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Read the Bible from start to finish, from Genesis to Revelation.
Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
Version
गिनती 18-20

याजकों और लेवीवंशियों के कार्य

18 यहोवा ने हारून से कहा, “तुम, तुम्हारे पुत्र और तुम्हारे पिता का परिवार अब किसी भी बुराई के लिए उत्तरदायी है जो पवित्र स्थान के विरुद्ध की जाएंगी। तुम और तुम्हारे पुत्र उन बुराइयों के लिए उत्तरदायी होगे जो याजकों के विरुद्ध होंगी। अन्य लेविवंशी लोगों को अपना साथ देने के लिए अपने परिवार समूह से लाओ। वे तुम्हारी और तुम्हारे पुत्रों की सहायता साक्षी के पवित्र तम्बू के कार्यों को करने में करेंगे। लेवी परिवार के वे लोग तुम्हारे अधीन हैं। वे उन सभी कार्यों को करेंगे जिन्हें तम्बू में किया जाना है। किन्तु उन्हें वेदी या पवित्र स्थान की चीज़ों के पास नहीं जाना चाहिए। यदि वे ऐसा करेंगे तो वे मर जायेंगे और तुम भी मर जाओगे। वे तुम्हारे साथ होंगे और तुम्हारे साथ काम करेंगे। वे मिलापवाले तम्बू की देखभाल करने के उत्तरदायी होंगे। सभी कार्य, जिन्हें तम्बू में किया जाना चाहिए, वे करेंगे। अन्य कोई भी उस स्थान के निकट नहीं आएगा जहाँ तुम हो।

“पवित्र स्थान और वेदी की देखाभाल करने के उत्तरदायी तुम हो। मैं इस्राएल के लोगों पर फिर क्रोधित होना नहीं चाहता। मैंने तुम्हारे लोगों अर्थात् लेवीवंश के लोगों को स्वयं इस्राएल के सभी लोगों में से चुना है। वे तुमको भेंट की तरह हैं। उनका एकमात्र उपयोग परमेश्वर की सेवा और मिलापवाले तम्बू के काम को करने में है। किन्तु केवल तुम और तुम्हारे पुत्र याजक के रूप में सेवा कर सकते हो। एक मात्र तुम्हीं वेदी के पास जा सकते हो। केवल तुम्हीं पर्दे के भीतर अति पवित्र स्थान में जा सकते हो। मैं याजक के रूप में तुम्हारी सेवा को तुम्हें एक भेंट के रूप में दे रहा हूँ। कोई भी अन्य, जो पवित्र स्थान के पास आएगा, मार डाला जाएगा।”

तब यहोवा ने हारून से कहा, “मैंने अपने लिए चढ़ाई गई भेटों का उत्तरदायित्व तुमको दिया है। इस्राएल के लोग जो सारी भेंट मुझको देंगे, वह मैं तुमको देता हूँ। तुम और तुम्हारे पुत्र इन पवित्र भेटों को आपस में बाँट सकते हैं। यह सदा तुम्हारी होंगी। उन सभी पवित्र भेंटों में तुम्हारा अपना भाग होगा जो जलाई नहीं जाएंगी। लोग मेरे पास भेंटें सर्वाधिक पवित्र भेंट के रूप में लाते हैं। ये अन्नबलि, या पापबलि या दोषबलि है। किन्तु ये सभी चीज़ें तुम्हारी और तुम्हारे पुत्रों की होंगी। 10 इन सबको सर्वाधिक पवित्र चीज़ों के रूप में खाओ। तुम्हारे परिवार का हर एक पुरुष इसे खाएगा। तुम्हें इसको पवित्र मानना चाहिए।

11 “और वे सभी जो इस्राएल के लोगों द्वारा उत्तोलन भेंट के रूप में दी जाएंगी, तुम्हारी ही होंगी। मैं इसे तुमको, तुम्हारे पुत्रों और तुम्हारी पुत्रियों को देता हूँ। यह तुम्हारा भाग है। तुम्हारे परिवार का हर एक व्यक्ति जो पवित्र होगा, इसे खा सकेगा।

12 “और मैं सारा अच्छा जैतून का तेल, सारी सर्वोतम नयी दाखमधु और अन्न तुम्हें देता हूँ। ये वे चीज़ें हैं जिन्हें इस्राएल के लोग मुझे अर्थात् अपने यहोवा को देते हैं। ये वे पहली चीज़ें हैं जिन्हें वे अपनी फसल पकने पर इकट्ठी करते हैं। 13 जब लोग अपनी फसलें इकट्ठी करते हैं तब लोग पहली चीज यहोवा के पास लाते हैं। अतः ये चीज़ें मैं तुमको दूँगा और हर एक व्यक्ति जो तुम्हारे परिवार में पवित्र है, इसे खा सकेगा।

14 “और इस्राएल में हर एक चीज जो यहोवा को दी जाती है, तुम्हारी है।

15 “किसी भी परिवार में पहलौठा बालक या जानवर यहोवा की भेंट होगा और वह तुम्हारा होगा। किन्तु तुम्हें प्रत्येक पहलौठे बच्चे और हर पक पहलौठे अशुध्द पशु को फिर से खरीदने के लिए स्वीकार करना चाहिए। तब पहलौठा बच्चा फिर उस परिवार का हो जाएगा। 16 जब वे एक महीने के हो जाए तब तुम्हें उनके लिए भुगतान ले लेना चाहिए। उसका मूल्य दो औंस चाँदी होगी।

17 “किन्तु तुम्हें पहलौठे गाय, भेड़ या बकरे के लिए भुगतान नहीं लेना चाहिए। वे पशु पवित्र हैं वे शुद्ध हैं। उनका खून वेदी पर छिड़को और उनकी चर्बी जलाओ। यह भेंट अग्नि द्वारा समर्पित है। इस भेंट की सुगन्ध मेरे लिए अर्थात् यहोवा के लिए मधुर सुगन्ध होगी। 18 किन्तु इन पशुओं का माँस तुम्हारा होगा। और उत्तोलन भेंट की छाती भी तुम्हारी होगी। अन्य भेंटों की दायी जांघ तुम्हारी होगी। 19 कोई भी चीज, जिसे लोग पवित्र भेंट के रूप में मुझे चढ़ाते हैं, मैं यहोवा उसे तुमको देता हूँ। यह तुम्हारा हिस्सा हैं। मै इसे तुमको और तुम्हारे पुत्रों और तुम्हारी पुत्रियों को देता हूँ। यह यहोवा के साथ की गयी वाचा है जो सदा बनी रहेगी। मैं यह वचन तुमको और तुम्हारे वंशजों को देता हूँ।”

20 यहोवा ने हारून से यह भी कहा, “तुम कोई भूमि नहीं प्राप्त करोगे और ऐसी कोई चीज़ नहीं रखोगे जैसी अन्य लोग रखते हैं। मैं, यहोवा, तुम्हारा रहूँगा। इस्राएल के लोग वह देश प्राप्त करेंगे जिसके लिए मैंने वचन दिया है। किन्तु तुम्हारे लिए अपना उपहार मैं स्वयं होऊँगा।

21 “इस्राएल के लोग उनके पास जो कुछ होगा उसका दसवाँ भाग देंगे। इस प्रकार मैं लेवीवंश के लोगों को दसवाँ भाग देता हूँ। यह उनके उस कार्य के लिए भुगतान है जो वे मिलापवाले तम्बू में सेवा करते हुए करते हैं। 22 किन्तु इस्राएल के अन्य लोगों को मिलापवाले तम्बू के निकट कभी नहीं जाना चाहिए। यदि वे ऐसा करते हैं तो उन्हें अपने पाप के लिए भुगतान करना पड़ेगा और वे मर जाएंगे! 23 जो लेवीवंश मिलापवाले तम्बू में काम कर रहे हैं वे इसके विरुद्ध किये गए पापों के लिए उत्तरदायी हैं। यह नियम भविष्य के दिनों के लिए भी रहेगा। लेवीवंशी लोग उस भूमि को नहीं लेंगे जिसे मैंने इस्राएल के अन्य लोगों को दिया है। 24 किन्तु इस्राएल के लोगों के पास जो कुछ होगा उसका दसवाँ हिस्सा मुझको देंगे। इस तरह मैं लेवीवंशी लोगों को दसवाँ हिस्सा दूँगा। यही कारण है कि मैंने लेविवंशीयों के लिए कहा हैः वे लोग उस भूमि को नहीं पाएंगे जिसे मैंने इस्राएल के लोगों को देने का वचन दिया है।”

25 यहोवा ने मूसा से कहा, 26 “लेवीवंशी लोगों से बातें करो और उनसे कहोः इस्राएल के लोग अपनी हर एक चीज़ का दसवाँ भाग यहोवा को देंगे। वह दसवाँ भाग लेवीवंशियों का होगा। किन्तु तुम्हें उसका दसवाँ भाग यहोवा को उनकी भेंट के रूप में देना चाहिए। 27 फसल कटने के बाद तुम लोग खलिहानों से अन्न और दाखमधुशाला से रस प्राप्त करोगे। तब वह भी यहोवा को तुम्हारी भेंट होगी। 28 इस प्रकार, तुम यहोवा को वैसे ही भेंट दोगे जिस प्रकार इस्राएल के अन्य लोग देते हैं। तुम इस्राएल के लोगों का दिया हुआ दसवाँ भाग प्राप्त करोगे और तब तुम उसका दसवाँ भाग याजक हारून को दोगे। 29 जब इस्राएल के लोग अपनी हर एक चीज़ का दसवाँ भाग दें तो तुम्हें उनमें से सर्वोत्तम और पवित्रतम भाग चुनना चाहिए। वही दसवाँ भाग है जिसे तुम्हें यहोवा को देना चाहिए।

30 “मूसा, लेवियों से यह कहोः इस्राएल के लोग तुम लोगों को अपनी फसल या अपनी दाखमधु का दसवाँ भाग देंगे। तब तुम लोग उसका सर्वोत्तम भाग यहोवा को दोगे। 31 जो बचेगा उसे तुम और तुम्हारे परिवार के व्यक्ति खा सकते हैं। यह तुम लोगों के उस काम के लिए भुगतान है जो तुम लोग मिलापवाले तम्बू में करते हो। 32 और यदि तुम सदा इसका सर्वोत्तम भाग यहोवा को देते रहोगे तो तुम कभी दोषी नहीं होगे। तुम इस्राएल के लोगों की पवित्र भेंट के प्रति पाप नहीं करोगे और तुम मरोगे नहीं।”

लाल गाय की राख

19 यहोवा ने मूसा और हारून से बात की। उसने कहा, “ये नियम और उपदेश हैं जिन्हें यहोवा इस्राएल के लोगों को देता है। उन्हें दोष से रहित एक लाल गाय लेनी चाहिए और उसे तुम्हारे पास लाना चाहिए। उस गाय को कोई खरोंच भी न लगी हो और उस गाय के कंधे पर कभी जुआ[a] नहीं रखा गया हो। इस गाय को याजक एलीआजार को दो। एलीआजार गाय को डेरे से बाहर ले जाएगा और वह वहाँ गाय को मारेगा। तब याजक एलीआजार को इसका कुछ खून अपनी उंगलियों पर लागना चाहिए और उसे कुछ खून पवित्र तम्बू की दिशा में छिड़कना चाहिए। उसे यह सात बार करना चाहिए। तब पूरी गाय को उसके सामने जलाना चाहिए। चमड़ा, माँस, खून और आतेँ सभी जला डालनी चाहिए। तब याजक को एक देवदारु की लकड़ी, एक जूफा की शाखा और लाल रंग का कपड़ा लेना चाहिए। याजक को इन चीज़ों को उस आग में डालना चाहिए जिसमें गाय जल रही हो। तब याजक को, अपने को तथा अपने कपड़ों को पानी से धोना चाहिए। तब उसे डेरे मे लौटना चाहिए। याजक सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा। जो व्यक्ति गाय को जलाए उसे अपने को तथा अपने वस्त्रों को पानी से धोना चाहिए। वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा।

“तब एक पुरुष जो शुद्ध होगा, गाय की राख को इकट्ठा करेगा। वह इस राख को डेरे के बाहर एक शुद्ध स्थान पर रखेगा। यह राख उस समय उपयोग में आएगी जब लोग शुद्ध होने के लिए विशेष संस्कार करेंगे। यह राख व्यक्ति के पाप को दूर करने के लिए उपयोग में आएगी।

10 “वह व्यक्ति, जिसने गाय की राख को इकट्ठा किया, अपने कपड़े धोएगा। वह सन्ध्या तक अशुद्ध रहेगा।

“यह नियम सदा चलता रहेगा। यह नियम इस्राएल के नागरिकों के लिए है और यह उन विदेशियों के लिए भी है जो तुम्हारे बीच रहते हैं। 11 यदि कोई व्यक्ति एक मरे व्यक्ति को छूता है, तो वह सात दिन के लिए अशुद्ध हो जाएगा। 12 उसे अपने को तीसरे दिन तथा फिर सातवें दिन विशेष पानी से धोना चाहिए। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो वह अशुद्ध रह जाएगा। 13 यदि कोई व्यक्ति किसी शव को छूता है, तो वह व्यक्ति अशुद्ध है। यदि वह व्यक्ति अशुद्ध रहता है और तब पवित्र तम्बू में जाता है तो पवित्र तम्बू अशुद्ध हो जाता है। इसलिए उस व्यक्ति को इस्राएल के लोगों से अलग कर दिया जाना चाहिए। यदि अशुद्ध व्यक्ति पर विशेष जल नहीं डाला जाता तो वह व्यक्ति अशुद्ध रहेगा।

14 “यह नियम उन लोगों से सम्बन्धित है जो अपने खेमों में मरते हैं। यदि कोई व्यक्ति खेमें में मरता है तो उस खेमे का हर एक व्यक्ति अशुद्ध हो जाएगा। वे सात दिन तक अशुद्ध रहेंगे 15 और हर एक ढक्कन रहित बर्तन और घड़ा अशुद्ध हो जाता है। 16 यदि कोई शव को छूता है, तो वह व्यक्ति सात दिन तक अशुद्ध रहेगा। यह तब भी सत्य होगा जब व्यक्ति बाहर देश में मरा हो या युद्ध में मारा गया हो। यदि कोई व्यक्ति मरे व्यक्ति की हड्डी या किसी कब्र को छूता है तो वह व्यक्ति अशुद्ध हो जाता है।

17 “इसलिए तुम्हें दुग्ध गाय की राख का उपयोग उस व्यक्ति को पुनः शुद्ध करने के लिए करना चाहिए। स्वच्छ पानी[b] घड़े में रखी हुई राख पर डालो। 18 शुद्ध व्यक्ति को एक जूफा की शाखा लेनी चाहिए और इसे पानी में डुबाना चाहिए। तब उसे तम्बू, बर्तनों तथा डेरे में जो व्यक्ति हैं उन पर यह जल छिड़कना चाहिए। तुम्हें यह उन सभी व्यक्तियों के साथ करना चाहिए जो शव को छुऐंगे। तुम्हें यह उस के साथ भी करना चाहिए जो युद्ध में मरे व्यक्ति के शव को छूता है या उस किसी के साथ भी जो किसी मरे व्यक्ति की हड्डियों या क्रब को छूता है।

19 “तब कोई शुद्ध व्यक्ति इस जल को अशुद्ध व्यक्ति पर तीसरे दिन और फिर सातवें दिन छिड़के। सातवें दिन वह व्यक्ति शुद्ध हो जाता है। उसे अपने कपड़ों को पानी में धोना चाहिए। वह संध्या के समय पवित्र हो जाता है।

20 “यदि कोई व्यक्ति अशुद्ध हो जाता है और शुद्ध नहीं होता तो उसे इस्राएल के लोगों से अलग कर देना चाहिए। उस व्यक्ति पर विशेष पानी नहीं छिड़का गया। वह शुद्ध नहीं हुआ। तो वह पवित्र तम्बू को अशुद्ध कर सकता है। 21 यह नियम तुम्हारे लिए सदा के लिए होगा। जो व्यक्ति इस विशेष जल को छिड़कता है, उसे भी अपने कपड़े अवश्य धो लेने चाहिए। कोई व्यक्ति जो इस विशेष जल को छुएगा, वह संध्या तक अशुद्ध रहेगा। 22 यदि कोई अशुद्ध व्यक्ति किसी अन्य को छूए, तो वह व्यक्ति भी अशुद्ध हो जाएगा। वह व्यक्ति संध्या तक अशुद्ध रहेगा।”

मरियम मरी

20 इस्राएल के लोग सीन मरुभूमि में पहले महीने में पहुँचे। लोग कादेश में ठहरे। मरियम की मृत्यु हो गई और वह वहाँ दफनाई गई।

मूसा की गलती

उस स्थान पर लोगों के लिए पर्याप्त पानी नहीं था। इसलिए लोग मूसा और हारून के विरुद्ध शिकायत करने के लिए इकट्ठे हुए। लोगों ने मूसा से बहस की। उन्होंने कहा, “क्या ही अच्छा होता हम अपने भाइयों की तरह यहोवा के सामने मर गए होते। तुम यहोवा के लोगों को इस मरुभूमि में क्यों लाए? क्या तुम चाहते हो कि हम और हमारे जानवर यहाँ मर जाए? तुम हम लोगों को मिस्र से क्यों लाएय़ तुम हम लोगों को इस बुरे स्थान पर क्यों लाए यहाँ कोई अन्न नहीं है, कोई अंजीर, अंगूर या अनार नहीं है और यहाँ पीने के लिए पानी नहीं है।”

इसलिए मूसा और हारून ने लोगों को छोड़ा और वे मिलापवाले तम्बू के द्वार पर पहुँचे। उन्होंने दण्डवत् (प्रणाम) किया और उन पर यहोवा का तेज प्रकाशित हुआ।

यहोवा ने मूसा से बात की। उसने कहा, “अपने भाई हारून और लोगों की भीड़ को साथ लो और उस चट्टान तक जाओ। अपनी छड़ी को भी लो। लोगो के सामने चट्टान से बातें करो। तब चट्टान से पानी बहेगा और तुम वह पानी अपने लोगों और जानवरों को दे सकते हो।”

छड़ी यहोवा के सामने पवित्र तुम्बू में थी। मूसा ने यहोवा के कहने के अनुसार छड़ी ली। 10 तब उसने तथा हारून ने लोगों को चट्टान के सामने इकट्ठा होने को कहा। तब मूसा ने कहा, “तुम लोग सदा शिकायत करते हो। अब मेरी बात सुनो। हम इस चट्टान से पानी बहायेंगे।” 11 मूसा ने अपनी भुजा उठाई और दो बार चट्टान पर चोट की। चट्टान से पानी बहने लगा और लोगों तथा जानवरों ने पानी पिया।

12 किन्तु यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, “इस्राएल के सभी लोग चारों ओर इकट्ठे थे। किन्तु तुमने मुझको सम्मान नहीं दिया। तुमने लोगों को नहीं दिखाया कि पानी निकालने की शक्ति मुझसे तुममें आई। तुमने लोगों को यह नहीं बताया कि तुमने मुझ पर विश्वास किया। मैं उन लोगों को वह देश दूँगा मैने जिसे देने का वचन दिया है। लेकिन तुम उस देश में उनको पहुँचाने वाले नहीं रहोगे।”

13 इस स्थान को मरीबा का पानी कहा जाता था। यही वह स्थान था जहाँ इस्राएल के लोगों ने यहोवा के साथ बहस की और यह वह स्थान था जहाँ यहोवा ने यह दिखाया कि वह पवित्र था।

एदोम ने इस्राएल को पार नहीं होने दिया

14 जब मूसा कादेश में था, उसने कुछ व्यक्तियों को एदोम के राजा के पास एक संदेश के साथ भेजा। संदेश यह थाः

“तुम्हारे भाई इस्राएल के लोग तुमसे यह कहते हैं: तुम जानते हो कि हम लोगों ने कितनी कठिनाइयाँ सही हैं। 15 अनेक वर्ष पहले हमारे पूर्वज मिस्र चले गये थे और हम लोग वहाँ अनेक वर्ष रहे। मिस्र के लोग हम लोगों के प्रति क्रूर थे। 16 किन्तु हम लोगों ने यहोवा से सहायता के लिए प्राथना की।” यहोवा ने हम लोगों की प्रार्थना सुनी और उन्होंने हम लोगों की सहायता के लिए एक दूत भेजा। यहोवा हम लोगों को मिस्र से बाहर लाया है।

“अब हम लोग यहाँ कादेश में हैं जहाँ से तुम्हारा प्रदेश आरम्भ होता है। 17 कृपया अपने देश से हम लोगों को यात्रा करने दें। हम लोग किसी खेत या अंगूर के बाग से यात्रा नहीं करेंगे। हम लोग तुम्हारे किसी कुएँ से पानी नहीं पीएंगे। हम लोग केवल राजपथ से यात्रा करेंगे। हम राजपथ को छोड़कर दायें या बायें नहीं बढ़ेंगे। हम लोग तब तक राजपथ पर ही ठहरेंगे जब तक तुम्हारे देश को पार नहीं कर जाते।”

18 किन्तु एदोम के राजा ने उत्तर दिया, “तुम हमारे देश से होकर यात्रा नहीं कर सकते। यदि तुम हमारे देश से होकर यात्रा करने का प्रयत्न करते हो तो हम लोग आएंगे और तुमसे तलवारों से लड़ेंगे।”

19 इस्राएल के लोगों ने उत्तर दिया, “हम लोग मुख्य सड़क से यात्रा करेंगे। यदि हमारे जानवर तुम्हारा कुछ पानी पीएंगे, तो हम लोग उसके मूल्य का भुगतान करेंगे। हम लोग तुम्हारे देश से केवल चलकर पार जाना चाहते हैं। हम लोग इसे अपने लिए लेना नहीं चाहते।”

20 किन्तु एदोम ने फिर उत्तर दिया, “हम अपने देश से होकर तुम्हें जाने नहीं देगे।”

तब एदोम के राजा ने एक विशाल और शक्तिशाली सेना इकट्ठी की और इस्राएल के लोगों से लड़ने के लिए निकल पड़ा। 21 एदोम के राजा ने इस्राएल के लोगों को अपने देश से यात्रा करने से मना कर दिया और इस्राएल के लोग मुड़े और दूसरे रास्ते से चल पड़े।

हारून मर जाता है

22 इस्राएल के सभी लोगों ने कादेश से होर पर्वत तक यात्रा की। 23 होर पर्वत एदोम की सीमा पर था। यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, 24 “हारून को अपने पूर्वजों के साथ जाना होगा। यह उस प्रदेश में नहीं जाएगा जिसे देने के लिए मैंने इस्राएल के लोगों को वचन दिया है। मूसा, मैं तुमसे यह कहता हूँ क्योंकि तुमने और हारून ने मरीबा के पानी के विषय में मेरे दिये आदेश का पूरी तरह पालन नहीं कया।

25 “हारून और उसके पुत्र एलीआज़ार को होर पर्वत पर लाओ। 26 हारून के विशेष वस्त्रों को उससे लो औ र उन वस्त्रो को उसके पुत्र ऐलीआज़ार को पहनाओ। हारून वहाँ पर्वत पर मरेगा और वह अपने पूर्वजों के साथ हो जाएगा।”

27 मूसा ने यहोवा के आदेश का पालन किया। मूसा, हारून और एलीआज़ार होर पर्वत पर गए। इस्राएल के सभी लोगों ने उन्हें जाते देखा। 28 मूसा ने हारून के वस्त्र उतार लिए और उन वस्रों को हारून के पुत्र एलीआजार को पहनाया। तब हारून पर्वत की चोटी पर मर गया। मूसा और एलीआज़ार पर्वत से उतर आए। 29 तब इस्राएल के सभी लोगों ने जाना कि हारून मर गया। इसलिए इस्राएल के हर व्यक्ति ने तीस दिन तक शोक मनाया।

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