A A A A A
Bible Book List

नीतिवचन 2 Awadhi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-AWA)

बुद्धि क नैतिक लाभ

हे मारे पूत, अगर तू मोरे बोध बचनन क सुना अउर मोर हुवुम मन मँ बटोरा, अउर तू बुद्धि क बातन पइ कान लगावा, मन आपन समुझदारी मँ लगावत भए, अउर अगर तू अन्तदृस्टि बरे गोहरावा, अउर तू समुझबूझ क बरे पुकारा, अगर तू एका अइसे हेरा जइसे कउनो कीमती चाँदी क हेरत ह, अउर तू एका हेरा, जइसे कउनो छुपे भए खजाना क हेरत ह, तब तू यहोवा क डर क समुझब्या अउर परमेस्सर क गियान पउब्या।

काहेकि यहोवा बुद्धि देत ह अउर ओकरे मुँह स ही गियान अउ समुझदारी क बातन फूटत हीं। ओकरे भंडारे मँ खरी बुद्धि ओनके बरे रहत ह जउन खरा अहइँ। अउर ओनके बरे जउन कि इमानदारी स रहत ह एक ढाल जइसे अहइ। उ निआव क मारग क रखवारी करत ह अउर आपन वफादार लोगन क राह क रच्छा करत ह।

तबहिं तू समुझब्या कि नेक निआब अउर इमानदारी का अहइ। इ सबइ नीक चिजियन अहइ। 10 तउ बुद्धि तोहरे मने मँ प्रवेस करी अउर गियान तोहरी आतिमा क आनन्दित करी।

11 तोहका नीक बुरा क बोध बचाइ, समुझबूझ भरी बुद्धि तोहार रखवारी करी। 12 बुद्धि तोहका बुरे लोगन क राहे स बचाइ। बुद्धि तोहका ओन लोगन स बचाइ जउन बुरी बात बोलत हीं। 13 अँधियारी गलियन मँ भटकइ बरे उ पचे सहल-सोझ राहन क तजि देत रहत हीं। 14 उ पचे बुरे करम करइ मँ हमेसा आनन्द मनावत हीं। उ पचे बुरे कार्य मँ हमेसा मगन रहत हीं। 15 ओन लोगन पइ बिस्सास नाहीं कइ सकित। उ पचे लबार अहइँ अउर छल करइवाला अहइँ। मुला तोहार बुद्धि अउर समुझ तोहका इन बातन स बचायेगी।

16 इ बुद्धि तोहका बदकार मेहरारु अउ ओकर चापललूसी स भरी बातन स बचाइ। 17 जउन आपन जवानी क साथी तजि दिहन वाचा क उपेच्छा परमेस्सर क समच्छ किहे रहा। 18 काहेकि ओकर घर मउत क गड्ढा मँ अहइ अउर ओकर राहन नरक मँ लइ जात हीं। 19 जउन भी ओकरे घर जात ह उ कबहुँ नाहीं लउटि पावत अउर ओका जिन्नगी क राहन कबहुँ नाहीं मिलतिन।

20 एह बरे तू नीक लोगन क मार्ग पइ चलइ चाही अउर तेहका हमेसा सत्यता क मागेर् पइ बना रहे चाही। 21 इमानदार जन अउर बे कसूर लोग आपन धरती पइ बसा रइहीं। 22 मुला जउन दुट्ठ धोका बाज अहइँ ओनका धरती स हटा दीन्ह जइहीं।

Awadhi Bible: Easy-to-Read Version (ERV-AWA)

Awadhi Bible: Easy-to-Read Version Copyright © 2005 World Bible Translation Center

Proverbs 2 New International Version (NIV)

Moral Benefits of Wisdom

My son, if you accept my words
    and store up my commands within you,
turning your ear to wisdom
    and applying your heart to understanding
indeed, if you call out for insight
    and cry aloud for understanding,
and if you look for it as for silver
    and search for it as for hidden treasure,
then you will understand the fear of the Lord
    and find the knowledge of God.
For the Lord gives wisdom;
    from his mouth come knowledge and understanding.
He holds success in store for the upright,
    he is a shield to those whose walk is blameless,
for he guards the course of the just
    and protects the way of his faithful ones.

Then you will understand what is right and just
    and fair—every good path.
10 For wisdom will enter your heart,
    and knowledge will be pleasant to your soul.
11 Discretion will protect you,
    and understanding will guard you.

12 Wisdom will save you from the ways of wicked men,
    from men whose words are perverse,
13 who have left the straight paths
    to walk in dark ways,
14 who delight in doing wrong
    and rejoice in the perverseness of evil,
15 whose paths are crooked
    and who are devious in their ways.

16 Wisdom will save you also from the adulterous woman,
    from the wayward woman with her seductive words,
17 who has left the partner of her youth
    and ignored the covenant she made before God.[a]
18 Surely her house leads down to death
    and her paths to the spirits of the dead.
19 None who go to her return
    or attain the paths of life.

20 Thus you will walk in the ways of the good
    and keep to the paths of the righteous.
21 For the upright will live in the land,
    and the blameless will remain in it;
22 but the wicked will be cut off from the land,
    and the unfaithful will be torn from it.

Footnotes:

  1. Proverbs 2:17 Or covenant of her God
New International Version (NIV)

Holy Bible, New International Version®, NIV® Copyright ©1973, 1978, 1984, 2011 by Biblica, Inc.® Used by permission. All rights reserved worldwide.

Viewing of
Cross references
Footnotes