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नीतिवचन 27Awadhi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-AWA)

27 भविस्य क बरे सेखी जिन बघाड़ा। कउन जानत ह कि आगे का घटइ।

आपन ही मुँहे स आपन बड़कई जिन करा दूसरन क तोहार तारीफ करइ द्या।

कठिन अहइ पाथर ढोउब, अउर ढोउब रेत क, मुला इन दुइनउँ स कहूँ जियादा कठिन अहइ मूरख क जरिये उपजावा भवा कस्ट।

किरोध त्रूर होत ह। प्रकोप बाढ़ क नाईं अहइ मुला जलन बहोत ही घातक अहइ।

छुपे भए पिरेम स, खुली घुड़की उत्तिम अहइ।

दोस्त क तमाचा पइ विस्सास कइ जा सकत ह कि तोहार मदद कइ सकत ह। किन्तु दुस्मन तोहार संग दाया करइ क बहाना बनावत ह। उ तोहका नोस्कान पहोंचाहीं।

पेट भरि जाए पइ सहद भी नाहीं भावत मुला भुखिया मँ तउ हर चीज भावत ह।

आपन घर स दूर भटकत भवा मनई अइसा अहइ जइसे कउनो चिरइया आपन घोंसला स दूर भटकत ह।

इत्र अउर सुगंधित धूप मने क आनन्द स भरि देत हीं अउर मीत क सच्ची सम्मति स मन उल्लासे स भरि जात ह।

10 आपन मीत क जिन बिसरा न ही आपन बाप क मीत क। अउर बिपत्ति मँ मदद बरे दूर आपन भाई क घरे जिन जा। दूर क भाई स पास क पड़ोसी नीक बा।

11 हे मोर पूत, तू बुद्धिमान बन जा अउर मोर मन आनन्द स भरि द्या। ताकि मोरे निन्दा करइ वाला क मइँ जवाब दइ सकउँ।

12 बिपत्ति क आवत लखिके बुद्धिमान जन दूर हट जात हीं किंतु मूरख जन बगैर राह बदले चलत रहत हीं अउर फँस जात हीं।

13 जउन कउनो पराए मनई क जमानत भरत ह ओका आपन ओढ़ना भी खोवइ पड़ी।

14 ऊँच सुरे मँ “सुप्रभात” कहिके अलख भिंसारे आपन पड़ोसी क जिन जगाया करा। उ एक सराप क रूप मँ झेली आसीर्वाद मँ नाहीं।

15 झगड़ालू मेहरारू अइसी होत ह जइसी बर्खा क दिनन मँ लगातार टपकइ वाला बर्खा।

16 ओका रोकब वइसा ही होत ह जइसे कउनो हवा क रोकइ क बेकार जतन करत ह या मूठी मँ तेल क धरइ क जतन करत ह।

17 जइसे लोहे स लोहा धार धरत ह, वइसे ही एक व्यक्ति दूसर व्यक्ति स सीखत ह।

18 जउन कउनो अंजीरे क बृच्छ सींचत ह, उ ओकर फल खात ह। वइसे ही जउन आपन सुआमी क सेवा करत ह, उ आदर पाइ लेत ह।

19 जइसे जल मुखड़ा क प्रतिबिंबित करत ह, वइसे ही हिरदय मनई क प्रतिबिंबित करत ह।

20 मउत अउ कबर कबहुँ तृप्त नाहीं अइसा ही मनई क आँखिन भी तृप्त नाहीं होत ह।

21 चाँदी अउ सोना क भट्ठी-वुठाली मँ परख लीन्ह जात ह। वइसे ही मनई उ तारीफ स परखा जात ह जउन उ पावत ह।

22 तू कउनो मूरख क चूना मँ पीसिके चाहे जेतना महीन करा अउर ओका पीसिके अनाज जइसा बनाइ द्या ओकर चूरन मुला ओकरी मूरखता क, कबहुँ भी ओहसे दूर न कइ पउब्या।

23 आपन रेवड़ क हानत तोहका निहचित ही जानइ चाही। आपन रेवड़ क धियान स देखरेख करा। 24 काहेकि धन-दौलत तउ टिकाऊ नाहीं होतेन। इ राजमवुट पीढ़ी-पीढ़ी तलक बना नाहीं रहत ह। 25 जब चारा कट जात ह, तउ नवी घास उग आवत ह। उ घास पहाड़ियन पइ स फुन बटोर लीन्ह जात ह। 26 मेमनन क ऊन काट ल्या अउर ओढ़ना बना ल्या बोकरियन क खेतन खरीदइ बरे बेच ल्या। 27 तोहरे परिवार क, तोहरे दास दासियन क अउर तोहरे आपन बरे भरपूर बोकरी क दूध होइ।

Awadhi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-AWA)

Awadhi Bible: Easy-to-Read Version Copyright © 2005 World Bible Translation Center

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