Beginning
इस्राएली, यहोवा के विशेष लोग
14 “तुम यहोवा अपने परमेश्वर के बच्चे हो। यदी कोई मरे तो तुम्हें अपने को शोक में पड़ा दिखाने के लिए स्वयं को काटना नहीं चाहिए। तुम्हें अपने सिर के अगले भाग के बाल नहीं कटवाने चाहिए।[a] 2 क्यों? क्योंकि तुम अन्य लोगों से भिन्न हो। तुम यहोवा अपने परमेश्वर के विशेष लोग हो। उसने संसार के सभी लोगों में से, तुम्हें अपने विशेष लोगों के रूप मे चुना है।
इस्राएलियों का भोजन, जिसे खाने की अनुमति थी
3 “ऐसी कोई चीज न खाओ, यहोवा जिसे खाना बुरा कहता है। 4 तुम इन जानवरों को खा सकते होः गाय, भेड़, बकरी, 5 हिरन, नीलगाय, मृग, जंगली भेड़, जंगली बकरी, चीतल और पहाड़ी भेड़। 6 तुम ऐसे किसी जानवर को खा सकते हो जिसके खुर दो भागों मे बंटे हों और जो जुगाली करते हों। 7 किन्तु ऊँटों, खरगोशर या चहानी बिज्जू को न खाओ। ये जानवर जुगाली करते हैं किन्तु इनके खुर फटे नहीं होते। इसलिए ये जानवर तुम्हारे लिए शुद्ध भोजन नहीं हैं। 8 तुम्हें सूअर नहीं खाना चाहिए। उनके खुर फटे होते हैं, किन्तु वे जुगाली नहीं करते। इसलिए सूअर तुम्हारे लिए स्वछ भोजन नहीं है। सूअर का कोई माँस न खाओ और न ही मरे हुए सूअर को छुओ।
9 “तुम ऐसी कोई मछली खा सकते हो जिसके डैने और चोइटें हों। 10 किन्तु जल में रहने वाले किसी ऐसे प्राणी को न खाओ जिसके डैने और चोइटें न हों। ये तुम्हारे लिए शुद्ध भोजन नहीं हैं।
11 “तुम किसी शुद्ध पक्षी को खा सकते हो। 12-18 किन्तु इन पक्षियों में से किसी को न खाओ: चील, किसी भी तरह के गिद्ध, बज्जर्द, किसी प्रकार का बाज, कौवे, तीतर, समुद्री बत्तख, किसी प्रकार का उल्लू, पेलिकन, काँरमारँन्त सारस, किसी प्रकार का बगुला, नौवा या चमगादड़।
19 “पंख वाले कीड़े तुम्हारे लिए शुद्ध भोजन नहीं हैं। तुम्हें उनको नहीं खाना चाहिए। 20 किन्तु तुम किसी शुद्ध पक्षी को खा सकते हो।
21 “अपने आप मरे जानवर को न खाओ। तुम मरे जानवर को अपने नगर के विदेशी को दे सकते हो और वह उसे खा सकता है अथवा तुम मरे जानवर के विदेशी के हाथ बेच सकते हो। किन्तु तुम्हें मरे जानवर को स्वयं नहीं खाना चाहिए। क्यों? क्योंकि तुम यहोवा अपने परमेश्वर के हो। तुम उसके विशेष लोग हो।
“बकरी के बच्चे को उसकी माँ के दूध में न पकाओ।
मन्दिर को दिया जानेवाला दशमांश
22 “तुम्हें हर वर्ष अपने खेतों में उगाई गई फसल का दसवाँ भाग निश्चयपूर्वक बचाना चाहिए। 23 तब तुम्हें उस स्थान पर जाना चाहिए जिसे यहोवा अपना विशेष निवास चुनता है। वहाँ यहोवा अपने परमेश्वर के साथ अपनी फसल का दशमांश, अन्न का दसवाँ भाग, तुम्हारा नया दाखमधु, तुम्हारा तेल, झुण्ड और रेवड़ में उत्पन्न पहला बच्चा, खाना चाहिए। तब तुम यहोवा अपने परमेश्वर का सदा सम्मान करना सीखोगे। 24 किन्तु वह स्थान इतना दूर हो सकता है कि तुम वहाँ तक की यात्रा न कर सको। यह सम्भव है कि यहोवा ने फसल का जो वरदान दिया है उसका दसवाँ भाग तुम वहाँ न पहुँचा सको। यदि ऐसा होता है तो यह करोः 25 अपनी फसल का वह भाग बेच दो। तब उस धन को लेकर यहोवा द्वारा चुने गए विशेष स्थान पर जाओ। 26 उस धन का उपयोग जो कुछ तुम चाहो उसके खरीदने में करो—गाय, भेड़, दाखमधु या अन्य स्वादिष्ट पेय या कोई अन्य चीज़ जो तुम चाहते हो। तब तुम्हें और तुम्हारे परिवार को खाना चाहिए और योहवा अपने परमेश्वर के साथ वहाँ उस स्थान पर आनन्द मनाना चाहिए। 27 किन्तु अपने नगर में रहने वाले लेवीवंशियों की उपेक्षा न करो, क्यों कि उनके पास तुम्हारी तरह भूमि का हिस्सा नहीं है।
28 “हर तीन वर्ष के अन्त में अपनी उस साल की फसल का दशमांश एक जगह इकट्ठा करो। इस भोजन को अपने नगर में उस स्थान पर जमा करो जहाँ दूसरे लोग उसका उपयोग कर सकें। 29 यह भोजन लेवीवंशियों के लिए है, क्योंकि उनके पास अपनी कोई भूमि नहीं है। यह भोजन तुम्हारे नगर में उन लोगों के लिये भी है जिन्हें इसकी आवश्यकता है—विदेशी, अनाथ बच्चे और विधवायें। यदि तुम यह करते हो तो यहोवा तुम्हारा परमेश्वर सभी काम तुम जो कुछ करोगे उसके लिए आशीर्वाद देगा।
कर्ज को समाप्त करने के विशेष वर्ष
15 “हर सात वर्ष के अन्त में, तुम्हें ऋण को खत्म कर देना चाहिए। 2 ऋण को तुम्हें इस प्रकार खत्म करना चाहिएः हर एक व्यक्ति जिसने किसी इस्राएली को ऋण दिया है अपना ऋण खत्म कर दे। उसे अपने भाई (इस्राएली) से ऋण लौटाने को नहीं कहना चाहिए। क्यों? क्योंकि यहोवा ने कहा है कि उस वर्ष ऋण खत्म कर दिये जाते हैं। 3 तुम विदेशी से अपना ऋण वापस ले सकते हो। किन्तु उस ऋण को खत्म कर दोगे जो किसी दूसरे इस्राएली पर है। 4 किन्तु तुम्हारे बीच कोई गरीब व्यक्ति नहीं रहना चाहिए। क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुहें सभी चीजों का वरदान उस देश में देगा जिसे वह तुम्हें रहने को दे रहा है। 5 यही होगा, यदि तुम यहोवा अपने परमेश्वर की आज्ञा का पालन पूरी तरह करोगे। तुम्हें उस हर एक आदेश का पालन करने में सावधान रहना चाहिए जिसे आज मैंने तुम्हें दिया है। 6 यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें आशीर्वाद देगा, जैसा कि उसने वचन दिया है और तुम्हारे पास बहुत से राष्ट्रों को ऋण देने के लिए पर्याप्त धन होगा। किन्तु तुम्हें किसी से ऋण लेने की आवश्यकता नहीं होगी। तुम बहुत से राष्ट्रों पर शासन करोगे। किन्तु उन राष्ट्रों में से कोई राष्ट्र तुम पर शासन नहीं करेगा।
7 “जब तुम उस देश में रहोगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है तब तुम्हारे लोगों में कोई भी गरीब हो सकता है। तुम्हें स्वार्थी नहीं होना चाहिए। तुम्हें उस गरीब व्यक्ति को सहायता देने से इन्कार नहीं करना चाहिए। 8 तुम्हें उसका हाथ बँटाने की इच्छा रखनी चाहिए। तुम्हें उस व्यक्ति को जितने ऋण की आवश्यकता हो, देना चाहिए।
9 “किसी को सहायता देने से इसलिए इन्कार न करो, क्योंकि ऋण को खत्म करने का सातवाँ वर्ष समीप है। इस प्रकार का बुरा विचार अपने मन में न अने दो। तुम्हें उस व्यक्ति के प्रति बुरे विचार नहीं रखने चाहिए जिसे सहायता की आवश्यकता है। तुम्हें उसकी सहायता करने से इन्कार नहीं करना चाहिए। यदि तुम उस गरीब व्यक्ति को कुछ नहीं देते तो वह यहोवा से तुम्हारे विरुद्ध शिकायत करेगा और यहोवा तुम्हें पाप करने का उत्तरदायी पाएगा।
10 “गरीब को तुम जितना दे सको, दो और उसे देने का बुरा न मानो। क्यों? क्योंकि यहोवा तुम्हारा परम्मेश्वर इस अच्छे काम के लिए तुम्हें आशीष देगा। वह तुम्हारे सभी कामों और जो कुछ तुम करोगे उसमें तुम्हारी सहायता करेगा। 11 देश मे सदा गरीब लोग भी होंगे। यही कारण है कि मैं तुम्हें आदेश देता हूँ कि तुम अपने लोगों, जो लोग तुम्हारे देश में गरीब और सहायता चाहते हैं, उन को सहायता देने के लिए दैयार रहो।
सातवें वर्ष में दासों को स्वतन्त्र करने के नियम
12 “यदि तुम्हारे लोगों में से कोई, हिब्रू स्त्री व पुरुष, तुम्हारे हाथ बेचा जाए तो उस व्यक्ति को तुम्हारी सेवा छः वर्ष करनी चाहिए। तब सातवें वर्ष तुम्हें उसे अपने से स्वतन्त्र कर देना चाहीए। 13 किन्तु जब तुम अपने दास को स्वतन्त्र करो तो उसे बिना कुछ लिए मत जाने दो। 14 तुम्हें उस व्यक्ति को अपने रेवड़ों का एक बड़ा भाग, खलिहान से एक बड़ा भाग और दाखमधु से एक बड़ा भाग देना चाहिए। यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें बहुत अच्छी चीज़ों की प्राप्ति का आशीर्वाद दिया है। उसी तरह तुम्हें भी अपने दास को बहुत सारी अच्छी चीज़ें देनी चाहिए। 15 तुम्हें याद रखना चाहिए कि तुम मिस्र में दास थे। यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें मुक्त किया है। यही कारण है कि मैं तुमसे आज यह करने को कह रहा हूँ।
16 “किन्तु तुम्हारे दासों में से कोई कह सकता है, ‘मैं आपको नहीं छोडूँगा।’ वह ऐसा इसलिए कह सकता है कि वह तुमसे, तुम्हारे परिवार से प्रेम करता है और उसने तुम्हारे साथ अच्छा जीवन बिताया है। 17 इस सेवक को अपने द्वार से कान लगाने दो और एक सूए[b] का उपयोग उसके कान में छेद करने के लिए करो। तब वह सदा के लिए तुम्हारा दास हो जाएगा। तुम दासियों के लिए भी यही करो जो तुम्हारे यहाँ रहना चाहती हैं।
18 “तुम अपने दास को मुक्त करते समय दुःख का अनुभव मत करो। याद रखो, छः वर्ष तक तुम्हारी सेवा, उससे आधी रकम पर उसने की जितनी मजदूरी पर रखे गए व्यक्ति को देनी पड़ती है। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम जो करोगे उसके लिए आशीष देगा।
पहलौठे जानवर के सम्बन्ध में नियम
19 “तुम अपने झुण्ड या रेवड़ में सभी पहलौठे बच्चों को यहोवा का विशेष जानवर बना देना। उनमें से किसी जानवर का उपयोग तुम अपने काम के लिए न करो। इन भेड़ों में से किसी का ऊन न काटो। 20 हर वर्ष मवेशियों के झुण्ड या रेवड़ में पहलौठे जानवर को लेकर उस स्थान पर आओ जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर चुने। वहाँ तुम और तुम्हारे परिवार के लोग उन जानवरों को खायेंगे।
21 “किन्तु यदि जानवर में कोई दोष हो, या लंगड़ा, अन्धा हो या इसमें कोई अन्य दोष हो, तो तुम्हें उसे यहोवा अपने परमेश्वर को भेंट नहीं चढ़ानी चाहिए। 22 किन्तु तुम उसका माँस वहाँ खा सकते हो जहाँ तुम रहते हो। इसे कोई व्यक्ति खा सकता है, चाहे वह पवित्र हो चाहे अपवित्र हो। नीलगाय या हिरन का माँस खाने पर वही नियम लागू होगा, जो इस माँस पर लागू होता है। 23 किन्तु तुम्हें जानवर का खून नहीं खाना चाहिए। तुम्हें खून को पानी की तरह जमीन पर बहा देना चाहिए।
फसह पर्व
16 “यहोवा अपने परमेश्वर का फसह पर्व आबीब के महीने में मनाओ। क्यों? क्योंकि आबीब के महीने में तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें रात में मिस्र से बाहर ले आया था। 2 तुम्हें उस स्थान पर जाना चाहिए जिसे यहोवा अपना विशेष निवास बनाएगा। वहाँ तुम्हें एक गाय या बकरी को यहोवा अपने परमेश्वर के सम्मान में, फसह पर्व के लिए भेंट के रूप में चढ़ाना चाहिए। 3 इस भेंट के साथ खमीर वाली रोटी मत खाओ। तुम्हें सात दिन तक अखमीरी रोटी खानी चाहिए। इस रोटी को ‘विपत्ति की रोटी’ कहते हैं। यह तुम्हें मिस्र में जो विपत्तियाँ तुम पर पड़ी उसे याद दिलाने में सहायता करेंगे। याद करो कि कितनी शीघ्रता से तुम्हें वह देश छोड़ना पड़ा। तुम्हें उस दिन को तब तक याद रखना चाहिए जब तक तुम जीवित रहो। 4 सात दिन तक देश में किसी के घर में कहीं खमीर नहीं होनी चाहिए। जो माँस पहले दिन की शाम को भेंट में चढ़ाओ उसे सवेरा होने के पहले खा लेना चाहिए।
5 “तुम्हें फसह पर्व के जानवरों की बलि उन नगरों में से किसी में नहीं चढ़ानी चाहिए जिन्हें यहोवा तुम्हारा परमेश्वर ने तुमको दिए हैं। 6 तुम्हें फसह पर्व के जानवर की बलि केवल उस स्थान पर चढ़ानी चाहिए जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर अपने लिए विशेष निवास के रूप में चुने। वहाँ तुम फसह पर्व के जानवर को जब सूर्य डूबे तब शाम को बलि चढ़ानी चाहिए। तुम इसे साल के उसी समय करोगे जिस समय तुम मिस्र से बाहर निकले थे। 7 और तुम्हें फसह पर्व का माँस यहोवा तुम्हारा परमेश्वर जिस स्थान को चुनेगा वहीं पकाओगे और खाओगे। तब सवेरे तुम्हें अपने खेमों में चले जाना चाहिए। 8 तुम्हें अखमीरी रोटी छ: दिन तक खानी चाहिए। सातवें दिन तुम्हें कोई भी काम नहीं करना चाहिए। उस दिन यहोवा अपने परमेश्वर के लिए विशेष सभा में सभी एकत्रित होंगे।
सप्ताहों का पर्व (पिन्तेकुस्त)
9 “जब तुम फसल काटना आरम्भ करो तब से तुम्हें सात हफ्ते गिनने चाहिए। 10 तब यहोवा अपने परमेश्वर के लिए सप्ताहों का पर्व करो। इसे एक स्वेच्छा बलि उसे लाकर करो। तुम्हें कितना देना है, इसका निश्चय यह सोचकर करो कि यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें कितना आशीर्वाद दिया है। 11 उस स्थान पर जाओ जिसे यहोवा अपने विशेष निवास के रूप में चुनेगा। वहाँ तुम और तुम्हारे लोग, यहोवा अपने परमेश्वर के साथ आनन्द का समय बिताएंगे। अपने सभी लोगों, अपने पुत्रों, अपनी पुत्रियों और अपने सभी सेवकों को वहाँ ले जाओ और अपने नगर में रहने वाले लेवीवंशियों, विदेशियों, अनाथों और विधवाओं को भी साथ में ले जाओ। 12 यह मत भूलो, कि तुम मिस्र में दास थे। तुम्हें निश्चय करना चाहिए कि तुम इन नियमों का पालन करोगे।
खेमों का पर्व
13 “जब तुम अपने खलिहान और दाखमधुशाला से सात दिन तक अपनी फसलें एकत्रित कर लो तब खेमों का पर्व करो। 14 तुम, तुम्हारे पुत्र, तुम्हारी पुत्रियाँ, तुम्हारे सभी सेवक तथा तुम्हारे नगर में रहने वाले लेवीवंशी, विदेशी, अनाथ बालक और विधवाऐं सभी इस दावत में आनन्द मनायें। 15 तुम्हें इस दावत को सात दिन तक उस विशेष स्थान पर मनाना चाहिए जिसे यहोवा चुनेगा। यह तुम यहोवा अपने परमेश्वर के सम्मान में करो। आनन्द मनाओ! क्योंकि यहोवा तुम्हारे परमेश्वर ने तुम्हें तुम्हारी फसल के लिए तथा तुमने जो कुछ भी किया है उसके लिए आशीष दी है।
16 “तुम्हारे सभी लोग वर्ष में तीन बार यहोवा अपने परमेश्वर से मिलने के लिए उस विशेष स्थान पर आएंगे जिसे वह चुनेगा। यह अखमीरी रोटी के पर्व के समय, सप्ताहों के पर्व के समय तथा खेमों के पर्व के समय होगा। हर एक व्यक्ति जो यहोवा से मिलने जाएगा कोई भेंट लाएगा। 17 हर एक व्यक्ति उतना देगा जितना वह दे सकेगा। कितना देना है, उसका निश्चय वह यह सोचकर करेगा कि उसे यहोवा ने कितना दिया है।
लोगों के लिए न्यायाधीश और अधिकारी
18 “यहोवा तुम्हारा परमेश्वर जिन नगरों को तुम्हें दे रहा है उनमें से हर एक नगर में तुम्हें अपने परिवार समूह के लिए न्यायाधीश और अधिकारी बनाना चाहिए। इन न्यायाधीशों और अधिकारियों को जनता के साथ सही और ठीक न्याय करना चाहिए। 19 तुम्हें ठीक न्याय को बदलना नहीं चाहिए। तुम्हें किसी के सम्बन्ध में अपने इरादे को बदलने के लिए धन नहीं लेना चाहिए। धन बुद्धिमान लोगों को अन्धा करता है और उसे बदलता है जो भला आदमी कहेगा। 20 तुम्हें हर समय निष्पक्ष तथा न्याय संगत होने का पूरा प्रयास करना चाहिए। तब तुम जीवित रहोगे और तुम उस देश को पाओगे जिसे यहोवा तुम्हारा परमेश्वर तुम्हें दे रहा है और तुम उसमें रहोगे।
परमेश्वर मूर्तियों से घृणा करता है
21 “जब तुम यहोवा अपने परमेश्वर के लिए वेदी बनाओ तो तुम वेदी के सहारे कोई लकड़ी का स्तम्भ न बनाओ जो अशेरा देवी के सम्मान में बनाए जाते हैं। 22 और तुम्हें विशेष पत्थर झूठे देवाताओं की पूजा के लिए नहीं खड़े करने चाहिए। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर इनसे घृणा करता है!
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