उसकी आज्ञा का पालन करेंगे।”

25 इसलिये यहोशू ने लोगों के लिये उस दिन एक वाचा की। यहोशू ने इस वाचा को उन लोगों द्वारा पालन करने के लिये एक नियम बना दिया। यह शकेम नामक नगर में हुआ। 26 यहोशू ने इन बातों को परमेश्वर के व्यवस्था की किताब में लिखा। तब यहोशू एक बड़ी शिला लाया। यह शिला इस वाचा का प्रमाण थी। उसने उस शिला को यहोवा के पवित्र तम्बू के निकट बांज के पेड़े के नीचे रखा।

27 तब योहशू ने सभी लोगों से कहा, “यह शिला तुम्हें उसे याद दिलाने में सहायक होगी जो कुछ हम लोगों ने आज कहा है। यह शिला तब यहाँ थी जब परमेश्वर हम लोगों से बात कर रहा था। इसलिये यह शिला कुछ ऐसी रेहेगी जो तुम्हें यह याद दिलाने में सहायता करेगी कि आज के दिन क्या हुआ था। यह शिला तुम्हारे प्रति एक साक्षी बनी रहेगी। यह तुम्हें तुम्हारे परमेश्वर यहोवा के विपरीत जाने से रोकेगी।”

28 तब यहोशू ने लोगों से अपने घरों को लौट जाने को कहा तो हर एक व्यक्ति अपने प्रदेश को लौट गया।

यहोशू की मृत्यु

29 उसके बाद नून का पुत्र यहोशू मर गया। वह एक सौ दस वर्ष का था। 30 यहोशू अपनी भूमि तिम्नत्सेरह में दफनाया गया। यह गाश पर्वत के उत्तर में एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश में था।

31 इस्राएल के लोगों ने यहोशू के जीवन काल में यहोवा की सेवा की और यहोशू के मरने के बाद भी, लोग यहोवा की सेवा करते रहे। इस्राएल के लोग तब तक यहोवा की सेवा करते रहे जब तक उनके नेता जीवित रहे। ये वे नेता थे, जिन्होंने वह सब कुछ देखा था जो यहोवा ने इस्राएल के लिये किया था।

यूसुफ दफनाया गया

32 जब इस्राएल के लोगों ने मिस्र छोड़ा तब वे यूसुफ के शरीर की हड्डियाँ अपने साथ लाए थे। इसलिए लोगों ने यूसुफ की हड्डियाँ शकेम में दफनाईं। उन्होंने हड्डियों को उस प्रदेश के क्षेत्र में दफनाया जिसे याकूब ने शकेम के पिता हमोर के पुत्रों से खरीदा था। याकूब ने उस भूमि को चाँदी के सौ सिक्कों से खरीदा था। यह प्रदेश यूसुफ की सन्तानों का था।

33 हारून का पुत्र एलीआज़ार मर गया। वह गिबा में दफनाया गया। गिबा एप्रैम के पहाड़ी प्रदेश में एक नगर था। वह नगर एलीआज़र के पुत्र पीनहास को दिया गया था।

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