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नीतिवचन 12Awadhi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-AWA)

12 जउन अनुसासन स पिरेम करत ह, उ तउ गियान स भी पिरेम करत ह। किन्तु जउन सुधार स घिना करत ह तउ उ निरा मूरख अहइ।

सज्जन मनई यहोवा क किरपा पावत ह, मुला छल छछंदी क यहोवा सजा देत ह।

दुट्ठता, कउनो जने क थिर नाहीं कइ सकत किन्तु धमीर् जन कबहुँ उखड़ नाहीं पावत ह।

एक उत्तिम पत्नी क संग पति खुस अउर अभिमानी होत ह। किंतु उ पत्नी जउन आपन मनसेधू क लजावत ह उ ओका तने क बेरामी जइसे होत ह।

धमीर् मनई क सबइ जोजना निआव स पूर्ण होत हीं जबकि दुट्ठ क सलाह कपट स भरी होत हीं।

दुट्ठ क सब्द लोगन क मारइ बरे घात मँ रहत हीं। मुला सज्जन क मुहँ ओनका बचावत ह।

जउन खोट होत हीं उखाड़ पेंका जात हीं, मुला धमीर् मनई क घराना टिका रहत ह।

मनई आपन अच्छा बातन जउन उ बोलत ह क मुताबिक तारीफ पावत ह। मुला उ जउन मुरख अहइ ओका तुच्छ जाना जात ह।

सामान्य मनई बनिके मेहनत करब उत्तिम अहइ एकरे कि भूखा रहिके महत्वपूर्ण मनई स सुआँग भरब।

10 धमीर् मनई आपन जानाबरन तलक क धियान रखत ह; किन्तु दुट्ठ मनइ सदा ही जालिम होत ह।

11 जउन अपने खेते मँ काम करत ह ओकरे लगे खाइके इफरात होइ। मुला जउन बियर्थ बिचारन क पाछा करत ह ओकरे लगे विवेक क अभाव रहत ह।

12 दुट्ठ जन बुरे जोजना क इच्छा करत ह। मुला धमीर् जन क जड़ फल लावत ह।

13 पापी मनई क ओकर आपन ही सब्द ओका जाल मँ फँसाइ लेत ह। किंतु खरा मनई बिपत्ति स बच निकरत ह।

14 आपन अच्छी बातन स जउन उ कहत ह मनइ अच्छा प्रतिफल पावत ह। इहइ तरह स एक मनइ आपन कार्य क अनुसार लाभ पावत ह।

15 मूरख क आपन मारग ठीक जान पड़त ह, मुला बुद्धिमान मनई सम्मति सुनत ह।

16 मूरख जन आपन झुँझलाहट झटपट देखावत ह मुला बुद्धिमान अपमान क उपेच्छा करत ह।

17 फुरइ स पूर्ण गवाह खरी गवाही देत ह, मुला लबार साच्छी झूठी बातन बनावत ह।

18 बिन बिचारे वाणी तरवार स छेदत, मुला विवेकी क वाणी घावन क भरत ह।

19 फुरइ स भरी वाणी हमेसा हमेसा टिकी रहत ह, मुला झूठी जीभ बस छिन भर क टिकत ह।

20 ओनके मने मँ छल-कपट भरा रहत ह, जउन वुचत्रे स भरी जोजना रचत हीं। मुला जउन सान्ति क बढ़ावा देत हीं, आनन्द पावत हीं।

21 धमीर् जने पइ कबहँ विपत्ति नाहीं पड़ी, मुला दुट्ठन क तउ विपत्तियन घेरिहीं।

22 अइसे ओंठन क यहोवा घिना करत ह जउन झूठ बोलत हीं; मुला ओन लोगन स जउन सच स पूर्ण अहइँ, उ खुस रहत ह।

23 गियानी जियादा बोलत नाहीं ह, चुप रहत ह मुला मूरख जियादा बोलिके आपन अगियानी क देखावत ह।

24 मेहनती हाथ तउ सासन करिहीं, मुला आलस क परिणाम बेगार होइ।

25 चिंता स भरा मन मनई क दबोच लेत ह। किंतु सुभ समाचार ओका हर्स स भरि देत हीं।

26 धमीर् मनई आपन पड़ोसी क मार्गदर्सन करत ह। मुला दुट्ठन क चाल ओनहीं क भटकावत ह।

27 आलसी मनई आपन आलस क कारण आपन काम पूरा नाही कर सकत ह। मुला एक मेहनती मनइ आपन सखत मेहनत स धन दोलत पावत ह।

28 नेकी क मारग मँ जिन्नगी रहत ह, अउर उ राहे क किनारे अमरता बसत ह।

Awadhi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-AWA)

Awadhi Bible: Easy-to-Read Version Copyright © 2005 World Bible Translation Center

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