Print Page Options
Previous Prev Day Next DayNext

Beginning

Read the Bible from start to finish, from Genesis to Revelation.
Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
Version
निर्गमन 7-9

यहोवा ने मूसा से कहा, “मैं तुम्हारे साथ रहूँगा। फ़िरौन के लिए तुम एक महान राजा[a] की तरह होगे और हारून तुम्हारा अधिकृत वक्ता[b] होगा। जो आदेश मैं दे रहा हूँ वह सब कुछ हारून से कहो। तब वह वे बातें जो मैं कह रहा हूँ, फ़िरौन से कहेगा और फ़िरौन इस्राएल के लोगों को इस देश से जाने देगा। किन्तु मैं फ़िरौन को हठी बनाऊँगा। वह उन बातों को नहीं मानेगा जो तुम कहोगे। तब मैं मिस्र में बहुत से चमत्कार करूँगा। किन्तु वह फिर भी नहीं सुनेगा। इसलिए तब मैं मिस्र को बुरी तरह दण्ड दूँगा और मैं अपने लोगों को उस देश के बाहर ले चलूँगा। तब मिस्र के लोग जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ। मैं उनके विरूद्ध हो जाऊँगा, और वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूँ। तब मैं अपने लोगों को उनके देश से बाहर ले जाऊँगा।”

मूसा और हारून ने उन बातों का पालन किया जिन्हें यहोवा ने कहा था। इस समय मूसा अस्सी वर्ष का था और हारून तिरासी का।

मूसा की लाठी का साँप बनना

यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, “फ़िरौन तुमसे तुम्हारी शक्ति को प्रमाणित करने के लिए कहेगा। वह तुम्हें चमत्कार दिखाने के लिए कहेगा। तुम हारून से उसकी लाठी जमीन पर फेंकने को कहना। जिस समय फ़िरौन देख रहा होगा तभी लाठी साँप बन जाएगी।”

10 इसलिए मूसा और हारून फ़िरौन के पास गए और यहोवा की आज्ञा का पालन किया। हारून ने अपनी लाठी नीचे फेंकी। फिरौन और उसके अधिकारियों के देखते—देखते लाठी साँप बन गयी।

11 इसलिए फ़िरौन ने अपने गुणी पुरुषों और जादूगरों को बुलाया। इन लोगों ने अपने रहस्य चातुर्य का उपयोग किया और वे भी हारून के समान कर सके। 12 उन्होंने अपनी लाठियाँ ज़मीन पर फेंकी और वे साँप बन गईं। किन्तु हारून की लाठी ने उनकी लाठियों को खा डाला। 13 फ़िरौन ने फिर भी, लोगों का जाना मना कर दिया। यह वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने कहा था। फिरौन ने मूसा और हारून की बात सुनने से मना कर दिया।

पानी का खून बनना

14 तब यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, “फ़िरौन हठ पकड़े हुए है। फिरौन लोगों को जाने से मना करता है। 15 सवेरे फ़िरौन नदी पर जाएगा। उसके साथ नील नदी के किनारे—किनारे जाओ। उस लाठी को अपने साथ ले लो जो साँप बनी थी। 16 उससे यह कहो, ‘हिब्रू लोगों के परमेश्वर यहोवा ने हमको तुम्हारे पास भेजा है। यहोवा ने मुझे तुमसे यह कहने को कहा है, मेरे लोगों को मेरी उपासना करने के लिए मरुभूमि में जाने दो। तुमने भी अब तक यहोवा की बात पर कान नहीं दिया है। 17 इसलिए यहोवा कहता है कि, मैं ऐसा करूँगा जिससे तुम जानोगे कि मैं यहोवा हूँ। जो मैं अपने हाथ की इस लाठी को लेकर नील नदी के पानी पर मारुँगा और नील नदी खून में बदल जाएगी। 18 तब नील नदी की मछलियाँ मर जाएंगी और नदी से दुर्गन्ध आने लगेगी। और मिस्री लोग नदी से पानी नहीं पी पाएंगे।’”

19 यहोवा ने मूसा को यह आदेश दिया, “हारून से कहो कि वह नदियों, नहरों, झीलों तथा तालाबों सभी स्थानों पर जहाँ मिस्र के लोग पानी एकत्र करते हैं, अपने हाथ की लाठी को बढ़ाए। जब वह ऐसा करेगा तो सारा जल खून में बदल जाएगा। सारा पानी, यहाँ तक कि लकड़ी और पत्थर के घड़ों का पानी भी, खून में बदल जाएगा।”

20 इसलिए मूसा और हारून ने यहोवा का जैसा आदेश था, वैसा किया। उसने लाठी को उठाया और नील नदी के पानी पर मारा। उसने यह फ़िरौन और उसके अधिकारियों के सामने किया। फिर नदी का सारा जल खून में बदल गया। 21 नदी में मछलियाँ मर गईं और नदी से दुर्गन्ध आने लगी। इसलिए मिस्री नदी से पानी नहीं पी सकते थे। मिस्र में सर्वत्र खून था।

22 जादूगरों ने अपनी जादूगरी दिखाई और उन्होंने भी वैसा ही किया। इसलिए फ़िरौन ने मूसा और हारून को सुनने से इन्कार कर दिया। यह ठीक वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने कहा था। 23 फिरौन मुड़ा और अपने घर चला गया। फ़िरौन ने, मूसा और हारून ने जो कुछ किया, उसकी उपेक्षा की।

24 मिस्री नदी से पानी नहीं पी सकते थे। इसलिए पीने के पानी के लिए उन्होंने नदी के चारों ओर कुएँ खोदे।

मेंढक

25 यहोवा द्वारा नील नदी के बदले जाने के बाद सात दिन बीत गये।

तब यहोवा ने मूसा से कहा, “फ़िरौन के पास जाओ और उससे कहो की यहोवा यह कहता है, ‘मेरे आदमियों को मेरी उपासना के लिए जाने दो। यदि फ़िरौन उनको जाने से रोकता है तो मैं मिस्र को मेंढ़कों से भर दूँगा। नील नदी मेढ़कों से भर जाएगी। वे नदी से निकलेंगे और तुम्हारे घरों में घुसेंगे। वे तुम्हारे सोने के कमरों और तुम्हारे बिछौनों में होंगे। मेढ़क तुम्हारे अधिकारियों के घरों में, रसोई में और तुम्हारे पानी के घड़ों में होंगे। मेंढ़क पूरी तरह तुम्हारे ऊपर, तुम्हारे लोगों के ऊपर और तुम्हारे अधिकारियों के ऊपर होंगे।’”

तब यहोवा ने मूसा से कहा, “हारून से कहो कि वह अपने हाथ की लाठी को नहरों, नदियों और झीलों के उपर उठाए और मेढ़क बाहर निकलकर मिस्र देश में भर जाएँगें।”

तब हारून ने मिस्र देश में जहाँ भी जल था उसके ऊपर हाथ उठाया और मेंढ़क पानी से बाहर आने आरम्भ हो गए और पूरे मिस्र को ढक दिया।

जादूगरों ने भी वैसा ही किया। वे भी मिस्र देश में मेंढ़क ले आए।

फ़िरौन ने मूसा और हारून को बुलाया। फिरौन ने कहा, “यहोवा से कहो कि वे मुझ पर तथा मेरे लोगों पर से मेढ़कों को हटाए। तब मैं लोगों को यहोवा के लिए बलि चढ़ाने को जाने दूँगा।”

मूसा ने फिरौन से कहा, “मुझे यह बताएँ कि आप कब चाहते हैं कि मेंढ़क चले जाएँ। मैं आपके लिए, आपके लोगों के लिए तथा आपके अधिकारियों के लिए प्रार्थना करूँगा। तब मेंढ़क आपको और आपके घरों को छोड़ देंगे। मेंढ़क केवल नदी में रह जाएँगे। आप कब चाहते है कि मेंढ़क चले जाएं?।”

10 फिरौन ने कहा, “कल।”

मूसा ने कहा, “जैसा आप कहते हैं वैसा ही होगी। इस प्रकार आप जान जाएंगे कि हमारे परमेश्वर यहोवा के समान कोई अन्य देवता नहीं है। 11 मेंढ़क आपको, आपके घर को, आपके अधिकारियों को और आपके लोगों को छोड़ देंगे। मेंढ़क केवल नदी में रह जाएंगे।”

12 मूसा और हारून फ़िरौन से विदा हुए। मूसा ने उन मेंढ़को के लिए जिन्हें फ़िरौन के विरुद्ध यहोवा ने भेजा था, यहोवा को पुकारा। 13 और यहोवा ने वह किया जो मूसा ने कहा था। मेंढ़क घरों में, घर के आँगनों में और खेतों में मर गए। 14 वे सड़ने लगे और पूरा देश दुर्गन्ध से भर गया। 15 जब फ़िरौन ने देखा कि वे मेंढ़कों से मुक्त हो गए हैं तो वह फिर हठी हो गया। फ़िरौन ने वैसा नहीं किया जैसा मूसा और हारून ने उससे करने को कहा था। वह ठीक वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने कहा था।

जूँएं

16 तब यहोवा ने मूसा से कहा, “हारून से कहो कि वह अपनी लाठी उठाए और जमीन पर की धूल पर मारे। मिस्र में सर्वत्र धूल जूँएं बन जाएंगी।”

17 उन्होंने यह किया। हारून ने अपने हाथ की लाठी को उठाया और जमीन पर धूल में मारा मिस्र में सर्वत्र धूल जूँएं बन गई। जूँएं जानवरों और आदमियों पर छागई।

18 जादूगरों ने अपने जादूओं का उपयोग किया और वैसा ही करना चाहा। किन्तु जादूगर धूल से जूँएं न बना सके। जूएँ जानवरों और आदमियों पर छाई रहीं। 19 इसलिए जादूगरों ने फिरौन से कहा कि परमेश्वर की शक्ति ने ही यह किया है। किन्तु फ़िरौन ने उनकी सुनने से इन्कार कर दिया। यह ठीक वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने कहा था।

मक्खियाँ

20 यहोवा ने मूसा से कहा, “सवेरे उठो और फ़िरौन के पास जाओ। फ़िरौन नदी पर जाएगा। उससे कहो कि यहोवा कह रहा है, ‘मेरे लोगों को मेरी उपासना के लिए जाने दो। 21 यदि तुम मेरे लोगों को नहीं जाने दोगे तो तुम्हारे घरों में मक्खियाँ आएँगी। मक्खियाँ तुम्हारे और तुम्हारे अधिकारियों के ऊपर छा जाएंगी। मिस्र के घर मक्खियों से भर जाएंगे। मक्खियाँ पूरी ज़मीन पर छा जाएंगी। 22 किन्तु मैं इस्राएल के लोगों के साथ वैसा ही बरताव नहीं करूँगा जैसा मिस्री लोगों के साथ करुँगा। जहाँ गेशेन में मेरे लोग रहते हैं वहाँ कोई मक्खी नहीं होगी। इस प्रकार तुम जानोगे कि मैं यहोवा, इस देश में हूँ। 23 अतः मैं कल अपने लोगों के साथ तुम्हारे लोगों से भिन्न बरताव करूँगा। यही मेरा प्रमाण होगा।’”

24 अतः यहोवा ने वही किया, उसने जो कहा झुण्ड की झुण्ड मक्खियाँ मिस्र में आईं। मक्खियाँ फ़िरौन के घर और उसके सभी अधिकारियों के घर में भरी थीं। मक्खियाँ पूरे मिस्र देश में भरी थीं। मक्खियाँ देश को नष्ट कर रही थीं। 25 इसलिए फ़िरौन ने मूसा और हारून को बुलाया। फ़िरौन ने कहा, “तुम लोग अपने परमेश्वर यहोवा को इसी देश में बलियाँ भेंट करो।”

26 किन्तु मूसा ने कहा, “वैसा करना ठीक नहीं होगा। मिस्री सोचते हैं कि हमारे परमेश्वर यहोवा को जानवरों को मार कर बलि चढ़ाना एक भयंकर बात है। इसलिए यदि हम लोग यहाँ ऐसा करते तो मिस्री हमें देखेंगे, वे हम लोगों पर पत्थर फेकेंगे और हमें मार डालेंगे। 27 हम लोगों को तीन दिन तक मरुभूमि में जाने दो और हमें अपने यहोवा परमेश्वर को बलि चढ़ाने दो। यही बात है जो यहोवा ने हम लोगों से करने को कहा है।”

28 इसलिए फ़िरौन ने कहा, “मैं तुम लोगों को जाने दूँगा और मरूभूमि में तुम लोगों के यहोवा परमेश्वर को बलियाँ भेंट करने दूँगा। किन्तु तुम लोगों को ज्यादा दूर नहीं जाना होगा। अब तुम जाओ और मेरे लिए प्रार्थना करो।”

29 मूसा ने कहा, “देखो, मैं जाऊँगा और यहोवा से प्रार्थना करूँगा कि कल वे तुम से, तुम्हारे लोगों से और तुम्हारे अधिकारियों से मक्खियों को हटा ले। किन्तु तुम लोग यहोवा को बलियाँ भेंट करने से मत रोको।”

30 इसलिए मूसा फ़िरौन के पास से गया और यहोवा से प्रार्थना की 31 और यहोवा ने यह किया जो मूसा ने कहा। यहोवा ने मक्खियों को फ़िरौन, उसके अधिकारियों और उसके लोगों से हटा लिया। कोई मक्खी नहीं रह गई। 32 किन्तु फ़िरौन फिर हठी हो गया और उसने लोगों को नहीं जाने दिया।

खेतों के जानवरों को बीमारियाँ

तब यहोवा ने मूसा से कहा फ़िरौन के पास जाओ और उससे कहो, “हिब्रू लोगों का परमेश्वर यहोवा कहता है, ‘मेरी उपासना के लिए मेरे लोगों को जाने दो।’ यदि तुम उन्हें रोकते रहे और उनका जाना मना करते रहे तब यहोवा अपनी शक्ति का उपयोग तुम्हारे खेत के जानवरों के विरुद्ध करेगा। यहोवा तुम्हारे सभी घोड़ों, गधों, ऊँटो, गाय, बैल, बकरियों और भेड़ों को भयंकर बीमारियों का शिकार बना देगा। यहोवा इस्राएल के जानवरों के साथ मिस्र के जानवरों से भिन्न बरताव करेगा। इस्राएल के लोगों का कोई जानवर नहीं मरेगा। यहोवा ने इसके घटित होने का समय निश्चित कर दिया है। कल यहोवा इस देश में इसे घटित होने देगा।”

अगली सुबह मिस्र के सभी खेत के जानवर मर गए। किन्तु इस्राएल के लोगों के जानवरों में से कोई नहीं मरा। फ़िरौन ने लोगों को यह देखने भेजा कि क्या इस्राएल के लोगों का कोई जानवर मरा या इस्राएल के लोगों का कोई जानवर नहीं मरा। फ़िरौन हठ पकड़े रहा। उसने लोगों को नहीं जाने दिया।

फोड़े फुंसियाँ

यहोवा ने मूसा और हारून से कहा, “अपनी अंजलियों में भट्टी की राख भरो। और मूसा तुम फ़िरौन के सामने राख को हवा में फेंको। यह धूल बन जाएगी और पूरे मिस्र देश में फैल जाएगी। जैसे ही धूल आदमी या जानवर पर मिस्र में पड़ेगी, चमड़े पर फोड़े फुंसी (घाव) फूट निकलेंगे।”

10 इसलिए मूसा और हारून ने भट्टी से राख ली। तब वे गए और फ़िरौन के सामने खड़े हो गए। उन्होंने राख को हवा में फेंका और लोगों और जानवरों को फोड़े होने लगे। 11 जादूगर मूसा को ऐसा करने से न रोक सके, क्योंकि जादूगरों को भी फोड़े हो गए थे। सारे मिस्र में ऐसा ही हुआ। 12 किन्तु यहोवा ने फ़िरौन को हठी बनाए रखा। इसलिए फ़िरौन ने मूसा और हारून को सुनने से मना कर दिया। यह वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने कहा था।

ओले

13 तब यहोवा ने मूसा से कहा, “सवेरे उठो और फ़िरौन के पास जाओ। उससे कहो कि हिब्रू लोगों का परमेश्वर यहोवा कहता है, ‘मेरे लोगों को मेरी उपासना के लिए जाने दो! 14 यदि तुम यह नहीं करोगे तो मैं तुम्हें, तुम्हारे अधिकारियों और तुम्हारे लोगों के विरुद्ध पूरी शक्ति का प्रयोग करुँगा। तब तुम जानोगे कि मेरे समान दुनिया में अन्य कोई परमेश्वर नहीं है। 15 मैं अपनी शक्ति का प्रयोग कर सकता हूँ तथा मैं ऐसी बीमारी फैला सकता हूँ जो तुम्हें और तुम्हारे लोगों को धरती से समाप्त कर देगी। 16 किन्तु मैंने तुम्हें यहाँ किसी कारणवश रखा है। मैंने तुम्हें यहाँ इसलिए रखा है कि तुम मेरी शक्ति को देख सको। तब सारे संसार के लोग मेरे बारे में जान जाएंगे। 17 तुम अब भी मेरे लोगों के विरुद्ध हो। तुम उन्हें स्वतन्त्रतापूर्वक नहीं जाने दे रहे हो। 18 इसलिए कल मैं इसी समय भयंकर ओला बारिश उत्पन्न करुँगा। जब से मिस्र राष्ट्र बना तब से मिस्र में ऐसी ओला बारिश पहले कभी नहीं आई होगी। 19 अतः अपने जानवरों को सुरक्षित जगह में रखना। जो कुछ तुम्हारा खेतों में हो उसे सुरक्षित स्थानों में अवश्य रख लेना। क्यों? क्योंकि कोई भी व्यक्ति या जानवर जो मैदानों में होगा, मारा जाएगा। जो कुछ तुम्हारे घरों के भीतर नहीं रखा होगा उस सब पर ओले गिरेंगे।’”

20 फ़िरौन के कुछ अधिकारियों ने यहोवा के सन्देश पर ध्यान दिया। उन लोगों ने जल्दी—जल्दी अपने जानवरों और दासों को घरों में कर लिया। 21 किन्तु अन्य लोगों ने यहोवा के सन्देश की उपेक्षा की। उन लोगों के वे दास और जानवर नष्ट हो गए तो बाहर मैदानों में थे।

22 यहोवा ने मूसा से कहा, “अपनी भुजाएं हवा में उठाओ और मिस्र पर ओले गिरने आरम्भ हो जाएंगे। ओले पूरे मिस्र के सभी खेतों में लोगों, जानवरों और पेड़—पौधों पर गिरेंगे।”

23 अतः मूसा ने अपनी लाठी को हवा में उठाया और यहोवा ने गर्जन और बिजलियां भेजीं, तथा ज़मीन पर ओले बरसाये। ओले पूरे मिस्र पर पड़े। 24 ओले पड़ रहे थे और ओलों के साथ बिजली चमक रह थी। जब से मिस्र राष्ट्र बना था तब से मिस्र को हानि पहुँचाने वाले ओले वृष्टि में यह सबसे भयंकर थे। 25 आँधी ने मिस्र के खेतों में जो कुछ था उसे नष्ट कर दिया। ओलों ने आदमियों, जानवरों और पेड़—पौधों को नष्ट कर दिया। ओले ने खेतों में सारे पेड़ों को भी तोड़ दिया। 26 गोशेन प्रदेश ही, जहाँ इस्राएल के लोग रहते थे, ऐसी जगह थी जहाँ ओले नहीं पड़े।

27 फ़िरौन ने मूसा और हारून को बुलाया। फ़िरौन ने उनसे कहा, “इस बार मैंने पाप किया है। यहोवा सच्चा है और मैं तथा मेरे लोग दुष्ट हैं। 28 ओले और परमेश्वर की गरजती आवाज़ें अत्याधिक हैं। परमेश्वर से तूफान को रोकने को कहो। मैं तुम लोगों को जाने दूँगा। तुम लोगों को यहाँ रहना नहीं पड़ेगा।”

29 मूसा ने फ़िरौन से कहा, “जब मैं नगर को छोड़ूँगा तब मैं प्रार्थना में अपनी भुजाओं को यहोवा के सामने उठाऊँगा और गर्जन तथा ओले रूक जाएंगे। तब तुम जानोगे कि पृथ्वी यहोवा ही की है। 30 किन्तु मैं जानता हूँ कि तुम और तुम्हारे अधिकारी अब भी यहोवा से नहीं डरते हैं और न ही उसका सम्मान करते हैं।”

31 जूट में दाने पड़ चुके थे। और जौ पहले ही फट चुका था। इसलिए ये फसलें नष्ट हो गईं। 32 गेहूँ और कठिया नामक गेहूँ अन्य अन्नों से बाद में पकते हैं अतः ये फसलें नष्ट नहीं हुई थीं।

33 मूसा ने फिरौन को छोड़ा और नगर के बाहर गया। उसने यहोवा के सामने अपनी भुजाएं फैलायीं और गरज तथा ओले बन्द हो गए। वर्षा भी धरती पर होनी बन्द हो गई।

34 जब फिरौन ने देखा कि वर्षा, ओले और गर्जन बन्द हो गए तो उसने फिर गलत काम किया। वह और उसके अधिकारी फिर हठ पकड़े रहे। 35 फ़िरौन ने इस्राएल के लोगों को स्वतन्त्रतापूर्वक जाने से इन्कार कर दिया। यह ठीक वैसा ही हुआ जैसा यहोवा ने मूसा से कहा था।

Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)

© 1995, 2010 Bible League International