Beginning
इस्राएल परमेश्वर का है
19 यहोवा ने मूसा से कहा, 2 “इस्राएल के सभी लोगों से कहोः कि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ मैं पवित्र हूँ! इसलिए तुम्हें पवित्र होना चाहिए!
3 “तुम में से हर एक व्यक्ति को अपने माता पिता का सम्मान करना चाहिए और मेरे विश्राम के विशेष दिनों को मानना चाहिए। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ।
4 “मूर्तियों की उपासना मत करो। अपने लिए देवताओं की मूर्तियाँ धातु गला कर मत बाओ। मैं तुम लोगों का परमेश्वर यहोवा हूँ!
5 “जब तुम यहोवा को मेलबलि चढ़ाओ तो तुम उसे ऐसे चढ़ाओ कि तुम यहोवा द्वारा स्वीकार किए जा सको। 6 तुम इसे चढ़ाने के दिन खा सकोगे और अगले दिन भी। किन्तु यदि बलि का कुछ भाग तीसरे दिन भी बच जाए तो उसे तुम्हें आग में जला देना चाहिए। 7 किसी भी बलि को तीसरे दिन नहीं खाना चाहिए। यह अशुद्ध है। यह स्वीकार नहीं होगी। 8 यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वह अपारधी होगा। क्यों? क्योंकि उसने यहोवा की पवित्र चीजों का सम्मान नहीं किया। उस व्यक्ति को अपने लोगों से अलग कर दिया जाना चाहिए।
9 “जब तुम कटनी के समय अपनी फ़सल काटो तो तुम सब ओर से खेत के कोनों तक मत काटो और यदि अन्न जमीन पर गिर जाता है तो तुम्हें उसे इकट्ठा नहीं करना चाहिए। 10 अपने अँगूर के बाग के सारे अंगूर न तोड़ो और जो जमीन पर गिर जाएँ उन्हें न उठाओ। क्यों? क्योंकि तुम्हें वे चीज़ें गरीब लोगों और जो तुम्हारे देश से यात्रा करेंगे, उनके लिए छोड़नी चाहिए। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ!
11 “तुम्हें चोरी नहीं करनी चाहिए। तुम्हें लोगों को ठगना नहीं चाहिए। तुम्हें आपस में झूठ नहीं बोलना चाहिए। 12 तुम्हें मेरे नाम पर झूठा वचन नहीं देना चाहिए। यदि तुन ऐसा करते हो तो तुम यह दिखाते हो कि तुम अपने परमेश्वर के नाम का सम्मान नहीं करते हो। मैं यहोवा हूँ!
13 “तुम्हें अपने पड़ोसी को धोखा नहीं देना चाहिए। तुम्हें उसकी चोरी नहीं करनी चाहिए। तुम्हें मजदूर की मजदूरी पूरी रात, सवेरे तक नही रोकनी चाहिए।[a]
14 “तुम्हें किसी बहरे आदमी को अपशब्द नहीं कहना चाहिए। तुम्हें किसी अन्धे को गिराने के लिए उसके सामने कोई चीज नहीं रखनी चाहिए। किन्तु तुम्हें अपने परमेश्वर यहोवा का सम्मान करना चाहिए। मैं यहोवा हूँ!
15 “तुम्हें न्याय करने मै ईमानदार होना चाहिए। न तो तुम्हें ग़रीब के साथ विशेष पक्षपात करना चाहिए और न ही बड़े एवं धनी लोगों के प्रति कोई आदर दिखाना चाहिए। तुम्हें अपने पड़ोसी के साथ न्याय करते समय ईमानदार होना चाहिए। 16 तुम्हें अन्य लोगों के विरुद्ध चारों ओर अफवाहें फैलाते हुए नहीं चलना चाहिए। ऐसा कुछ न करो जो तुम्हारे पड़ोसी के जीवन को खतरे में डाले। मैं यहोव हूँ!
17 “तुम्हें अपने हृदय में अपने भाईयों से घृणा नहीं करनी चाहिए। यदि तुम्हारा पड़ोसी कुछ बुरा करता है तो इसके बारे में उसे समझाओ। किन्तु उसे क्षमा करो! 18 लोग, जो तुम्हारा बुरा करें, उसे भूल जाओ। उससे बदला लेने का प्रयत्न न करो। अपने पड़ोसी से वैसे ही प्रेम करो जैसे अपने आप से करते हो। मैं यहोव हूँ!
19 “तुम्हें मेरे नियमों का पालन करना चाहिए। दो जातियों के पशुओं को प्रजनन के लिए आपस में मत मिलाओ। तुम्हें खेत में दो प्रकार के बीज नहीं बोने चाहिये। तुम्हें दो प्रकार सी चीज़ो को मिलावट से बने वस्त्रों को नहीं पहनना चाहिए।
20 “यह हो सकता है कि किसी दूसरे व्यक्ति की दासी से किसी व्यक्ति का यौन सम्बन्ध हो। यदि यह दासी न तो खरीदी गई है न ही स्वतन्त्र कराई गई है तो उन्हें दण्ड दिया जाना चाहिए। किन्तु वे मारे नहीं जाएंगे। क्यों? क्योंकि स्त्री स्वतन्त्र नहीं थी। 21 उस व्यक्ति को अपने अपराध के लिए मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा को बलि चढ़ानी चाहिए। व्यक्ति को एक मेढ़ा दोषबलि के रूप में लाना चाहिए। 22 याजक उस व्यक्ति के पापों के भुगतान करने के लिए उपासना करेगा। याजक यहोवा को दोषबलि के रूप में मेढ़े को चढ़ाएगा। यह व्यक्ति के किए हुए पापों के लिए होगा। तब व्यक्ति अपने किए पाप के लिए क्षमा किया जाएगा।
23 “भविष्य में तुम अपने प्रदेश में प्रवेश करोगे। उस समय भोजन के लिए तुम अनेकों प्रकार के पेड़ लगाओगे। पेड़ लगाने के बाद पेड़ के किसी फल का उपयोग करने के लिए तुम्हें तीन वर्ष तक प्रतीक्षा करनी चाहिए। तुम्हें उससे पहले के फल का उपयोग नहीं करना चाहिए। 24 चौथे वर्ष उस पेड़ के फल यहोवा के होंगे। यह यहोवा की स्तुति के लिए पवित्र भेंट होगी। 25 तब, पाँचवें वर्ष तुम उस पेड़ का फल खासकते हो और पेड़ तुम्हारे लिए अधिक से अधिक फल पैदा करेगा। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ!
26 “तुम्हें कोई चीज़, उसमें खून रहते तक नहीं खानी चाहिए।
“तुम्हें भविष्यवाणी करने के लिये जादू या शगुन आदि का उपयोग नहीं करना चाहिए।
27 “तुम्हें अपने सिर के बगल के बढ़े बालों को कटवाना नहीं चाहिए। तुम्हें अपनी दाढ़ी के किनारे नहीं कटवाने चाहिए। 28 किसी मरे व्यक्ति की याद को बनाए रखने के लिए तुम्हें अपने शरीर को काटना नहीं चाहिए। तुम्हें अपने ऊपर कोई चिन्ह गुदवाना नहीं चाहिए में यहोवा हूँ!
29 “तुम अपनी पुत्री को वेश्या मत बनने दो। इससे केवल यह पता चलता है कि तुम उसका आदर नहीं करते। तुम अपने देश में स्त्रियों को वेश्याएँ मत बनने दो। तुम अपने देश को इस प्रकार के पापों से मत भर जानेदो।
30 “तुम्हें मेरे विश्राम के विशेष दिनों में काम नहीं करना चाहिए। तुम्हें मेरे पवित्र स्थान का सम्मान करना चाहिए। मैं यहोवा हूँ!
31 “ओझाओं तथा भूतसिद्धियों के पास सलाह के लिए मत जाओ। उनके पास तुम मत जाओ, वे केवल तुम्हें अशुद्ध बनाएँगें। में तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ!”
32 “बूढ़े लोगों का सम्मान करो। जब वे कमरे में आएँ तो खड़े हो जाओ। अपने परमेश्वर का सम्मान करो। मैं यहोवा हूँ!”
33 “अपने देश में रहने वाले विदेशियों के साथ बुरा व्यवहार मत करो! 34 तुम्हें विदेशियों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा तुम अपने नागरिकों के साथ करते हो। तुम विदेशियों से वैसा प्यार करो जैसा अपने से करते हो। क्यों? क्योंकि तुम भी एक समय मिस्र में विदेशी थे। मैं तुम्हारा परमेशवर यहोवा हूँ!
35 “तम्हें न्याय करते समय लोगों के प्रति ईमानदार होना चाहिए। तुम्हें चीज़ों के नापने और तौलने में ईमानदार होना चाहिए। 36 तुम्हारी टोकरियाँ ठीक माप की होनी चाहिए। तुम्हारे नापने के पात्रों में द्रव की उचित मात्रा आनी चाहिए। तुम्हारे तराजू और तुम्हारे बाट चीज़ों को ठीक तौलने वाले होने चाहिए। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ! मैं तुम्हें मिस्र देश से बाहर लाया!
37 “तुम्हें मेरे सभी नियमों और निर्णयों को याद रखना चाहिए और तुम्हें उनका पालन करना चाहिए। मैं यहोवा हूँ!”
मूर्ति पूजा के विरूद्ध चेतावनी
20 यहोवा ने मूसा से कहा, 2 “तुम्हें इस्राएल के लोगों से यह भी कहना चाहिए: तुम्हारे देश में कोई व्यक्ति अपने बच्चों में से किसी को झूठे देवता मोलेक को दे सकता है। उस व्यक्ति को मार डालना चाहिए। इससे अन्तर नहीं पड़ता कि वह इस्राएल का नागरिक है या इस्राएल में रहने वाला कोई विदेशी है, तुम्हें उसे पत्थर फेंक फेंक कर मार डालना चाहिए। 3 मैं उस व्यक्ति के विरुद्ध होऊँगा। मैं उसे उसके लोगों से अलग करूँगा। क्यों? क्योंकि उसने अपने बच्चों को मोलेक को दिया। उसने यह प्रकट किया कि वह मेरे पवित्र नाम का सम्मान नहीं करता। उसने मरे पवित्र स्थान को अशुद्ध किया। 4 सम्भव है साधारण लोग उस व्यक्ति की उपेक्षा करें। सम्भव है वे उस व्यक्ति को न मांरे जिसने बच्चों को मोलेक को दिया है। 5 किन्तु मैं उस व्यक्ति और उसके परिवार के विरुद्ध होऊँगा। मैं उसे उसके लोगों से अलग करुँगा मैं किसी भी ऐसे व्यक्ति को उसके लोगों से अलग करुँगा जो मेरे प्रति विश्वास नहीं रखता और मोलेक का अनुसरण करता है।
6 “मैं उस व्यक्ति के विरुद्ध होऊँगा जो किसी ओझा और भूतसिद्धि के पास सलाह के लिए जाता है। वह व्यक्ति मुझसे विश्वासघात करता है। इसलिए मैं उस व्यक्ति को उसके लोगों से अलग करूँगा।
7 “विशेष बनो। अपने को पवित्र बनाओ। क्यों? क्योंकि मैं पवित्र हूँ! मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ! 8 मेरे आज्ञाओं का पालन करो और उन्हें याद रखो। मैं योहवा हूँ और मैंने तुम्हें अपना विशेष लोग बनाया है।
9 “यदि कोई व्यक्ति अपने माता पिता के अनिष्ट की कामना करता है तो उस व्यक्ति को मार डालना चाहिए। उसने अपने पिता या माँ का अनिष्ट चाहा है, इसलिए उसे दण्ड देना चाहिए।[b]
यौन पापों के दण्ड
10 “यदि कोई व्यक्ति अपने पड़ोसी की पत्नी के साथ यौन सम्बन्ध करता है तो स्त्री और पुरुष दोनों अनैतिक सम्बन्ध के अपराधी हैं। इसलिए स्त्री और पुरुष दोनों को मार डालना चाहिए। 11 यदि कोई व्याक्ति अपनी विमाता से यौन सम्बन्ध करता है तो उस व्यक्ति को मार डालना चाहिए। उस व्यक्ति को और उसकी विमाता दोनों को मार डालना चाहिए। उस व्यक्ति ने अपने पिता के विरुद्ध पाप किया है।[c]
12 “यदि कोई व्यक्ति अपनी पुत्रवधू के साथ यौनसम्बन्ध करता है तो दोनों को मार डालना चाहिए। उन्होंने बहुत बुरा यौन पाप किया है। उन्हें दण्ड अवश्य मिलना चाहिए।
13 “यदि कोई व्यक्ति किसी पुरुष के साथ स्त्री जैसा यौन सम्बन्ध करता है तो दोनों को मार डालना चाहिए। उन्होंने बहुत बुरा यौन पाप किया है। उन्हें दण्ड अवश्य मिलना चाहिए।
14 “यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री और उसकी माँ के साथ यौन सम्बन्ध करता है तो यह यौन पाप है। लोगों को उस व्यक्ति तथा दोनों स्त्रियों को आग में जला देना चाहिए। इस यौन पाप को अपने लोगों में मत होने दो।
15 “यदि कोई व्यक्ति किसी जानवर से यौन सम्बन्ध करे तो उस व्यक्ति को मार डालना चाहिए और तुम्हें उस जानवर को भी मार देना चाहिए। 16 यदि कोई स्त्री किसी जानवर से यौन सम्बन्ध करती है तो तुम्हें अवश्य मार देना चाहिए। उन्हें दण्ड अवश्य मिलना चाहिए।
17 “यह एक भाई और उसकी बहन के लिए लज्जाजनक है कि आपस में वे यौन सम्बन्ध करे।[d] उन्हें सामाजिक रूप में दण्ड मिलना चाहिए। वे अपने लोगों से अलग कर दिए जाने चाहिए। वह व्यक्ति जिसने अपनी बहन के साथ यौन सम्बन्ध किया है, अपने पाप के लिए दण्ड पाएगा।
18 “यदि कोई व्यक्ति किसी स्त्री के साथ मासिकधर्म के रक्त स्राव के समय यौन सम्बन्ध करेगा तो स्त्री पुरुष दोनों को अपने लोगों से अलग कर देना चाहिए। उन्होंने पाप किया है क्योंकि उसने खून के स्रोत को उघाड़ा।
19 “तुम्हें योन स्म्बन्ध अपनी माँ की बहन या पिता की बहन के साथ नहीं करना चाहिए। यह गोत्रीय अनैतिकता का पाप है।[e] उन्हें उनके पाप के लिए दण्ड मिलागा।
20 “किसी पुरुष को अपने चाचा मामा की पत्नी के सात नहीं सोना चाहिए। यह व्यक्ति तथा उसकी चाची व मामी को उनके पापों के लिए दण्ड मिलेगा। व बिना किसी सन्तान के मरेंगे।
21 “किसी व्यक्ति के लिए यह बुरा है कि वह अपने भाई की पत्नी के साथ यौन सम्बन्ध करे। उस व्यक्ति ने अपने भाई के विरुद्ध पाप किया है।[f] उनकी कोई सन्तान नहीं होगी।
22 “तुम्हें मेरे सारे नियमों और निर्णयों को याद रखना चाहिए और तुम्हें उनका पालन अवश्य करना चाहिए। मैं तुम्हें तुम्हारे प्रदेश को ले जा रहा हूँ। तुम लोग उस प्रदेश में रहोगे। यदि तुम लोग मेरे नियमों और निर्णयों को मानते रहे तो वह प्रदेश तुम लोगों को निकाल बाहर नहीं करेगा। 23 मैं अन्य लोगों को उस प्रदेश को छोड़ने के लिए विवश कर रहा हूँ। क्यों? क्योंकि उन लोगों ने वे सभी पाप किए। मैं उन पापों से घृणा करता हूँ। इसलिए जिस प्रकार वे लोग रहे, उस तरह तुम नहीं रहोगे। 24 मैंने कहा है कि तुम उनका प्रदेश प्राप्त करोगे। मैं उनका प्रदेश तुमको दूँगा। यह तुम्हारा प्रदेश होगा। वह प्रदेश बहुत सुन्दर है। उसमें दूध व मधु की नदियाँ बहती हैं। मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूँ!
“मैंने तुम्हें विशेष बनाया है। मैंने तुम्हारे साथ अन्य लोगों से भिन्न व्यवहार किया है। 25 इसलिए तुम्हें शुद्ध जानवरों के साथ अशुद्ध जानवरों से भिन्न व्यवहार करना चाहिए। तुम्हें शुद्ध पक्षियों के साथ अशुद्ध पक्षियों से भिन्न व्यवहार करना चाहिए। उन में से किसी भी अशुद्ध पक्षी, जानवर और कीट पतंग को मत खाओ जो भूमि पर रेंगते हैं। मैंने उन चीज़ों को अशुद्ध बनाया है। 26 मैंने तुम्हें अपना विशेष जन बनाया है। इसलिए तुम्हें मेरे लिए पवित्र होना चाहिए। क्यों? क्योंकि मैं यहोवा हूँ और मैं पवित्र हूँ!
27 “कोई पुरुष या कोई स्त्री जो ओझा हो या कोई भूतसिद्धि हो, तो उन्हें निश्चय ही मार दिया जाना चाहिए। लोगों को चाहिए कि वे उन्हें पत्थर मार मार कर मार दें। उन्हें मार ही दिया जाना चाहिए।”
याजकों के लिए नियम
21 यहोवा ने मूसा से कहा, “ये बातें हारून के याजक पुत्रों से कहो: किसी मरे व्यक्ति को छूकर याजक अपने को अशुद्ध न करें। 2 किन्तु यदि मरा हुआ व्यक्ति उसके नजदीकी सम्बन्धियों मेंसे कोई है तो वह मृतक के शरीर को छू सकता है। याजक अपने को अशुद्ध कर सकता है यदि मृत व्यक्ति उसकी माँ, पिता, उसका पुत्र, या पुत्री, उसका भाई, 3 उसकी अविवाहित बहन है। (यह बहन उसकी नजदीकी है क्योंकि उसका पति नहीं है। इसलिए याजक अपने को अशुद्ध कर सकता है, यदि वह मरती है।) 4 किन्तु याजक अपने को अशुद्ध नहीं कर सकता, यदि मरा व्यक्ति उसके दासों में से एक हो।[g]
5 “याजक को शोक प्रकट करने के लिए अपने सिर का मुण्डन नहीं कराना चाहिए। याजक को अपनी दाढ़ी के सिरे नहीं कटवाने चाहिए। याजक को अपने शरीर को कहीं भी काटना नहीं चाहिए। 6 याजक को अपने परमेश्वर के लिए पवित्र होना चाहिए। उन्हें परमेश्वर के नाम के लिए सम्मान दिखाना चाहिए। क्यों क्योंकि वे रोटी और आग द्वारा भेंट यहोवा को पहुँचाते हैं। इसलिए उन्हें पवित्र होना चाहिए।
7 “याजक परमेश्वर की सेवा विशेष ढंग से करता है। इसलिए याजक को ऐसी स्त्री से विवाह नहीं करना चाहिए जिसने किसी के साथ यौन सम्बन्ध किया हो। याजक को किसी वेश्या, या किसी तलाक दी गई स्त्री से विवाह नहीं करना चाहिए। 8 याजक परमेश्वर की सेवा विशेष ढंग से करता है। इसलिए तुम्हें उसके साथ विशेष व्यवहार करना चाहिए। क्यों? क्योंकि वह पवित्र चीज़ें ले चलता है। वह पवित्र रोटी यहोवा को पहुँचता है। और मैं पवित्र हूँ, मैं यहोवा हूँ, और में तुम्हें पवित्र बनाता हूँ।
9 “यदि याजक की पुत्री वेश्या बन जाती है तो वह अपनी प्रतिष्ठा नष्ट करती है तथा अपने पिता को कलंक लगाती है। इसलिए उसे जला देना चाहिए।
10 “महायाज अपने भाईयों में से चुना जाता था। अभिषेक का तेल उसके सिर पर डाला जाता था। इस प्रकार वह माहायाजक के विशेष कर्त्तव्य के लिए नियुक्त किया जाता था। वह महायाजक के विशेष वस्त्र को पहनने के लिए चुना जाता था। इसलिए उसे अपने दुःख को प्रकट करने वाला कोई काम समाज में नहीं करना चाहिए। उसे अपने बाल जंगली ढंग से नहीं बिखेरने चाहिए। उसे अपने वस्त्र नहीं फाड़ने चाहिए। 11 उसे मुर्दे को छूकर अपने को अशुद्ध नहीं बनाना चाहिए। उसे किसी मुर्दे के पास नहीं जाना चाहिए। चाहे वह उसके अपने माता—पिता का ही क्यों न हो। 12 महायाजक को परमेश्वर के पवित्र स्थान के बाहर नहीं जाना चाहिए। यदि उसने ऐसा किया तो वह अशुद्ध हो जायेगा और तब वह परमेश्वर के पवित्र स्थान को अशुद्ध कर देगा। अभिषेक का तेल महायाजक के सिर पर डाला जाता था। यह उसे शेष लोगों से भिन्न करता था। मैं यहोवा हूँ!
13 “महायाजक को विवाह करके उसे पत्नी बनाना चाहिए जो कुवाँरी हो। 14 महायाजक को ऐसी सत्री से विवाह नहीं करना चाहिए जो किसी अन्य पुरुष के साथ यौन सम्बन्ध रख चुकी हो। महायजक को किसी वेश्या, या तलाक दी गई स्त्री, या विधवा स्त्री से विवाह नहीं करना चाहिए। महायाजक को अपने लोगों में से एक कुवाँरी से विवाह करना चाहिए। 15 इस प्रकार लोग उसके बच्चों को सम्मान देंगे। मैं, यहोवा ने, याजक को विशेष काम के लिए भिन्न बनाया है।”
16 यहोवा ने मूसा से कहा, 17 “हारून से कहो: यदि तुम्हारे वंशजों की सन्तानों में से कोई अपने में कोई दोष पाए तो उन्हें विशेष रोटी परमेश्वर तक नहीं ले जानी चाहिए। 18 कोई व्यक्ति जिसमें कोई दोष हो, याजक का काम न करे और न ही मेरे पास भेंट लाए, ये लोग याजक के रूप में सेवा नहीं कर सकते: अन्धे व्यक्ति, लगंड़े व्यक्ति, विकृत चेहरे वाले व्यक्ति, अत्याधिक लम्बी भुजा और टाँग वाले व्यक्ति। 19 टूटे पैर या हाथ वाले व्यक्ति, 20 कुबड़े व्यक्ति, बौने, आँख में दोष वाले व्यक्ति,। खुजली और चर्म रोग वाले व्यक्ति बधिया किए गे नपुंसक व्यक्ति।
21 “यदि हारून के वंशजों मे से कोई कुछ दोष वाला है तो वह यहोवा को आग से बलि नहीं चढ़ा सकता और वह व्यक्ति विशेष रोटी अपने परमेश्वर को नहीं पहुँचा सकता। 22 वह व्यक्ति याजकों के पिरवार से है अतः वह पवित्र रोटी खा सकता है। वह अती पवित्र रोटी बी खा सकता है। 23 किन्तु वह सबसे अधिक पवित्र स्थान में पर्दे से होकर नहीं जा सकता और न ही वह वेदी के पास जा सकता है। क्यों? क्योंकि उस में कुछ दोष है। उसे मेरे पवित्र स्थान को अपवित्र नहीं बनाना चाहिए। मैं यहोवा उन स्थानों को पवित्र बनाता हूँ।”
24 इसलिए मूसा ने ये बातें हारून से, हारून के पुत्रों और इस्राएल के सभी लोगों से कहीं।
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