Print Page Options
Previous Prev Day Next DayNext

Beginning

Read the Bible from start to finish, from Genesis to Revelation.
Duration: 365 days
Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)
Version
उत्पत्ति 12-15

परमेश्वर अब्राम को बुलाता है

12 यहोवा ने अब्राम से कहा, “अपने देश और अपने लोगों को छोड़ दो। अपने पिता के परिवार को छोड़ दो और उस देश जाओ जिसे मै तुम्हें दिखाऊँगा।

“मैं तुम्हें आशीर्वाद दूँगा।
    मैं तुझसे एक महान राष्ट्र बनाऊँगा।
    मैं तुम्हारे नाम को प्रसिद्ध करूँगा।
लोग तुम्हारे नाम का प्रयोग
    दूसरों के कल्यान के लिए करेंगे।
मैं उन लोगों को आशीर्वाद दूँगा, जो तुम्हारा भला करेंगे।
    किन्तु उनको दण्ड दूँगा जो तुम्हारा बुरा करेंगे।
पृथ्वी के सारे मनुष्यों को आशीर्वाद देने के लिए
    मैं तुम्हारा उपयोग करूँगा।”

अब्राम कनान जाता है

अब्राम ने यहोवा की आज्ञा मानी। उसने हारान को छोड़ दिया और लूत उसके साथ गया। इस समय अब्राम पच्हत्तर वर्ष का था। अब्राम ने जब हारान छोड़ा तो वह अकेला नहीं था। अब्राम अपनी पत्नी सारै, भतीजे लूत और हारान में उनके पास जो कुछ था, सबको साथ लाया। हारान में जो दास अब्राम को मिले थे वे भी उनके साथ गए। अब्राम और उसके दल ने हारान को छोड़ा और कनान देश तक यात्रा की। अब्राम ने कनान देश में शकेम के नगर और मोरे के बड़े पेड़ तक यात्रा की। उस समय कनानी लोग उस देश में रहते थे।

यहोव अब्राम के सामने आया[a] यहोवा ने कहा, “मैं यह देश तुम्हारे वंशजों को दूँगा।”

यहोवा अब्राम के सामने जिस जगह पर प्रकट हुआ उस जगह पर अब्राम ने एक वेदी यहोवा की उपासना के लिए बनाया। तब अब्राम ने उस जगह को छोड़ा और बेतेल के पूर्व पहाड़ों तक यात्रा की। अब्राम ने वहाँ अपना तम्बू लगाया। बेतेल नगर पश्चिम में था। ये नगर पूर्व में था। उस जगह अब्राम ने यहोवा के लिए दूसरी वेदी बनाई और अब्राम ने वहाँ यहोवा की उपासना की। इसके बाद अब्राम ने फिर यात्रा आरम्भ की। उसने नेगव की ओर यात्रा की।

मिस्र में अब्राम

10 इन दिनों भूमि बहुत सूखी थी। वर्षा नहीं हो रही थी और कोई खाने की चीज़ नहीं उग सकती थी। इसलिए अब्राम जीवित रहने के लिए मिस्र चला गया। 11 अब्राम ने देखा कि उसकी पत्नी सारै बहुत सुन्दर थी। इसलिए मिस्री में आने के पहले अब्राम ने सारै से कहा, “मैं जानता हूँ कि तुम बहुत सुन्दर स्त्री हो। 12 मिस्र के लोग तुम्हें देखेंगे। वे कहेंगे ‘यह स्त्री इसकी पत्नी है।’ तब वे मुझे मार डालेंगे क्योंकि वे तुमको लेना चाहेंगे। 13 इसलिए तुम लोगों से कहना कि तुम मेरी बहन हो। तब वे मुझको नहीं मारेंगे। वे मुझ पर दया करेंगे क्योंकि वे समझेंगे कि मैं तुम्हारा भाई हूँ। इस तरह तुम मेरा जीवन बचाओगी।”

14 इस प्रकार अब्राम मिस्र में पहुँचा। मिस्र के लोगों ने देखा, सारै बहुत सुन्दर स्त्री है। 15 कुछ मिस्र के अधिकारियों ने भी उसे देखा। उन्होंने फ़िरौन से कहा कि वह बहुत सुन्दर स्त्री है। वे अधिकारी सारै को फ़िरौन के घर ले गए। 16 फिरौन ने अब्राम के ऊपर दया की क्योंकि उसने समझा कि वह सारै का भाई है। फ़िरौन ने अब्राम को भेड़ें, मवेशी और गधे दिए। अब्राम को ऊँटों के साथ—साथ आदमी और स्त्रियाँ दास—दासी के रूप में मिले।

17 फ़िरौन ने अब्राम की पत्नी को रख लिया। इससे यहोवा ने फ़िरौन और उसके घर के मनुष्यों में बुरी बीमारी फैला दी। 18 इसलिए फिरौन ने अब्राम को बुलाया। फ़िरौन ने कहा, “तुमने मेरे साथ बड़ी बुराई की है। तुमने यह नहीं बताया कि सारै तुम्हारी पत्नी है। क्यों? 19 तुमने कहा, ‘यह मेरी बहन है।’ तुमने ऐसा क्यों कहा? मैंने इसे इसलिए रखा कि यह मेरी पत्नी होगी। किन्तु अब मैं तुम्हारी पत्नी को तुम्हें लौटाता हूँ। इसे लो और जाओ।” 20 तब फ़िरौन ने अपने पुरुषों को आज्ञा दी कि वे अब्राम को मिस्र के बाहर पहुँचा दें। इस तरह अब्राम और उसकी पत्नी ने वह जगह छोड़ी और वे सभी चीज़ें अपने साथ ले गए जो उनकी थीं।

अब्राम कनान लौटा

13 अब्राम ने मिस्र छोड़ दिया। अब्राम ने अपनी पत्नी तथा अपने सभी सामान के साथ नेगेव से होकर यात्रा की। लूत भी उसके साथ था। इस समय अब्राम बहुत धनी था। उसके पास बहुत से जानवर, बहुत सी चाँदी और बहुत सा सोना था।

अब्राम चारों तरफ यात्रा करता रहा। उसने नेगेव को छोड़ा और बेतेल को लौट गया। वह बेतेल नगर और ऐ नगर के बीच के प्रदेश में पहुँचा। यह वही जगह थी जहाँ अब्राम और उसका परिवार पहले तम्बू लगाकर ठहरा था। यह वही जगह थी जहाँ अब्राम ने एक वेदी बनाई थी। इसलिए अब्राम ने यहाँ यहोवा की उपासना की।

अब्राम और लूत अलग हुए

इस समय लूत भी अब्राम के साथ यात्रा कर रहा था। लूत के पास बहुत से जानवर और तम्बू थे। अब्राम और लूत के पास इतने अधिक जानवर थे कि भूमि एक साथ उनको चारा नहीं दे सकती थी। (उन दिनों कनानी लोग और परिज्जी लोग भी इसी प्रदेश में रहते थे।) अब्राम और लूत के मज़दूर आपस में बहस करने लगे।

अब्राम ने लूत से कहा, “हमारे और तुम्हारे बीच कोई बहस नहीं होनी चाहिए। हमारे और तुम्हारे लोग भी बहस न करें। हम सभी भाई हैं। हम लोगों को अलग हो जाना चाहिए। तुम जो चाहो जगह चुन लो। अगर तुम बायीं औरो जाओगे तो मैं दाहिनी ओर जाऊँगा। अगर तुम दाहिनी ओर जाओगे तो मैं बायीं ओर जऊँगा।”

10 लूत ने निगाह दौड़ाई और यरदन की घाटी को देखा। लूत ने देखा कि वहाँ बहुत पानी है। (यह बात उस समय की है जब यहोवा ने सदोम और अमोरा को नष्ट नहीं किया था। उस समय यरदन की घाटी सोअर तक यहोवा के बाग की तरह पूरे रास्ते के साथ—साथ फैली थी। यह प्रदेश मिस्र देश की तरह अच्छा था।) 11 इसलिए लूत ने यरदन घाटी में रहना स्वीकार किया। इस तरह दोनों व्यक्ति अलग हुए और लूत ने पूर्व की ओर यात्रा शुरू की। 12 अब्राम कनान प्रदेश में रहा और लूत घाटी के नगरों में रहा। लूत सदोम के दक्षिण में बढ़ा और ठहर गया। 13 सदोम के लोग बहुत पापी थे। वे हमेशा यहोवा के विरुद्ध पाप करते थे।

14 जब लूत चला गया तब यहोवा ने अब्राम से कहा, “अपने चारों ओर देखो, उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम की ओर देखो। 15 यह सारी भूमि, जिसे तुम देखते हो, मैं तुमको और तुम्हारे बाद जो तुम्हारे लोग रहेंगे उनको देता हूँ। यह प्रदेश सदा के लिए तुम्हारा है। 16 मैं तुम्हारे लोगों को पृथ्वी के कणों के समान अनगिनत बनाऊँगा। अगर कोई व्यक्ति पृथ्वी के कणों को गिन सके तो वह तुम्हारे लोगों को भी गिन सकेगा। 17 इसलिए जाओ। अपनी भूमि पर चलो। मैं इसे अब तुमको देता हूँ।”

18 इस तरह अब्राम ने अपना तम्बू हटाया। वह मम्रे के बड़े पेड़ों के पास रहने लगा। यह हेब्रोन नगर के करीब था। उस जगह पर अब्राम ने एक वेदी यहोवा की उपासना के लिए बनायी।

लूत पकड़ा गया

14 अम्रापेल शिनार का राजा था। अर्योक एल्लासार का राजा था। कदोर्लाओमेर एलाम का राजा था। तिदाल गोयीम का राजा था। इन सभी राजाओं ने सदोम के राजा बेरा, अमोरा के राजा बिर्शा, अद्मा के राजा शिनाब, सबोयीम के राजा शेमेबेर तथा बेला (बेला सोअर भी कहा जाता है) के राजा के साथ एक लड़ाई लड़ी।

सिद्दीम की घाटी में ये सभी राजा अपनी सेनाओं से मिले। (सिद्दीम की घाटी आज—कल लवण सागर है।) इन राजाओं ने कदोर्लाओमेर की सेवा बारह वर्ष तक की थी। किन्तु तेरहवें वर्ष वे सभी उसके विरुद्ध हो गए। इसलिए चौदहवें वर्ष कदोर्लाओमेर अन्य राजाओं के साथ उनसे लड़ने आया। कदोर्लाओमेर और उसके साथ के राजाओं ने रपाई लोगों को अशतरोत्कनम में हराया। उन्होंने हाम में जीजूजि लोगों को भी हराया। उन्होंने एमि लोगों को शाबेकिर्यातैम में हराया और उन्होंने होरीत लोगों को सेईर के पहाड़ी प्रदेश से हराकर एल्पारान की ओर भगाया। (एल्पारान मरूभूमि के करीब है।) तब राजा कदोर्लाओमेर पीछे को मुड़ा और एन्मिशपात को गया। (यह कादेश भी कहलाता है।) और सभी अमालेकी लोगों को हराया। उसने एमोरी लोगों को भी हराया। ये लोग हससोन्तामार में रहते हैं।

उस समय सदोम का राजा, अमोरा का राजा, अदमा का राजा, सबोयीम का राजा, और बेला का राजा, (बेला सोअर-ही है।) सभी एक साथ मिलकर अपने शत्रुओं से लड़ने के लिए गए। वे एलाम के राजा कदोर्लाओमेर, गोयीम के राजा तिदाल, शिनार के राजा अम्रापेल, और एल्लासार के राजा अर्योक से लड़े। इस तरह चार राजा पाँच राजाओं से लड़ रहे थे।

10 सिद्दीम की घाटी में राल से भरे हुए अनेक गके थे। सदोम और अमोरा के राजा और उनकी सेनाएं भाग गई। अनेक सैनिक उन गद्ढों में गिर गए। किन्तु दूसरे लोग पहाड़ी में भाग गए।

11 सदोम और अमोरा के पास जो कुछ था उसे उनके शत्रुओं ने ले लिया। उन्होंने उनके सारे भोजन—वस्त्रों को ले लिया और वे चले गए। 12 अब्राम के भाई का पुत्र लूत सदोम में रहता था, उसे शत्रुओं ने पकड़ लिया। उसके पास जो कुछ था उसे भी शत्रु लेकर चले गए। 13 एक व्यक्ति ने, जो पकड़ा नहीं जा सका था उसने अब्राम (जो हिब्रू था) को ये सारी बातें बतायीं। एमोरी मम्रे के पेड़ों के पास अब्राम ने अपना डेरा डाला था। मम्रे एशकोल और आनेर के एक सन्धि एक दूसरे की मदद के लिए की थी[b] और उन्होंने अब्राम की मदद के लिए भी एक वाचा की थी।

अब्राम लूत को छूड़ाता है

14 जब अब्राम को पता चला कि लूत पकड़ा गया है। तो उसने अपने पूरे परिवार को इकट्ठा किया और उनमें से तीन सौ अट्ठारह प्रशिक्षित सैनिकों को लेकर अब्राम ने दान नगर तक शत्रुओं का पीछा किया। 15 उसी रात उसने और उसके पुरुषों ने शत्रुओं पर अचानक धावा बोल दिया। उन्होंने शत्रुओं को हराया था दमिश्क के उत्तर में होबा तक उनका पीछा किया। 16 तब अब्राम शत्रु द्वारा चुराई गई सभी चीज़ें लाया। अब्राम स्त्रियों, नौकर, लूत और लूत की अपनी सभी चीज़ें ले आया।

17 कदोर्लाओमेर और उसके साथ के सभी राजाओं को हराने के बाद अब्राम अपने घर लौट आय। जब वह घर आया तो सदोम का राजा उससे मिलने शावे की घाटी पहुँचा। (इसे अब राजा की घाटी कहते हैं।)

मेल्कीसेदेक

18 शालेम का राजा मेल्कीसेदेक भी अब्राम से मिलने गया। मेल्कीसेदेक, सबसे महान परमेश्वर का याजक था। मेल्कीसेदेक रोटी और दाखरस लाया। 19 मेल्कीसेदेक ने अब्राम को आशीर्वाद दिया और कहा:

“अब्राम, सबसे महान परमेश्वर तुम्हें आशीष दे।
    परमेश्वर ने पृथ्वी और आकाश बनाया।
20 और हम सबसे महान परमेश्वर की स्तुति करते हैं।
    परमेश्वर ने शत्रुओं को हराने में तुम्हारी मदद की।”

तब अब्राम ने लड़ाई में मिली हर एक चीज़ का दसवाँ हिस्सा मल्कीसेदेक को दिया। 21 तब सदोम के राजा ने कहा, “तुम ये सभी चीज़ें अपने पास रख सकते हो, मुझे केवल मेरे उन मनुष्यों को दे दो जिन्हें शत्रु पकड़ कर ले गए थे।”

22 किन्तु अब्राम ने सदोम के राजा से कहा, “मैंने सबसे महान परमेश्वर यहोवा जिसने पृथ्वी और आकाश को बनाया है। उसके सम्मुख यह शपथ ली है 23 कि जो आपकी चीज़ है उसमें से कुछ भी न लूँगा। यहाँ तक कि एक धागा व जूते का तस्मा भी नहीं लूँगा। मैं यह नहीं चाहता कि आप कहें, ‘मैंने अब्राम को धनी बनाया।’ 24 मैं केवल वह भोजन स्वीकार करूँगा जो हमारे जवानों ने खाया है किन्तु आप दूसरे लोगों को उनका हिस्सा दें। हमारी लड़ाई में जीती हुई चीज़ें आप लें और इसमें से कुछ आनेर, एश्कोल और मस्रे को दें। इन लोगों ने लड़ाई में मेरी मदद की थी।”

अब्राम के साथ परमेश्वर की वाचा

15 इन बातों के हो जाने के बाद यहोवा का आदेश अब्राम को एक दर्शन में आया। परमेश्वर ने कहा,

“अब्राम, डरो नहीं।
    मैं तुम्हारी रक्षा करूँगा
    और मैं तुम्हें एक बड़ा पुरस्कार दूँगा।”

किन्तु अब्राम ने कहा, “हे यहोवा ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे तू मुझे देगा और वह मुझे प्रसन्न करेगा। क्यों? क्योंकि मेरे पुत्र नहीं है। इसलिए मेरा दास दमिश्क का निओवासी एलीएजेर मेरे मरने के बाद मेरा सब कुछ पाएगा।” अब्राम ने कहा, “तू ही देख, तूने मुझे कोई पुत्र नहीं दिया है। इसलिए मेरे घर में पैदा एक दास मेरी सभी चीज़ें पाएगा।”

तब यहोवा ने अब्राम से बातें कीं। परमेश्वर ने कहा, “तुम्हारी चीज़ों को तुम्हारा यह दास नहीं पाएगा। तुमको एक पुत्र होगा और तुम्हारा पुत्र ही तुम्हारी चीज़ें पाएगा।”

तब परमेश्वर अब्राम को बाहर ले गया। परमेश्वर ने कहा, “आकाश को देखो। अनेक तारों को देखो। ये इतने हैं कि तुम गिन नहीं सकते। भविष्य में तुम्हारा कुटुम्ब ऐसा ही होगा।”

अब्राम ने परमेश्वर पर विश्वास किया और परमेश्वर ने उसके विश्वास को एक अच्छा काम माना, परमेश्वर ने अब्राम से कहा, “मैं ही वह यहोवा हूँ जो तुम्हें कसदियों के ऊर से बाहर लाया। यह मैंने इसलिए किया कि यह प्रदेश मैं तुम्हें दे सकूँ, तुम इस प्रदेश को अपने कब्ज़े में कर सको।”

किन्तु अब्राम ने कहा, “हे यहोवा, मेरे स्वामी, मुझे कैसे विश्वास हो कि यह प्रदेश मुझे मिलेगा?”

परमेश्वर ने अब्राम से कहा, “हम लोग एक वाचा बांधेंगे। तुम मुझको तीन वर्ष की एक गाय, तीन वर्ष की एक बकरी, और तीन वर्ष की एक भेड़ लाओ। एक फ़ाख्ता और एक कबूतर का बच्चा भी लाओ।”

10 अब्राम ये सभी चीज़ें परमेश्वर के पास लाया। अब्राम ने इन प्राणियों को मार डाला और हर एक के दो टुकड़े कर डाले। अब्राम ने एक आधा टुकड़ा एक तरफ तथा उसका दूसरा आधा टुकड़ा उसके विपरीत दूसरी तरफ रखा। अब्राम ने पक्षियों के दो टुकड़े नहीं किए। 11 थोड़ी देर बाद माँसहारी पक्षी वेदी पर चढ़ाए हुए मृत जीवों को खाने के लिए नीचे आए किन्तु अब्राम ने उनको भगा दिया।

12 बाद में सूरज डूबने लगा। अब्राम को गहरी नींद आ गयी। घन—घोर अंधकार ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। 13 तब यहोवा ने अब्राम से कहा, “तुम्हें ये बातें जाननी चहिए। तुम्हारे वंशज विदेशी बनेंगे और वे उस देश में जांएगे जो उनका नहीं होगा। वे वहाँ दास होंगे। चार सौ वर्ष तक उनके साथ बुरा व्यवहार होगा। 14 मैं उस राष्ट्र का न्याय करूँगा तथा उसे सजा दूँगा, जिसने उन्हें गुलाम बनाया और जब तुम्हारे बाद आने बाले लोग उस देश को छेड़ेंगे तो अपने साथ अनेक अच्छी वस्तुएं ले जायेंगे।”

15 “तुम बहुत लम्बी आयु तक जीवित रहोगे। तुम शान्ति के साथ मरोगे और तुम अपने पुरखाओं के पास दफनाए जाओगे। 16 चार पीढ़ियों के बाद तुम्हारे लोग इसी प्रदेश में फिर आएंगे। उस समय तुम्हारे लोग एमोरियों को हरांएगे। यहाँ रहने वाले एमोरियों को, दण्ड देने के लिए मैं तुम्हारे लोगों का प्रयोग करूँगा। यह बात भविष्य में होगी क्योंकि एमोरी दण्ड पाने येग्य बुरे अभी नहीं हुए हैं।”

17 जब सूरज ढ़ल गया, तो बहुत अंधेरा छा गया। मृत जानवर अभी तक जमीन पर पड़े हुए थे। हर जानवर दो भागों में कटे पड़े थे। उसी समय धुएँ तथा आग का एक खम्भा[c] मरे जानवरों के तुकड़ों के बीच से गुजरा।[d]

18 इस तरह उस दिन यहोवा ने अब्राम को वचन दिया और उसके साथ वाचा की। यहोवा ने कहा, “मैं यह प्रदेश तुम्हारे वंशजों को दूँगा। मैं मिस्र की नदी और बड़ी नदी परात के बीच का प्रदेश उनको दूँगा। 19 यह देश केनी, कनिज्जी, कदमोनी, 20 हित्ती, परीज्जी, रपाई, 21 एमोरी, कनानी, गिर्गाशी तथा यबूसी लोगों का है।”

Hindi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-HI)

© 1995, 2010 Bible League International